आपके शिशु की मालिश के लिए 8 खास तेल (Shishu ki malish ke 8 khas tel)

आपके शिशु की मालिश के लिए 8 खास तेल (Shishu ki malish ke 8 khas tel)
अपने बच्चों की मालिश करना ज्यादातर माँओं की दिनचर्या का एक अहम हिस्सा होता है। कुछ माँएं स्नान से पहले अपने बच्चों की मालिश करती हैं तो कुछ को बच्चे को नहलाने के बाद उसकी मालिश करना पसंद होता है। मालिश करने के लिए शिशु की मालिश का तेल सबसे ज़रूरी चीज है, और हर माँ को अपने शिशु की मालिश का तेल चुनते वक़्त कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि शिशु की अच्छी सेहत के लिए सही तेल चुनना ज़रूरी है। आज के ब्लॉग में हम आपको शिशु की मालिश के 8 खास तेल व उनके गुणों के बारे में बता रहे हैं, जिनसे आप रोज अपने शिशु की मालिश कर सकती हैं। शिशु की मालिश का तेल : नारियल तेल से शिशु की मालिश (Nariyal tel se baby ki malish) शिशु की मालिश का तेल : सरसों के तेल से बच्चों की मालिश (Shishu ki malish ke liye sarso ka tel) शिशु की मालिश का तेल : शिशु की मालिश के लिए बादाम का तेल (Badam ke tel se baby ki malish) शिशु की मालिश का तेल : सूरजमुखी के तेल से बच्चों की मालिश (Surajmukhi ke tel se bache ki malish) शिशु की मालिश का तेल : शिशु के शरीर पर तिल के तेल की मालिश (Bache ki malish ke liye til ka tel) शिशु की मालिश का तेल : नवजात की मालिश के लिए जैतून का तेल (Jaitun ke tel se shishu ki malish) शिशु की मालिश का तेल : शिशु की मालिश के लिए अरंडी का तेल (Arandi tel se bache ki malish) शिशु की मालिश का तेल : टी ट्री आयल से नवजात बच्चों की मालिश (Tea tree oil se baby ki malish) छोटे बच्चों की मालिश के वक़्त इन खास बातों का ध्यान रखें (Baby massage tips in hindi) शिशु की मालिश का तेल : नारियल तेल से शिशु की मालिश (Nariyal tel se baby ki malish) शिशु की मालिश का तेल : नारियल तेल से शिशु की मालिश (Nariyal tel se baby ki malish) बच्चों की मालिश के लिए तेल के रूप में नारियल का तेल (nariyal ka tel) एक बेहतर विकल्प है। नारियल का तेल बहुत हल्का होता है, जिससे शिशु की त्वचा इसे आसानी से सोख लेती है। नारियल तेल की मालिश से शिशु के शरीर को ठंडक मिलती है। एंटी बैक्टीरियल (anti bacterial in hindi) और एंटी फंगल (antifungal in hindi) गुणों से भरपूर नारियल का तेल (nariyal ka tel) बच्चे की त्वचा को पोषण देने के साथ ही उसे नर्म और कोमल भी बनाता है, इसलिए नारियल के तेल से बच्चों की मालिश करना उनके लिए लाभदायक होता है। नारियल तेल की मालिश से शिशु को खुजली, सिर पर पपड़ी जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। आमतौर पर नहाने से पहले नारियल के तेल (nariyal ka tel) से बच्चों की मालिश की जाती है, लेकिन आप शिशु को नहलाने के बाद भी उसकी हाथ पैरों पर कुछ बूंद नारियल तेल लगा सकती हैं। शिशु की मालिश का तेल : सरसों के तेल से बच्चों की मालिश (Shishu ki malish ke liye sarso ka tel) शिशु की मालिश का तेल : सरसों के तेल से बच्चों की मालिश (Shishu ki malish ke liye sarso ka tel) सर्दियों के मौसम