बच्चों के दांत निकलने से जुड़ी ज़रूरी बातें (Bacho ke dato se judi jaruri bate)

बच्चों के दांत निकलने से जुड़ी ज़रूरी बातें (Bacho ke dato se judi jaruri bate)
मुँह में छोटे छोटे दांतों के साथ मुस्कुराता हुआ नन्हा बच्चा सबका मन मोह लेता है। क्या आप जानते हैं, कुछ बच्चों के मुँह में जन्म से ही दांत मौजूद होते हैं? जी हाँ, यह बिल्कुल सच है! मगर आमतौर पर ज्यादातर बच्चों के दांत जन्म के बाद पहले वर्ष में निकलने शुरू होते हैं। शुरुआत में नवजात शिशु के मुँह में निकलने वाले दांतों को प्राथमिक दांत या दूध के दांत (milk teeth in hindi) कहा जाता है, एक निश्चित उम्र पर ये गिर जाते हैं और इनकी जगह स्थाई दांत निकल आते हैं। दूध के दांत निकलने (bachon ke dant nikalna in hindi) के दौरान होने वाले दर्द व अन्य परेशानियों से शिशु असहज हो सकता है। इस ब्लॉग में हम आपको नवजात शिशु के दांत निकलने (baby teething in hindi) से जुड़ी सभी बातें बता रहे हैं। बच्चों के दांत निकलने का क्या मतलब होता है? (Kya hoti hai baby teething in hindi) बच्चों के मुँह में दांत कहाँ से आते हैं? (Bacho ke muh me dant kaha se aate hai) बच्चों के दांत निकलने के लक्षण क्या होते हैं? (Bacho ke dant niklane ke lakshan kya hote hai) बच्चों के दांत किस क्रम में निकलते हैं? (Bacho ke dant kaise nikalte hai) बच्चों के दांत निकलते समय उसके मसूड़ों पर कौनसी चीज़ें ना लगाएं? (Bacho ke dant nikalte vaqt uske masudo par kaunsi chije na lagaye) अगर बच्चों के दांत निकलने में देरी हो, तो क्या करें? (Agar baby ke dant niklne me deri ho, to kya kare) बच्चे के दांत निकलने में देरी के क्या कारण होते हैं? (Bache ke dant nikalne me deri ke kya karan hote hai) बच्चे के दांतों की देखभाल कैसे करें? (Baby ke danto ke dekhbhal kaise kare) बच्चों के दांत निकलने का क्या मतलब होता है? (Kya hoti hai baby teething in hindi) जब बच्चों के दूध के दांत उनके मसूड़ों को काटकर या जगह बनाकर बाहर आने लगते हैं, तो इसे दांत निकलना (baby teething in hindi) कहा जाता है। बच्चों के दांत निकलने (bachon ke dant nikalna in hindi) की शुरुआत चार से बारह महीने के उम्र में हो जाती है। करीब तीन साल की उम्र तक शिशु के मुँह में 20 प्राथमिक दांत (दूध के दांत) निकल आने चाहिए। बच्चों के मुँह में दांत कहाँ से आते हैं? (Bacho ke muh me dant kaha se aate hai) अक्सर आपके मन में ये सवाल आता होगा कि "आखिर बच्चों के मुँह में दांत कहाँ से आते हैं?" असल में, गर्भ में शिशु के विकास के दौरान ही उसके मसूड़ों में दांतों के अंकुर (दांत बनाने वाली कोशिकाएं) बन जाते हैं। शिशु के जन्म के बाद ये अंकुर लगातार विकसित होने लगते हैं और निश्चित समय पर दांत बनकर बाहर निकल आते हैं। बच्चों के दांत निकलने के लक्षण क्या होते हैं? (Bacho ke dant niklane ke lakshan kya hote hai) शिशु में दांत निकलने (baby teething in hindi) के लक्षण कुछ हफ़्तों से लेकर कुछ महीनों तक बने रह सकते हैं। इसके अलावा अक्सर कुछ बच्चों में दांत निकलने के कोई लक्षण दिखे बिना ही उनके दांत निकल आते हैं। बच्चों के दांत निकलने (bachon ke dant nikalna in hindi) के मुख्य लक्षण निम्न हैं -
  • बच्चे के मसूड़ों में सूजन - दांत ऊपर की तरफ बढ़ने के साथ ही शिशु के मसूड़े लाल हो जाते हैं और उनमें सूजन आ जाती है। मसूड़ों में सूजन से शिशु असहज हो सकता है, लेकिन जैसे ही दांत मसूड़ों से बाहर निकल आता है, शिशु सामान्य होने लगता है।
