शिशु का वज़न : कुछ ज़रूरी बातें (newborn baby ka weight : kuch jaruri bate)

शिशु का वज़न : कुछ ज़रूरी बातें (newborn baby ka weight : kuch jaruri bate)

माता पिता अपने शिशु के विकास के बारे में जानने के लिए बेहद उत्सुक रहते हैं। कई लोगों के मन में यह सवाल भी होता है, “जन्म के समय बच्चे का वजन कितना होना चाहिए?” बच्चे के विकास के दौरान जहां एक तरफ अचानक नवजात शिशु का वजन बढ़ने से अक्सर माता पिता चौंक जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ बाकी बच्चों के मुकाबले अपने बच्चे का वजन ना बढ़ने पर माता पिता चिंतित हो जाते हैं।

आपकी इस चिंता को दूर करने के लिए इस ब्लॉग में हम आपको शिशु की उम्र के हिसाब से उसके वजन (baby ki age ke hisab se weight) में होने वाले बदलावों से जुड़ी ज़रूरी बातें बता रहे हैं।

जन्म के समय नवजात शिशु का वजन कितना होता है?

(Janm ke samay baby ka weight kitna hota hai)

औसत रूप से जन्म के समय नवजात शिशु का वजन 3.2 किलोग्राम से 3.4 किलोग्राम तक होता है, लेकिन ज्यादातर स्वस्थ नवजात शिशुओं का वजन 2.6 किलोग्राम से 3.8 किलोग्राम तक हो सकता है।

अगर समय पर पैदा होने वाले बच्चे का वजन 2.5 किलोग्राम से कम हो तो उसे कम वजनी बच्चा कहा जाता है। वहीं अगर समय पर पैदा हुए नवजात शिशु का वजन 4 किलोग्राम से ज्यादा हो, तो उसे सामान्य से अधिक वजनी बच्चा कहते हैं। समयपूर्व प्रसव से पैदा होने वाले अधिकांश शिशुओं का वजन सामान्य से कम होता है।

एक वर्ष की उम्र तक हर महीने नवजात शिशु का वजन कितना बढ़ता है?

(Ek sal ki age tak har mahine baby ka weight kitna badhta hai)

  • जन्म के शुरुआती पांच दिन: जन्म लेने के बाद शुरुआती पांच दिनों तक नवजात शिशु का वजन, उसके जन्म के समय के वजन से करीब पांच से दस प्रतिशत कम हो जाता है। ऐसा मुख्य रूप से शिशु के शरीर से मल-मूत्र के जरिए तरल पदार्थों के बाहर निकलने के कारण होता है।

  • पांच दिन से तीन माह की उम्र: इस दौरान हर हफ्ते नवजात शिशु का वजन करीब 225 ग्राम बढ़ता है। आमतौर पर जन्म के दूसरे हफ्ते तक उसके जन्म के शुरुआती पांच दिनों में खोया वजन वापिस बढ़ जाता है। तीन हफ्ते और छह हफ्ते की उम्र में शिशु के वजन में अचानक वृद्धि हो सकती है, जिसे तीव्र वृद्धि का समय या ग्रोथ स्पर्ट (infant growth spurt) कहा जाता है।

  • तीन माह से छह माह की उम्र: तीन से छह माह की उम्र तक नवजात शिशु का वजन हर दो हफ़्तों में करीब 225 ग्राम बढ़ना चाहिए। छह माह का होने तक नवजात शिशु का वजन उसके जन्म के समय के वजन या बर्थवेट का करीब दो गुना हो जाना चाहिए।

  • सात माह से एक वर्ष की उम्र: हालाँकि यह कई चीजों जैसे शिशु के पोषण व सक्रियता आदि पर निर्भर करता है, लेकिन इस दौरान हर महीने नवजात शिशु का वजन करीब 450 ग्राम बढ़ना चाहिए। अपने पहले जन्मदिन तक आपके नवजात शिशु का वजन, उसके बर्थवेट का तीन गुना होना चाहिए।

शिशु का वेट पर्सेंटाइल क्या होता है?

