डिलीवरी के बाद नई माँ की देखभाल (Pregnancy ke baad care in hindi)

डिलीवरी के बाद नई माँ की देखभाल (Pregnancy ke baad care in hindi)
नौ महीने गर्भावस्था की तमाम चुनौतियों का सामना करने के बाद जब गर्भवती माँ बनती है तो शिशु का मुँह देखते ही वो सारा दर्द भूल जाती है। बच्चे के जन्म के दौरान माँ बहुत थक जाती है और उसके शरीर को पूरी तरह ठीक होने में थोड़ा समय लगता है। ऐसे में डिलीवरी के बाद माँ की अच्छी देखभाल (delivery ke baad care in hindi) और खानपान का विशेष ध्यान रखना ज़रूरी है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के बाद माँ को कुछ शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है, जिससे माँ के साथ ही साथ शिशु को भी तकलीफ़ हो सकती है। आज के ब्लॉग में हम आपको डिलीवरी के बाद माँ की देखभाल के उपाय (delivery ke baad care in hindi) और कुछ अन्य जरूरी बातें बता रहे हैं। डिलीवरी के बाद माँ को ठीक होने में कितना समय लगता है? (Recovery time after delivery in hindi) प्रेग्नेंसी के बाद समस्याएं (Problems after pregnancy in hindi) प्रेगनेंसी के बाद क्या सावधानियां रखनी चाहिए? (Precautions after pregnancy in hindi) डिलीवरी के बाद शिशु को स्तनपान कराना(Breastfeeding after delivery in hindi) क्या माँ बनने के बाद 40 दिन का एकांतवास जरूरी है? (40 days confinement after delivery in hindi) प्रेगनेंसी के बाद माँ को क्या खाना चाहिए? (Delivery ke baad kya khana chahiye) प्रेगनेंसी के बाद माँ को क्या नहीं खाना चाहिए? (Foods to avoid after delivery in hindi) प्रेगनेंसी के बाद पेट कैसे कम करें? (Pregnancy ke baad jaldi pet kam karne ke upay) प्रेगनेंसी के बाद पहला मासिक धर्म कब आता है? (First periods after pregnancy in hindi) प्रेगनेंसी के बाद कैसे सोयें? (Sleep after delivery in hindi) प्रेगनेंसी के बाद पति से रिलेशन (Sex after pregnancy in hindi) डिलीवरी के बाद माँ को ठीक होने में कितना समय लगता है? (Recovery time after delivery in hindi) विशेषज्ञों के अनुसार आमतौर पर सामान्य प्रेगनेंसी के बाद माँ के शरीर को पूरी तरह ठीक होने में चार से छह हफ़्ते का समय लग सकता है, यह समय हर माँ के लिए अलग अलग हो सकता है। प्रेगनेंसी के बाद तीन से चार दिनों तक माँ के पेट में हल्का दर्द (pregnancy ke baad pet dard in hindi) व ऐंठन होती है, असल में यह दर्द इसलिए होता है क्योंकि इस दौरान गर्भाशय दोबारा अपने सामान्य आकार में लौटता है। योनि और गर्भाशय के पूरी तरह ठीक होने में दो से तीन महीने का समय लग सकता है। जब आपको लगे कि आपका शरीर पूरी तरह ठीक हो चुका है, तब भी बिना डॉक्टर की सलाह के घरेलू काम ना करें, क्योंकि आपके शरीर के अंदरूनी भागों को स्वस्थ होने में काफी समय लगता है। अगर आपको ऑपरेशन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) से बच्चा हुआ है, तो आपको पूरी तरह ठीक होने में कम से कम छह माह लगेंगे और इस दौरान केवल आराम करें और अपने खानपान का ध्यान रखें (pregnancy ke baad care in hindi)। डॉक्टर की सलाह के बिना घर या बाहर कोई भी ऐसा काम ना करें जिससे आपके पेट या योनि में खिंचाव हो। प्रेग्नेंसी के बाद समस्याएं (Problems after pregnancy in hindi) प्रेग्नेंसी के बाद समस्याएं (Problems after pregnancy in hindi) डिलीवरी हर महिला के लिए एक थकाने वाला अनुभव होता है, इस दौरान महिला का शरीर काफी कमज़ोर हो जाता है। शरीर के अंगों को चोट भी लगती है, जिसकी वजह से प्रेगनेंसी के बाद एक माँ को कई समस्याओं से गुज़रना पड़ता है। डिलीवरी के बाद एक माँ को होने वाली कुछ आम समस्याएं नीचे बता रहे हैं -
