स्तनपान के दौरान शिशु का सही से दूध ना पी पाना (Stanpan ke dauran baby ka sahi se breast latch na kar pana)

स्तनपान के दौरान शिशु का सही से दूध ना पी पाना (Stanpan ke dauran baby ka sahi se breast latch na kar pana)

अपने शिशु को स्तनपान करवाना एक माँ के लिए बेहद खास एहसास होता है। लेकिन अक्सर कुछ शिशुओं व माँओं को स्तनपान के दौरान परेशानियों (breastfeeding problems in hindi) का सामना करना पड़ता है, जैसे स्तनों में ठीक से दूध ना आना, निप्पल फटना आदि। स्तनपान (stanpan) करते समय बच्चे का माँ के स्तन को मुँह में ठीक से ना पकड़ पाना या स्तन लैच ना कर पाना भी इनमें से एक है। इस ब्लॉग में हम आपको शिशु के सही तरह से लैच ना करने की समस्या, इसके कारण और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं।

शिशु का लैच करना क्या होता है?

(Baby ka latch karna kya hota hai)

स्तनपान करने के लिए जब शिशु आपका स्तन अपने मुँह में लेता है, तो उसे लैच करना कहते हैं। इस दौरान बच्चा आपके निप्पल के साथ ही एरियोला (निप्पल के चारों ओर स्थित काला/भूरा भाग) का कुछ हिस्सा (करीब एक इंच) अपने मुँह में ले लेता है और निप्पल को अपनी तालु व जीभ से दबाकर स्तनपान (stanpan) करता है। लेकिन अक्सर कुछ शिशु स्तनपान के दौरान सही तरह लैच नहीं कर पाते।

स्तनपान के समय शिशु को सही तरह लैच कैसे करवाएं?

(Stanpan karvate samay baby ko latch kaise karvaye)

baby ko dudh pilane ki taknik

शिशु को स्तनपान (breastfeeding in hindi) करने के लिए सही तरह से लैच करवाने के दो तरीके हैं-

  • सामान्य या ट्रेडिशनल लैच तकनीक (Traditional latch technique)- आमतौर पर जब भी आप शिशु को स्तनपान (stanpan) करवाती हैं, तो इसी तकनीक का उपयोग करती हैं। इस लैचिंग तकनीक में, आप शिशु को अपनी गोद में इस तरह पकड़ती हैं, की उसका मुँह आपके निप्पल और एरियोला के पास होता है। शिशु जब आपका निप्पल व एरियोला मुँह में ले लेता है, तब आपको शिशु के मुँह के चारों तरफ बराबर मात्रा में एरियोला दिखाई देना चाहिए।

  • असममित लैच तकनीक (Asymmetrical latch technique)- यह तकनीक शिशु को दूध पिलाने की सामान्य तकनीक से थोड़ी अलग है। असममित लैच तकनीक में, शिशु के मुँह में निप्पल के साथ एरियोला का निचला भाग ज्यादा दिया जाता है और एरियोला का ऊपरी भाग अधिकांश रूप से शिशु के मुँह से बाहर रहता है। इस तकनीक में निप्पल शिशु के मुँह में सीधा ना जाकर तिरछा जाता है। शिशु अपनी ठोड़ी और मुँह से आपकी दुग्ध ग्रन्थियों को दबाता है, जिससे दूध बाहर आने लगता है। इस तकनीक को सामान्य लैच तकनीक की तुलना में ज्यादा आरामदायक माना जाता है। इसके अलावा यह भी माना जाता है कि इससे शिशु को स्तनपान (stanpan) करने में आसानी होती है। अगर स्तनपान करते समय शिशु की ठोड़ी और नाक आपके स्तन को स्पर्श कर रही है, तो आमतौर पर इसका मतलब है कि शिशु आपके स्तन पर सही पकड़ बना पा रहा है और आराम से स्तनपान कर रहा है।

शिशु के सही तरह से लैच ना करने के क्या लक्षण हैं?

(Baby ke sahi tarah latch na karne ke kya lakshan hai)

निम्न सामान्य लक्षणों से आप पता लगा सकती हैं, कि आपका शिशु स्तनपान (stanpan) के समय स्तन सही तरह से मुँह में ले पा रहा है या नहीं-

  • स्तनपान करवाते समय निप्पल में दर्द होने (breastfeeding problems in hindi) का मतलब है कि शिशु आपके एरियोला को दबाने के बजाय आपके निप्पल चबा रहा है।
  • शिशु को स्तनपान करवाते समय उसके होठों से आवाज़ आना (breastfeeding problems in hindi) इस बात का लक्षण है कि, शिशु ने सही तरह लैच नहीं किया है।
  • अगर आपके स्तनों में पर्याप्त दूध आता है और बच्चा बहुत देर तक स्तनपान (stanpan) करके भी भूखा है, तो यह इस बात का संकेत है कि वह ठीक से लैच नहीं कर पाया है या सही तरह से दूध नहीं पी पा रहा है।

