38 सप्ताह की गर्भवती माँ

Question: डिलिवरी डेट तक दर्द नही होने पर डॉक्टर के पास कितने दिन बाद जाना chahoye

3 Answers
सवाल
Answer: शिशु के जन्म की नियत तिथि निकल चुकी है। अब क्या होगा? क्या गर्भावस्था का नियत तिथि से आगे जारी रहना सामान्य है? हां बिल्कुल, यह बहुत ही आम बात है। वैश्विक आंकड़ों के अनुसार केवल चार फीसदी शिशु ही अपने जन्म की ठीक नियत तिथि पर जन्म ले पाते हैं। नियत तिथि शिशु के जन्म लेने की अनुमानित तारीख होती है। इसकी गणना आपकी अंतिम माहवारी के पहले दिन में 40 हफ्ते जोड़कर की जाती है। आपके अल्ट्रासाउंड स्कैन देखने के बाद डॉक्टर शिशु के जन्म की अनुमानित तिथि में बदलाव भी कर सकती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि अल्ट्रासाउंड स्कैन एकदम सही अंदाजा दे पाते हैं कि आप गर्भावस्था के कौन से चरण में पहुंच चुकी हैं। अधिकांश शिशु गर्भावस्था के 37वें सप्ताह और 41वें सप्ताह के बीच जन्म ले लेते हैं। शिशु का जन्म अक्सर उनके जन्म की अनुमानित तिथि के एक सप्ताह पहले या एक सप्ताह बाद हो ही जाता है। यदि गर्भ में जुड़वां या इससे अधिक शिशु हों, तो वे इस अवधि से पहले ही जन्म ले सकते हैं। एशियाई महिलाओं की औसत या मध्य गर्भावधि उम्र 39 सप्ताह मानी गई है। 42 सप्ताह (294 दिनों) से अधिक चलने वाली गर्भावस्था को लंबी या दीर्घकालीन गर्भावस्था कहा जाता है। बहुत से अस्पतालों का नियम होता है कि वे 40 सप्ताह की गर्भावस्था के बाद प्रसव पीड़ा प्रेरित करने का निर्णय ले लेते हैं। इसलिए इस बात का सटीक आंकड़ा दे पाना मुश्किल है कि वास्तव में कितनी गर्भावस्थाएं 40 सप्ताह के बाद तक चलती हैं। अगर मेरी गर्भावस्था नियत तिथि से आगे जारी रहे, तो क्या फर्क पड़ता है? अगर आप अपनी नियत तिथि से केवल कुछ दिन ही आगे बढ़ी हैं, तो शायद आपकी डॉक्टर अभी प्रसव उत्प्रेरित करना न चाहे। हालांकि, काफी कुछ आपकी सेहत और डॉक्टर के फैसले पर निर्भर करता है। आपके लिए उस समय जो बेहतर होगा, डॉक्टर वही निर्णय लेंगी। इस स्तर पर आने के बाद संभव है कि आप अपनी गर्भावस्था से तंग सा महसूस करें और चाहें कि जल्दी से जल्दी प्रसव हो, ताकि आपको इन सबसे छुटकारा मिले।  बहरहाल, अगर गर्भावस्था नियत तारीख से काफी हफ्ते आगे तक जारी रहती है, तो डॉक्टर भी चिंतित होते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि 42 सप्ताह की गर्भावस्था के बाद भी गर्भ में रहने वाले कुछ शिशुओं की अंदर ही अकस्मात मृत्यु हो जाती है। हालांकि, बहुत ही कम शिशुओं के साथ ऐसा होता है। मृत पैदा हुए शिशुओं या जन्म के थोड़ी देर बाद ही गुजर जाने वाले शिशुओं की संख्या भी 39 सप्ताह के बाद धीरे-धीरे बढ़ती जाती है। इसके बावजूद भी, 39 सप्ताह और 42 सप्ताह के बीच मृत शिशु के पैदा होने की संभावना काफी कम ही रहती है।  डॉक्टर भी इस बात को लेकर विश्वस्त नहीं है कि नियत समय के बाद जैसे-जैसे सप्ताह गुजरते हैं, तो शिशु को खोने का खतरा क्यों बढ़ जाता है। वे निश्चित नहीं हैं कि ऐसा गर्भावस्था की अवधि की वजह से होता है या फिर माँ या शिशु की सेहत की वजह से।  एक भारतीय अध्ययन में पाया गया है कि 41 सप्ताह और चार दिन की गर्भावस्था के बाद एमनियोटिक द्रव्य में मिकोनियम घुलने का खतरा काफी बढ़ जाता है।  