समय से पहले होने वाले शिशुओं की देखभाल, खानपान और सावधानियां (premature baby care in hindi)

समय से पहले होने वाले शिशुओं की देखभाल, खानपान और सावधानियां (premature baby care in hindi)
भारत में प्रत्येक वर्ष लगभग 3.5 लाख से ज्यादा बच्चों का जन्म, निर्धारित समय यानी गर्भावस्था के 37वें सप्ताह से पहले हो जाता है। एेसे बच्चों को प्रीमैच्योर बेबी या प्रीटर्म बेबी (premature baby in hindi) कहा जाता है। समय से पहले डिलीवरी से होने वाले बच्चों में शुरुआत से ही कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती है, इसीलिए इन बच्चों को जन्म के बाद नवजात बच्चों के आईसीयू (nicu in hindi) में रखा जाता है। इस ब्लॉग में हम आपको समय से पहले हुए शिशुओं की देखभाल और उनमें होने वाली समस्याओं के बारे में बताएंगे - 1. प्रीमैच्योर बेबी होने के बाद क्या होता है? (premature baby hone ke baad kya hota hai) 2. प्रीमैच्योर बेबी को कब घर ला सकते हैं? (premature baby ko kab ghar la sakte hai) 3. समयपूर्व हुए बच्चों में होने वाली परेशानी और घरेलू उपाय (samay purv huye bacho me hone wali pareshani aur gharelu upay) 4. समयपूर्व हुए बच्चों के लिए स्तनपान क्यों जरूरी है? (samay purv huye bacho ke liye stanpan kyu jaruri hai) 5. समयपूर्व हुए बच्चों को क्या बाद में भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती है? (samay purv huye bacho me swasth sambandhi samasya) 6. समयपूर्व हुए बच्चों में होने वाली बीमारियां (samay purv huye bacho me hone wali bimariya) 1. प्रीमैच्योर बेबी होने के बाद क्या होता है? (premature baby hone ke baad kya hota hai) प्रीमैच्योर बेबी होने के बाद क्या होता है? (premature baby hone ke baad kya hota hai)
  • प्रीमैच्योर बेबी (preterm baby in hindi) होने के बाद सबसे पहले डॉक्टर शिशु के वजन को मापते हैं और उसके आधार पर प्रीटर्म बेबी को बच्चों के आईसीयू (nicu in hindi) में रखा जाता है। बच्चोंं के आईसीयू में विशेषज्ञ प्रीटर्म बेबी के दिल की धड़कन, शरीर का तापमान, बीपी (bp in hindi), सांस संबंधी समस्याओं और अॉक्सीजन (oxygen in hindi) के स्तर को नियंत्रण में रखने की कोशिश करते हैं।
  • शिशु को इस दौरान ट्यूब के माध्यम से मां का दूध पिलाया जाता है।
  • बच्चों के आईसीयू मेंं कुछ विशेष रोशनी (thermoregulation in hindi) से शिशु का इलाज किया जाता है।
  • एेसे बच्चें न तो खुद मां का दूध पी सकते हैं और न ही खुद सांस ले सकते हैं। इसीलिए उन्हें बच्चों के आईसीयू में कृत्रिम तरीकों से दूध पीना और सांस लेना सिखाया जाता है।
2. प्रीमैच्योर बेबी को कब घर ला सकते हैं? (premature baby ko kab ghar la sakte hai) प्रीमैच्योर बेबी को कब घर ला सकते हैं? (premature baby ko kab ghar la sakte hai) यह कहना मुश्किल होता है कि प्रीमैच्योर बेबी (preterm baby in hindi) को कब घर ला सकते हैं, क्योंकि हर प्रीमैच्योर शिशु (premature baby in hindi) की समस्या अलग होती है। अस्पताल से घर ले जाना कभी-कभी शिशु के विकास क्षमता पर भी निर्भर करता है। अगर बच्चों के आईसीयू में रहने के दौरान आपके प्रीमैच्योर बेबी (preterm baby in hindi) का विकास तेजी से होता है तो उन्हें जल्दी घर भेज देते हैं। बच्चों के आईसीयू से घर भेजने के पहले प्रीमैच्योर शिशु को कुछ दिनों तक आईसीयू में मां के स्पर्श का अनुभव कराया जाता है। यह प्रीमैच्योर शिशु (premature baby in hindi) का अवस्था परिवर्तन काल होता है जहां उसे केवल मां के करीब रखते हैं। 