9 सप्ताह की गर्भवती माँ

Question: mera pith m bht jada dard ho रा h

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सवाल
Answer: हेलो डियर प्रेगनेंसी में कमर दर्द होना आम बात है,बाल्म लगाकर गरम पानी से सिकाई कर लिजिए। हल्का काम ओर थोड़ा बहुत घुमने भी जाइए। केल्शियम कि टेबलेट जो डॉक्टर ने दि हैं वो लिजिए समय पर। प्रेग्नेंसी में ऐसा होता है। गर्म पानी से सिकाई करें। रात को सोते समय पैरों के नीचे तकिया लगाकर सोये।
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सवाल: mere pith m bht dard hota h
उत्तर: प्रेग्नेंसी के दौरान कभी कभी पेट में दर्द और ऐंठन होना हानिकारक नहीं होता है। पहली तिमाही में दर्द,कब्ज, गर्भाशय में होने वाले रक्त प्रवाह में वृद्धि, खाना खाने के बाद दर्द और ब्रेक्सटन-हिक्स संकुचन (Braxton hicks contractions) और गर्भाशय की अस्थियों (Round ligaments) में खिंचाव के कारण दूसरी और तीसरी तिमाही में दर्द महसूस हो सकता है। (और पढ़ें - गर्भावस्था में कब्ज) पहली तिमाही में पेट दर्द: पहली तिमाही में पेट दर्द या परेशानी होना आम बात है, खासकर गर्भावस्था की शुरुआत में। ये आपके शरीर में गर्भावस्था के दौरान होने वाले परिवर्तनों का एक हिस्सा है, जो अगले 40 हफ्तों तक बच्चे के गर्भ में रहने के लिए आपके शरीर की प्रतिक्रिया स्वरुप अनुभव होते हैं। कभी-कभी, पेट में दर्द होना इस बात की चेतावनी होती है कि आप जो खा रही हैं उसके सही से पच नहीं रहा है जिस कारण पेट में ऐंठन हो रही है। यहां तक कि इस दौरान ऑर्गेज्म से भी पेट में दर्द हो सकता है। दूसरी तिमाही में पेट दर्द: दूसरी तिमाही में अगर आपको पेट में दर्द के साथ रक्तस्राव नहीं हो रहा है तो यह आमतौर पर चिंता का कारण नहीं होती है क्योंकि ऐसा होने पर मिसकैरेजकी संभावना होती है। 100 में से एक से भी कम महिलाओं को दूसरी तिमाही में मिसकैरेज होता है। यदि ऐंठन बहुत अधिक रक्तस्राव के साथ हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। तीसरी तिमाही में पेट दर्द: ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन (Braxton hicks contractions) के अलावा, पेट के आसपास गंभीर दर्द होना सामान्य नहीं होता है। अगर ऐसा है तो ये संकुचन आमतौर पर समय से पूर्व प्रसव का संकेत होते हैं। समय से पूर्व प्रसव के अन्य लक्षणों में पानी की थैली का फटना, श्रोणि के आसपास दर्द, भ्रूण की गतिविधियों में कमी, पीठ के निचले हिस्से में दर्द और संकुचन आदि प्रमुख हैं। यदि आपको इन लक्षणों में से एक का भी अनुभव हो तो तुरंत अपने चिकित्सक से बात करें। अगर आपको 37 हफ़्तों के बाद पेट में दर्द महसूस हो रहा है, तो प्रसव के अन्य लक्षणों की भी पुष्टि करें कि क्या आपको योनि से डिस्चार्ज, पानी की थैली के फटने, संकुचन आदि का भी अनुभव हो रहा है? अगर इनमें से कोई भी लक्षणों महसूस नहीं हो रहा है, तो चिंता की कोई बात ही नहीं है। पीठ दर्द, संभवतः बच्चे द्वारा सिर की स्थिति बदलने के कारण, पेल्विक क्षेत्र के आसपास दबाव उत्पन्न होने की वजह से हो रहा है। (और पढ़ें - पेट दर्द के घरेलू उपाय) प्रेगनेंसी में पेट दर्द क्यों होता है - Common causes of abdominal pain in pregnancy in Hindi गर्भावस्था की शुरुआत में थोड़ा पेट दर्द होना सामान्य है। हालांकि, यदि दर्द तेज़ और लगातार हो रहा है या आप तीव्र ऐंठन और रक्तस्राव महसूस कर रही हैं, तो आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए। प्रेग्नेंसी में पेट में होने वाले दर्द के कुछ ऐसे ही कारण निम्नलिखित हैं जो चिंताजनक नहीं होते हैं: राउंड लिगामेंट्स में दर्द: जैसे जैसे गर्भाशय बढ़ता है, राउंड लिगामेंट्स (दो बड़े स्नायुबंधन जो गर्भाशय से जननांगों तक फैले होते हैं) में खिंचाव होता है, जिस कारण निचले पेट में दर्द होता है। जब आप अचानक अपनी स्थिति बदलती हैं तो दर्द तेज या बहुत तेज़ हो सकता है। ये लक्षण आमतौर पर कुछ समय बाद गायब हो जाते हैं। अगर दर्द असहनीय है, तो आप डॉक्टर से पूछ कर दर्द निवारक दवा ले सकती हैं। गैस और कब्ज: गर्भावस्था में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के स्तर में वृद्धि होने के कारण पेट में गैस और कब्ज़ की शिकायत हो जाती है। जब प्रोजेस्टेरोन का स्तर बढ़ता है तो गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट धीमा पड़ जाता है और भोजन सामान्य से धीमी गति से पचता है। जिसके परिणामस्वरूप गैस और कब्ज की समस्या उत्पन्न होती है। अधिक पानी पीने, फाइबर युक्त भोजन खाने और नियमित रूप से व्यायाम करने से आपको इस समस्या से आराम मिल सकता है। ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन: ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन हल्के होते हैं, बल्कि इन्हें "अभ्यास संकुचन" कहा जाता है। आपको प्रसव के संकुचन के समान ही कुछ संकुचन महसूस होंगे। हालांकि, जब आप स्थिति बदलती हैं तो ये घीमे या शांत पड़ जाते हैं। डिहाइड्रेशन इन संकुचनों के लिए सबसे प्रमुख कारण है, इसलिए उनसे बचने के लिए पर्याप्त पानी पिएं। यदि संकुचन लंबे समय तक महसूस हों, तो डॉक्टर से संपर्क करें। गर्भाशय का बढ़ना: गर्भाशय के बढ़ने की वजह से, आपकी आंत थोड़ी खिसक जाती है, जिससे मतली आदि की दिक्कत बढ़ जाती है। असुविधा को खत्म करने के लिए, आपको कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए। थोड़ी थोड़ी मात्रा में भोजन करें। नियमित रूप से व्यायाम करें। पर्याप्त आराम करें और अपने मूत्राशय को नियमित रूप से खाली करें। (और पढ़ें - गर्भावस्था में उल्टी और मतली आना) ऑर्गेज्म के दौरान दर्द: शुरुआती गर्भावस्था के दौरान चरम सुख की प्राप्ति के दौरान और बाद में दर्द होना काफी आम है। इसके बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि ये बहुत हल्का दर्द होता है। पेट में दर्द आमतौर पर सामान्य संकुचन या श्रोणि क्षेत्र में रक्त प्रवाह बढ़ने के कारण होता है। आम असुविधाएं: उपरोक्त हानिरहित कारणों के अलावा, पेट के वायरस, गर्भाशय फाइब्रॉएड, गुर्दे की पथरी, किसी विशेष भोजन के प्रति संवेदनशीलता आदि परेशानियों के कारण पेट में दिक्कत हो सकती है। हालांकि, सभी कारण हानिरहित नहीं हैं और न ही इन्हें अनदेखा किया जा सकता है। कुछ गंभीर जटिलता भी उत्पन्न कर सकते हैं। (और पढ़ें - पीरियड के कितने दिन बाद प्रेगनेंसी टेस्ट करे) प्रेग्नेंसी में पेट दर्द होने के गंभीर कारण – निम्नलिखित गंभीर जटिलताओं के होने पर आपको और आपके बच्चे को किसी भी जोखिम से बचने के लिए तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता होती है:     एक्टोपिक गर्भधारण (पहली और दूसरी तिमाही): 50 में से एक गर्भधारण में एक्टोपिक गर्भावस्था का अनुभव होता है, इसमें गर्भाशय के बाहर अंडे का प्रत्यारोपण (Implantation) विशेष रूप से फैलोपियन ट्यूब में होता