13 सप्ताह की गर्भवती माँ

Question: क्या डबल मार्कर टेस्ट ज़रूरी होता है

1 Answers
सवाल
Answer: हाँ ये टेस्ट फीटल की कार्डियक एक्टिविटी मेंटल हेल्थ के लिए होता ह मुझे भी डॉक्टर ने आज रिकमंड किया ह
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सवाल: ये डबल मार्कर टेस्ट करवाना ज़रूरी होता है
उत्तर: Double Marker टेस्ट प्रसव पूर्व किया जाने वाला स्क्रीनिंग टेस्ट है जो गर्भावस्था के पहले तिमाही में किया जाता है। यह आपके भ्रूण में होने वाले क्रोमोसोमल विषमता की संभावना का आकलन करने के लिए किया जाता है। यह इस बात का भी पता लगाने में मदद करता है कि आपके होने वाले बच्चे को डाउन सिंड्रोम या trisomy18 जैसी कोई बीमारी तो नही है जो मूल रूप से क्रोमोसोमल विकारों से होती हैं। यह विकार बच्चे में गंभीर मानसिक दोषों को जन्म दे सकता है और कभी कभी मृत प्रसव भी हो सकता है। यह टेस्ट करवाना आपके ऊपर निर्भर करता है यदि डॉक्टर से पूछने के बाद डॉक्टर बोलते हैं जरूरी है तो आपको करवाना चाहिए ज्यादा बेहतर होगा कि आप एक बार डॉक्टर से पूछ ले
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सवाल: ये डबल मार्कर टेस्ट क्या होता है
उत्तर: hello dear 35 वर्ष से ऊपर की गर्भवती महिलाओं के लिए डबल मार्कर परीक्षण का सुझाव दिया जाता है, जो डाउन सिंड्रोम वाले बच्चे को देने का उच्च जोखिम लेते हैं। हालांकि, छोटी उम्र की महिलाओं के लिए भी इसकी सिफारिश की जाती है। यह परीक्षण भ्रूण की पूर्व-जन्म स्थितियों के पता लगाने में मदद करता है और आमतौर पर 14 सप्ताह तक गर्भावस्था के 8 सप्ताह के बाद किया जाता है। यह परीक्षण गर्भधारण के बाद होने वाली किसी भी प्रकार की गुणसूत्र असामान्यताओं का पता लगाता है। डॉक्टर इस अल्ट्रा-ध्वनि परीक्षण के परिणामों के आधार पर पहले अल्ट्रा ध्वनि परीक्षण की सिफारिश कर सकते हैं, जो इस डबल मार्केट टेस्ट के लिए सुझाव दे सकता है। यह परीक्षण आमतौर पर डॉक्टरों द्वारा 35 साल से ऊपर गर्भवती महिलाओं, जन्म दोषों का पारिवारिक इतिहास, जन्म दोषों से पैदा हुए पिछले बच्चे, इंसुलिन-निर्भर (प्रकार 1) मधुमेह का इतिहास है।
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सवाल: डबल मार्कर टेस्ट क्या होता है
उत्तर: डबल मार्कर टेस्ट उस तरह का टेस्ट है, जिसमें बच्चे के गुणसूत्र के विकास में आने वाली परेशानियों या दिक्कतों की जांच की जाती है। गुणसूत्र में किसी तरह की कमी बच्चे के भ्रूण के विकास में बाधक या विकृति का कारण हो सकता है या फिर इसके कारण बच्चे में जीवन के किसी उम्र में किसी प्रकार विकास में बाधक हो सकती है। जांच के माध्यम से अगर शुरूआत में ही उस क्रोमोसोम की पहचान कर ली जाए, जिसमें डाउन सिंड्रोम, इडवार्ड सिंड्रोम जैसे किसी विशेष तरह की विकृति है तो उस क्रोमोसोम का समय रहते उपचार करके ठीक किया जा सकता है। 
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