3. समयपूर्व हुए बच्चों में होने वाली परेशानी और घरेलू उपाय (samay purv huye bacho me kya pareshani aur gharelu upay) समयपूर्व हुए बच्चों में होने वाली परेशानी और घरेलू उपाय (samay purv huye bacho me kya pareshani aur gharelu upay) समयपूर्व हुए शिशुओं (preterm baby in hindi) को सामान्य प्रसव में हुए शिशुओँ की तुलना में आपकी ज्यादा जरूरत होती है। जब अस्पताल से शिशु को घर लाया जाता है तो उनमें होने वाली परेशानियों को आप करीब से जान सकती हैं। आपको इन परेशानियों के उपायों के बारे भी सारी जानकारी होनी चाहिए। नीचे प्रीमैच्योर बेबी से (premature baby care in hindi) संबंधित परेशानियों और उनके घरेलू उपायों के बारे में बताया जा रहा है - परेशानी - 1 : प्रीमैच्योर बच्चों को सांस लेने में परेशानी होती है (premature baby ko saas lene me pareshani hoti hai) घरेलू उपाय : जिन प्रीमैच्योर बच्चों (premature baby in hindi) को सांस लेने में परेशानी होती है, उनकी मांओं को डॉक्टर कुछ सामान्य व्यायाम बताते हैं। ये व्यायाम शिशु को रोजाना करवाने से धीरे-धीरे उनमें खुद सांस लेने की क्षमता आ जाती है। परेशानी - 2 : प्रीमैच्योर बच्चे खुद मां का दूध नहीं पी सकते है (premature baby khud maa ka dudh nahi pi sakte hai) घरेलू उपाय : मां के दूध में वसीय अम्ल (fatty acid in hindi) होता है और यह शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास में काफी महत्वपूर्ण होता है। कुछ प्रीमैच्योर शिशुओं (preterm baby in hindi) में मां का दूध न खींचने की भी समस्या होती है। अगर आपका शिशु अापके स्तनों से दूध नहीं पी रहा है तो आप अपना दूध निकालकर शिशु को चम्मच या बोतल से पिलाने की कोशिश करें। परेशानी - 3 : प्रीमैच्योर बच्चों में पाचन संबंधी समस्या होती है (premature baby me pachan sambandhi samasya hoti hai) घरेलू उपाय : क्योंकि मां के गर्भ में प्रीमैच्योर बच्चों (preterm baby in hindi) का विकास नहीं हो पाता है इसीलिए उनमें पाचन संबंधी समस्या होती है। जन्म के बाद पाचन समस्या पर रोक लगाने के लिए डॉक्टर शिशु को समय पर और उचित परिमाण में मां का दूध देने की सलाह देते हैं। परेशानी - 4 : प्रीमैच्योर बच्चे अपने शरीर के तापमान को नियंत्रित नहीं रख पाते (premature baby apne sharir ke temperature ko control nahi kar sakte) घरेलू उपाय : प्रीमैच्योर बच्चे (premature baby in hindi) अपने शरीर के तापमान पर नियंत्रण नहीं रख पाते इसीलिए घर के एक कमरे में कृत्रिम तरीकों से उनके शरीर के तापमान को नियंत्रण में रखा जाना चाहिए। घर पर कृत्रिम तरीकों के इस्तेमाल से पहले अपने विशेषज्ञ की सलाह जरूर ले लें। परेशानी - 5 : प्रीमैच्योर बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी होती है (premarure baby me immunity ki kami hoti hai) घरेलू उपाय : प्रीमैच्योर शिशुओँ (preterm baby in hindi) में बीमारियों से लड़ने की क्षमता नहीं होती है, इसीलिए उनके स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों पर नजर रखी जाती है और उनके स्वास्थ्य की नियमित जांच भी करवाई जाती है। परेशानी - 6 : प्रीमैच्योर बच्चों की त्वचा संबंधी एलर्जी हो सकती है (premature baby ko skin problem ho sakti hai) घरेलू उपाय : प्रीमैच्योर बच्चों (premature baby in hindi) की त्वचा शुष्क होती है इसीलिए उन्हें हमेशा त्वचा संबंधी एलर्जी हो सकती है। अस्पताल से घर ले आने के बाद उन्हें और भी ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है। बच्चे को घर लाने के बाद शुरुआत के दिनों में उसे केवल स्पंज स्नान ही कराएं। 4. समयपूर्व हुए शिशुओं के लिए स्तनपान क्यों जरूरी है? (samay purv huye bacho ke liye stanpan kyun jaruri hai) समयपूर्व हुए शिशुओं के लिए स्तनपान क्यों जरूरी है? (samay purv huye bacho ke liye stanpan kyun jaruri hai) समयपूर्व होने वाले शिशुओं (premature baby in hindi) का वजन कम होता है और उनकी वजन वृद्धि के लिए मां के दूध को एकमात्र आहार माना जाता है। स्तनपान से शिशु की बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। इससे मां और शिशु के बीच भावनात्मक लगाव भी बढ़ता है। लेकिन कुछ एेसे विशेष मामलों में, जिनमें शिशु की गर्भकालीन उम्र 24 से 29 सप्ताह की होती है, उन्हें ट्यूब के माध्यम से दूध दिया जाता है। इसीलिए शिशु को स्तनपान कराने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ले लें।