  • प्रेगनेंसी के बाद मानसिक तनाव या मन ख़राब होना (postpartum depression in hindi)
  • डिलीवरी के दौरान योनि का छिलना (pregnancy ke baad vaginal injury in hindi)
  • डिलीवरी के बाद बालों का झड़ना (delivery ke baad hair fall in hindi)
  • प्रेगनेंसी के बाद सीने में जलन (heartburn after pregnancy), गले या पेट में जलन होना।
  • प्रेगनेंसी के बाद योनि का सूखापन (pregnancy ke baad vaginal dryness in hindi)
  • प्रेगनेंसी के बाद त्वचा सम्बंधी समस्याएं जैसे कील-मुहाँसे, तैलीय त्वचा आदि
  • प्रेगनेंसी के बाद गर्भाशय या योनि में संक्रमण (pregnancy ke baad vaginal infection in hindi)
  • डिलीवरी के बाद रक्तस्राव या ब्लीडिंग (bleeding after delivery in hindi)
  • डिलीवरी के बाद मासिक धर्म की शुरुआत ना होना
  • प्रेग्नेंसी के बाद समय पर मासिक धर्म ना आना यानी अनियमित मासिक धर्म (irregular periods after delivery in hindi)
  • डिलीवरी के बाद वज़न बढ़ना (weight gain after delivery in hindi)
  • प्रेगनेंसी के बाद स्तन सम्बंधी समस्याएं (breast problems in hindi)
  • डिलीवरी के बाद पेशाब करते समय योनि में जलन होना (yoni me jalan in hindi)
  • डिलीवरी के बाद पैरों व पेट पर सूजन आना
  • डिलीवरी के बाद पेट पर गर्भावस्था के बाद स्ट्रैच मार्क्स बनना (pregnancy ke baad stretch marks in hindi)
  • प्रेगनेंसी के बाद कब्ज़ व बवासीर (pregnancy ke baad constipation and piles in hindi)
प्रेगनेंसी के बाद क्या सावधानियां रखनी चाहिए? (Precautions after pregnancy in hindi) प्रेगनेंसी के बाद क्या सावधानियां रखनी चाहिए? (Precautions after pregnancy in hindi)
  • डिलीवरी के बाद छह हफ़्तों तक केवल आराम करें, घर के कामों के लिए परिजनों की सहायता लें, कोई घरेलू काम भी ना करें (pregnancy ke baad care in hindi)। छह हफ्ते बाद भी घरेलू काम करना शुरू करने से पहले एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
  • अपने खानपान का विशेष ध्यान रखें, अच्छा खाना आपको जल्दी ठीक होने में मदद करेगा।
  • प्रेगनेंसी के बाद दिन में कम से कम आठ घण्टे सोयें (sleep after pregnancy in hindi)
  • शिशु को नियमित स्तनपान ज़रूर करवायें, इससे आपके गर्भाशय को संकुचित होने में मदद मिलती है और यह आपका वजन घटाने में भी सहायक है (breastfeeding in hindi)।
  • प्रेगनेंसी के बाद किसी भी प्रकार का तनाव ना लें।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी प्रकार की दवा ना लें।
  • धीरे धीरे चलना फिरना शुरू करें, इससे पाचन शक्ति बढ़ेगी और आपको शौच में आसानी होगी।
  • योनि की सफाई का विशेष ख़याल रखें, क्योंकि प्रेगनेंसी के बाद होने वाले रक्तस्राव की वजह से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
डिलीवरी के बाद शिशु को स्तनपान कराना (Breastfeeding after delivery in hindi) डिलीवरी के बाद शिशु को स्तनपान कराना (Breastfeeding after delivery in hindi) माँ और बच्चे का रिश्ता इस दुनिया में सबसे ख़ास और अनोखा होता है। शिशु को स्तनपान करवाते समय एक माँ को मिलने वाली खुशी का एहसास बहुत प्यारा होता है। स्तनपान (breastfeeding in hindi) के दौरान नई माँओं को वाक़ई कभी कभी बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, लेकिन स्तनपान माँ और शिशु के भावनात्मक जुड़ाव के साथ ही उन दोनों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए भी