इस अध्ययन से यह भी पता चलता है कि शायद 41 सप्ताह के बाद आपकी अपरा (प्लेसेंटा) पहले की तरह काम न कर पाए। इसके परिणामस्वरूप आपके शिशु तक आॅक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति घट सकती है। अध्ययन में यह निष्कर्ष दिया गया है कि 41 सप्ताह से गर्भावस्था पर पूरी नजर रखनी चाहिए और 41 सप्ताह और चार दिन के बाद प्रसव पीड़ा उत्प्रेरित (इंड्यूस) कर दी जानी चाहिए। विशेषज्ञ 41 सप्ताह से पहले प्रसव प्रेरित करने की सलाह नहीं देते। ऐसा इसलिए क्योंकि 38 और 41 सप्ताह के बीच प्रसव पीड़ा पैदा करने पर होने वाले फायदों या अनुचित प्रभावों का हमारे पास पर्याप्त प्रमाण नहीं है। इसके अलावा, न ही कोई ऐसी जांच है, जिससे पता चल सके कि प्रसव प्रेरित करना आपके शिशु के लिए उचित रहेगा या नहीं।  प्रसव पीड़ा कब उत्प्रेरित की जानी चाहिए, इस बात को लेकर भी बहस है। कुछ अध्ययनों के अनुसार अगर 42 सप्ताह पर या इससे पहले प्रसव पीड़ा उत्प्रेरित की जाए, तो शिशु के अधिक स्वस्थ और सुरक्षित पैदा होने की संभावना रहती है।  वहीं, कुछ अध्ययन इस बात से असहमत हैं। उनके अनुसार अगर, माँ की सेहत सही है, तो नियमत: इस समय तक प्रसव पीड़ा उत्प्रेरित करने से शिशु की सेहत पर खास असर नहीं पड़ता। बहरहाल, एशियाई महिलाओं की गर्भावस्था थोड़ी छोटी मानी जाती है। इसलिए सैद्धांतिक सलाह यही है कि अगर प्रसव अभी तक शुरु नहीं हुआ है, तो 41 सप्ताह पर इसे प्रेरित कर दिया जाए। इसके बाद इसमें देरी नहीं की जानी चाहिए।  प्रसव पीड़ा प्रेरित करना कितना आम है? हाल ही में हुए एक सर्वे से पता चला है कि प्रसव प्रेरित करने की दर पूरे एशिया में 12.1 फीसदी है। भारत में 3.6 फीसदी जन्म बिना किसी चिकित्सकीय कारण के प्रसव पीड़ा शुरु करके कराए जाते हैं।  भारत में 32.1 प्रतिशत मामलों में प्रसव पीड़ा निर्वाचित या ऐच्छिक तौर पर प्रेरित कराई जाती है। मगर, यह दर आपके क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। नियत तिथि के बाद भी गर्भावस्था जारी रहे, तो क्या होता है? अगर, गर्भावस्था के 41 सप्ताह के बाद भी शिशु का जन्म नहीं हुआ है, तो आपको प्रसवपूर्व जांच के लिए डॉक्टर से मिलना होगा।  अगर, आपको गर्भावस्था के दौरान कभी कोई परेशानी नहीं रही, तो  शायद 41 सप्ताह के बाद आपको प्रसव पीड़ा प्रेरित करवाने के लिए कहा जाएगा। आपकी सेहत और आपकी डॉक्टर व अस्पताल के नियमों के हिसाब से यह समय अलग-अलग हो सकता है। कुछ डॉक्टर नियत तिथि गुजरने के सात से 10 दिन बाद प्रसव पीड़ा पैदा कर देते हैं। वहीं, कुछ अन्य डॉक्टर दो सप्ताह तक इंतजार करने के लिए कह सकते हैं। इसे लेकर हर डॉक्टर का निर्णय अलग हो सकता है। नियत तिथि से आगे बढ़ चुकी गर्भवती महिलाओं में प्रसव प्रेरित करने का आदर्श समय क्या है, इसे लेकर अभी भी अनिश्चितता है। इस स्तर पर डॉक्टर निम्न जांच व पूछताछ करेंगी: आपकी अंतिम माहवारी की तिथि की दोबारा पुष्टि करेंगी और देखेंगी कि क्या इसके अनुसार आपकी नियत तिथि सही है।आपके माहवारी चक्र के बारे में पूछेंगी क्या वह सामान्यत: 28 दिन का है। वे आपकी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट भी देखेंगी।आपके रक्तचाप को मापेंगी और प्रोटीन के लिए आपके पेशाब की जांच करेगी।शिशु की स्थिति और आकार जानने के लिए आपके पेट का जायजा लेगी।योनि जांच के जरिये देखेंगी कि आपकी ग्रीवा मुलायम व लचीली और प्रसव के लिए तैयार है या नहीं। डॉक्टर प्रसव शुरु कराने के लिए मैम्बरेन स्वीप करके भी देख सकती हैं। वह अपनी उंगली ग्रीवा के प्रवेश मार्ग के अंदर घुसाकर सौम्यता से मगर दृढ़ता से उसे घुमाएंगी। ऐसा करने से ग्रीवा उत्तेजित होकर वे हार्मोन पैदा करती है, जिनके कारण प्रसव शुरू हो सकता है।  