7 सप्ताह की गर्भवती माँ

Question: pait mai thoda dard ho rha h or raat mai neend nhi aa rhi h

1 Answers
सवाल
Answer: हेलो डियर प्रेगनेंसी में पेट में हल्का दर्द होना और नींद ना आना दोनों ही कॉमन है ऐसा होता है प्रेगनेंसी में पेट दर्द होने पर भी नींद नहीं आती है , प्रेगनेंसी में utress बढ़ने की वजह से पेट की मास पेशियों में खिंचाव होता है और आपका पेट दर्द होता है अगर यह हल्का हल्का होता है तो यह नॉर्मल बात है आप बिल्कुल भी परेशान ना हो ऐसा दर्द आपकी जब तक की डिलीवरी नहीं हो जाती तब तक हल्का हल्का दर्द बना रहता है प्रेगनेंसी के शुरुआती समय में बेबी के भूर्ण बनने का प्रोसेस होता है जिसकी वजह से पेट में हल्का दर्द और ऐंठन होती है ऐसा अगर आपको होता है तो यह नॉर्मल बात है ऐसे में आप अधिक से अधिक पानी पिएं ज्यादा आराम करें और गुनगुनी पट्टी से सिकाई कर ले , आप ऐसे में हल्के हाथ से तेल लगा कर मॉलिश भी कर सकती हैं ।
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सवाल: mhujy neend nhi aa rhi h or bycyani bhot ho rha h to aise m kya krna chayiye
उत्तर: रात मे आप अच्छे से साफ सुधरी होकर हल्के कपड़े पहनें , कमरे की रोशनी धीमी रखे अपनी पसंदka धीमा गाना या भजन सुने , आप अच्छी सी कितना भी पढ़ सकती है , सकरतमक सोच रखे प्रेग्नेंसी के दौरान की जाने वाली एक्सरसाइज और टहलना नियमित रखें,इससे शरीर में रक्तका प्रवाह सही बना रहता है, रात में पैरों में ऎंठन की परेशानी कम करने में मदद मिलती है, एक्सरसाइज सुबह के समय करनी ज्यादा फायदेमंद होती है . लेफ्ट सोने का ट्राइ करे , किडनी यूटेरेस तक खुन का प्रवाह अच्छा होगा .. जिसे आपकी नीन्द ना आने की तकलीफ़ कम होगी .. इसके अलावा रात मे सोने से पहले एक ग्लास गरम मिल्क पी कर सोएं इससे हाथ पैर मे दर्द भी कम होगा और नीन्द भी ठीक से आएगी .
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सवाल: mujhe neend m problem ho rhi h mujhe neend nhi aa rhi h naaa din m shi se so paa rhi hu naaa raat ko
उत्तर: प्रेगनेंसी के दौरान भरपूर नींद लेना बहुत जरूरी है प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में बहुत से हारमोनल चेंज हो जाते हैं इसी के साथ ऐसी स्थिति में बहुत तनाव होता है जिस वजह से नींद ना आना स्वाभाविक है नींद आने के का बहुत से कारण हो सकते हैं नींद ना आने पर आप कुछ उपाय कर सकते हैं जैसे कि खाने में तरल तरल पदार्थ लें जैसे पानी और जूस पिए ध्यान दें रात में सोने से पहले तरल पदार्थ ना लें इसे रात को बार-बार urine आ सकती है और नींद खराब होगी मॉर्निंग वॉक करें हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें इससे ब्लड सरकुलेशन होता रहेगा रात के समय पैरों में ऐंठन कम होगी तनाव बिल्कुल ना ले इसलिए बेहतर होगा कि आप अपने आपको हर वक्त खुश रखें
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सवाल: meri delevary abhi ho nhi rhi h kb tak ho gi thoda thoda pani a rha h dard nhi ho rha h 9month chal rha h kuch btaiye
उत्तर: dear friend यह अनुभव हर महिला के लिये अलग-अलग होता है। इसका कोई निश्चित ढंग नहीं होता है जिससे आप यह समझ सकें कि यह लेबर का दर्द है। लेबर पेन का डिलीवरी की तारीख से सीधा संबंध होता है। डिलीवरी की तारीख का अंदाज़ा लगाने के लिए, यह जानना ज़रूरी होता है कि गर्भवती महिला का आखिरी मासिक धर्म किस तारीख को शुरू हुआ था। इसके 40 सप्ताह के बाद आने वाली तारीख को डिलीवरी की तारीख माना जाता है। डॉक्टरों का मानना है कि गर्भवती महिला को गर्भावस्था के 37वें सप्ताह से लेकर 40वें सप्ताह के बीच कभी भी लेबर पेन शुरू हो सकता है। अगर गर्भावस्था के 37वें सप्ताह से पहले प्रसव हो जाए, तो उसे प्री-मैच्योर डिलीवरी या समय पूर्व प्रसव कहा जाता है। डिलीवरी का समय नज़दीक आने पर गर्भवती महिला को अपनी मांसपेशियों और जोड़ों में खिंचाव महसूस हो सकता है। इसे प्रसव और लेबर पेन शुरू होने के समय के पास आने का संकेत माना जा सकता है। ये सारे लक्षण शिशु के जन्म से पहले हार्मोन में बदलाव होने की वजह से नज़र आते हैं। जब ये लक्षण नज़र आने लगें, तो समझ लेना चाहिए कि प्रसव और लेबर पेन शुरू होने का समय करीब आ गया ह। गर्भ में एम्नियोटिक द्रव से भरी एक थैली होती है। इस थैली को आम बोलचाल में (पानी की थैली)भी कहा जाता है। पानी की थैली का फटना इस बात का संकेत होता है कि लेबर पेन शुरू होने वाला है। इसलिए, पानी की थैली के फटते ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। संकुचन की गति का बढ़ना प्रसव पीड़ा शुरू होने का सबसे बड़ा लक्षण होता है। शुरुआत में संकुचन की गति धीरे-धीरे बढ़ती है, लेकिन डिलेवरी की समय नज़दीक आने पर यह गति तेजी से बढ़ती है। लेकिनआप बोल रही है पानी आ रहा है लेकिन दर्द नहीं होरहा तब एक बार आप डॉक्टर को चैक कराए ।
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