गर्भावस्था की तैयारी

Question: mujhe कुछ जानकारी चाहिये बच्चें से रिलेटेड

1 Answers
सवाल
Answer: जी हां डियर आप अपने और अपने बच्चे से रिलेटेड कोई भी जानकारी यहाँ पर किसी भी मॉम से ले सकती हैयहां पर सारी माँ में दूसरे की हेल्प करती है
समान प्रश्न, उत्तर के साथ
सवाल: मै व्यायाम कसरत कोनसे महीने से कर सकती हूँ . कोन से आसन करने चाहिये. क्रुपया विडियो या जानकारी दे मुजे
उत्तर: योगावैसे तो गर्भवती महीलाओ को शुरु से नही करना चाहीये पहले तीन महीने बहुत आराम से रहना चाहीयेक योगा आसन का अभ्यास  प्रेगनेंसी के चौथे महीने से ले कर नवे महीने तक करने की सलाह दी जाती है। योगा के जरिये ना केवल तनाव दूर होता है, बल्कि प्रसव के दौरान होने वाले दर्द से भी राहत मिलती है| (1)तितली आसन--- तितली आसन को गर्भावस्था के तीसरे महीने से कर सकते है| शरीर के लचीलेपन को बढ़ाने के लिए यह आसन किया जाता है| इसे करने से शरीर के निचले हिस्से का तनाव खुलता है| इससे प्रजनन के दौरान गर्भवती महिला को दिक्कत कम होती है। तितली आसन करने के लिए दोनों पैरों को सामने की ओर मोड़कर, तलवे मिला लें, यानी पैरों से नमस्ते की मुद्रा बननी चाहिए। इसके पश्चात दोनों हाथों की उंगलियों को क्रॉस करते हुए पैर के पंजे को पकड़ें और पैरों को ऊपर-नीचे करें। आपकी पीठ और बाजू बिल्कुल सीधी होनी चाहिए। इस क्रिया को 15 से अधिक बार ना करे| (यदि इस क्रिया को करते वक्त आपको कमर के निचले हिस्से में दर्द महसूस होता हो तो इसे बिल्कुल भी न करे (2)अनुलोम विलोम--- गर्भावस्था में अनुलोम विलोम आसन करने से शरीर में रक्त का संचार बढ़ता है। इसे करने से रक्तचाप नियंत्रित होता है| प्रेगनेंसी में तनावरहित रहने के लिए इस आसन को जरूर करना चाहिए| इस आसन को करने के लिए सबसे पहले आराम से बैठे इसके बाद दाएं हाथ के अंगूठे से नाक का दाया छिद्र बंद करें और अपनी सांस अंदर की ओर खींचे। फिर उसी हाथ की दो उंगलियों से बाईं ओर का छिद्र बंद कर दें और अंघूटे को हटाकर दाईं ओर से सांस छोड़ें। इस प्रक्रिया को फिर नाक के दूसरे छिद्र से दोहराएँ। (3)---पर्वतासन गर्भावस्था में पर्वतासन करने से कमर के दर्द से निजाद मिलती है| इसे करने से आगे चलकर शरीर बेडौल नहीं होता है| इस आसन को करने के लिए सर्व प्रथम आरामआराम से बैठे। इस वक्त आपकी पीठ सीधी होनी चाहिए| अब सांस को भीतर लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं और हथेलियों को नमस्ते की मुद्रा में जोड़ लें। कोहनी सीधी रखें। कुछ समय के लिए इसी मुद्रा में रहें और तत्पश्चात सामान्य अवस्था में आ जाएं। इस आसन को दो या तीन से ज्यादा ना करे| योग आसन करने से पहले अपने डॉक्‍टर की सलाह जरूर लें।
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सवाल: मेरा कभी कभी मिट्टी जेसा कुछ खाने का मन करता है . क्या ये प्रेग्नेन्सी से रिलेटेड है ??
उत्तर: हेलो डिअर, प्रेग्नेंसीय में कैल्शियम की कमी होने की वजह से मिट्टी और स्लेट चाक खाने की इच्छा होने लगती है ,मिट्टी, स्लेट खाने की आदत बहुत ही खराब माना जाता है एक बार अगर लत लग गयी तो तो जल्दी सही नही होती है आप अगर मिट्टी, स्लेट खाते है तो इससे पेट मे कीड़े होने की संभावना होती है और तो और मिट्टी, स्लेट खाने से बॉडी में खून की कमी होने लगती है,और होने वाले बेबी में भी ब्लड की कमी हो सकती है या नुकसान कर सकता है इसलिए आप मिट्टी, स्लेट न खाये अगर आपका मिट्टी , स्लेट खाने का मन करे तो आप तुरंत डॉक्टर को दिखा दे आपके डॉक्टर आपको कैल्शियम वाली चीजें खाने के लिए देंगे या बताएंगे जिससे आपका स्लेट , मिट्टी खाने का मन नही करेगा ।
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सवाल: दुसरे बच्चें मे कितना अन्‍तर होना चाहिये
उत्तर: पहले बच्चे और दूसरे बच्चे के बीच कम से कम 2...3 साल का अंतर होना hi चाहिए क्योंकि डिलीवरी के बाद जो माता की शरीर में जो भी क्षति हुई रहती है उसे रिकवर करने में हमें 3 साल का समय आराम से देना चाहिए जिससे दूसरे बच्चे में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं आती और माता का शरीर स्वस्थ रहता है..
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सवाल: सी सेक्शन के बारे मे पूरी जानकारी चाहिये।
उत्तर: शल्य प्रसव परिच्छेद (अमेरिका: सीज़ेरियन सेक्शन), जिसे सी-सेक्शन (C-section), सीज़ेरियन सेक्शन (Caesarian section), सीज़ेरियन सेक्शन (Cesarian section), सीज़र (Caesar), इत्यादि भी कहते हैं, एक ऐसी शल्यक्रिया है, जिसमें एक या एक से अधिक शिशुओं के जन्म के लिए या कभी-कभी मृत भ्रूण को बाहर निकालने के लिए मां के पेट (लैप्रोटोमी) और गर्भाशय में (हिस्टेरोटॉमी) एक या एक से अधिक चीरे लगाए जाते हैं। सीज़ेरियन सेक्शन प्रक्रिया के प्रयोग द्वारा देर से की जाने वाले गर्भपात को हिस्टेरोटॉमी गर्भपात कहते हैं तथा यह विरले ही प्रयोग में लाया जाता है। सीज़ेरियन सेक्शन (शल्य प्रसव परिच्छेद) का प्रयोग प्रायः योनिमार्ग द्वारा शिशु जन्म की प्रक्रिया में मां या शिशु की जान या स्वास्थ के खतरे में पड़ने पर किया जाता है, हालांकि इन दिनों प्राकृतिक विधि से शिशु जन्म होने की स्थिति में भी मांग किए जाने पर इसका प्रयोग किया जा रहा है। हाल के वर्षों में इसकी दर काफी तेजी से बढ़ी है, जिसमें चीन 46% तथा अन्य एशियाई, लेटिन अमेरिकी देशों तथा अमेरिका में 25% के स्तर पर हैं।
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