3 महीने का बच्चा

Question: मेरे बेबी का कलर दिन म 2 बार change hota hai esa kyu

2 Answers
सवाल
Answer: डियर बेबी जैस जैसे बदलता राहत है आप बेबी का कोल फेअर करने ये के.आर.आर. ,बेबी का कॉलर फेयर करने के लिए आप बेबी की स्किन में नमी बनाए रखे उसे कोई मॉइस्चराइजर क्रीम या लोशन लगाए ,ओर बेबी को जैतून का तेल लगाने से बेबी का कॉलर फेयर होता है इसके अलावा आप उप्टन का भी प्रयोग कर सकते है आप बेबी के उबटन के लिए 1 चम्मच बेसन चुटकी भर हल्दी और 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच जैतून का तेल इन्हें मिला ले और हफ्ते में 2 बार लगाय बेबी का कॉलर फेयर होने लगेगा।
Answer: बच्चो का कलर जनम के समय बहुत गोरा और गुलाबी रंग का होता है जिसे हम लोग asli रंग मान लेते हैं लेकिन ऐसा नहीं है वो सिर्फ लाल रक्त वाहिकाओं के कारन और स्किन बहुत पतली होने के कारन दीखता है उस टाइम मे' स्किन में मेलेनिन बनना चालू नहीं रहता लेकिन जनम के बाद जब बच्चा कुछ दिन का होता है उसके बाद मेलेनिन का बनना चालू होता है जिससे गहरा रंग होते जाता है बाछे का स्किन कर अपने माता पिता जैसे ही होता है बस कुछ दिनों का बदलता है l
समान प्रश्न, उत्तर के साथ
सवाल: मे म मे 6month प्रेगनेट हू और दिन में 2 बार चाय पीती हूँ क्या किसी तरह का नुकसान मेरे आने वाले बेबी को तो नही होगा
उत्तर: हेलो डियर आप चाय पी सकती है मगर दिन भर में 1 या 2 कप से जादा ना पीएं ऑर पावडर वाली चाय ना पीएं घर की बनी हुई दूध की चाय पी सकती है इस्से आपको सर दर्द की समस्या ऑर आप नींबू की चाय मतलब लेमन टी पी सकती है साथ ही आप हरबल टी भि पी सकते है जैस की सबसे अच्छा होता है तुलसी की चाय जो की बहुत अच्छा होता है क्युकी ये प्रक्रतिक आओसदहि है मगर दयान रखें की कोई भि चाय 2 कप से जादा ना पीएं
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सवाल: मेरा बेबी बॉय दिन का हे वो काले कलर का पोटी 5 बार किया ये बात नॉर्मल हे
उत्तर: हेलो डियर नवजात शिशु को ब्लैक कलर की पॉटी आना पूरी तरह से नॉर्मल बात होती है , आप बिल्कुल भी चिंता ना करें , आपका जीबी जब पेट में होता है तब वह अमनोटिक द्रव निगलता रहता है , इसकी वजह से आपके बेबी की पॉटी का कलर जन्म के तुरंत बाद ब्लैक कलर का होता है , पूरी तरह से आप बात है आप बिल्कुल भी चिंता ना करो , कलर धीरे धीरे करो कम हो जाएगा . ख्याल रखें .
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सवाल: मेरे बेबी का कलर साफ़ नही हे
उत्तर: hello dear छोते बेबी जन्म के समय अक्सर गोरे लगते हैं, और कभी-कभी त्वचा में गुलाबी रंगत भी होती है। यह गुलाबी रंगत लाल रक्त वाहिकाओं से मिलती है, जो कि शिशुओं की पतली त्वचा में से दिखाई देती हैं। अधिकांश माता-पिता इसे बच्चे की त्वचा का वास्तविक रंग मान लेते हैं। मगर नवजात की त्वचा का रंग थोड़ा गहरा होने लगता है, क्योंकि त्वचा को रंग देने वाला प्राकृतिक रंजक (पिग्मेंट)-मेलानिन- का उत्पादन शुरु हो जाता है। इसलिए शुरुआत में शिशु की रंगत में बदलाव आना सामान्य है। फिर भि आप कुछ घरेलु नुस्खे ट्राइ कर सकती है . चंदन, हल्दी, केसर और दूध का पेस्ट बनाएं और इसे अपने बच्चे के शरीर पर लगाएं। इसे 10 मिनट तक सूखने के लिए छोड़ दें। उसके बाद गुनगुने पानी से बच्चे को नेहला के साफ करे बच्चे के रंग को बरकरार रखेगा साथ ही सूखेपन को भी दूर करे साबुन के इस्तेमाल की बजाये बच्चे को दूध और गुलाब जल से साफ करें। इसके आलावा आप ग्लिसरीन और क्रीम से बने baby वाश का भी इस्तेमाल कर सकते है।  
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