  • समयपूर्व हुए बच्चों को स्तनपान कैसे कराएं? (samay purv huye bacho ko stanpan kaise karaye) समयपूर्व हुए बच्चों को स्तनपान कैसे कराएं? (samay purv huye bacho ko stanpan kaise karaye)
    • शिशु को गोद में लेने से पहले अपने हाथों को धो लें।
    • शिशु को गोद में लेते वक्त उसकी गर्दन को अच्छे से पकड़ लें, क्योंंकि उसकी गर्दन नाजुक होती है।
    • समयपूर्व होने वाले बच्चों का वजन काफी कम होता है इसीलिए उन्हें गोद में लेने से पहले आप बिस्तर पर बैठ जाएं और बड़ी ही सावधानी से उन्हें गोद में लें।
    • समयपूर्व होने वाले बच्चों में जल्द ही संक्रमण फैल जाता है इसीलिए जहां बच्चे को स्तनपान करा रही हों, उस कमरे की स्वच्छता का ख्याल रखें।
    • बच्चें को रोजाना एक ही समय पर दूध पिलाएं।
    • शिशुओं के आहार में धीरे-धीरे दूध की मात्रा को बढ़ाएं।
5. क्या समयपूर्व हुए शिशुओं को जन्म के बाद भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती है? (samay se purv huye bacho me swasth sambandhi samasya) क्या समयपूर्व हुए शिशुओं को जन्म के बाद भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती है? (samay se purv huye bacho me swasth sambandhi samasya) हां, समय से पहले प्रसव होने वाले बच्चों को भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती है। ज्यादातर मामलों में समयपूर्व हुए बच्चों (preterm baby in hindi) में दो प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती हैं। पहली शारीरिक और दूसरी मानसिक। समयपूर्व हुए शिशुओं में आम शारीरिक समस्याएं (samay se purv huye bacho me sharirik samasya) समयपूर्व हुए शिशुओं (premature baby in hindi) में कई प्रकार की शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं। जिसकी वजह से बच्चों के शारीरिक विकास में बाधाएं उत्पन्न होती है। आइए जानते हैं समय से पहले होने वाले बच्चों की शारीरिक समस्याओं के बारे में -
  • शारीरिक विकास में रुकावट : शरीर में पौष्टिक तत्वों की कमी की वजह से समयपूर्व हुए शिशुओं (preterm baby in hindi) के शारीरिक विकास में रुकावट हो सकती है। जैसे बौना होने की समस्या, या शरीर के किसी अन्य अंग का विकास न होना।
  • शरीर में एक या उससे ज्यादा अंगों का काम न करना : समयपूर्व हुए शिशुओँ (premature baby in hindi) में यह समस्या आम है। मां के गर्भ में शिशु का संपूर्ण विकास नहीं हो पाता है, जिसकी वजह से जन्म के बाद शिशु के शरीर में एक या एक से ज्यादा अंग काम करना बंद कर देते हैं।
  • देखने और सुनने में समस्या : समयपूर्व हुए शिशुओं (preterm baby in hindi) को अक्सर देखने और सुनने में समस्या होती है।
  • अतिरिक्त वजन का बढ़ना : समयपूर्व हुए शिशुओं (premature baby in hindi) का वजन जन्म के समय काफी कम होता है, लेकिन बाद में किसी-किसी बच्चे में अतिरिक्त वजन बढ़ने की समस्या होती है।
  • हाथों और पैरों में सूजन : समयपूर्व हुए शिशुओं (preterm baby in hindi) के हाथों और पैरों में सूजन आती है।
  • दांत आने में देरी : समयपूर्व हुए शिशुओं के विकास मे कमी की वजह से उन्हें दांत आने में भी देरी हो सकती है।
समयपूर्व हुए शिशुओं में आम मानसिक समस्याएं (samay purv huye bacho me aam sharirik samasya) समयपूर्व हुए शिशुओं में शारीरिक समस्याओं के साथ ही करीब 40 प्रतिशत शिशुओं में मानसिक समस्याएं भी होती है। प्रीमैच्योर शिशुओं में होने वाली मानसिक समस्याएं निम्न हैं -
  • समयपूर्व हुए शिशुओं में सीखने संबंधी समस्या : सीखने संबंधी समस्या (learning disorder in hindi) में समय से पहले होने वाले बच्चे आम बच्चों की तरह किसी चीज को जल्दी सीख नहीं सकते।