(Baby ka weight percentile kya hota hai)

कई तरह के बेबी ग्रोथ चार्ट, वेट पर्सेंटाइल शब्द का उपयोग करते हैं, जिसे ज्यादातर माता पिता समझ नहीं पाते हैं। असल में वेट पर्सेंटाइल का मतलब यह होता है कि 100 बच्चों में से आपका बच्चा विकास के मामले में कौनसे स्थान पर है।

उदाहरण के तौर पर, अगर आपके बच्चे का वेट पर्सेंटाइल 50 है, तो इसका मतलब है कि 50 बच्चों का वजन उससे कम है और 50 बच्चों का वजन उसके वजन से ज्यादा है। इसलिए 50 पर्सेंटाइल को शिशुओं का औसत वजन भी माना जा सकता है।

कम वेट पर्सेंटाइल से यह तय नहीं होता है कि शिशु का विकास सही तरह से हो रहा है या नहीं, क्योंकि बच्चे का विकास कई बातों जैसे जन्म के समय उसके वजन आदि पर निर्भर करता है।

लड़के शिशु का उम्र के हिसाब से वजन चार्ट : 0-1 वर्ष

(Baby boy ka age ke hisab se weight chart : 0-1 sal)

नीचे दिए गए लड़के शिशु के उम्र के हिसाब से वजन चार्ट में जन्म से लेकर एक साल की उम्र तक हर महीने उसके वजन में वृद्धि को 50 पर्सेंटाइल के साथ ही तीसरे से 97वें पर्सेंटाइल (जिसे सामान्य सीमा या रेंज भी कहते हैं) के साथ दर्शाया गया है। ये औसत वजन चार्ट सही समय पर जन्मे, स्वस्थ शिशुओं के लिए है और इसे सिर्फ एक नमूने (रेफरेंस) की तरह देखें। अगर आपको शिशु के विकास सम्बंधी कोई भी जानकारी चाहिए, तो इस बारे में अपने बच्चे के डॉक्टर से सलाह लें।

लड़के शिशु की उम्र 50 पर्सेंटाइल वजन की सामान्य सीमा या रेंज (तीसरे से 97वां पर्सेंटाइल)
एक महीना 4.4 किलोग्राम 3.4 से 5.7 किलोग्राम
दो महीने 5.2 किलोग्राम 4.4 से 7.0 किलोग्राम
तीन महीने 6.0 किलोग्राम 5.1 से 7.9 किलोग्राम
चार महीने 6.7 किलोग्राम 5.6 से 8.6 किलोग्राम
पांच महीने 7.4 किलोग्राम 6.1 से 9.2 किलोग्राम
छह महीने 7.9 किलोग्राम 6.4 से 9.7 किलोग्राम
सात महीने 8.4 किलोग्राम 6.7 से 10.2 किलोग्राम
आठ महीने 8.9 किलोग्राम 7.0 से 10.5 किलोग्राम
नौ महीने 9.3 किलोग्राम 7.2 से 10.9 किलोग्राम
दस महीने 9.7 किलोग्राम 7.5 से 11.2 किलोग्राम
ग्यारह महीने 10.0 किलोग्राम 7.7 से 11.5 किलोग्राम
बारह महीने/एक वर्ष 10.3 किलोग्राम 7.8 से 11.8 किलोग्राम

लड़की शिशु का उम्र के हिसाब से वजन चार्ट : 0-1 वर्ष

(Girl baby ka age ke hisab se weight chart : 0-1 sal)

नीचे दिए गए लड़की शिशु के उम्र के हिसाब से वजन चार्ट में जन्म से लेकर एक साल की उम्र तक हर महीने उसके वजन में वृद्धि को 50 पर्सेंटाइल के साथ ही तीसरे से 97वें पर्सेंटाइल (जिसे सामान्य सीमा या रेंज भी कहते हैं) के साथ दर्शाया गया है। ये औसत वजन चार्ट सही समय पर जन्मे, स्वस्थ शिशुओं के लिए है और इसे सिर्फ एक नमूने (रेफरेंस) की तरह देखें। अगर आपको शिशु के विकास सम्बंधी कोई भी जानकारी चाहिए तो इस बारे में अपने बच्चे के डॉक्टर से सलाह लें।

लड़की शिशु की उम्र 50 पर्सेंटाइल वजन की सामान्य सीमा या रेंज (तीसरे से 97वां पर्सेंटाइल)
एक महीना 4.2 किलोग्राम 3.2 से 5.4 किलोग्राम
दो महीने 4.8 किलोग्राम 4.0 से 6.5 किलोग्राम
तीन महीने 5.4 किलोग्राम 4.6 से 7.4 किलोग्राम
चार महीने 6.2 किलोग्राम 5.1 से 8.1 किलोग्राम
पांच महीने 6.7 किलोग्राम 5.5 से 8.7 किलोग्राम
छह महीने 7.2 किलोग्राम 5.8 से 9.2 किलोग्राम
सात महीने 7.7 किलोग्राम 6.1 से 9.6 किलोग्राम
आठ महीने 8.1 किलोग्राम 6.3 से 10.0 किलोग्राम
नौ महीने 8.5 किलोग्राम 6.6 से 10.4 किलोग्राम
दस महीने 8.8 किलोग्राम 6.8 से 10.7 किलोग्राम
ग्यारह महीने 9.2 किलोग्राम 7.0 से 11.0 किलोग्राम
बारह महीने/एक वर्ष 9.5 किलोग्राम 7.1 से 11.3 किलोग्राम

एक वर्ष की आयु तक प्रीमैच्योर शिशु का वजन कैसे बढ़ता है?

