गर्भावस्था की तैयारी

Question: मेरी सेकंड प्रेगनेंसी के बारे में बताये

1 Answers
सवाल
Answer: हेलो डियर,आप अपनी सेकंड प्रेगनेंसी से रिलेटेड क्या जानना चाहती है आपको पूछिए आपको उसकी जानकारी दी जाएगीl
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सवाल: प्रेग्नेंसी के बारे में मालूमात
उत्तर: गर्भावस्था में इना से करें पर हेज  ऐसे का म करने से बचें जिसमे भारी वज़नदार चीज़ें उठानी पड़ें, जैसे कि पानी से भरी हुई बाल्टी, सब्जियों या किराने के भारी थैले आदि। भारी सूटकेस, गैस का सिलिंडर या अपने बड़े बच्चे को उठाने से भी आप की पीठ में मरोड़ हो सकती है । ज़मीन पर बिखरी हुई वस्तुएं उठाने के लिए झुकने से भी आपकी पीठ पर विपरीत रूप से असर हो सकता है। अधिक देर तक खड़े होने से बचें। अगर आपको सब्जी या फल काटने हैं तो कुर्सी पर बैठकर किसी टेबल पर रखकर काटे इस से आपको थोड़ा विश्राम भी मिल जाएगा। और ऐसे खाना पकाने से बचें जिनमे अधिक देर तक खड़े रहने की ज़रुरत पड़े।      अगर आपको रसोईघर में किसी उपरी शेल्फ से किसी चीज़ की आवश्यकता हो तो स्टूल या सीढ़ी का प्रयोग करने से बचें। याद रखें कि इस अवस्था में आप उतनी फुर्तीली नहीं होती ं जितनी आप सामान्य अवस्था में होती हैं, तो गिरने पड़ने का डर अधिक रहता है। अगर आप छत के पंखों पर, खिडकियों पर, या आइनों पर जमी हुई मैल के बारे में चिंतित हैं, तो आप उन्हें अकेले साफ़ करने का प्रयास न करें, बल्कि अपनी नौकरानी की या किसी और की सहायता लें। अगर फ्यूज़ हुए बल्ब या बिजली के तार, सॉकेट, प्लग वगैरह में गड़बड़ी हो तो उसे ठीक करने के लिए अपने पति से या किसी इलेक्ट्रिशियन से करने को कहें।   घुड़सवारी, समुद्र से जुडी किसी भी गतिविधि से बचें। मनोरंजन पार्क में किसी भी झूले पर बैठने से बचें। कुछ योग आसनों को करने से बचें।गर्भवती महिलाओं को स्टीम बाथ से भी बचना चाहिए , क्योंकि गर्भ में गर्मी जमा होने से बच्चे के लिए नुकसानदे हो सकता है।
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सवाल: डायट के बारे में बताये
उत्तर: गर्भावस्था में चाय-कॉफी के बजाय दूध, फल और सब्जियां खूब लें। तला भुना खाने से बचें। Protein युक्त भोजन लें। और इस दौरान वजन कम करने की सोचें भी नहीं।गर्भ धारण के बाद भोजन 200-300 केलोरीज ही ज्यादा लेना अच्छा रहता है बहुत ठूंस – ठूंस कर नहीं खाना चाहिए।अगर आपका आहार संतुलित होगा , तो ही आपकी व बच्चे की सेहत सुरक्षित रहेगी इसीलिए आपके भोजन में Folic Acid, Calcium, Iron, Zinc, Protein, Phosphorus, Vitamin D और ओमेगा 3 Omega Fatty Acids का होना जरुरी होता है | इन तत्वों को लेने से खून में Hemoglobin बढ़ता है। और मिस कैरिज का डर नहीं रहता है।इन सब विटामिन के कुदरती स्रोत के रूप में हरी पत्तेदार सब्जियां, मटर, फूलगोभी, शिमला मिर्च, बादाम, काजू, मूंगफली, तरबूज, केला व संतरा खाएं। इनके अलावा पालक, चुकंदर, broccoli ,शलगम कद्दू राजमा दाले , दही, फैट फ्री मीट , अंडे का सफ़ेद भाग , दूध-मट्ठा, पनीर, सोयाबीन, बीन्स, और साबुत अनाज लें।अगर आप नॉन वेज भोजन खाती है तो आपको अपने Pregnancy Diet Chart में मांस, अंडा, मछली शामिल करना चाहिए क्योंकि ये सब प्रोटीन, आयरन और जिंक का अच्छा स्रोत है | प्रोटीन शरीर के अंगो के बनावट के लिए बहुत जरुरी होता है | सही प्रोटीन की मात्र एक ग्राम प्रोटीन प्रति किलो वजन के फॉर्मूले के हिसाब से होती है | मान लीजिये अगर किसी का वजन 50 किलो है तो उसको 50 ग्राम प्रोटीन सामान्य अवस्था में चाहिए ,गर्भावस्था के दौरान 15 ग्राम प्रतिदिन के हिसाब से और जोड़ लीजिये तो एक 50 किलो वजनी गर्भवती स्त्री को 65 ग्राम प्रोटीन प्रतिदिन लेना चाहिए |मकई, गेंहू और दूसरे साबुत अनाज से बना हुआ दलिया फाइबर से भरपूर होता है उसे अपने Pregnancy diet chart में अवश्य शामिल करें | चाहे तो पोपकोर्न और भुना हुआ मकई भी लें सकती है !Oat में फाइबर, आयरन ,विटामिन बी होता है इसलिए सुबह के नाश्ते में एक बाउल ओट्स लें।दूध, दही और पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद प्रोटीन, कैल्शियम, फास्फोरस और विटामिन का अच्छा स्रोत होते है | इन्हें लेने से बच्चे की ग्रोथ में मदद मिलती है, उसकी हड्डियां व दांत मजबूत होते है। इनसे उसके दिल की मसल्स व नसों के विकास में अच्छी मदद मिलती है डेयरी उत्पाद लेने से उसकी मांसपेशिया बनने के अलावा किडनी के फंक्शन व दिल की धड़कन सामान्य बनी रहती है। इन्हें लेने से बच्चे का ब्रेन, नर्वस सिस्टम व आँखे बनने में सहायता मिलती है
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सवाल: वॅक्सीनेशन के बारे में बताये
उत्तर: आपकी प्रोफाइल के अनुसार आपका बच्चा 21 महीने का है इस अवस्था में हेपेटाइटिस A का वैक्सीनेशन दिया जा सकता है क्योंकि is वैक्सीनेशन का टाइम 12 से 24 महीने के बीच होता है यदि आपके बच्चे को अभी यह वैक्सीनेशन नहीं दिया गया है तो आप उसे लगवा सकती हैं।
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सवाल: प्रेगनेंसी में औरतों के स्वभाव के बारे में बताएं
उत्तर: हेलो डियर राजू की प्रेगनेंसी में बहुत सारे और मॉडल चेंज होते हैं तो बहुत बार लेडीस चिड़चिड़ी हो जाती हैं या फिर उनका मूड बहुत जल्दी बदलता है तो इसमें घर वालों को थोड़ा पेशेंट के साथ काम लेना चाहिए मूड स्विंग्स होते हैं प्रेगनेंसी की वजह से
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