बेहद ज़रूरी है। शिशु के जन्म के छह माह बाद तक माँ का दूध ही बच्चे के लिए संपूर्ण आहार की सभी ज़रूरतें पूरी करता है , इसलिए छह माह से पहले अपने बच्चे को माँ के दूध के अलावा कुछ भी ठोस या तरल ना दें। जन्म के एक साल बाद तक शिशु के कुछ ज़रूरी अंग बन रहे होते हैं, जैसे सिर की हड्डी, किडनी आदि, इसलिए सभी माँओं को अपने शिशु को स्तनपान ज़रूर कराना चाहिये। प्रसव के बाद शिशु को स्तनपान (breastfeeding in hindi) कराने से महिला को अपना बढ़ा हुआ वज़न कम करने में मदद मिलती है। जब माँ अपने शिशु को स्तनपान (stanpan) कराती है तो इस दौरान उसका शरीर करीब 500 कैलोरी ख़र्च करता है, इससे माँ को वज़न कम करने में मदद मिलती है। शिशु को स्तनपान कराने के दौरान माँ को अपने खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि इससे माँ व् शिशु दोनों की स्वास्थ्य बेहतर होता है। क्या माँ बनने के बाद 40 दिन का एकांतवास जरूरी है? (40 days confinement after delivery in hindi) भारतीय समाज में बच्चे के जन्म के बाद शुरुआती 40 दिनों के दौरान गर्भवती को कुछ विशेष सावधानियां व दिनचर्या अपनाने के लिए कहा जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि इस दौरान गर्भवती पूरी तरह आराम करे और उसका शरीर अच्छी तरह स्वस्थ हो जाये। 40 दिनों के एकांतवास के दौरान माँ को केवल अपना और अपने शिशु का ध्यान रखना होता है। कई जगहों पर डिलीवरी के बाद 40 दिनों तक माँ को घर से बाहर जाने से भी मना किया जाता है और कुछ अन्य नियमों का पालन करने को कहा जाता है जैसे बाहर का खाना नहीं खाना, कुछ वज़न नहीं उठाना आदि। ऐसे में कुछ माँओं को ये 40 दिन बहुत ज्यादा लम्बा समय लगता है, लेकिन आपके शरीर को पूरी तरह ठीक होने के लिये इस आराम की सख़्त ज़रूरत होती है, इसलिए इस दौरान अपने बच्चे के साथ समय बितायें और कुछ ज़रूरी चीजें जैसे शिशु के स्तनपान (stanpan) व सोने की दिनचर्या आदि के बारे में जानें, यह बाद में आपके बहुत काम आने वाली बातें हैं, इसलिए इन 40 दिनों के दौरान अपनी अच्छी देखरेख करें और इस समय का आनन्द लें। प्रेगनेंसी के बाद माँ को क्या खाना चाहिए? (Delivery ke baad kya khana chahiye) प्रेगनेंसी के बाद माँ को क्या खाना चाहिए? (Delivery ke baad kya khana chahiye) डिलीवरी के बाद (delivery ke baad) माँ के शरीर को ठीक होने व शिशु को स्तनपान (breastfeeding in hindi) कराने के लिए ढेर सारे पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, इसलिए माँ को संतुलित व पौष्टिक खाना खाना चाहिए (breastfeeding mother diet in hindi)। प्रेगनेंसी के बाद कब्ज़ से राहत के लिए फाइबर युक्त खाना जैसे दलिया, हरी सब्जियां, फल आदि खाएं। विटामिन (vitamins in hindi) और खनिज तत्वों (minerals in hindi) की पर्याप्त मात्रा माँ को स्वस्थ बनाती है, इसके लिए फल व सूखे मेवे खा सकती हैं। प्रेगनेंसी के बाद माँ के शरीर को स्वस्थ होने के लिए बड़ी मात्रा में प्रोटीन की आवश्यकता होती है, इसके लिए आप दाल, दूध, दही, सूखे मेवे, अंडा व मांस-मछली आदि खा सकती हैं (pregnancy ke baad kya khaye)। इसके अलावा शरीर में खून की मात्रा बढ़ाने के लिए आयरन (iron in hindi) व फोलिक एसिड से भरपूर भोजन जैसे पालक, मेथी, अंजीर आदि खाना चाहिए। डिलीवरी के बाद माँ को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ जैसे आठ से दस गिलास पानी, नारियल पानी, सौंफ का पानी, फलों का जूस आदि भी पीना चाहिये। प्रेगनेंसी के बाद माँ को क्या नहीं खाना चाहिए? (Foods to avoid after delivery in hindi) प्रेगनेंसी के बाद माँ को क्या नहीं खाना चाहिए? (Foods to avoid after delivery in hindi)