(Ek sal ka hone tak premature baby ka weight kaise badhta hai)

38 सप्ताह की गर्भावस्था से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं को प्रीमैच्योर शिशु कहा जाता है। समयपूर्व प्रसव से पैदा हुए बच्चों को उनके वजन के हिसाब से दो वर्गों में बांटा जाता है -

  • कम वजन वाले शिशु: जन्म के समय जिन प्रीमैच्योर शिशुओं का वजन 1.6 किलोग्राम से 2.6 किलोग्राम होता है, उन्हें इस वर्ग में रखा जाता है।
  • बेहद कम वजन वाले शिशु: जिन प्रीमैच्योर बच्चों का वजन जन्म के समय 1.6 किलोग्राम से कम होता है, उन्हें इस वर्ग में रखा जाता है।

समयपूर्व पैदा हुए बच्चों को शुरुआत में विशेष देखभाल की ज़रूरत होती है। गर्भ में 32 सप्ताह की आयु तक शिशु दूध पीना नहीं सीखता है, ऐसे में ज्यादा जल्दी पैदा होने वाले शिशु को पेट में एक नली डालकर दूध पिलाया जाता है। सामान्य बच्चों की तरह ही प्रीमैच्योर शिशु का वजन भी जन्म के शुरुआती पांच दिन घटता है और फिर बढ़ने लगता है।

अगर बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है, तो धीरे धीरे उसका वजन बढ़ता रहता है। डॉक्टर प्रीमैच्योर शिशुओं का वजन उस समय के अनुसार मापते हैं, जब उनका जन्म होना चाहिए था। उदाहरण के तौर पर, अगर आपका बच्चा 34वें सप्ताह में पैदा हुआ है, तो डॉक्टरों के अनुसार उसके छह सप्ताह का होने पर उसका वजन सामान्य नवजात शिशु के वजन जितना होना चाहिए।

कई प्रीमैच्योर शिशु एक वर्ष का होने तक वजन के मामले में सामान्य शिशुओं की बराबरी कर लेते हैं, मगर कुछ प्रीमैच्योर शिशुओं को ऐसा करने में डेढ़ से दो साल का समय लग सकता है।

नवजात शिशु का वजन किन चीजों से प्रभावित होता है?

(Newborn baby ka weight par kin cheejo ka asar padta hai)

Newborn baby weight - kin cheejo ka asar

नवजात शिशु का वजन निम्न चीजों (फैक्टर्स) से प्रभावित हो सकता है -

1. गर्भावधि: समय से पहले जन्मे बच्चों का वजन आम शिशुओं से कम होता है, जबकि ड्यू डेट (प्रसव की अनुमानित तिथि) के बाद जन्मे बच्चों का वजन आम बच्चों से ज्यादा होता है।

2. गर्भावस्था के दौरान पोषण: गर्भावस्था में माँ के भोजन का शिशु के वजन पर सीधा प्रभाव पड़ता है। अगर माँ के शरीर में पोषक तत्वों की कमी है, तो जन्म के समय नवजात शिशु का वजन कम होगा, वहीं अगर माँ ज्यादा पोषण ले रही है, तो जन्म के समय शिशु का वजन ज्यादा होगा।

3. गर्भावस्था के दौरान नशा करना: गर्भावस्था के दौरान माँ के धूम्रपान करने, शराब पीने, या ड्रग्स लेने से जन्म के समय नवजात शिशु का वजन कम हो सकता है।

4. गर्भवती के शरीर में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं: माँ को गर्भावस्था में शुगर (gestational diabetes in hindi), हृदयरोग, उच्च रक्तचाप (gestational hypertension in hindi) या मोटापे जैसी बीमारियाँ होने से नवजात शिशु का वजन प्रभावित हो सकता है।

5. आनुवांशिक कारण: जन्म के समय नवजात शिशु का वजन आनुवांशिक कारणों जैसे माता-पिता के जीन्स व जन्म के समय उनके वजन पर भी निर्भर करता है।

6. शिशु का लिंग: शिशु के लिंग का असर उसके वजन पर पड़ता है। आमतौर पर लड़कों का वजन लड़कियों से ज्यादा होता है।

7. गर्भ में बच्चों की संख्या: शिशु को गर्भाशय में विकसित होने के लिए पर्याप्त जगह की आवश्यकता होती है। अगर गर्भ में एक से ज्यादा बच्चे हैं, तो जन्म के समय उनका वजन कम हो सकता है।

8. शिशु का स्वास्थ्य: अगर शिशु को किसी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी (जैसे जन्मजात रोग आदि) है, तो जन्म के समय उसका वजन कम हो सकता है।

शिशु के वजन पर नज़र रखना क्यों ज़रूरी है?

