8 सप्ताह की गर्भवती माँ

Question: डाउन सिन्दरोम होने पर क्या होता hai

1 Answers
सवाल
Answer: डाउन सिंड्रोम एक जेनेटिक बीमारी है इस बीमारी की वजह से baby में शारीरिक और मानसिक विकास बहुत देर में hota hai डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चे की देखभाल बहुत ही आवश्यक होती है डाउन सिंड्रोम की बीमारी में ज्यादातर हैंडीकैप्ड होकर ही पूरी लाइफ स्पेंड करनी पड़ती है ऐसी स्थिति में बच्चे सहित पूरे फैमिली को इन चैलेंज इससे उबरने के लिए बहुत ही कॉर्पोरेशन की जरूरत होती है देखिए इस रोग से पीड़ित बच्चे का विकास बहुत देर से शुरू होता है वह बैठना भी देर से करता शुरू करता है देर से बोलना और चलना शुरू करता है इसलिए माता-पिता को इस बारे में जरूर जानकारी होनी चाहिए कि डाउन सिंड्रोम से बच्चे का विकास सामान्य बच्चे की अपेक्षा देर से होता है डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चे की देखभाल के लिए एक टीम होती है जिसमें फिजिकल थैरेपिस्ट और स्पीच थेरेपिस्ट होते हैं जो बच्चे की भाषा , सोशल स्केल बढ़ाने में हेल्प करते हैं जिन बच्चों को यह सिंड्रोम होता है उन्हें चेस्ट और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम कि प्रॉब्लम रहती है इसलिए प्लीज आप एक बहुत अच्छे child स्पेशलिस्ट से मिलकर अपने बच्चे को डेवलप करने के लिए एक अच्छे डॉक्टर से कंसल्ट करें जो आपके बच्चे के लिए अच्छा लाइफ प्लान कर सके आपको अपने बच्चे पर कंसंट्रेट करना पड़ेगा बहुत मेहनत करनी पड़ेगी आपका बच्चा भी आगे बढ़ सकता है
समान प्रश्न, उत्तर के साथ
सवाल: मारी बेबी डाउन सिन्दरोम हेय
उत्तर: भारत में 1000 बच्चो में से 1 बच्चा डाउन सिंड्रोम के साथ पैदा होता है। इस विकार से चार लाख से अधिक भारतीय पीड़ित हैं और फिर भी चारों ओर इसकी जागरूकता बहुत कम है। सामान्य बच्चों की तुलना में, डाउंस सिंड्रोम से पीड़ित बच्चो का मानसिक और शारीरिक विकास धीमा रहता है।
»सभी उत्तरों को पढ़ें
सवाल: प्लैसेन्टा डाउन होने का क्या मतलब hai
उत्तर: अपरा यदि नीचे की ओर स्थित हो, तो इसका पता मध्य गर्भावस्था अल्ट्रासाउंड स्कैन से चल सकता है। यह स्कैन 18 से 20 सप्ताह और छह दिन की गर्भावस्था पर कराया जाता है। अगर, आपका वजन ज्यादा है या फिर कुछ अन्य जटिलताएं हैं, जिनसे स्कैन की गुणवत्ता पर फर्क पड़ा हो, तो शायद आपको अतिरिक्त स्कैन कराने के लिए कहा जाएगा। यह 23 सप्ताह की गर्भावस्था होने से पहले ही किया जाएगा। अगर, स्कैन में पता चलता है कि अपरा नीचे की ओर स्थित है और गर्भाशय की पीछे की दीवार से जुड़ी हुई है, तो आपको ट्रांसवेजिनल अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ सकता है। अल्ट्रासाउंड डॉक्टर यह स्कैन योनि के अंदर ट्रांसड्यूसर या प्रोब डालकर करेंगे, ताकि एक स्पष्ट छवि मिल सके। इससे प्रारंभिक स्कैन की सत्यता की भी जांच हो सकेगी।  डॉक्टर सावधानीपूर्वक एक विशेष आकार के उपकरण को आपकी योनि में धीरे से घुसाएंगे, ताकि आपका गर्भाशय दिखाई दे सके। इस स्क्रैन से आपको कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए। यह एकदम सुरक्षित प्रक्रिया होती है। अगर, अपरा आपकी ग्रीवा को ढके हुए है या इसके ऊपर आ रही है, तो गर्भावस्था के अंतिम चरण में ट्रांसवेजिनल स्कैन से पता चलेगा कि यह ऊपर खिसकी है या नहीं। निम्नलिखित कारणों की वजह से 32 सप्ताह की गर्भावस्था के बाद डॉक्टर आपको नियमित स्कैन कराने की सलाह देंगी, जैसे कि: आपकी प्लेसेंटा प्रिविया की स्थिति अधिक गंभीर है, जिसमें अपरा ग्रीवा को पूरी तरह ढक लेती है। आपको रक्तस्त्राव हुआ है डॉक्टर को अन्य जटिलताएं होने की भी चिंता है बहुत से मामलों में अंतिम चरण में