में नवजात बच्चों की मालिश के लिए सरसों का तेल (sarso ka tel) बेहद गुणकारी होता है। ऐसा माना जाता है कि सरसों के तेल को गर्म करके उसमें दो-चार कली लहसुन व थोड़ी सौंफ चटका कर शिशु को लगाने से शिशु की बीमारियों से लड़ने की क्षमता (immunity in hindi) बढ़ती है। सरसों का तेल (sarso ka tel) ज्यादा महँगा नहीं होता और इसे सभी आसानी से खरीद सकते हैं। नवजात शिशुओं के शरीर पर सरसों के तेल की मालिश करने से उनकी त्वचा मुलायम रहती है, साथ ही इससे शिशु के शरीर के विकास में भी मदद मिलती है। सरसों का तेल (sarso ka tel) गर्म करके उसमें थोड़ी अजवाइन चटकाकर कोलिक की समस्या से परेशान बच्चों की मालिश करने से उन्हें पेटदर्द व गैस की समस्या से राहत मिलती है। सरसों के तेल से बच्चों की मालिश करते समय इन बातों का ध्यान रखें -
  • शिशु को नहलाने से पहले सरसों के तेल की मालिश करें, शिशु को नहलाने के बाद सरसों के तेल की मालिश ना करें।
  • शिशु के शरीर पर शुद्ध सरसों का तेल (sarso ka tel) ना लगाएं, इसे गर्म करके इसमें लहसुन, अजवाइन आदि डालें या इसमें कोई अन्य तेल मिलाकर लगाएं, क्योंकि शुद्ध सरसों के तेल की मालिश से शिशु को त्वचा पर जलन हो सकती है।
शिशु की मालिश का तेल : शिशु की मालिश के लिए बादाम का तेल (Badam ke tel se baby ki malish) शिशु की मालिश का तेल : शिशु की मालिश के लिए बादाम का तेल (Badam ke tel se baby ki malish) ओमेगा 3 फैटी एसिड (omega 3 fatty acid in hindi) और विटामिन ई (vitamin E in hindi) से भरपूर बादाम का तेल शिशु की त्वचा को अच्छी तरह पोषण देता है और शिशु के सिर पर हल्के हाथों से बादाम का तेल (badam ka tel) लगाने से उसके सिर के विकास में सहायता मिलती है। बादाम के तेल से बच्चों की मालिश करने से उनकी हड्डियाँ भी मजबूत होती हैं। बादाम का तेल (badam ka tel) शिशु की त्वचा को रूखेपन से बचाता है और इससे बच्चों की मालिश करने से उनकी त्वचा में नमी बनी रहती है। इसके अलावा बादाम के तेल से बच्चों की मालिश करने से उनकी पाचन शक्ति बढ़ती है। शिशु की त्वचा पर केवल कुछ बूंद बादाम का तेल (badam ka tel) ही लगाएं ताकि उसकी त्वचा तेल को पूरी तरह सोख ले। शिशु की त्वचा पर अतिरिक्त तेल बचा रह जाने पर उसे रैशेज की समस्या हो सकती है। शिशु को नहलाने से पहले या बाद में, कभी भी बादाम के तेल की मालिश की जा सकती है। शिशु की मालिश का तेल : सूरजमुखी के तेल से बच्चों की मालिश (Surajmukhi ke tel se bache ki malish) शिशु की मालिश का तेल : सूरजमुखी के तेल से बच्चों की मालिश (Surajmukhi ke tel se bache ki malish) सूरजमुखी का तेल (sunflower oil in hindi) बच्चों की मालिश के लिए अच्छा होता है। नवजात शिशु ज्यादातर लोगों को उनकी गंध से पहचानते हैं, ऐसे में खुशबूदार तेल की मालिश से शिशु परेशान हो सकता है, लेकिन सूरजमुखी के तेल में कोई गंध नहीं होती, इसलिए इसे लगाने से शिशु को कोई परेशानी नहीं होती। सूरजमुखी के तेल (sunflower oil in hindi) में कई सारे विटामिन (vitamin in hindi) होते हैं, जिससे शिशु की त्वचा स्वस्थ रहती है। इस तेल में एंटी बैक्टीरियल (anti bacterial in hindi) गुण होते हैं, इसलिए सूरजमुखी के तेल की मालिश से शिशु को त्वचा संक्रमण होने की आशंका कम हो जाती है। इसके अलावा अगर मालिश के दौरान सूरजमुखी का तेल (sunflower oil in hindi) शिशु के मुँह में चला जाए तो इससे शिशु की सेहत को कोई नुकसान नहीं होता है। स्नान से पहले या बाद में सूरजमुखी के तेल से (sunflower oil in hindi) नवजात बच्चों की मालिश की जा सकती है। शिशु की मालिश का तेल : शिशु के शरीर पर तिल के तेल की मालिश (Bache ki malish ke liye til ka tel) शिशु की मालिश का तेल : शिशु के शरीर पर तिल के तेल की मालिश (Bache ki malish ke liye til ka tel) बच्चों की मालिश के लिए तिल का तेल (til ka tel) बहुत अच्छा माना जाता है। तिल के तेल की मालिश से शिशु के शरीर में रक्तसंचार बढ़ता है और उसके शरीर को गर्माहट मिलती है। अगर शिशु की त्वचा ख़ुश्क या रूखी है तो तिल के तेल की मालिश करने से शिशु की त्वचा का रूखापन दूर हो सकता है। तिल का तेल (til ka tel) बाजार में आसानी से मिल जाता है, लेकिन तिल का तेल खरीदते वक्त ध्यान रखें कि ये नकली ना हो, क्योंकि मिलावटी तेल से शिशु की त्वचा को नुकसान पहुँच सकता है। ध्यान दें- शिशु को नहलाने से पहले तिल के तेल की मालिश करें, ताकि बाद में अतिरिक्त तेल स्नान के दौरान धुल जाए। शिशु की मालिश का तेल : नवजात की मालिश के लिए जैतून का तेल (Jaitun ke tel se shishu ki malish) शिशु की मालिश का तेल : नवजात की मालिश के लिए जैतून का तेल (Jaitun ke tel se shishu ki malish) बच्चों की मालिश के लिए जैतून का तेल (olive oil in hindi) बहुत फायदेमंद होता है। जैतून का तेल शिशु की त्वचा के लिए सुरक्षित होता है, इसलिए दुनियाभर की माँएं जैतून के तेल से अपने बच्चों की मालिश करना पसंद करती हैं। जैतून के तेल की मालिश से शिशु की कमज़ोर मांसपेशियों को ताकत मिलती है और साथ ही यह शिशु की त्वचा को सेहतमंद बनाता है। शिशु को नहलाने से पहले या बाद में कभी भी जैतून के तेल की मालिश की जा सकती है। ध्यान दें- जैतून के तेल (olive oil in hindi) से दो माह से छोटे बच्चों की मालिश ना करें। शिशु की मालिश का तेल : शिशु की मालिश के लिए अरंडी का तेल (Arandi ke tel se bache ki malish) शिशु की मालिश का तेल : शिशु की मालिश के लिए अरंडी का तेल (Arandi ke tel se bache ki malish) अरंडी के तेल को कैस्टर ऑयल (castor oil in hindi) भी कहा जाता है, यह शिशु की रूखी त्वचा को नर्म और मुलायम बनाने में मददगार है। इसके अलावा अरंडी का तेल (castor oil in hindi) कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है, इसलिए अरंडी के तेल से बच्चों की मालिश करने से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। शिशु को डायपर रैश की समस्या होने पर प्रभावित जगह पर अरंडी के तेल की मालिश करने से उसकी त्वचा जल्दी ठीक होती है। ध्यान दें - मालिश के दौरान अरंडी के तेल शिशु की आँखों और होठों पर लगने ना दें। विशेषज्ञ नहलाने से पहले अरंडी के तेल (castor oil in hindi) से बच्चों की मालिश करने की सलाह देते हैं। इससे नहाने के बाद शिशु के