  • शिशु का हर वस्तु मुँह में लेना - शिशु बहुत जिज्ञासु होते हैं और हर वस्तु को मुँह में लेकर उसका स्वाद महसूस करने की कोशिश करते हैं। यह उनके दांत उगने (baby teething in hindi) का भी एक लक्षण हो सकता है।
  • शिशु का हर वस्तु को काटना या चबाना - अगर आपका बच्चा हर चीज को काटने या चबाने का प्रयास करता है, तो यह उसके दांत निकलने (baby teething in hindi) का लक्षण हो सकता है। दांत निकलते समय बच्चे के मसूड़ों में खुजली होती है, जिसकी वजह से वह ऐसा करता है।
  • बच्चे का ठीक से स्तनपान ना करना - बच्चे का ठीक से स्तनपान ना करना उसके दांत निकलने का लक्षण हो सकता है। वह ऐसा उसके मसूड़ों में दर्द की वजह से करता है, इसलिए चिंता ना करें और इस बारे में डॉक्टर की सलाह लें।
  • शिशु का ठीक से सो ना पाना - अगर बच्चा अपनी नियमित दिनचर्या के अनुसार सो नहीं पा रहा है, तो यह उसके दांत निकलने (baby teething in hindi) का लक्षण हो सकता है। ऐसा दांत निकलने (bachon ke dant nikalna in hindi) के दौरान मसूड़ों में खुजली या दर्द होने की वजह से हो सकता है।
  • शिशु का बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा होना - दांत निकलते (baby teething in hindi) वक्त मसूड़ों में दर्द और भूख की वजह से शिशु बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा हो सकता है। ऐसा शिशु के ठीक से स्तनपान ना कर पाने व सो ना पाने की वजह से भी हो सकता है।
  • शिशु का बहुत ज्यादा लार टपकाना - अगर आपके नन्हें शिशु के मुँह से अचानक ज्यादा लार टपकती दिखाई दे, तो परेशान ना हों, यह उसके दांत निकलने (baby teething in hindi) का लक्षण हो सकता है।
  • शिशु का बार बार अपना गाल या कान रगड़ना - दांत निकलने (baby teething in hindi) के दौरान होने वाले दर्द की वजह से इस दौरान शिशु बार बार अपना गाल या कान रगड़ता है। अगर इसके साथ ही शिशु को तेज बुखार आए, तो यह उसके कान में संक्रमण का लक्षण हो सकता है।
  • शिशु को हल्का बुखार होना - दांत निकलने (baby teething in hindi) के दौरान शिशु के शरीर का तापमान थोड़ा (100 डिग्री फॉरेनहाइट तक) बढ़ सकता है, इसे हल्का बुख़ार कह सकते हैं।
  • शिशु के मसूड़ों के नीचे दांत दिखाई देना - शिशु का दांत निकलने (baby teething in hindi) में केवल एक या दो दिन बाकी रह जाने पर यह लक्षण दिखाई देता है। इस दौरान शिशु के मुँह में देखने पर मसूड़े के नीचे दांत का कुछ हिस्सा नज़र आता है।
ये सभी लक्षण शिशु में एक साथ दिखाई देना मुश्किल है। जैसे हो सकता है कि, दांत निकलते वक्त कुछ बच्चे बहुत ज्यादा लार टपकाएं, वहीं कुछ बच्चों के मसूड़ों के नीचे दांत दिखने लगें। यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि शिशु में दांत निकलने (baby teething in hindi) के लक्षण दिखने के कितने बाद उसके दांत मसूड़े से बाहर आएंगे। हो सकता है कि, आपके बच्चे में ये लक्षण दिखने के एक-दो हफ्ते बाद ही उसके दांत निकल आएं। साथ ही ऐसा भी हो सकता है कि, महीनों तक दांत निकलने (bachon ke dant nikalna in hindi) के लक्षण दिखने के बाद भी बच्चे के मुँह में दांत दिखाई ना दें। बच्चों के दांत किस क्रम में निकलते हैं? (Bacho ke dant kaise nikalte hai) शिशु के दांत जोड़ों में निकलते हैं। शिशु के मुँह में सबसे पहले आगे की तरफ नीचे के दो दांत निकलते हैं। इसके कुछ महीने बाद सामने की तरफ ऊपर वाले दो दांत निकलते हैं। फिर इन दाँतो के दोनों ओर दो दो दांत निकलते हैं। इनके बाद पहली दो दाढ़ व नुकीले दांत (केनाइन्स) निकलते हैं और फिर दूसरी दाढें निकलती हैं। दांत निकलने (baby teething in hindi) के इस क्रम को आप इस चार्ट की मदद से समझ सकते हैं -