होने वाले स्कैन से यही पता चलता है कि अपरा ऊपर की ओर खिसक कर रास्ते से हट गई है। अगर, यह अभी तक नहीं हुआ है, तो भी ऐसा होने के लिए काफी समय बाकी है। मगर, अपरा का खिसकना बहुत हद तक इस पर निर्भर करता है कि आपकी प्लेसेंटा प्रिविया की स्थिति कितनी गंभीर है, और आपका पहले सीजेरियन ऑपरेशन हुआ है या नहीं। ये दोनों ही स्थिति इस बात की संभावना को बढ़ा देती हैं कि अपरा अपने स्थान से नहीं हिलेगी (स्थाई प्लेसेंटा प्रिविया)। क्या प्लेसेंटा प्रिविया के कोई अन्य लक्षण होते हैं? कभी-कभार, प्लेसेंटा प्रिविया का पता अन्य तरीकों से भी चल सकता है, जैसे: आपका शिशु गर्भ में ब्रीच स्थिति (नितंब या पैर नीचे की तरफ) या आड़ा यानि तिरछी स्थिति (ट्रांसवर्स स्थिति) में है। या फिर वह गर्भ में काफी ऊपर की तरफ है। यह सब इस बात का संकेत हो सकता है कि अपरा शिशु के रास्ते में अड़ रही है। इसकी वजह से वह सिर नीचे वाली स्थिति या एंगेज्ड स्थिति में नहीं आ पा रहा है। दूसरी या तीसरी तिमाही में बिना दर्द के योनि से रक्तस्त्राव होता है। इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर से बात करें। प्लेसेंटा प्रिविया की वजह से क्या जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं? बहुत कम ऐसा होता है कि प्लेसेंटा प्रिविया से कोई जटिलताएं उत्पन्न हों। इसके अधिकांश मामलों में चिंता की कोई बात नहीं होती है। बहरहाल, यदि जटिलताएं उत्पन्न हो जाएं, तो ये गंभीर हो सकती हैं। रक्तस्त्राव अगर, आपको प्लेसेंटा प्रिविया है, तो गर्भावस्था या प्रसव के दौरान अचानक बिना दर्द के रक्तस्त्राव होने का खतरा रहता है। आपको आपातकालीन चिकित्सकीय देखभाल की जरुरत होगी। ऐसे में प्रसव जल्दी शुरु होने का भी खतरा होता है। बिना उपचार के अत्याधिक रक्तस्त्राव (हैमरेज) आपके और शिशु के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। मगर, आवश्वस्त रहें कि यह स्थिति काफी दुर्लभ है और एक बार अस्पताल पहुंचने पर रक्तस्त्राव का उपचार शीघ्रता से किया जा सकता है। प्लेसेंटा एक्रीटा यह एक काफी दुर्लभ समस्या है। यह तब उत्पन्न होती है, जब अपरा स्वयं को गर्भाशय की दीवार में काफी गहराई तक प्रत्यारोपित कर लेती है। शिशु के जन्म के बाद बाहर निकलने की बजाय अपरा गर्भाशय से जुड़ी रहती है। अगर आपका पहले सीजेरियन ऑपरेशन हो चुका है, तो ऐसा होने की संभावना अधिक रहती है। लेकिन आप चिंता न करें, आपकी डॉक्टर विभिन्न स्कैनों के जरिये आपकी स्थिति से अवगत होंगी। उपचार में सहायता के लिए आपको मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) स्कैन कराने की सलाह दी जा सकती है। प्लेसेंटा एक्रीटा होने पर सीजेरियन ऑपरेशन के दौरान काफी अधिक रक्तस्त्राव होने का जोखिम रहता है। हालांकि, आपका इतना खून बहना संभव नहीं है, जिससे आपकी सेहत को गंभीर खतरा उत्पन्न हो। डॉक्टर ऐसी स्थिति से बचने के लिए शीघ्र कदम उठाते हैं। इस अत्याधिक दुर्लभ स्थिति में आपके स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए हो सकता है कि गर्भाशय को ही निकलवाना (हिस्टरेक्टमी) एकमात्र विकल्प हो।  वासा प्रिविया यह प्लेसेंटा एक्रीटा से भी अधिक दुर्लभ समस्या है। जब गर्भ नाल की रक्त नलिकाएं ग्रीवा को ढकने वाली झिल्लियों में से होकर गुजरे तो यह समस्या उत्पन्न होती है। क्योंकि ये झिल्लियां गर्भ लाल द्वारा संरक्षित नहीं होती हैं, इसलिए ये आसानी से फट सकती हैं और इनमें रक्तस्त्राव हो सकता है। यह 2000 से 6000 गर्भावस्थाओं में से किसी एक को होता है।  