है। नतीजतन, आपके पेट में निचली तरफ तेज दर्द होता है और गर्भावस्था के छठे हफ्ते और गर्भावस्था के दसवें सप्ताह के बीच आपको रक्तस्राव होने लगता है। जिन महिलाओं की पहले की प्रेग्नेंसी भी एक्टोपिक गर्भावस्था थी या जिनमें एंडोमेट्रिओसिस(Endometriosis), अपेन्डिसाइटिस(Appendicitis), और पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज(पीआईडी) का निदान हुआ है, उनमें एक्टोपिक गर्भावस्था का खतरा बढ़ जाता है। पेट के दर्द के अन्य कारणों में फैलोपियन ट्यूब में ट्यूमर और असामान्यताएं, अतीत में हुए कई गर्भपात, अंतर्गर्भाशयी उपकरणों (जैसे कॉपर टी) या प्रोजेस्टिन जैसी गर्भनिरोधक गोलियों का उपयोगआदि प्रमुख हैं। मिसकैरेज (पहली और दूसरी तिमाही): 20वें हफ्ते तक पहुंचने से पहले गर्भावस्था की समाप्ति को मिसकैरेज कहते हैं। योनि से रक्तस्रावइसका पहला लक्षण है और कुछ घंटों या कुछ दिनों तक पेट में दर्द भी होता है। दर्द हल्का या गंभीर हो सकता है और आपको ऐंठन भी हो सकती है। आपको पीठ के निचले हिस्से में दर्द और श्रोणि क्षेत्र में प्रेशर भी महसूस हो सकता है। अधिकांश गर्भपात पहली तिमाही में होते हैं और कभी कभी दूसरी तिमाही में। कभी-कभी, यह कहना मुश्किल हो जाता है कि दर्द आखिर मिसकैरेज, आरोपण या गर्भाशय के बढ़ने में से किसके कारण हो रहा है। मिसकैरेज के दौरान होने वाले दर्द और ऐंठन में अंतर रक्तस्राव के आधार पर किया जा सकता है, जो कुछ दिनों तक होता रहता है। यदि आपको मिसकैरेज के लक्षण दिखाई देते हैं तो डॉक्टर से संपर्क करें। अपरिपक्व प्रसव (दूसरी और तीसरी तिमाही): यदि आपको प्रेगनेंसी के 37वें सप्ताह से पहले की प्रसव के संकुचन का अनुभव होता है, तो आप प्री टर्म प्रसव अर्थात अपरिपक्व प्रसव की स्थिति में हैं। इससे लगातार पेट में दर्द (यह दर्द मासिक धर्म में होने वाली ऐंठन की तरह होता है), योनि से रक्तस्राव, पैल्विक हिस्से में बढ़ा हुआ दबाव और भ्रूण की गतिविधियों में कमी होती है। यदि आप उपरोक्त लक्षण महसूस होते हैं तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए। प्लेसेंटा का टूटना (दूसरी और तीसरी तिमाही): यह आम तौर पर तीसरी तिमाही में होता है जब प्लेसेंटा अपने आप गर्भाशय से अलग हो जाती है। लक्षणों में तेज़ और गंभीर पेट की ऐंठन, रक्तस्राव (बिना थक्के के) और संकुचन अनुभव होते हैं। कभी कभी प्लेसेंटा के टूटने पर महिला की तुरंतसिजेरियन डिलीवरी करने की आवश्यकता होती है। इनमें से किसी भी लक्षण का अनुभव होने पर तत्काल चिकित्सा पाने की कोशिश करें। हाई ब्लड प्रेशर, नशीली दवाओं का आदि होना या अतीत में प्लेसेंटा के टूटने के कारण भी ये समस्या होती है। प्री-एक्लेमप्सिया (दूसरी और तीसरी तिमाही): प्री-एक्लेमप्सिया का अनुभव, गर्भावस्था की दूसरी छमाही में किसी भी समय हो सकता है। इसमें मूत्र मेंप्रोटीन का उच्च स्तर या हाई ब्लड प्रेशर जैसे संकेत महसूस होते हैं। इसी कारण डॉक्टर हर जन्म से पहले दौरे (Prenatal visit) के दौरान ब्लड प्रेशर की जांच करते हैं। प्री-एक्लेमप्सिया के दौरान ऊपरी पेट में दर्द, गंभीरसिरदर्द, साँस लेने में कठिनाई, आंखों की दृष्टि में परिवर्तन, चेहरे, आँखों, हाथ, पैर और टखनों परसूजन और तेजी से वजन बढ़ने जैसे लक्षणों का अनुभव होता है। यदि आपको संदेह है कि आप प्री-एक्लेमप्सिया से पीड़ित हैं, तो आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए। (और पढ़ें - गर्भावस्था में सूजन) मूत्र पथ संक्रमण: यदि आप गर्भावस्था के दौरान मूत्र पथ संक्रमण को नजरअंदाज करती हैं, तो इससे पेट में दर्द और असुविधा हो सकती हैं, जैसे पेशाब के दौरान जलनऔर खून आना और शरीर के निचले हिस्से में दर्द होना आदि। यदि आपको उपरोक्त संकेतों के साथबुखार, पसीना, मतली या ठंड का अनुभव हो रहा है, तो आपको भी किडनी संक्रमण हो सकता है। ऐसे में आपको तुरंत इलाज की आवश्यकता हो सकती है। अच्छी बात यह है कि यूटीआई का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं से किया जा सकता है। अपेन्डिसाइटिस: गर्भधारण में अपेन्डिसाइटिस होना एक गंभीर स्थिति है और इसका निदान करना भी मुश्किल होता है। मतली, उल्टी, भूख में कमी आदि सभी अपेन्डिसाइटिस के लक्षण होते हैं। ये सभी गर्भावस्था के लक्षणों के समान ही होते हैं और यही कारण है कि इसका निदान करना मुश्किल हो जाता है। यद्यपि पेट के निचले दाहिने भाग में अपेन्डिसाइटिस का दर्द होता है। आप गर्भावस्था के दौरान इसे थोड़ा अधिक महसूस करेंगी क्योंकि अपेन्डिसाइटिस का दर्द लिवर या पेट के नीचे तक पहुंच जाता है। (और पढ़ें - गर्भावस्था में भूख न लगना) पित्ताशय में पथरी: यदि आप 35 वर्ष से अधिक उम्र की हैं, अधिक वजन वाली महिला हैं या आपके परिवार में या आपको ऐसा कुछ हो चुका है तो आपके पित्ताशय में पथरी होने की अधिक संभावना है। पेट के ऊपरी दाएं भाग में आपको तेज़ दर्द हो सकता है, और पीठ तथा दाएं कंधे के नीचे दर्द हो सकता है। (और पढ़ें - गर्भावस्था में दर्द) प्रेग्नेंसी में पेट में होने वाले दर्द का इलाज - Abdominal pain treatment during pregnancy in Hindi यदि आपको थोड़े दर्द का अनुभव हो, तो आप इससे राहत पाने के लिए निम्न सरल युक्तियों का उपयोग कर सकती हैं: (और पढ़ें - गर्भवती महिला के लिए भोजन) दर्द वाले हिस्से पर गर्म पानी की बोतल से सिकाई करें, या गर्म पानी से स्नान करें। गैस के दर्द को दूर करने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करें। आराम पाने के लिए जितनी बार हो सके आराम करें। खूब सारा पानी या तरल पदार्थ पिएं। फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ जैसे, चोकर, फल औरसब्ज़ियां खाएं। बार बार लेकिन थोड़ा भोजन करें। (और पढ़ें - प्रेगनेंसी में गैस बनना)  गर्भावस्था में पेट में दर्द होने पर डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए - When to call doctor for abdominal pain during pregnancy in Hindi यदि आपको पेट में गंभीर दर्द या ऐंठन है, तो डॉक्टर से जांच कराने में संकोच न करें।निम्नलिखित परिस्थितियों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें: पहली तिमाही के दौरान रक्तस्राव या स्पॉटिंग के साथ तेज़ दर्द का अनुभव। (और पढ़ें - गर्भावस्था में रक्तस्राव) खून के साथ या बिना पेट में दर्द। सिरदर्द, उल्टी, मतली और चक्कर आना। हाथों और पैरों में गंभीर सूजन या एडिमा। पेशाब के दौरान जलन और दर्द होना। बुखार या ठंड लगना। दृष्टि में परिवर्तन जैसे प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता, धुंधला दिखाई देना, अस्थायी अंधापन या फ्लैश लाइट्स दिखना। लगभग एक घंटे में चार संकुचन महसूस करना। यह समय से पूर्व प्रसव का संकेत हो सकता है। यदि आपको गर्भावस्था के दौरान पेट में दर्द हो तो आपको डरने या चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। यह गैस बनने के कारण भी हो सकता है, लेकिन एक ही समय में लगातार होने वाले दर्द को आप अनदेखा नहीं कर सकतीं। अपना ध्यान रखें और अगर ज़रूरत पड़े तो डॉक्टर से संपर्क करें।