  • गैस बनाने वाली चीजें जैसे गोभी आदि ना खायें।
  • खट्टी चीजें ना खाएं, इससे छाती में जलन व शिशु को अपच की समस्या हो सकती है।
  • मसालेदार व तला हुआ भोजन ना खाएं।
  • कॉफी व चॉकलेट कम खाएं।
  • कोल्डड्रिंक व सोडा ना पियें।
  • शराब या सिगरेट का सेवन बिल्कुल भी ना करें।
  • बाहर का खाना ना खाएं।
प्रेगनेंसी के बाद पेट कैसे कम करें? (Pregnancy ke baad jaldi pet kam karne ke upay) प्रेगनेंसी के बाद पेट कैसे कम करें? (Pregnancy ke baad jaldi pet kam karne ke upay) गर्भावस्था के समय और डिलीवरी के बाद माँ का वजन बढ़ना एक आम समस्या है, और अधिकतर महिलाएं अपने बढ़े हुए वज़न को लेकर काफी परेशान रहती हैं। ऐसे में वज़न कम करने (pregnancy ke baad weight loss in hindi) और शरीर को फिर से स्वस्थ व मजबूत बनाने के लिए एक्सरसाइज (exercise after pregnancy in hindi) व योग-प्राणायाम (yoga after pregnancy in hindi) बहुत ही ज़रूरी हैं। सुबह - शाम पैदल चलना (morning walk after delivery in hindi) एक बहुत ही सामान्य और अच्छी एक्सरसाइज है, इससे माँ को वज़न कम करने और शरीर को स्वस्थ बनाने में मदद मिलती है। मूत्राशय सम्बंधी समस्याओं के लिए कीगल एक्सरसाइज (kegel exercise in hindi) करना बहुत फायदेमंद है। प्रेगनेंसी के बाद पेट कम करने के व शरीर के अन्य अंगों को मजबूत बनाने के लिए अनुलोम-विलोम, उठक-बैठक, पेट के निचले हिस्से की एक्सरसाइज आदि व्यायाम किये जा सकते हैं। इनसे माँ को अपना शरीर स्वस्थ बनाने में मदद मिलती है। प्रेगनेंसी के बाद पहला मासिक धर्म कब आता है? (First periods after pregnancy in hindi) प्रेगनेंसी के बाद पहला मासिक धर्म कब आता है? (First periods after pregnancy in hindi) डिलीवरी के बाद अगर आप शिशु को स्तनपान नहीं कराती हैं, तो आमतौर पर प्रसव के छह से आठ हफ़्ते बाद आपका पहला मासिक धर्म (periods in hindi) आ जाता है। प्रेगनेंसी के बाद माँ का मासिक धर्म होने में आमतौर पर छह माह से एक साल तक का समय लग सकता है, इसलिए ऐसी माँएं जो अपने बच्चे को अच्छी तरह से स्तनपान कराती हैं, उनमें स्तनपान के पूरे समय मासिक धर्म ना आने की संभावना होती है। माँ में दूध पैदा करने वाले हार्मोन (hormone in hindi) माँ के यौन हार्मोन (estrogen and progesterone in hindi) की मात्रा कम कर देते हैं, जिससे उनमें अंडा नहीं बन पाता है। स्तनपान करवाने वाली महिलाओं में पहला मासिक धर्म आने का कोई निश्चित समय नहीं होता है, डिलीवरी के बाद सभी महिलाओं का पहला मासिक धर्म अलग अलग समय होता है।

स्तनपान छुड़ाने या स्तनपान बन्द करवाने के बाद भी महिलाओं का मासिक धर्म नियमित होने में थोड़ा समय लगता है। अगर एक डिलीवरी के एक वर्ष बाद भी आपके मासिक धर्म नियमित नहीं हैं तो आपको कोई समस्या हो सकती है, इसलिए इस बारे में डॉक्टर की सलाह लें।

प्रेगनेंसी के बाद कैसे सोयें? (Sleep after delivery in hindi) प्रेगनेंसी के बाद कैसे सोयें? (Sleep after delivery in hindi) डिलीवरी के बाद माँ अपने छोटे से शिशु का ध्यान रखने में इतनी व्यस्त हो जाती है कि उसे ठीक से सोने का वक़्त ही नहीं मिल पाता, जो कि माँ की सेहत के लिए नुकसानदायक होता है। नवजात बच्चे रात को कई बार स्तनपान करते हैं और एक बार में 4 से 5 घण्टे से ज्यादा नहीं सोते, इसलिए माँ को भी अपने सोने का समय इसके हिसाब से थोड़ा बदल लेना चाहिए। नीचे बताए घरेलू नुस्खों से आप प्रेगनेंसी के बाद अच्छी नींद ले सकती हैं (sleep after delivery in hindi)।