शिशु की लैचिंग संबंधी 6 समस्याएं और उनके समाधान

(Baby ki latching se judi 6 problems aur unke solutions)

जब शिशु स्तन पर अपने मुँह की सही पकड़ बनाकर स्तनपान (stanpan) करता है, तो उसे पर्याप्त मात्रा में दूध मिल पाता है और इसके साथ ही माँ के शरीर में ज्यादा दूध बनने लगता है। वहीं दूसरी तरफ, अगर शिशु ठीक से दूध नहीं पी पाता है, तो इससे स्तनपान (breastfeeding in hindi) से जुड़ी कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं। शिशु की लैचिंग संबंधी 6 प्रमुख समस्याएं निम्न हैं-

  1. शिशु का बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा होना (breastfeeding problems in hindi- shishu ka bahut chidchida hona)-

    shishu ka chidchida hona

    बहुत ज्यादा रोने या चिड़चिड़ा होने पर शिशु स्तनों पर सही से लैच नहीं कर पाता है, ऐसे में उसे स्तनपान (stanpan) करवाना बेहद मुश्किल हो सकता है। उसके चिड़चिड़ा होने या रोने की कई वजह हो सकती हैं, जैसे ज्यादा थक जाना, भूख लगना आदि।

    समाधान- जब बच्चा शांत हो और जाग रहा हो, तो उसे उसके स्तनपान का समय होते ही दूध पिला दें, उसके रोने का इंतज़ार ना करें। अगर वो रो रहा है या चिड़चिड़ा है, तो पहले उसे बहला फुसलाकर चुप करें और फिर स्तनपान (breastfeeding in hindi) करवाएं। इसके अलावा शिशु को दूध पिलाने से पहले अपने स्तनों से दूध की एक दो बूंदें निकालकर निप्पल व एरियोला पर लगाएं, दूध की खुशबू और स्वाद महसूस होते ही बच्चा स्तनपान (stanpan) करना शुरू कर सकता है।

  2. शिशु को बहुत ज्यादा नींद आना (breastfeeding problems in hindi- baby ko bahut neend aana)-

    shishu ko nind ana

    छोटे बच्चे अपना ज्यादातर वक़्त सोते हुए गुज़ारते हैं, यह उनके विकास के लिए बेहद ज़रूरी है। प्रसव के समय माँ को दी गयी दर्द निवारक दवाओं की वजह से भी शिशु को ज्यादा नींद आ सकती है, ऐसे में वह स्तनपान (stanpan) करने के लिए स्तन पर सही पकड़ नहीं बना पाता।

    समाधान- शिशु को हर दो से तीन घंटे बाद स्तनपान (breastfeeding in hindi) के लिए जगाएं। उसे जगाने के लिए उससे बात करें, उसका डायपर बदलें, या उसका कंबल थोड़ा हटा दें। स्तनपान करते समय शिशु को जल्दी नींद ना आए, इसके लिए उसे स्तनपान (stanpan) की किसी अलग अवस्था में पकड़ें, इससे वह जल्दी नहीं सोएगा।

  3. माँ के निप्पल बड़े होना (breastfeeding problems in hindi- ma ke nipple bade hona)-

    nipple bade hona

    नवजात शिशु के लिए बड़े निप्पलों से स्तनपान करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, क्योंकि स्तनपान के लिए सही तरह से लैच करने के लिए शिशु को निप्पल के साथ ही एरियोला का कुछ भाग मुँह में लेना ज़रूरी है।

    समाधान- अपने स्तनों पर निप्पल शील्ड (nipple shield) लगा सकती हैं (निप्पल शील्ड, सिलिकॉन से बना एक उपकरण होता है, जिसे शिशु के सही तरह से लैच न हो पाने पर स्तन के निप्पल और एरियोला पर लगाया जाता है), इससे शिशु के मुँह में निप्पल कम जाएगा और उसे लैच करने में आसानी होगी। जैसे जैसे आपका शिशु बड़ा होगा, वैसे वैसे बड़े निप्पल से दूध पीना उसके लिए आसान हो सकता है।

  4. माँ के स्तन ज्यादा बड़े होना (breastfeeding problems in hindi- ma ke stan jyada bade hona-

    stan bade hona

    अगर माँ के स्तन बहुत ज्यादा बड़े हैं, तो हो सकता है कि उसे अपने निप्पल दिखाई ना दें। ऐसे में शिशु को सही तरह से लैच करवाने में उसे परेशानी हो सकती है। इसके अलावा बड़े स्तनों व शिशु को एक साथ संभालने में भी माँ को मुश्किल हो सकती है।

    समाधान- इस स्थिति में शिशु को अच्छी तरह स्तनपान (stanpan) करवाने का सबसे बेहतर तरीका यही है कि आप किसी की मदद ले लें। इसके लिए आपके पति, किसी सहेली या परिवार के अन्य सदस्य को शिशु व स्तन को सहारा देने के लिए कह सकती हैं। थोड़े समय बाद आपका शिशु आपके स्तनों पर अपने मुँह से पकड़ बनाना सीख जाएगा।