शिशु की उम्र निकलने वाले दांत
चार से सात महीने सामने की तरफ नीचे वाले दो दांत
आठ से बारह महीने सामने की तरफ ऊपर वाले दो दांत
नौ से सोलह महीने ऊपर व नीचे वाले दांतों के बगल वाले दांत (दो ऊपर - दो नीचे)
एक साल शिशु के मुँह में कुल आठ दूध के दांत हैं
तेरह से उन्नीस महीने पहली दाढें (पहले नीचे की दो आती हैं, फिर ऊपर की दो आती हैं)
सोलह से तेईस महीने नुकीले दांत (दो ऊपर - दो नीचे)
तेईस से इकत्तीस महीने दूसरी दाढें (पहले नीचे की दो आती हैं, फिर ऊपर की दो आती हैं)
तीन साल शिशु के मुँह में 20 दूध के दांत होते हैं।
ध्यान दें - यह टेबल समय पर जन्मे पूरी तरह से स्वस्थ शिशुओं के लिए है। हर बच्चा अलग ढंग से बढ़ता है, इसलिए हो सकता है कि उसके दूध के दांत इस टेबल में दिए समय से अलग समय पर निकलें। शिशु के दांतों से जुड़ी किसी भी आशंका के लिए डॉक्टर से सम्पर्क करें। बच्चों के दांत निकलते समय उसके मसूड़ों पर कौनसी चीज़ें ना लगाएं? (Bacho ke dant nikalte vaqt uske masudo par kaunsi chije na lagaye) शिशु के दूध के दांत निकलने (baby teething in hindi) के दौरान उसके मसूड़ों पर इन चीजों का उपयोग न करें -
  • सुन्न करने वाली दवाएं - विशेषज्ञ शिशु के मसूड़ों पर टीथिंग जैल (बच्चों के दांत निकलने (baby teething in hindi) का दर्द दूर करने की एक विशेष दवा) या एल्कोहॉल (शराब) ना लगाने की सलाह देते हैं। इनसे शिशु का गला सुन्न हो सकता है और उसे निगलने में परेशानी हो सकती है।
  • होम्योपैथिक टीथिंग जैल - डॉक्टर्स कहते हैं कि, शिशु के दांत निकलने (baby teething in hindi) के दौरान उसके मसूड़ों पर होम्योपैथिक टीथिंग जैल नहीं लगाना चाहिए। इस तरह के टीथिंग जैल में मौजूद तत्वों से शिशु को दिल की बीमारियां हो सकती हैं।
  • टीथिंग क्रीम - शिशु के मुँह में टीथिंग क्रीम लगाने से कुछ खास फायदा नहीं होता है, क्योंकि ये उसकी लार के साथ बाहर निकल जाती है।
  • पेड़ के गोंदयुक्त टीथिंग नैकलैस - अक्सर माता-पिता दांत निकलने (baby teething in hindi) के दौरान शिशु के मसूड़ों की खुजली दूर करने के लिए टीथिंग नैकलैस का उपयोग करते हैं। आप ऐसे टीथिंग नैकलैस का उपयोग ना करें, जिसे बनाने में पेड़ के गोंद का इस्तेमाल हुआ हो, क्योंकि ये गोंद शिशु के गले में अटक सकता है।
  • लौंग का तेल - दांत निकलने (baby teething in hindi) के दौरान शिशु के मसूड़ों पर लौंग का तेल ना लगाएं। इससे शिशु के नाज़ुक मसूड़े जल सकते हैं।
अगर बच्चों के दांत निकलने में देरी हो, तो क्या करें? (Agar baby ke dant niklne me deri ho, to kya kare) शिशु के दांत निकलने (baby teething in hindi) की औसत उम्र छह माह होती है। इससे पहले दांत निकलने (bachon ke dant nikalna in hindi) को जल्दी दांत निकलना (अर्ली टीथिंग) कहा जाता है। अगर शिशु के 13 महीने का होने तक भी उसके दांत नहीं निकलते हैं, तो इसे देरी से दांत निकलना (लेट टीथिंग) कहा जाता है। बच्चे के दांत निकलने में देरी के क्या कारण होते हैं? (Bache ke dant nikalne me deri ke kya karan hote hai) निम्न कारणों से शिशु के दांत निकलने (baby teething in hindi) में देरी हो सकती है -
