सिजेरियन डिलीवरी से जुड़े 14 मिथक और उनकी सच्चाई (14 myths of cesarean delivery in hindi)

सिजेरियन डिलीवरी से जुड़े 14 मिथक और उनकी सच्चाई (14 myths of cesarean delivery in hindi)

पिछले एक दशक में सिजेरियन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) को लेकर महिलाओं की धारनाएं बदली है। इनमें से कुछ स्वास्थ्य हित में हैं, तो कुछ उसके विपरीत। आज भी लोग ऑपरेशन डिलीवरी से जुड़ी कई ऐसी धारणाओं को सच मान बैठे हैं, जिनका जवाब मेडिकल शोधों में भी नहीं है। इस ब्लॉग में हम आपको सिजेरियन डिलीवरी से जुड़े कुछ ऐसे ही मिथक (c section myths in hindi) और उनसे जुड़ी सच्चाई के बारे में बताएंगे।

मिथक 1. सिजेरियन डिलीवरी के बाद मां अपने नवजात शिशु को स्तनपान नहीं करा सकती

(cesarean delivery ke baad maa apne bacche ko stanpan nahi kara sakti)

cesarean delivery myths breastfeeding

सच्चाई- यह एक मिथक है कि ऑपरेशन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) के बाद मां अपने शिशु को स्तनपान नहीं करा सकती। सच्चाई यह है कि नॉर्मल डिलीवरी की तुलना में सिजेरियन डिलीवरी कराने वाली मांएं शिशु को स्तनपान कराने में थोड़ा ज्यादा समय लेती हैं और टांकें सूखने के चार दिन बाद मां अपने नवजात शिशु को कुछ चुनिंदा अवस्थाओं में स्तनपान करा सकती है। दरअसल, सिजेरियन डिलीवरी के समय मां को लगे टांकें न सूखने के कारण वह अपने नवजात शिशु को किसी आरामदायक अवस्था में स्तनपान नहीं करा सकती, इसीलिए डॉक्टर सिजेरियन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) के बाद नवजात को स्तनपान कराने के लिए मां को बेहतर और आरामदायक अवस्थाओं के बारे में बताते हैं।

मिथक 2. अगर आपको पहले सिजेरियन डिलीवरी हो चुकी है तो आपको नॉर्मल डिलीवरी नहीं हो सकती

(agar aapko pehle cesarean delivery ho chuki hai to aapko normal delivery nahi ho sakti)

cesarean delivery ke bad normal delivery

सच्चाई- यह सच नहीं हैं, क्योंकि डॉक्टर कहते हैं कि लगभग 70 प्रतिशत महिलाएं एक बार सिजेरियन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) होने के बाद नॉर्मल डिलीवरी से अपने बच्चे को जन्म देती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑपरेशन डिलीवरी के बाद कोई मां नॉर्मल डिलीवरी के लिए कितनी सक्षम है, यह उनकी शारीरिक अवस्था पर निर्भर करता है। इसीलिए दूसरी बार प्रेगनेंसी होने पर प्रसव पीड़ा आने तक इंतजार किया जाता है। इसमें कोई परेशानी न होने पर नॉर्मल डिलीवरी की जा सकती है।

मिथक 3. दो से ज्यादा बार ऑपरेशन डिलीवरी नहीं हो सकती

(do se jyada baar cesarean delivery nahi ho sakti)

operation delivery

सच्चाई- यह मिथक पूरी तरह से सच नहीं है। डॉक्टर कहते हैं कि इसकी कोई निश्चित संख्या नहीं है कि आप कितनी बार सुरक्षित सिजेरियन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) करवा सकती हैं, क्योंकि यह अक्सर गर्भवती महिलाओं की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करती है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान शिशु और मां को होने वाली समस्याओं को ध्यान में रखकर डॉक्टर दोबारा ऑपरेशन डिलीवरी करने की सलाह दे सकते हैं। इसीलिए लोगों की सलाह पर विश्वास न करें और सिजेरियन डिलीवरी से संबंधित ज्यादा जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

मिथक 4. सिजेरियन डिलीवरी के समय आपको कुछ अनुभव नहीं होगा

(cesarean delivery ke samay aapko kuch anubhav nahi hoga)

operation delivery ke mithak

सच्चाई- इस बात में बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है। दरअसल, सिजेरियन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) के पहले डॉक्टर अक्सर गर्भवती महिला को बेहोशी का इंजेक्शन देते हैं, जिससे डिलीवरी के समय महिलाओं के शरीर का निचला हिस्सा सुन्न हो जाता है, लेकिन महिला को पेट के निचले हिस्से में खिंचाव और हल्का दर्द हो सकता है। विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि कई महिलाओं को बेहोशी का इंजेक्शन देते ही उन्हें उल्टियां शुरू हो जाती है।