  • जब भी समय मिले, लेट जाएं। भले ही इस दौरान आपको नींद ना आये, लेकिन आँखें बंद करके सोने से आपके शरीर को आराम मिलेगा और आप अच्छा महसूस करेंगी।
  • बच्चे को अपने पास ही रखें, इससे उसे जब भी भूख लगेगी, बिना बिस्तर से उठे उसे दूध पिला सकेंगी (breastfeeding in hindi)।
  • प्रेगनेंसी के बाद कुछ महिलाएं रात को नींद ना आने की समस्या से परेशान रहती हैं, ऐसे में मनपसन्द और सुरीला संगीत सुनने से आपको नींद आने में मदद मिल सकती है।
  • कॉफी पीना बन्द कर दें, अगर बंद नहीं कर सकतीं तो एक कप से ज्यादा कॉफी ना पीयें। कॉफी में मौजूद कैफीन (caffeine in hindi) आपकी नींद कम कर सकता है।
  • दिन के समय सोने से नींद पूरी ना हो पाने की समस्या से आपको राहत मिलेगी। जब भी बच्चा दूध पीकर सो जाए, आप भी थोड़ी देर सोने की कोशिश करें।
  • रात के समय ज्यादा देर तक टीवी ना देखें, सोने से आधा घण्टे पहले फोन वगैरह सब एक तरफ रख दें, और आँखें बंद करके आराम करें (sleep after pregnancy in hindi)।
प्रेगनेंसी के बाद पति से रिलेशन (Sex after pregnancy in hindi) प्रेगनेंसी के बाद पति से रिलेशन (Sex after pregnancy in hindi) डिलीवरी के बाद सेक्स करने से पहले आपका शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना ज़रूरी है। इसलिए प्रेगनेंसी के बाद छह हफ़्तों तक सेक्स ना करें तो बेहतर होगा, कम से कम बच्चे के जन्म के बाद होने वाले रक्तस्राव के रुकने का इंतज़ार करें। इससे पहले सेक्स करने से गर्भाशय में संक्रमण का खतरा होता है।आपकी योनि और गर्भाशय के ठीक होने के बाद ही सैक्स करना सुरक्षित है। अगर आपका बच्चा ऑपरेशन से हुआ है (cesarean delivery in hindi), तो कम से कम छह से आठ हफ़्तों तक सेक्स ना करें, अगर संभव हो तो सेक्स करने से पहले एक बार डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।

बच्चे के जन्म के बाद कुछ हफ्ते या महीने सेक्स करने का मन ना करना बिल्कुल सामान्य है। अपने जीवनसाथी से इस बारे में बात करें और उन्हें समझाएं। सेक्स तभी करें, जब आप दोनों का मन हो, किसी प्रकार के दबाव में सेक्स करने से आपको तकलीफ हो सकती है।

सेक्स के दौरान ऐसी अवस्था में सेक्स ना करें, जिसमें आपको पेट पर दबाव या गर्भाशय में दर्द महसूस हो। दाईं या बायीं करवट से लेटकर, पीछे से रिलेशन बना सकती हैं।

प्रेगनेंसी के बाद गर्भवती शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत थक जाती है, डिलीवरी के बाद एक माँ को प्यार और देखभाल की ज़रूरत होती है। शिशु के जन्म के बाद माँ के शरीर में होने वाले हार्मोन सम्बंधी बदलावों की वजह से माँ के व्यवहार में बदलाव जैसे मन ख़राब होना, उदास रहना, चिड़चिड़ापन, गुस्सा, रोना या मूड स्विंग्स (mood swings in hindi) आदि हो सकते हैं, अपने पति से अपनी भावनाओं के बारे में बात करें, उन्हें अपनी सभी समस्याएं बताएं। इससे आपके आपसी संबंध अच्छे होने के साथ ही आप दोनों के बीच मतभेद या बहस होने की संभावना भी नहीं रहेगी। अपनी जरूरतों के लिए पति व घरवालों का सहारा लेने में ना हिचकिचाएं।

अगर आप किसी नई माँ के पति या घरवाले हैं तो माँ की हर ज़रूरत को समझें और उन्हें भावनात्मक सहारा दें। माँ से उनकी भावनाओं के बारे में बात करें और उन्हें कम से कम छह हफ़्तों तक घर का कोई भी काम ना करने दें, केवल आराम करने को कहें। आपकी हर छोटी मदद और हर अच्छी बात माँ को अच्छा महसूस करवाएगी, इसलिए जितना हो सके माँ को खुश रखें और अपने खुशहाल परिवार के साथ आप भी खुश रहें।
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