13 सप्ताह की गर्भवती माँ

Question: क्या ट्विन्स pragnancy me duble marker test करण ज़रूरी hai

1 Answers
सवाल
Answer: 🙏 जी हां यह टेस्ट जरुरी है। डबल मार्कर टेस्ट प्रसव पूर्व किए जाने वाला टेस्ट है यह गर्भावस्था के तीसरे महीने में किया जाता है यह एक महत्वपूर्ण टेस्ट है इससे बच्चा गर्भ में किस तरह बढ़ रहा है यह पता लगाया जाता है और उसकी मानसिक दोंसो का परिक्षण करता है। Take care💐
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सवाल: मैम दुबले मार्कर टेस्ट करना जरूरी है क्यों
उत्तर: है ेलों डूअल मार्कर टेस्ट स्क्रीनिंग टेस्ट है जो गर्भावस्था के पहले तिमाही में कि या जाता ह इस का यूज़ गर्भ में बेबी के क्रोमोसोमल विषमता को पता लगाने के लिए किया जाता है यह इस बात का भी पता लगाने में मदद करता है कि आपके हो ने वाले बच्चे को डाउन सिंड्रोम या तृसौमी18 जैसी कोई बीमारी तो नहींं है जो मूल रूप से क्रोमोसोमल विकारों से होती हैं । यह विकार बच्चे में गंभीर मानसिक दोषों को जन्म दें सकता है ये टेस्ट कराने के बाद हम निशिन्त हो सकते है कि हमारा बेबी हेल्थी ग्रो हो रहा है इस टेस्ट के माध्यम से बेबी को डाउन सिंड्रोम तो नही है पता चलता है डाउन सिंड्रोम के साथ बच्‍चे को ये प्रॉब्लम हो सकती है जैसे असामान्य चेहरे की विशेषताएं, तिरछी आँखें और छोटे कान और बौद्धिक परेशानी का होना ।सुनाइ ना देना दिखाई ना देना हार्ट प्रॉब्लम,फ़ेफ़डो का कम विकसित होना lमहिलाओं की अधीक उम्र से उसके होने वाले बच्चे में डाउन सिंड्रोम के होने की संभावना रहती है। इसलिए 35 साल की उम्र से अधिक गर्भवती महिलाओं को निश्चित रूप से डूअल मार्कर टेस्ट जरूर करवाना चाहिए
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सवाल: क्या double marker test कराना ज़रूरी होता है
उत्तर: हेलों नही ये टेस्ट कराना जरोरी नही होता है लेकिन अगर आपको ये टेस्ट डॉक्टर सजेस्ट कर रहें है तो आप जरूर ये टेस्ट कराये . डबल मार्कर टेस्ट स्क्रीनिंग टेस्ट है जो गर्भावस्था के पहले तिमाही में किया जाता ह इसका यूज़ गर्भ में बेबी के क्रोमोसोमल विषमता को पता लगाने के लिए किया जाता है यह इस बात का भी पता लगाने में मदद करता है कि आपके होने वाले बच्चे को डाउन सिंड्रोम या trisomy18 जैसी कोई बीमारी तो नही है जो मूल रूप से क्रोमोसोमल विकारों से होती हैं। यह विकार बच्चे में गंभीर मानसिक दोषों को जन्म दे सकता है ये टेस्ट कराने के बाद हम निशिन्त हो सकते है कि हमारा बेबी हेल्थी ग्रो हो रहा है इस टेस्ट के माध्यम से बेबी को डाउन सिंड्रोम तो नही है पता चलता है डाउन सिंड्रोम के साथ बच्‍चे को ये प्रॉब्लम हो सकती है जैसे असामान्य चेहरे की विशेषताएं, तिरछी आँखें और छोटे कान और बौद्धिक परेशानी का होना।सुनाइ ना देना दिखाई ना देना हार्ट प्रॉब्लम,फ़ेफ़डो का कम विकसित होना lमहिलाओं की adhik उम्र से उसके होने वाले बच्चे में डाउन सिंड्रोम के होने की संभावना रहती है। इसलिए 35 साल की उम्र से अधिक गर्भवती महिलाओं को निश्चित रूप से डूअल मार्कर टेस्ट ज़रूर करवाना चाहिए
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सवाल: duble marker test krbana jaruri h kya?
उत्तर: हेलो डियर डबल मार्कर टेस्ट फर्स्ट ट्रिमेस्टर में 9 वीक से 13 वीक तक किया जाता है ye आपके feetal में होने वाले क्रोमोसोम की कमी को चेक करता है यह इस बात को पता करता है कि आपके बेबी को सिंड्रोम या trisomy 18 जैसी कोई बीमारी तों नही है jo ki क्रोमोसोम डिसॉर्डर के कारण होती है इन सभी की जानकारी के लिए ये टेस्ट ज़रूरी होता है |
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