मिथक 5. ऑपरेशन डिलीवरी होने पर मां अपने नवजात शिशु को गोद में नहीं ले सकती

(cesarean delivery hone par maa apne navjat bacche ko god me nahi le sakti)

operation delivery hone ke bad

सच्चाई- यह मिथक पूर्ण रूप से सच नहीं है। विशेषज्ञ कहते हैं, ऐसा नहीं हैं कि सिजेरियन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) होने पर मां अपने नवजात शिशु को गोद में नहीं ले सकती। असल में, ऑपरेशन डिलीवरी होने के बाद मां को लगे टांकों की वजह उसे केवल कुछ घंटों के लिए ही शिशु से अलग रखा जाता है, और उसके बाद डॉक्टर शिशु को ऐसी अवस्था में गोद लेने की जानकारी मां को देते हैं जिससे कि मां और शिशु में शारीरिक संपर्क संभव हो सके।

मिथक 6. सिजेरियन डिलीवरी के छह महीने के बाद ही फिर गर्भधारण हो सकता हैं

(cesarean delivery ke six months baad hi fir garbhdharan ho sakta hai)

operation delivery ke 6 mahine bad

सच्चाई- यह सच नहीं है। सच्चाई तो यह है कि ऑपरेशन डिलीवरी के बाद करीब छह हफ्तों तक रक्तस्राव होता है और उसके बाद पुनः मासिक धर्म शुरू हो जाता है। मासिक धर्म प्रारंभ होते ही महिलाओँ के शरीर में ओव्युलेशन की प्रक्रिया फिर से शुरू हो जाती है। इसीलिए महिलाएं सिजेरियन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) के बाद छह महीने से पहले गर्भधारण कर सकती हैं।

मिथक 7. गर्भावस्था पूरी होने से पहले ऑपरेशन डिलीवरी करवा सकते हैं

(garbhavastha puri hone se pehle cesarean delivery karwa sakte hai)

time se pahle delivery myths

सच्चाई- प्रत्येक मामले में यह संभव नहीं होता। गर्भावस्था पूरी होने से पहले विशेषज्ञ, सिजेरियन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) की सलाह बहुत कम मामलों में देते हैं। डॉक्टर कहते हैं कि ऑपरेशन डिलीवरी कब होगी, यह पूरी तरह से गर्भवती महिला और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे पर निर्भर करता है। अगर बच्चे के विकास से संबंधित कोई बाधा हो या मां को किसी प्रकार की शारीरिक समस्या हो, तभी गर्भावस्था पूरी होने के पहले सिजेरियन डिलीवरी की जाती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि पहली और दूसरी ऑपरेशन डिलीवरी अमूमन 38 सप्ताह तक की जाती हैं, वहीं दो से ज्यादा सिजेरियन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) होने की स्थिति में 37 सप्ताह तक प्रसव तिथि तय की जाती है।

मिथक 8. सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं को रक्तस्राव नहीं होता

(cesarean delivery ke baad mahilaon ko bleeding nahi hoti)

cesarean delivery ke baad bleeding

सच्चाई- इस बात में कोई सच्चाई नहीं है। चाहे डिलीवरी सिजेरियन या नॉर्मल, किसी भी प्रकार से हुई हो, दोनों ही स्थिति में महिलाओं को रक्तस्राव होता है। डॉक्टर कहते हैं कि सिजेरियन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) के बाद करीब चार से पांच दिनों तक महिलाओँ को अधिक रक्तस्राव होता है जो करीब 10 से 12 दिनों तक सामान्य हो जाता है। ऑपरेशन डिलीवरी के बाद महिलाओँ को रक्तस्राव ज्यादा से ज्यादा छह सप्ताह तक होता है।

मिथक 9. ऑपरेशन डिलीवरी होने पर शिशु और मां को स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो जाती हैं

(cesarean delivery hone par bacche aur maa ko swasth sambandhi samasya ho jati hai)

cesarean delivery ke bad baby ka health

सच्चाई- यह केवल एक मिथक है। सिजेरियन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) होने के बाद शिशु और मां को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होना जरूरी नहीं है, बल्कि सच्चाई यह है कि ज्यादातर मामलों में ऑपरेशन डिलीवरी के बाद मां और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ होते हैं। लेकिन अगर मां को डिलीवरी के पहले और गर्भ में शिशु को जन्म से पहले किसी प्रकार की कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या होती है तो इसका असर जन्म के बाद मां ओर शिशु दोनों पर हो सकता है। सिजेरियन डिलीवरी के बाद स्वास्थ्य संबंधी परेशानियोंं से जुड़ी जानकारी केवल डॉक्टर ही दे सकते हैं।

