15 सप्ताह की गर्भवती माँ

Question: mujie डॉक्टर ने डबल मार्कर टेस्ट कराने बोले है ये क्या टेस्ट होता है

1 Answers
सवाल
Answer: Featous में किसी भी क्रोमोसोमल प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए गर्भावस्था के दौरान डबल मार्कर टेस्ट किया जाता है जो की ब्लड टेस्ट के द्वारा होता है यह टेस्ट यह पता लगाने में मदद करता है कि बच्चे को डाउन सिंड्रोम या एडवर्ड सिंड्रोम जैसे क्रोमोसोमल प्रॉब्लम तो नहीं है यह ज्यादातर 35 ईयर्स से ज्यादा जिन वूमेन की एज होती है उनका टेस्ट किया जाता है यह टेस्ट गर्भावस्था के 8th और 14th week के बीच में किया जाता है
समान प्रश्न, उत्तर के साथ
सवाल: डबल मार्कर टेस्ट क्या होती है, क्या ये टेस्ट करणा जरुरी होता है क्या? कृपया बताइये
उत्तर: हेलो डियर डबल मार्कर टेस्ट प्रसव पूर्व किया जाने वाला स्क्रीनिंग टेस्ट है जो गर्भावस्था के पहले तिमाही में किया जाता है। यह आपके भ्रूण में होने वाले क्रोमोसोमल विषमता की संभावना का आकलन करने के लिए किया जाता है। यह इस बात का भी पता लगाने में मदद करता है कि आपके होने वाले बच्चे को डाउन सिंड्रोम या तृसौमी18 जैसी कोई बीमारी तो नही है जो मूल रूप से क्रोमोसोमल विकारों से होती हैं। यह विकार बच्चे में गंभीर मानसिक दोषों को जन्म दे सकता है और कभी कभी मृत प्रसव भी हो सकता है।
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सवाल: ये डबल मार्कर टेस्ट क्या होता है
उत्तर: hello dear 35 वर्ष से ऊपर की गर्भवती महिलाओं के लिए डबल मार्कर परीक्षण का सुझाव दिया जाता है, जो डाउन सिंड्रोम वाले बच्चे को देने का उच्च जोखिम लेते हैं। हालांकि, छोटी उम्र की महिलाओं के लिए भी इसकी सिफारिश की जाती है। यह परीक्षण भ्रूण की पूर्व-जन्म स्थितियों के पता लगाने में मदद करता है और आमतौर पर 14 सप्ताह तक गर्भावस्था के 8 सप्ताह के बाद किया जाता है। यह परीक्षण गर्भधारण के बाद होने वाली किसी भी प्रकार की गुणसूत्र असामान्यताओं का पता लगाता है। डॉक्टर इस अल्ट्रा-ध्वनि परीक्षण के परिणामों के आधार पर पहले अल्ट्रा ध्वनि परीक्षण की सिफारिश कर सकते हैं, जो इस डबल मार्केट टेस्ट के लिए सुझाव दे सकता है। यह परीक्षण आमतौर पर डॉक्टरों द्वारा 35 साल से ऊपर गर्भवती महिलाओं, जन्म दोषों का पारिवारिक इतिहास, जन्म दोषों से पैदा हुए पिछले बच्चे, इंसुलिन-निर्भर (प्रकार 1) मधुमेह का इतिहास है।
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सवाल: हेलो डॉक्टर मुझे डॉक्टर ने एन.टी. सोनोग्र्फी ऑर डबल मार्कर टेस्ट बोले है कराने के लाइए ये ज़रूरी है क्या क्यों होते है ये टेस्ट कोई प्रॉब्लम तो नही है ना
उत्तर: डियर . घबराने की कोई बात नही है ..सभी गर्भवती महिलाओं को न्यूकल ट्रांसलुसेंसी (एनटी) स्कैन करवाना होता है, ताकि उनके शिशुओं में डाउंस सिंड्रोम होने की संभावनाओं को आंका जा सके.. यह पहली तिमाही में होने वाले विस्तृत स्कैन का ही एक हिस्सा होता है..अगर अल्ट्रासाउंड स्कैन में सामान्य से अधिक मात्रा में तरल होने का पता चलता है, तो यह डाउंस सिंड्रोम होने का संकेत हो सकता है.. डाउंस सिंड्रोम का एक अन्य संकेत शिशु के नाक की हड्डी (नेज़ल बोन) का आकार है..NT स्कैन शिशु में केवल डाउंस सिंड्रोम होने के खतरे के स्तर को इंगित करता है..एनटी स्कैन गर्भावस्था में एक विशेष समय पर ही होना चाहिए..यह 11 हफ्ते व दो दिन और 13 हफ्ते छह दिन के बीच कराया जाता है. ओके
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