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सवाल: हेलो फंडस एक्चुअली मेरा पीठ एम बहुत दर्द रहता ह प्लीज कोई बता दीजिए क्यों हो रहा ह बहुत परेशान हूँ एम
उत्तर: हाय डीयर यदि आप अपने बच्चे को बोतल से दूध पिलाते हैं तो आप कुछ दिनों के लिए उसको छोड़ छोड़ दीजिए आप गिलास से दूध पिलाया स्टील के बर्तन में ही दूध पिलाई है क्योंकि क्योंकि बोतल में बहुत जल्दी कीटाणु लग जाते हैं जिसकी वजह से बच्चा जब दूध पीता है तो उसकी बॉडी में वह कीटाणु चले जाते हैं जिसकी वजह से बच्चा सफर करता है उसको लूज मोशन लग जाते हैं और कई बार बच्चे अपने हाथों से कुछ भी गंदा टच कर लेते हैं जिसके कारण उनके हाथ में कीटाणु लग जाते हैं और वही हाथ बच्चे मुंह में डालते हैं जिसके कारण उनको इंफेक्शन हो जाता है लूज मोशन हो जाते हैं और उसके कारण कई बार बुखार आ जाता है कई बार हम अपने बच्चे को नार्मल वॉटर दे देते हैं कई बार पानी की वजह से भी बच्चों को इंफेक्शन हो जाता है आप अपने बच्चे को कम से कम पानी को 2 से 5 मिनट तक उबालें और उसको ठंडा करके फिर अपने बच्चे को पिलाएं उससे बच्चे के इंफेक्शन होने के चांस कम होते हैं आप अपने बच्चे को ओ आर एस का घोल भी दे सकते हैं जब आपको लगे आपका बच्चा बहुत ज्यादा लूज मोशन जा रहा है क्योंकि उसकी बॉडी में पानी की कमी ना होने दें मान लीजिए आप का बच्चा 10 किलो का है तो आप 50एमएल पानी अपने बच्चे को वायरस का अप्लाई और कोशिश कीजिए दो जो भी आप अभी दूध पिला रहे हैं बच्चों को वह अभी रोक दीजिए पिलाने से दूध पीने से बच्चों का लूज मोशन का लेवल बढ़ जाता है और यदि आप दे सकते हैं तो ब्रेस्टमिल्क दे सकते हैं क्योंकि वह बच्चे के लिए उसमें वह गुण होते हैं जो उसको लड़ने की शक्ति मिलती है और आप अपने बच्चे को घर का जमा हुआ दही खिला सकते हैं यह बहुत ही अच्छा होता है आप घर का ही जमा हुआ है कि लाभ ज्यादा बैटर है और इस टाइम पर आप अपने बच्चे को दही दाल का पालक खिचड़ी जितना हो सके उसको लाइट भोजन दीजिए कि उसकी सेहत के लिए बहुत अच्छा रहेगा और आप हो जितना हो सके अपने आसपास सफाई रखी है बच्चे जहां घूमता है जहां घर में रहता है वह अच्छे से फिनायल का पोछा लगा कर रही है साफ सुथरा रखें ताकि बच्चे के मुंह में कोई कीटाणु ना जाए
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सवाल: Mam mere पीठ m और कमर m bht ज्यादा दर्द रहता लेता भी नहीं हटा
उत्तर: प्रेगनेंसी में कमर और पीठ में दर्द होना तो नॉर्मल होता है क्योंकि इस समय पेट में बच्चा रहता है जिसका पूरा दबाव कमर और पीठ पर ही पड़ता है जिस वजह से प्रेगनेंसी के पूरे 9 महीने तक दर्द महसूस होता है मगर दर्द में राहत पाने के लिए आप गुनगुने तेल से अपने पेट और कमर का हल्का मालिश कर करवा सकते हैं इस दिन ब्लड सरकुलेशन बढ़ेगा और आपको दर्द में आराम मिलेगा सुबह हल्का फुल्का वाक kre व्यायाम करें एक ही पोजीशन में ज्यादा देर तक खड़े ना रहे हैं और ना ही बैठकर कोई काम ज्यादा समय तक करें प्रेगनेंसी में पूरे 9 महीने का कितने कपड़े पहने मेरी बहुत ज्यादा दर्द होता है वह बर्फ की सिकाई भी कर सकते हैं फिर भी यदि आराम ना मिले तो डॉक्टर से सलाह जरूर लेना चाहिए
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