  5. चपटे या उल्टे निप्पल होना (breastfeeding problems in hindi- chapte ya ulte nipple hona)-

    nipple ulta ya chapta hona

    कुछ शिशु चपटे या उल्टे निप्पल वाले स्तन पर भी आसानी से लैच कर लेते हैं, वहीं कई शिशुओं को ऐसे स्तनों से स्तनपान (breastfeeding in hindi) करने में परेशानी होती है।

    समाधान- शिशु को दूध पिलाने से पहले एक या दो मिनट तक उंगलियों से निप्पल को दबाकर दूध बाहर निकालें, इससे निप्पल नर्म हो जाएंगे और शिशु को लैच करने में आसानी होगी। अगर अब भी शिशु स्तन पर सही तरह से लैच नहीं कर पा रहा है, तो डॉक्टर की सलाह लें।

  6. शिशु का प्रीमैच्योर होना (breastfeeding problems in hindi- premature baby hona)-

    premature baby

    प्रीमैच्योर शिशु का मुँह सामान्य शिशु की तुलना में थोड़ा छोटा होता है, ऐसे में उसके लिए स्तनपान (breastfeeding in hindi) करते समय सही तरह से लैच कर पाना काफी मुश्किल हो सकता है।

    समाधान- निप्पल शील्ड का उपयोग करने से प्रीमैच्योर शिशु को स्तनपान (stanpan) के समय लैच करने में सुविधा हो सकती है। इसके अलावा डॉक्टर समयपूर्व पैदा हुए शिशु के लिए ब्रेस्ट मिल्क पम्प करने (एक उपकरण द्वारा अपने स्तन से दूध निकालना) की सलाह देते हैं, बाद में इसे सिरिंज या छोटे निप्पल वाली बोतल के ज़रिए शिशु को पिलाया जा सकता है।

शिशु की लैचिंग संबंधी समस्या के लिए डॉक्टर से कब संपर्क करें?

(Baby ki latching problem ke liye doctor ko kab dikhaye)

अगर आपका शिशु आपके स्तनों पर सही तरह से लैच नहीं कर पा रहा है और भरपूर स्तनपान (stanpan) नहीं कर रहा है तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा निम्न स्थितियों में आपको डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए-

  • अगर आपका शिशु स्तनपान नहीं कर पा रहा है।
  • अगर आपका शिशु बहुत ज्यादा सोता है और स्तन पर लैच करने व स्तनपान करने के लिए भी नहीं जाग पाता है।
  • अगर शिशु के सिर की नाज़ुक त्वचा सिर के अंदर की तरफ धँसी हुई दिख रही है (शिशु की नाज़ुक त्वचा सर के अंदर धँसने की मुख्य वजह उसके शरीर में पानी की कमी होती है, ऐसा शिशु के सही तरह से स्तनपान ना करने की वजह से हो सकता है)।
  • अगर शिशु दिन में पर्याप्त डायपर गीले नहीं करता है। (एक से चार दिन का शिशु दिन में कम से कम दो बार पेशाब करता है और इससे बड़ा शिशु दिन में कम से कम छह बार पेशाब करता है।)
  • अगर आपके शिशु को कटे होंठ की समस्या है।
  • अगर आपके शिशु को अन्य जन्मजात समस्याएं जैसे डाउन सिंड्रोम आदि हैं।

सही अवस्था में ना होने पर शिशु को स्तनपान (stanpan) करने में परेशानी हो सकती है, इसके साथ ही शिशु के सही तरह से स्तन मुँह में ना लेने से माँ को स्तनों में दर्द या सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इनसे बचने के लिए ब्लॉग में बताई गई लैचिंग संबंधी बातों का ध्यान रखें और अगर समस्या ज्यादा हो तो डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें। उचित सलाह और स्तनपान की सही तकनीक की मदद से आप अपने शिशु के साथ स्तनपान (breastfeeding in hindi) के अनोखे एहसास को बिना किसी दर्द और परेशानी के महसूस कर सकती हैं।

इस ब्लॉग के विषय - शिशु का लैच करना क्या होता है? (Baby ka latch karna kya hota hai),स्तनपान के समय शिशु को सही तरह लैच कैसे करवाएं? (Stanpan karvate samay baby ko latch kaise karvaye),शिशु के सही तरह से लैच ना करने के क्या लक्षण हैं? (Baby ke sahi tarah latch na karne ke kya lakshan hai),शिशु की लैचिंग संबंधी 6 समस्याएं और उनके समाधान (Baby ki latching se judi 6 problems aur unke solutions),शिशु की लैचिंग संबंधी समस्या के लिए डॉक्टर से कब संपर्क करें? (Baby ki latching problem ke liye doctor ko kab dikhaye)
नए ब्लॉग पढ़ें