वासा प्रिविया को अपरा या गर्भ नाल की अन्य जटिलताओं के साथ भी जोड़ा जाता है, जिनका पता दूसरी तिमाही के स्कैन में चल जाता है। वासा प्रिविया की वजह से रक्तस्त्राव होने का खतरा आपकी बजाय शिशु की जान को जोखिम में डाल देता है। इसका पता प्रसव से पहले या प्रसव के दौरान आपकी पानी की थैली फटने पर ही चल सकता है। ताजा लाल रक्तस्त्राव और शिशु की धड़कन को लेकर हो रही समस्या वासा प्रिविया का संकेत हो सकते हैं। आपको तुरंत आपातकालीन सीजेरियन ऑपरेशन के जरिये शिशु का जन्म करवाना पड़ेगा। प्लेसेंटा प्रिविया की देखभाल किस तरह की जाती है? प्लेसेंटा प्रिविया की देखभाल में कई बार केवल चिकित्सकीय टीम द्वारा अपरा की स्थिति पर निगरानी रखने और इंतजार करने की ही जरुरत होती है। आपकी देखभाल इस बात पर भी निर्भर करेगी कि आपको कोई रक्तस्त्राव हुआ है या नहीं। अगर, आपको रक्तस्त्राव नहीं हुआ है, तो शायद आप घर पर ही रह सकती हैं। हो सकता है आपको अब पूरी गर्भावस्था के दौरान संभोग न करने की सलाह दी जाए। आपको सहायता के लिए अपने आसपास हमेशा किसी न किसी को रखना होगा। साथ ही, व्यवस्था करनी होगी कि आप आपातकाल में जल्दी से जल्दी अस्पताल पहुंच सकें। अगर, आपको किसी तरह की कोई जटिलता नहीं होती है, तो आपको 38 से 39 सप्ताह के बीच पूर्व नियोजित सीजेरियन करवाने के लिए कहा जा सकता है। अगर, आपको प्लेसेंटा एक्रीटा है या फिर रक्तस्त्राव हो चुका है, तो आपको 34 सप्ताह की गर्भावस्था पर अस्पताल में भर्ती कर लिया जाएगा। 36 और 37 सप्ताह के बीच पहुंचने पर शायद पूर्व नियोजित सीजेरियन ऑपरेशन करना तय कर लिया जाएगा। एक वरिष्ठ प्रसूती रोग विशेषज्ञ इस ऑपरेशन को करेंगी। क्योंकि ऑपरेशन के दौरान रक्तस्त्राव होने की संभावना अधिक होती है, इसलिए रक्त चढ़ाने की व्यवस्था भी तैयार होगी। अगर आपको अस्पताल में भर्ती होने की नियत तिथि से पहले ही रक्तस्त्राव, संकुचन या माहवारी जैसा दर्द महसूस हो, तो तुरंत अस्पताल जाएं। वहां पर आपकी निगरानी की जा सकेगी। अगर, आपको ये लक्षण बंद भी हो जाते हैं, तो भी शिशु के जन्म तक आपको अस्पताल में रहने के लिए कहा जा सकता है। अगर, आपके ये लक्षण जारी रहते हैं या फिर आपका समय से पहले प्रसव शुरु हो जाता है, तो आपातकालीन सीजेरियन के जरिये आपके शिशु का जन्म कराया जाएगा। अगर, यह सब 35 सप्ताह की गर्भावस्था से पहले होता है, तो आपकी डॉक्टर आपको स्टेरॉयड के इंजेक्शन लेने की सलाह दे सकती है। स्टेरॉयड शिशु के फेफड़ों को तेजी से विकसित होने में करते हैं। मैं अपनी सहायता के लिए क्या कर सकती हूं? आप अपरा की स्थिति बदलने के लिए कुछ भी नहीं कर सकती हैं। लेकिन आप स्वस्थ और सुरक्षित रहने के लिए काफी कुछ कर सकती हैं, जैसे कि: पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक भोजन खाएं। विशेषकर कि आयरन से भरपूर आहार जैसे कि लाल मांस, हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें और दलहन जैसे राजमा और काबुली चने। यह आप में खून की कमी होने की संभावना हो कम करेगा। अगर, आपका आयरन स्तर कम है, तो डॉक्टर आपको आयरन अनुपूरक (सप्लीमेंट) लेने की सलाह दे सकती हैं। अगर आप अस्पताल में हैं, तो आपना रक्त संचरण जारी रखें ताकि खून के थक्के बनने से रोका जा सके। अपने कमरे के आसपास टहलने का प्रयास करें और खूब सारा पानी पीएं। अगर, अस्पताल उपलब्ध कराए और डॉक्टर आपको इसकी इजाजत दे, तो कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स का इस्तेमाल करें। अगर, आपको प्लेसेंटा प्रिविया है और आप अपरा के ऊपर खिसकने का इंतजार कर रही हैं, तो यह समय आपके लिए काफी तनाव भरा हो सकता है। आप चिंता न करें, डॉक्टर व उनकी टीम आपको और शिशु को सुरक्षित और स्वस्थ रखने के लिए काफी कुछ कर सकती है।
»सभी उत्तरों को पढ़ें
सवाल: बेबी प्लॅनिंग के लाइए सोच राही हु लेकिन सेकण्ड चाइल्ड डाउन सिन्दरोम ..