मिथक 10. सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं में तनाव और चिड़चिड़ापन ज्यादा होता है

(cesarean delivery ke baad mahilaon me tanav aur chidchidapan hota hai)

cesarean delivery ke baad mahilaon me tanav

सच्चाई- यह सच नहीं है। नॉर्मल डिलीवरी की तुलना में सिजेरियन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) के बाद महिलाओं को तनाव और चिड़चिड़ापन ज्यादा नहीं होता है। डॉक्टर कहते हैं कि डिलीवरी के बाद तनाव और चिड़चिड़ापन होने का कारण हर महिला में अलग हो सकता है, और यह प्रसव के बाद किसी भी महिला को हो सकता है, फिर चाहे उसका सामान्य प्रसव हुआ हो या उसने ऑपरेशन डिलीवरी से बच्चे को जन्म दिया हो। डॉक्टर बताते हैं कि शिशु के जन्म के बाद महिलाओं में तनाव और चिड़चिड़ेपन का असली कारण प्रेगनेंसी के दौरान हुए हार्मोनल बदलाव हो सकता हैं।

मिथक 11. अगर नॉर्मल डिलीवरी में मां प्रसव के दर्द को बर्दाश्त नहीं कर सकी तो डॉक्टर उसे ऑपरेशन डिलीवरी की सलाह देते हैं

(agar normal delivery me maa prasav ke dard ko bardash nahi kar saki to doctor use cesarean delivery ki salah dete hai)

normal delivery me dard

सच्चाई- ऐसा कहा जाता है कि अगर नॉर्मल डिलीवरी में मां प्रसव के दर्द को बर्दाश्त न कर सकीं तो डॉक्टर सिजेरियन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) की सलाह देते हैं, जो एक मिथक है। डॉक्टरों का कहना है कि गर्भवती महिला या उनके गर्भ में पल रहे बच्चे को किसी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो तभी उन्हें ऑपरेशन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) करने की सलाह दी जाती है।

मिथक 12. गर्भ में जुड़वां बच्चे होने पर आपको सिजेरियन डिलीवरी करवानी पड़ेगी

(garbh me judwa bacche hone par aapko cesarean delivery karwani padegi)

garbh me judwa bacche myths

सच्चाई- इस मिथक में कोई सच्चाई नहीं है, क्योंकि सामान्य परिस्थितियों में गर्भ में जुड़वां बच्चे होने पर भी आप नॉर्मल डिलीवरी से बच्चों को जन्म दें सकती हैं। डॉक्टर कहते हैं कि अगर जुड़वां बच्चों से गर्भधारण करने वाली मां को हाई बीपी (high BP in hindi), शुगर (sugar in hindi), थायराइड (thyroid in hindi), यूरिक एसिड (uric acid in hindi), प्लेसेंटा प्रीविया (placenta previa in hindi) या कोई अन्य बीमारी है या फिर शिशुओं को गर्भ में सांस या हृदय संबंधी कोई समस्या है तो ऐसी स्थिति में सिजेरियन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) की सलाह दी जाती है, ताकि मां और शिशु सुरक्षित रह सकें।

मिथक 13. ऑपरेशन डिलीवरी से पैदा होने वाले बच्चों में बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम होती है

(cesarean delivery se paida hone wale baccho me bimariyon se ladne ki shamta kam hoti hai)

operation delivery ke bad shishu ki health

सच्चाई- यह एक मिथक है। कई लोगों का मानना है कि सिजेरियन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) से पैदा होने वाले बच्चों को जन्म के समय ऑपरेशन की मदद से आसानी से बाहर निकाल लिया जाता है, इसीलिए ऑपरेशन डिलीवरी से होने वाले बच्चों में बीमारियों से लड़ने की क्षमता नहीं होती। हालांकि डॉक्टर इस बात को मानने से इंकार करते हैं और कहते हैं कि जन्म के बाद सभी नवजात शिशुओं में शुरुआती तीन महीनों तक रोग प्रतिरोधक क्षमता नहीं होती। बाद में मां के दूध से मिलने वाले पोषक तत्वों से उनमें बीमारियों से लड़ने की क्षमता आ जाती है।

