4 साल का बच्चा

Question: मेरे बेटे 4 साल की है और वह मेरी कोई भी बात जल्दी नहीं सुनते हैं और बहुत जिद करती है हर चीज में मैं उसके लिए क्या करूं

1 Answers
सवाल
Answer: हेलों बेबी आप का 4 साल का आपकी को ई भी बात को जल्दी नही ं सुनता है और बहुत जिद कर ता है दें ख िए इस एज में आप जैसा व्यवहार बच्चे के साथ करें गे बच्चा वैसा ही व्यवहार आपके साथ करता है उसे सही गलत का पता नहीं हो ता है वह चीजें देख कर सीखता है यदि आप बच्चे को चिल्लाकर याद आती है तो वैसे ही चीजें सीख जाता है और समझ जाता है कि ऐसे करने पर चीजें मिल जाती है आप अपने बच्चे के साथ प्यार से पेश आएं प्यार से से बात करें दूसरी सबसे ज्यादा जरूरी बात कि आप उसकी हर विश को पूरा करना बंद कर दे उसे समझाएं कि आप क्यों उनकी विश पूरी नहीं कर रही है ... बच्चे को छोटे-छोटे एक्टिविटी में लगा रहे ताकि बच्चे के पास जिद करने के लिए समय ही ना हो आप खुद बच्चे के साथ बैठे बच्चे अकेलेपन के कारण भी जिद्दी हो जाते हैं आप बच्चे को पेंटिंग कराएं एक्सरसाइज कराए साइकल चलवा है ऐसे में बच्चे का बौद्धिक और शारीरिक दोनों विकास होता है
समान प्रश्न, उत्तर के साथ
सवाल: मेरे बेटे की एज 3 साल है वह बहुत जिद करती है और रोते रहते मैं क्या करूं
उत्तर: हेलो डियर आजकल सभी बच्चे बहुत जिद्दी हो ते है ं क्योंकि हर किसी को एक ही बेबी होता है तो सारे मम्मी को पापा अपने बच्चों का बहुत लाड प्या र कर ते हो वह जो चीज मांगते हैं उन्हें वह चीज तुरंत मिलती है इसलिए उन्हें अॅडजेस्ट करने की आदत नहीं होती कर कभी कबार आप ने कोई चीज से में से इनकार करते हैं तो फिर वह रोना चाट स्टार्ट दें ं ते हैं या फिर जिद्द करते हैं इसलिए आप अपने बेबी को प्यार से समझाओ और जब वह कोई चीज मांगे तो वह उसे तुरंत ना दे आप चाहे तो वही चीज उसे दो या तीन दिन बाद ला कर दे लेकिन जब वह मांगे तो तुरंत ना दें ऐसा करने से उसे धीरे-धीरे आदत हो जाएगी और फिर वह जिद नहीं करेगा ।
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सवाल: मेरी बेटी 3 साल की है और वह बहुत जिद करती है और रोती बहुत ही इसके लिए मैं क्या करूं
उत्तर: हेलो डियर छोटे बच्चे अक्सर तभी ज़िद करते हैं जब हम उनकी हर एक चीज को पूरा करते हैं डियर आप अपने बच्चे की हर एक चीज को पूरा करने की जरूर कोशिश किया करें पर हर चीज मानना भी कभी कबार बहुत ज्यादा हम पर ही हावी होने लगता है, सबसे पहले अगर आपका बच्चा कुछ मांगता है या कुछ भी करता है हमेशा उसको पहले प्यार से ही समझाएं कभी भी जोर से चिल्लाए नहीं ना ही उसको डांटे और ना ही उसको मारे हमेशा प्यार से ही समझाएं बच्चों को हमेशा प्यार से ही समझाना चाहिए प्यार से बच्चे बहुत जल्दी काबू में आते हैं और आप अपने घर केवातावरण को बहुत ही शांतिपूर्वक बनाए रखें जो बच्चे घर में देखते हैं बच्चे अक्सर वही करते हैं और जिद्दी बनने लगते हैं अक्सर हम बच्चों के सामने बड़े लोग लड़ते हैं कुछ ना कुछ उल्टा सीधा कहते रहते हैं इसका पूरा पूरा प्रभाव बच्चों पर पड़ता है इसलिए अपने बच्चों के सामने कभी भी लड़ाई नहीं करें हमेशा प्यार से ही रहे बच्चा भी प्यार से ही रहना सीखेगा जब भी बच्चा बहुत ज्यादा रो रहा हो तो बच्चे को उसका ध्यान भटकाने के लिए कुछ ऐसी चीजें रखें जो आपको पता है कि बच्चे की फेवरेट है मैंने भी ऐसा ही किया हुआ है मैं भी अपने बच्चे को जब मेरा बच्चा कंट्रोल में नहीं आता है तो कुछ चीजें हैं जो कि मैं बच्चे को उस टाइम पर देती हूं तो मेरा बच्चा एकदम चुप हो जाता है समझता है और जब बच्चा बहुत ही एकदम शांत अच्छे से हंस खेल रहा हूं तब बच्चे को गुडmannners और bad manners में फर्क बताएं बच्चे को हर एक चीज बहुत ही आराम से बताएं कि रोना अच्छी बात नहीं होती है रोने के पीछे कारण भी होना चाहिए यदि कारण नहीं है और आप रो रहे हो तो इससे आपके ऊपर तब बच्चे बाहर के हटेंगे कोई आप से खेलना पसंद नहीं करेगा इस तरीके से बच्चे को बच्चों की बातों से ही समझाया जा सकता है मैं भी अक्सर ऐसा ही करती हूं मैंने आपके साथ अपने कुछ टिप्स शेयर किए हैं जो कि मैं अपने बच्चे के साथ फॉलो करती हूं आप भी इन्हें फोलो करें आपको जरूर मदद मिलेगी :)
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सवाल: मेरी बेटी चार साल की है और वह हर चीज़ के लिए बहुत ज़िद करती है और बहुत ज़्यादा रोती भी है .... में क्या करु ??
उत्तर: आप चिंता ना करें बच्चे का बिहेवियर हमेशा बदलते रहता है बच्चे के जन्म के बाद से ही वह सीखने की प्रक्रिया चालू हो जाता हैl और माना जाता है कि परिवार ही बच्चे का पहला पाठशाला होता है जिसमें मां पहली guru होती है जो बच्चे को संस्कार देती हैंl अगर बच्चा कुछ गलत करता है तो उसे मारने या डरने के बजाए उसे प्यार से समझाना चाहिए ताकि बच्चा प्यार से सीखेंl सभी बच्चा एक जैसे नहीं होता हर कोई का स्टाइल अलग अलग होता है इसलिए हम बच्चे को किसी भी चीज के लिए फोर्स नहीं कर सकते कोई ज्यादा शरारती होता है तो कोई थोड़ा कम होता है उन्हें अपने माहौल में डालने के लिए थोड़ी मेहनत करनी पड़ती हैl और बच्चों को ज्यादा किसी चीज के लिए नियंत्रण भी ना रखें क्योंकि ऐसे में बच्चे बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा और jiddiबन जाते हैंl
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