16 सप्ताह की गर्भवती माँ

Question: मेरा 4th month chal rha h kya gud kha skti hu

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सवाल
Answer: हैलो डियर- जी नहीं अभी आपको गुड नहीं खाना चाहिए गर्भवती स्त्रियों को 7 महीने से गुड़ खाना शुरू कर देना चाहिए। गुड एंटीऑक्सीडेंट का भंडार है इम्यून सिस्टम को स्ट्रांग बनाता है गुड़ के सेवन से गर्भावस्था में होने वाले जोड़ों के दर्द से आराम मिलता है।क्योंकी गुड़ आयरन की कमी को पूरा करता है इसलिए इससे बच्चे की वजन और सेहत अच्छी बानी रहती है। इसे रोज़ अपने खाने के साथ में लेने से गर्भवती स्त्रियों के दूध की अशुद्धियाँ कम हो जाती हैं।
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सवाल: kya mai kinu kha skti hu 4th chal rha h
उत्तर: सिट्रस फ्रूट नींबू वंश के फल होते हैं, जैसे कि संतरा, किन्नू, नींबू मौसंबी आदि। ये फल गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत लाभकारी होते हैं। बैंगलोर की सीनियर न्यूट्रीशनिस्ट शोभा शास्त्री कहती हैं, गर्भावस्था में सिट्रस फ्रूट बहुत तरीकों से फायदेमंद साबित होते हैं। एक गर्भवती महिला को दिन में 3 से 4 बार फल खाने चाहिए जिनमें दो बार सिट्रस फल होने चाहिए।’ आइये जानें ऐसे ही 4 सिट्रस फ्रूट्स जो गर्भवती महिलाओं को ज़रूर खाने चाहिए। 1) संतरा संतरे विटामिन सी का एक अच्छा स्रोत है और ये तत्व आयरन, ज़िंक और कैल्शियम को शरीर में अवशोषित होने में मदद करता है। इतना ही नहीं, संतरे के छिलके में संतरे से दो गुना ज्यादा विटामिन सी होता है। डॉक्टर शोभा शास्त्री कहती है, संतरे के छिलके के छिलके को घिसकर या पीसकर शिकंजी और मीठी चीज़ों में मिलाकर खाया जा सकता है, इससे नैचुरल फ्लेवर भी मिलता है।’ वो कहती हैं, अध्ययनों में ये बात सामने आई है कि संतरा खाने से मां को कम ऐलर्जी होती है और बेबी का मस्तिष्क अच्छी तरीके से काम करता है।’ 2) कीवी फॉलिक एसिड का अच्छा स्रोत होने के अलावा, कीवी फल में पोटैशियम, फास्फोरस और कॉपर जैसे कई दूसरे पोषक तत्व भी होते हैं। डॉक्टर शोभा कहती हैं, इस फल का फाइबर मां का ब्लड ग्लूकोज़ स्तर सही बनाए रखता है जिससे कि शिशु के शरीर में मैक्रोसोमिक (macrosomic) का निर्माण होने से बच जाता है। गर्भावस्था में होने वाली आम समस्या जैसे कि कब्ज़, ब्लॉटिंग और अन्य पाचन संबंधी समस्याओं में राहत पाने के लिए भी ये फल अच्छा है।’ 3) ग्रेपफ्रूट ये एक प्रकार की नारंगी होती है जिसे चकोतरा भी कहते हैं। इसमें फॉलिक एसिड और बायोफ्लेवोनॉइड्स जैसे कि लिमिनॉइड्स (liminoids), लाइपोसीन (lycopene), विटामिन ए, विटामिन बी5, पोटैशियम और फाइबर होता है। डॉक्टर शोभा कहती हैं, इस फल में मौजूद बायोफ्लेवोनॉइड्स कनेक्टिव टिशू (connective tissues) को मजबूत करते हैं, जलन कम करते हैं, और ऐसा करके मां और गर्भस्थ शिशु दोनों को कई ऐलर्जी से बचा लेते हैं।’ 4) मौसंबी विटामिन सी का अच्छा स्रोत होने के अलावा, मौसंबी को फॉलिक एसिड और एंटीऑक्सीडेंटेस का भी पावरहाउस कहा जाता है जो शिशु के विकास के लिए अच्छे हैं। डॉक्टर शोभा कहती हैं, गर्भावस्था में मौसंबी पीने से कब्ज़, गैस, मतली, बजहज़मी और पैरों में सूजन जैसी समस्याओं में राहत पाई जा सकती है।’
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सवाल: mera six month chal rha h kya mai gud kha skti hu
उत्तर: hello प्रेग्नेंसीमें पहले तिमाही में गुड नहीं खाना चाहिए लेकिन सातवें महीने से गुड़ खाना शुरू कर देना चाहिए। गुड में कैल्शियम होता और आयरन होता है जो हड्डियों को मजबूत करता है गुड में फ्री रेडिकल्स होते हैं जो रेड ब्लड कॉरपसल्स बनाने में सहायक होता है और खून की कमी को पूरा करता है इसको खाने से इम्युनिटी पावर स्ट्रांग होती है और घुटने तथा जोड़ों के दर्द को ठीक करता है इसमें मौजूद मिनरल्स और पोटेशियम शरीर में पानी की कमी को दूर करने में मददगार होता है और सूजन कम करता है। लेकिन गुड़ की तासीर गर्म होती है और इसे एकदम कम मात्रा में खानी चाहिए
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सवाल: mam mera 4th month chal rha h to kya me gud kha skti hun
उत्तर: हेलों हा आप गुड खा सकती है लेकिन इसका सेवन सिमित मात्रा में करे .आयरन, कैल्शियम और फॉस्‍फोरस जैसे गुणों से भरपूर गुड़ खाने से खून की कमी दूर होती है, पाचन संबंधी समस्‍या को ठीक होती है और हड्डियों को मजबूती मिलती है। प्रेगनेंसी में आयरन की कमी को पूरा करता है इसलिए इससे बच्चे का वजन और सेहत अच्छी बनी रहती है।गुड़ में मौजूद फोलेट के कारण इससे भ्रूण का भी सही विकास होता है। गुड खाने से खून साफ होता है गुड़ में सोडियम की मात्रा कम होने के कारण यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखता हैlगुड में मौजूद मिनरल और पोटैशियम शरीर में पानी की कमी नहीं होने देते है। पोटैशियम के कारण शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलित मात्रा में बना रहता है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान हुई सूजन और दर्द को कम करने में मदद मिलती है।
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