उत्तर: डाउन सिंड्रोम एक जेनेटिक बीमारी है इस बीमारी की वजह से baby में शारीरिक और मानसिक विकास बहुत देर में hota hai डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चे की देखभाल बहुत ही आवश्यक होती है डाउन सिंड्रोम की बीमारी में ज्यादातर हैंडीकैप्ड होकर ही पूरी लाइफ स्पेंड करनी पड़ती है ऐसी स्थिति में बच्चे सहित पूरे फैमिली को इन चैलेंज इससे उबरने के लिए बहुत ही कॉर्पोरेशन की जरूरत होती है देखिए इस रोग से पीड़ित बच्चे का विकास बहुत देर से शुरू होता है वह बैठना भी देर से करता शुरू करता है देर से बोलना और चलना शुरू करता है इसलिए माता-पिता को इस बारे में जरूर जानकारी होनी चाहिए कि डाउन सिंड्रोम से बच्चे का विकास सामान्य बच्चे की अपेक्षा देर से होता है डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चे की देखभाल के लिए एक टीम होती है जिसमें फिजिकल थैरेपिस्ट और स्पीच थेरेपिस्ट होते हैं जो बच्चे की भाषा , सोशल स्केल बढ़ाने में हेल्प करते हैं जिन बच्चों को यह सिंड्रोम होता है उन्हें चेस्ट और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम कि प्रॉब्लम रहती है इसलिए प्लीज आप एक बहुत अच्छे child स्पेशलिस्ट से मिलकर अपने बच्चे को डेवलप करने के लिए एक अच्छे डॉक्टर से कंसल्ट करें जो आपके बच्चे के लिए अच्छा लाइफ प्लान कर सके आपको अपने बच्चे पर कंसंट्रेट करना पड़ेगा बहुत मेहनत करनी पड़ेगी आपका बच्चा भी आगे बढ़ सकता है
»सभी उत्तरों को पढ़ें
सवाल: ट्रिपल मार्कर टेस्ट मि डाउन सिन्दरोम इंक्रीस्ड आया हि प्लीज़ guide
उत्तर: डाउन सिंड्रोम एक जेनेटिक बीमारी है इस बीमारी की वजह से baby में शारीरिक और मानसिक विकास बहुत देर में hota hai डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चे की देखभाल बहुत ही आवश्यक होती है डाउन सिंड्रोम की बीमारी में ज्यादातर हैंडीकैप्ड होकर ही पूरी लाइफ स्पेंड करनी पड़ती है ऐसी स्थिति में बच्चे सहित पूरे फैमिली को इन चैलेंज इससे उबरने के लिए बहुत ही कॉर्पोरेशन की जरूरत होती है देखिए इस रोग से पीड़ित बच्चे का विकास बहुत देर से शुरू होता है वह बैठना भी देर से करता शुरू करता है देर से बोलना और चलना शुरू करता है इसलिए माता-पिता को इस बारे में जरूर जानकारी होनी चाहिए कि डाउन सिंड्रोम से बच्चे का विकास सामान्य बच्चे की अपेक्षा देर से होता है डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चे की देखभाल के लिए एक टीम होती है जिसमें फिजिकल थैरेपिस्ट और स्पीच थेरेपिस्ट होते हैं जो बच्चे की भाषा , सोशल स्केल बढ़ाने में हेल्प करते हैं जिन बच्चों को यह सिंड्रोम होता है उन्हें चेस्ट और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम कि प्रॉब्लम रहती है इसलिए प्लीज आप एक बहुत अच्छे child स्पेशलिस्ट से मिलकर अपने बच्चे को डेवलप करने के लिए एक अच्छे डॉक्टर से कंसल्ट करें जो आपके बच्चे के लिए अच्छा लाइफ प्लान कर सके आपको अपने बच्चे पर कंसंट्रेट करना पड़ेगा बहुत मेहनत करनी पड़ेगी आपका बच्चा भी आगे बढ़ सकता है
»सभी उत्तरों को पढ़ें