Planning for pregnancy

Question: Pcod hi to conceive Kar me join problem hi Sakti he?

1 Answers
सवाल
Answer: हेलो डियर , आपको अगर picos है तो इससे आपको प्रेग्नेन्ट होने में प्रॉब्लम हो सकती है , इसके लिए आप डॉक्टर से अपना इलाज करवायें और फ़िर प्रेग्नेन्ट होने की कोशिश करे , ऐसे में आप कुछ घरेलु उपाय भी कर सकती हैं। सबसे पहले आपको ऐसे डेली थोड़ा बदलाव करे। मसालेदार और जंक फूड बिल्कुल ना लें। साथ मे दालचीनी गरम पानी मे मिलाकर रोज पिये। अलसी को भी पानी मे मिलाकर पिया जा सकता है। मेथी को रात भर पानी मे भिगो दें सुबाह मेथी दाना शहद के साथ खाएं। एप्पल साइडर विनेगर सुबह २ स्पून १ ग्लास पानी मे मिलाकर पियें।
समान प्रश्न, उत्तर के साथ
सवाल: mujhe thyroid he to kya me conceive kar sakti hu
उत्तर: थायरॉयड गले का रोग है। गले का यह रोग हार्मोन असंतुलन का एक बड़ा कारण हैं। थायरॉयड समस्या को नियंत्रि‍त किया जा सकता है लेकिन उसके लिए जरूरी है सही इलाज और व्यायाम। गर्भावस्था के प्रथम तीन महीनों में थायरॉयड होने से गर्भवती महिला में गंभीर समस्या भी हो सकती है। जिन महिलाओं को थायरॉयड संबंधी समस्या है, उन्हें गर्भधारण के पहले तो जांच करानी ही चाहिए बल्की गर्भावस्था के हर महिने भी जांच कराते रहना चाहिए। ऐसा करने से वे कई परेशानियों को विक्राल रूप लेने से रोक सकती हैं।  आवश्यक्ता अनुसार दवाओं की डोज घटाई-बढ़ाई जा सकती है ताकि मां और शिशु दोनों को नुकसान से बचाया जा सकता है। आइए प्रेग्नेंसी में थायरॉयड की समस्या के बारे में विस्तार से कुछ तथ्यों को जानें।   थायरॉयड पाचनक्रिया पर खासा असर डालता है। थायरॉयड बीमारी के दौरान पाचनक्रिया सामान्य से 50 फीसदी कम हो जाती है। इतना ही नहीं थायरॉयड ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोंस की अधिकता के कारण पाचनक्रिया पर असर पड़ता है,जो कि बड़ी स्वास्‍थ्‍य समस्याओं के साथ ही गर्भावस्था के दौरान खतरनाक स्थिति भी पैदा कर सकता है। ऐसा नहीं कि थायरॉयड का इलाज नहीं लेकिन थायरॉयड से निजात पाने के लिए उसका सही इलाज जरूरी है, इसलिए गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान हर महीने थायरॉयड की जांच करवानी चाहिए। गर्भावस्‍था के दौरान थायरॉयड के इलाज के लिए दी जाने वाली डोज जरूरत के हिसाब से घटाई या बढ़ाई भी जा स‍कती हैं। जिससे होने वाले बच्चे को किसी भी नुकसान से बचाया जा सकें। आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान थायरॉयड के इलाज में दवाओं के डोज बढ़ा दिए जाते हैं लेकिन बच्चे के जन्म के बाद इसे जरूरत के हिसाब से कम कर दिया जाता है। गंभीर थायरॉयड होने यानी हाइपोथायरॉयड होने से गर्भपात की संभावना बढ़ जाती हैं। इतना ही नहीं भ्रूण के गर्भ में ही मृत्यु होने का खतरा भी बढ़ जाता है। थायरॉयड के कारण बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास पर बहुत प्रभाव पड़ता है, बच्चा असमान्य भी हो सकता है। बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास में भी समस्या आती हैं। थायरॉयड पीडि़त प्रेग्नेंट महिलाओं के बच्चों का विकास सामान्य बच्चों की तरह नहीं होता बल्कि धीमी गति से होता है। थायरॉयड पीडि़त प्रेग्नेंट महिलाओं के बच्चों को यानी नवजात शिशुओं का नियोनेटल हाइपोथायरॉयड की समस्या हो सकती हैं।   गर्भवती महिलाओं को थायरॉयड का पता लगते ही उन्हें तुरंत इलाज शुरू कर देना चाहिए। डॉक्टर के सलाहानुसार समय-समय पर लगातार जांच करानी चाहिए और नियमित रूप से दवाओं का सेवन करना चाहिए जिससे होने वाले बच्चे पर थायरॉयड का कोई खास प्रभाव न पड़े और गर्भवती महिला भी सुरक्षित रहें।  
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सवाल: Mujhe pcod ka starting problem he to Kyaa pregnancy ho sakti he
उत्तर: डियर .इस रोग का मुख्य कारण आजकल की चिंता,खाने-पीने मे अनियमितता,असंतुलित आहार, मोटापा और मधुमेह ही है गर्भधारण में परेशानियां या बार बार गर्भपात PCOD के लक्षण है. इस रोग से बचने क कुछ उपाय निम्न है *आप रोजाना एक्सरसाइजेज, रनिंग और स्विमिंग करें, इससे शरीर के हॉर्मोन संतुलित रहते है  *आप संतुलित और स्वस्थ आहार लें,  तैलीय चीजों से दूर रहे,उनके स्थान पर आप फलों और पत्तेदार सब्जियों का सेवन कर सकती है. *जितना कम हो सके उतना कम तनाव लें. तनाव दूर करने के लिए आप योग प्राणायाम का सहारा भी ले सकते हो. *अगर आप अपने वजन को ही कण्ट्रोल में कर लें तो PCOD की समस्या अपने आप दूर हो जायेगी *महिलायें जिन्हें PCOD है, उन्हें तुरंत डॉक्टर्स से मिलना चाहियें और उनकी सलाह के अनुसार ही दवाओं का सेवन शुरू कर देना चाहियें
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सवाल: Me 3 saale se try kar rahi hu for conceive nahi hu rahi hu, maze PCOD he
उत्तर: हेल्लो डीयर Pcod एक ऐसी मैडिकल कंडीशन है जो महिलाओं मे होर्मोनल असन्तुलन के कारण पाई जाती है। इसमे महिला के शरीर मे पुरुष होर्मोन का स्तर बढ़ जाता है। और ओवरी मे एक से ज्यादा सिस्ट हो जाती हैं। इसको पोल्य्सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या पोल्य्सिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर के नाम से जानते हैं। इसके सिम्पटम्स वजन बढ़ना, अनियमित पीरियड होना, शरीर पर ज्यादा बालो की ग्रोथ होना, मुहासे हो सकते हैं। वैसे तो इसका इलाज डॉक्टर से करवाना ठीक रह्ता है लेकिन आप कुछ घरेलु उपाय भी कर सकती हैं। सबसे पहले अपनी जीवन शैली मे थोड़ा बदलाव करे। मसालेदार और जंक फूड बिल्कुल ना लें। साथ मे दालचीनी गरम पानी मे मिलाकर रोज पिये। अलसी को भी पानी मे मिलाकर पिया जा सकता है। मेथी को रात भर पानी मे भिगो दें सुबाह मेथी दाना शहद के साथ खाएं। एप्पल साइडर विनेगर सुबह २ स्पून १ ग्लास पानी मे मिलाकर पियें।
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