मिथक 14. केवल सिजेरियन डिलीवरी के मामलों में ही एपीड्युरल दिया जाता है

(cesarean delivery ke mamlon me hi epidural diya jata hai)

cesarean delivery me epidural

सच्चाई- यह सच नहीं है। डॉक्टर कहते हैं कि नॉर्मल और ऑपरेशन डिलीवरी में असहनीय दर्द होने की वजह से गर्भवती महिलाओं को दर्द कम करने के लिए एपीड्युरल दिया जाता है। ऐसा नहीं है कि अगर प्रसव के पहले एपीड्युरल लगाया जा रहा है तो आपको सिजेरियन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) ही होगी। एपीड्युरल कैथिटर के माध्यम से दी जाने वाली दवा है जो गर्भवती मां को प्रसव पीड़ा से राहत देने में मदद करती है। आमतौर पर एपीड्युरल महिलाओं को रीढ़ की हड्डी में दिया जाता है।

कई महिलाओं को सिजेरियन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) शब्द का असली मतलब प्रेगनेंसी के दौरान पता चलता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि सिजेरियन डिलीवरी की तिथि पहले से तय नहीं की जा सकती क्योंकि यह गर्भवती महिलाओं और उनके शिशु के स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों पर निर्भर होती है। ब्लॉग में बताए गए ऑपरेशन डिलीवरी से जुड़े मिथकों (c section myths in hindi) को जान लें और ऐसी बातों पर विश्वास न करें। ऑपरेशन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लें।

इस ब्लॉग के विषय - मिथक 1. सिजेरियन डिलीवरी के बाद मां अपने नवजात शिशु को स्तनपान नहीं करा सकती (cesarean delivery ke baad maa apne bacche ko stanpan nahi kara sakti),मिथक 2. अगर आपको पहले सिजेरियन डिलीवरी हो चुकी है तो आपको नॉर्मल डिलीवरी नहीं हो सकती (agar aapko pehle cesarean delivery ho chuki hai to aapko normal delivery nahi ho sakti),मिथक 3. दो से ज्यादा बार ऑपरेशन डिलीवरी नहीं हो सकती (do se jyada baar cesarean delivery nahi ho sakti)मिथक 4. सिजेरियन डिलीवरी के समय आपको कुछ अनुभव नहीं होगा (cesarean delivery ke samay aapko kuch anubhav nahi hoga),मिथक 5. ऑपरेशन डिलीवरी होने पर मां अपने नवजात शिशु को गोद में नहीं ले सकती (cesarean delivery hone par maa apne navjat bacche ko god me nahi le sakti),मिथक 6. सिजेरियन डिलीवरी के छह महीने के बाद ही फिर गर्भधारण हो सकता हैं (cesarean delivery ke six months baad hi fir garbhdharan ho sakta hai),मिथक 7. गर्भावस्था पूरी होने से पहले ऑपरेशन डिलीवरी करवा सकते हैं (garbhavastha puri hone se pehle cesarean delivery karwa sakte hai),मिथक 8. सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं को रक्तस्राव नहीं होता (cesarean delivery ke baad mahilaon ko bleeding nahi hoti)मिथक 9. ऑपरेशन डिलीवरी होने पर शिशु और मां को स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो जाती हैं (cesarean delivery hone par bacche aur maa ko swasth sambandhi samasya ho jati hai),मिथक 10. सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं में तनाव और चिड़चिड़पन ज्यादा होता है (cesarean delivery ke baad mahilaon me tanav aur chidchidapan hota hai),मिथक 11. अगर नॉर्मल डिलीवरी में मां प्रसव के दर्द को बर्दाश्त नहीं कर सकी तो डॉक्टर उसे ऑपरेशन डिलीवरी की सलाह देते हैं (agar normal delivery me maa prasav ke dard ko bardash nahi kar saki to doctor use cesarean delivery ki salah dete hai),मिथक 12. गर्भ में जुड़वां बच्चे होने पर आपको सिजेरियन डिलीवरी करवानी पड़ेगी (garbh me judwa bacche hone par aapko cesarean delivery karwani padegi),मिथक 13. ऑपरेशन डिलीवरी से पैदा होने वाले बच्चों में बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम होती है (cesarean delivery se paida hone wale baccho me bimariyon se ladne ki shamta kam hoti hai),मिथक 14. केवल सिजेरियन डिलीवरी के मामलों में ही एपीड्युरल दिया जाता है (cesarean delivery ke mamlon me hi epidural diya jata hai)
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