मैम्बरेन स्वीप से 48 घंटों के अंदर स्वत: प्रसव शुरू होने की संभावना बढ़ जाती है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप अपनी डॉक्टर से पूछ सकती हैं। अगर, मैम्बरेन स्वीप के बाद भी प्रसव शुरू नहीं होता, तो डॉक्टर हॉर्मोन के जरिये प्रसव पीड़ा उत्प्रेरित कराने के फायदे व नुकसान के बारे में आपसे बात करेंगी। डॉक्टर वही सलाह देंगी, जो आपके और आपके शिशु के लिए बेहतर होगी। वह आपको यह भी समझाएंगी कि अगर प्राकृतिक प्रसव पीड़ा शुरू होने का इंतजार किया, तो क्या होगा। अगर, आप प्रसव पीड़ा उत्प्रेरित कराना चुनती हैं, तो इसके लिए आपको अस्पताल आने की एक निश्चित तिथि बता दी जाएगी।  यदि, डॉक्टर प्रसव प्रेरित न करने और थोड़ा इंतजार करने का निर्णय लेती हैं, तो हो सकता है उन्हें उम्मीद हो कि 42 हफ्ते पूरा करने से पहले स्वत: ही प्रसव शुरु हो जाएगा। ऐसा उस स्थिति में संभव है, जब आपकी नियत तिथि अल्ट्रासाउंड स्कैन पर आधारित हो। क्योंकि अंतिम माहवारी की तुलना में अल्ट्रासांउड पर आधारित तिथि अधिक सटीक होती है। इस स्तर पर भी आपके शिशु के सुरक्षित और सेहतमंद पैदा होने की पूरी संभावना होती है।
Answer: डर डिलीवरी के टाइम किसी किसी महिला को दर्द नहीं होता जिस कारण डिलीवरी में प्रॉब्लम भी आ जाती है कभीकभी पर डिअर आगे दर्द न हो तो आप अपनी डिलीवरी डेट के बाद १ दिन वेट करे फिर आप डॉक्टर को चेक उप करवा लीजिये साडी कंडीशन डॉक्टर बतायेंगे डिअर एक अडवीसे देती भी डेली से जल्दी और नार्मल होगी टेक केयर डिअर
Answer: delawri dete ki baad turant chaly jana chaiy
समान प्रश्न, उत्तर के साथ
सवाल: पिरियड मिस होने के कितने दिन बाद डॉक्टर के पास जाना चाहिये ?
उत्तर: पीरियड बंद होने के ७-१० दिन बाद आप जांच करके देख सकती है की आप प्रेग्नेंट है या नहीं। मार्केट मे किट उपलब्ध है अगर प्रेग्नेंसी टेस्ट निगेटिव आता है तो ७२ घंटे के बाद दोबारा जांच अवश्य करे दोबारा जाँच करने के बाद भी रिज़ल्ट नेगेटिव हो तो किसी डॉक्टर से जरूर मिले कही पीरियड नहीं आने की कोई और कारण न हो
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सवाल: डॉक्टर डिलिवरी के बाद आब तक मुझे डेट नही आयी
उत्तर: hello dear स्तनपान कराने पर कई महिलाओं को अनियमित पीरियड का अनुभव होता है। स्तनपान से हार्मोन प्रभावित होते है और वो हार्मोन आपकी अवधि को अप्रत्याशित बना सकते हैं। आपकी अवधि को नियंत्रित करने में कुछ समय लगता है। इसलिये delivery के बाद पीरियड अनियमित हो जाते हैं कुछ समय के लिये। इसलिए कभी-कभी किसी किसी को दो-तीन महीने में किसी को 6 महीने बाद तो किसी को एक साल बाद भी पीरियड आते हैं आप परेशान मत होइए।
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सवाल: तो मुझे डॉक्टर के पास कल जाना चाहिए या डेट बंद होने के बाद
उत्तर: आपको पहले तो यह बताइए डॉक्टर के पास जाना क्यों है आप यह तो कुछ बताइए कि डॉक्टर के पास किस किस वजह से आपको जाना है तब तो हम आपको बता पाएंगे कि आपको कब जाना चाहिए और यह डेट बंद से आपका क्या मतलब है क्या कहना चाहती हैं कि डेट निकल गई है पीरियड की प्लीज अपना प्रश्न ठीक से पहले पूछिए ताकि हम आपका जवाब ठीक से रीजन तो बताइए कि डॉक्टर के पास क्यों जाना है
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