शरीर पर से अतिरिक्त तेल हट जाता है और शिशु की त्वचा को अच्छी तरह पोषण भी मिल जाता है। शिशु की मालिश का तेल : टी ट्री आयल से नवजात बच्चों की मालिश (Tea tree oil se baby ki malish) शिशु की मालिश का तेल : टी ट्री आयल से नवजात बच्चों की मालिश (Tea tree oil se baby ki malish) छह माह से अधिक उम्र के बच्चों की मालिश के लिए टी ट्री आयल (tea tree oil in hindi) का उपयोग किया जा सकता है और मालिश के वक़्त इस बात का खास खयाल रखें कि तेल शिशु के मुंह या आंख में ना जाये। टी ट्री आयल में संक्रमण से लड़ने का गुण होता है, इसलिए शिशु की मालिश के तेल में टी ट्री आयल (tea tree oil in hindi) की कुछ बूंदें मिलाकर मालिश करने से शिशु त्वचा सम्बंधी संक्रमण से सुरक्षित रहता है। शिशु को ठंड लगने पर सोने से पहले उसकी छाती पर टी ट्री आयल (tea tree oil in hindi) की कुछ बूंदें लगाने से उसे ठंड से राहत मिलती है। टी ट्री आयल से बच्चों की मालिश करने से उनके शरीर में रक्तसंचार सही रहता है। ध्यान दें-
  • इसकी मालिश कभी भी की जा सकती है, लेकिन छह माह से कम उम्र के शिशु के शरीर पर इसे किसी अन्य तेल जैसे नारियल के तेल आदि में थोड़ी सी मात्रा में मिलाकर लगाएं।
  • टी ट्री आयल (tea tree oil in hindi) की ज्यादा मात्रा शिशु को नुकसान पहुंचा सकती है।
चेतावनी - टी ट्री आयल से शिशु की मालिश के वक़्त इस बात का खास खयाल रखें, कि तेल शिशु के मुँह में ना जाये, क्योंकि यह शिशु की सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक हो सकता है। टी ट्री आयल से अपने बच्चे की मालिश करने से पहले एक बार डॉक्टर की सलाह ले लें, क्योंकि यह एक औषधीय तेल है और शिशु की नाज़ुक त्वचा पर इसके कुछ दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। छोटे बच्चों की मालिश के वक़्त इन खास बातों का ध्यान रखें (Baby massage tips in hindi) छोटे बच्चों की मालिश के वक़्त इन खास बातों का ध्यान रखें (Baby massage tips in hindi)
  • मालिश के वक़्त शिशु के किसी भी अंग पर दबाव ना डालें, इससे शिशु को चोट लग सकती है।
  • एक साल से छोटे शिशु की मालिश करते समय उसकी नाक, कान या नाभि में तेल ना डालें, इससे उसे जानलेवा संक्रमण हो सकता है।
  • किसी भी तेल से शिशु की मालिश करने से पहले उसे शिशु की त्वचा के एक छोटे से हिस्से पर लगाकर देखें, अगर एक दिन तक शिशु की त्वचा और तेल का कोई गलत प्रभाव नहीं होता है तो आप उस तेल से शिशु की मालिश कर सकती हैं।
अच्छे स्वास्थ्य और सेहतमंद त्वचा के लिए एक माह से अधिक आयु के बच्चों की मालिश करना फायदेमंद होता है। मालिश करने से शिशु माँ के और ज्यादा करीब आ जाता है और इससे उनका रिश्ता पहले से भी ज्यादा मजबूत हो जाता है, इसलिए दिन में कुछ मिनट का समय निकालकर अपने बच्चे की मालिश करना ना भूलें। हमें उम्मीद है इस ब्लॉग को पढ़ने के बाद शिशु की मालिश का तेल चुनने में अब आपको आसानी होगी। अपने बच्चे की मालिश के लिए वही तेल चुनें जो आपको सबसे बेहतर लगता है और डॉक्टर जिस तेल का उपयोग करने की सलाह देते हैं।
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