  • आनुवंशिक कारण
  • पोषण की कमी
  • हाइपरथायराइडिज्म
  • समयपूर्व प्रसव
हर बच्चे का विकास अलग ढंग से होता है, इसलिए अगर आपके बच्चे के दांत निकलने (baby teething in hindi) में देरी हो रही है, तो परेशान ना हों। अगर शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास सामान्य ढँग से हो रहा है, तो दांत निकलने में देरी होना (late teething in hindi) चिंता की बात नहीं है। निम्न स्थितियों में डॉक्टर की सलाह लें -
  • आपके बच्चे पर ऊपर बताए गए कारण लागू नहीं होते (यानी सब सामान्य होने के बावजूद उसके दांत निकलने में देरी हो रही है)।
  • अगर 18 महीने का होने तक शिशु के दांत ना निकलें।
  • आपको शिशु के दांतों से जुड़ी अन्य कोई आशंका है।
बच्चे के दांतों की देखभाल कैसे करें? (Baby ke danto ke dekhbhal kaise kare) दूध के दांतों को भी सामान्य दांतों की तरह ही देखभाल की ज़रूरत होती है। शुरुआत से ही साफ-सफाई का ध्यान रखकर, बच्चे के दांतों को कीड़ों (कैविटी) से बचाया जा सकता है। शिशु के दांतों की देखभाल निम्न तरीकों से की जा सकती है -
  • शिशु के मसूड़ों को रुई के नर्म-साफ फाहे से नियमित रूप से साफ करें।
  • बच्चे के खाने के बर्तन (जैसे चम्मच, कटोरी आदि), बाकी लोगों के बर्तनों से अलग रखें। इससे शिशु के मुँह में संक्रमण का खतरा घट जाता है।
  • शिशु को विटामिन व खनिज तत्वों से भरपूर खाना खिलाएं। इससे उसके दांत व मसूड़े मजबूत होंगे।
  • शिशु को मीठे खाद्य व पेय पदार्थ ना दें, इससे उसके दांत खराब हो सकते हैं।
  • शिशु के दूध के दांत पूरी तरह निकलने (20 दांत) पर उसे एक बार डेंटिस्ट के पास ले जाएं।
  • अपने बच्चे को बोतल के बजाय कप से दूध, जूस आदि पीना सिखाएं। बोतल से तरल पदार्थ पीने से शिशु के दांत व मसूड़ों पर बुरा असर पड़ता है।
  • हर छह महीने में एक बार शिशु को डेंटिस्ट के पास लेकर जाएं और उसके दांतों की जांच करवाएं।
  • शिशु के डेढ़ साल का हो जाने के बाद उसे दांतों को ब्रश से साफ करना सिखाएं।
शिशु के दांत निकलना (baby teething in hindi) एक बेहद रोमांचक प्रक्रिया है, अपने बच्चे के मुँह में मोती जैसे छोटे छोटे दांत देखकर आपको बेहद खुशी होती है। मगर इस खुशी के साथ ही आपको बच्चे के दांतों की अच्छी तरह साफ सफाई करने की ज़िम्मेदारी भी मिलती है। इसलिए अपने बच्चे के दांतों का ध्यान रखें। शिशु के दांतों में किसी भी तरह की समस्या की आशंका होने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

इस ब्लॉग के विषय - बच्चों के दांत निकलने का क्या मतलब होता है? (Kya hoti hai baby teething in hindi), बच्चों के मुँह में दांत कहाँ से आते हैं? (Bacho ke muh me dant kaha se aate hai), बच्चों के दांत निकलने के लक्षण क्या होते हैं? (Bacho ke dant niklane ke lakshan kya hote hai), बच्चों के दांत किस क्रम में निकलते हैं? (Bacho ke dant kaise nikalte hai), बच्चों के दांत निकलते समय उसके मसूड़ों पर कौनसी चीज़ें ना लगाएं? (Bacho ke dant nikalte vaqt uske masudo par kaunsi chije na lagaye), अगर बच्चों के दांत निकलने में देरी हो, तो क्या करें? (Agar baby ke dant niklne me deri ho, to kya kare), बच्चे के दांत निकलने में देरी के क्या कारण होते हैं? (Bache ke dant nikalne me deri ke kya karan hote hai), बच्चे के दांतों की देखभाल कैसे करें? (Baby ke danto ke dekhbhal kaise kare)

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