  • समयपूर्व हुए शिशुओं में असुरक्षा की भावना : समय से पहले होने वाले शिशु (preterm baby in hindi) बहुत संवेदनशील होते हैं और इसी वजह से उनमें असुरक्षा की भावना आ जाती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि समय के साथ-साथ यह समस्या खत्म हो सकती है।
  • समयपूर्व हुए शिशु ज्यादा रोते हैं : इन शिशुओं में अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की क्षमता नहीं होती इसीलिए इन्हें जब भी कोई बात बुरी लगती है या कोई बात समझ में नहीं आती तो बच्चे जोर-जोर से रोने लगते हैं।
6. समयपूर्व हुए बच्चों में होने वाली बीमारियां : (samay purv huye bacho me hone wali bimariya) समयपूर्व हुए बच्चों में होने वाली बीमारियां : (samay purv huye bacho me hone wali bimariya) समयपूर्व हुए शिशुओं (premature baby in hindi) में जन्म के बाद से ही कुछ गंभीर समस्याएं होती है, जो निम्न हैं-
  • एपनिया (apnea in hindi) : इस बीमारी में अक्सर बच्चों की सांसे 20 सेकेण्ड के लिए रूक जाती है। यह शिशुओं में दिल की धड़कन की गति कम होने की वजह से होती है।
  • सांस संबंधी समस्या (respiratory problem in hindi) : जिन बच्चों का जन्म गर्भावस्था के 34वें सप्ताह में होता है उन शिशुओं को सांस संबंधी समस्याएं हो सकती है।
  • पीलिया (jaundice in hindi) : समयपूर्व प्रसव होने वाले शिशुओं में लिवर का विकास समय पर नहीं हो पाता है, इससे उनकी रक्त वाहिकाओं में बिलीरूबिन (bilirubin in hindi) की मात्रा घटती नहीं है। जिसकी वजह से प्रीमैच्योर शिशुओं को पीलिया (jaundice in hindi) की समस्या होती है।
  • एनीमिया (anemia in hindi) : गर्भावस्था में रक्त की कमी की वजह से शिशु को एनीमिया हो सकता है।
  • इंट्रावेंट्राईकुलर हैमरेज (intraventricular hemorrhage in hindi) : इस बीमारी में शिशु के मस्तिष्क के अंदर खून का प्रवाह तेज होता है।
  • निमोनिया (pneumonia in hindi) : समयपूर्व हुए शिशु में संक्रमण की वजह से निमोनिया हो सकता है।
  • डाऊन सिंड्रोम (down syndrome in hindi) : मां के गर्भ से ही कई शिशुओँ को डाऊन सिंड्रोम की समस्या हो जाती है।
समय से पहले होने वाले शिशुओं (preterm baby in hindi) का विकास कम होता है इसीलिए उन्हें सामान्य शिशुओं की तुलना में ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है। यह जरूरत शिशुओं को कुछ दिन, कुछ महीने या कुछ सालों तक रह सकती है। शिशुओं में होने वाली समस्याएं ज्यादा दिनों तक न रहें इसीलिए घर पर उनकी देखभाल अच्छे से करें। प्रीमैच्योर शिशुओं कीे देखभाल (premature baby care in hindi) से जुड़ी किसी भी घरेलू नुस्खे का इस्तेमाल करने पहले एक बार अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें। समयपूर्व हुए शिशुओं की नियमित जांच कराएं। डॉक्टर की सलाह लिए बगैर शिशुओं को कहीं बाहर न ले जाएं।
इस ब्लॉग के विषय - 1. प्रीमैच्योर बेबी होने के बाद क्या होता है? (premature baby hone ke baad kya hota hai), 2. प्रीमैच्योर बेबी को कब घर ला सकते हैं? (premature baby ko kab ghar la sakte hai),3. समयपूर्व हुए बच्चों में होने वाली परेशानी और घरेलू उपाय (samay purv huye bacho me hone wali pareshani aur gharelu upay),4. समयपूर्व हुए बच्चों के लिए स्तनपान क्यों जरूरी है? (samay purv huye bacho ke liye stanpan kyu jaruri hai),
  • समयपूर्व हुए बच्चों को स्तनपान कैसे कराएं? (samay se purv huye bacho ko stanpan kaise karaye),
5. समयपूर्व हुए बच्चों को क्या बाद में भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती है? (samay purv huye bacho me swasth sambandhi samasya),
  • समयपूर्व हुए शिशुओं में आम शारीरिक समस्याएं (samay se purv huye bacho me sharirik samasya)
  • समयपूर्व हुए शिशुओं में आम मानसिक समस्याएं (samay se purv huye bacho me aam manasik samasya),
6. समयपूर्व हुए बच्चों में होने वाली बीमारियां (samay purv huye bacho me hone wali bimariya)
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