(Baby ka weight check karvate rehna kyun jaruri hai)

नवजात शिशु का वजन उसके शारीरिक और मानसिक विकास के बारे में महत्वपूर्ण संकेत देता है, जिनके जरिए माता पिता व डॉक्टर यह पता लगा सकते हैं, कि बच्चा सामान्य ढंग से बढ़ पा रहा है या नहीं। इसके साथ ही नवजात शिशु का वजन डॉक्टरों को उसके शरीर में किसी भी प्रकार की समस्या होने की स्पष्ट जानकारी देने में भी सहायक होता है। इसलिए बच्चे के वजन की निगरानी करना बेहद ज़रूरी है।

नवजात शिशु का वजन सामान्य से कम बढ़ने के क्या कारण हैं?

(Baby ka weight normal se kam badhne ke kya karan hai)

Newborn baby weight - kam hone ka karan

नवजात शिशु का वजन सामान्य से कम बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ मुख्य कारण निम्न हैं -

  • जन्म के समय नवजात शिशु का वजन सामान्य से कम होना।
  • शिशु का सही तरह से दूध न पी पाना।
  • माँ के स्तनों में कम दूध बनना और पर्याप्त पोषण ना मिल पाना।
  • दूध पीने के बाद शिशु का बार बार उल्टी कर देना।
  • जन्म के समय से ही शिशु का किसी संक्रमण का शिकार होना।
  • बच्चे को जन्मजात समस्याएं जैसे डाउन सिंड्रोम, कटे होंठ आदि होना।
  • शिशु को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जैसे हृदयरोग या पाचनतंत्र की समस्या आदि होना।

नवजात शिशु का वजन सामान्य रूप से ना बढ़ना कई समस्याओं जैसे कुपोषण या शारीरिक समस्या आदि का लक्षण हो सकता है। बच्चे का वजन ना बढ़ने से उसके शारीरिक और मानसिक विकास में बाधा आ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे उसकी बीमारियों से लड़ने की क्षमता पर भी गलत असर पड़ता है। इसलिए अगर आपके नवजात शिशु का वजन सामान्य रूप से नहीं बढ़ रहा है, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

नवजात शिशु का वजन सामान्य से ज्यादा बढ़ने के क्या कारण हैं?

(Baby ka weight normal se jyada badhne ke kya karan hai)

Newborn baby weight - zyada hone ka karan

नवजात शिशु का वजन सामान्य से अधिक बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख कारण निम्न हैं -

  • जन्म के समय नवजात शिशु का वजन ज्यादा होना।
  • शिशु को डायबिटीज या शुगर की समस्या होना।
  • बच्चे को फॉर्मूला दूध (शिशुओं के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया दूध) पिलाना।
  • शिशु का ज्यादा स्तनपान करना।
  • माँ के स्तनों में ज्यादा दूध बनना और शिशु को अतिरिक्त पोषण मिलना।
  • शिशु को जल्दी ठोस आहार खिलाने की शुरुआत करना।

अच्छी तरह स्तनपान करने वाले नवजात शिशु का वजन आमतौर पर जन्म के शुरुआती छह माह तक तेजी से बढ़ता है और फिर उसका वजन बढ़ने की दर कम होने लगती है। कई मामलों में, सामान्य से अधिक वजन वाले बच्चे अन्य बच्चों की तुलना में थोड़ी देर से चलना शुरू करते हैं।

नवजात शिशु का वजन सामान्य से अधिक बढ़ना आमतौर पर कोई चिंताजनक बात नहीं है। लेकिन अगर उसका वजन तेजी से बढ़ रहा है, तो यह किसी शारीरिक समस्या जैसे हॉर्मोन असंतुलन, शुगर आदि का संकेत हो सकता है।

अगर बच्चे का वजन सामान्य से कम या ज्यादा बढ़ रहा है, तो क्या करें?

(Agar baby ka vajan samanya se kam ya jyada badh raha hai, to kya kare)

अगर आप अपने बच्चे के कम या ज्यादा वजन को लेकर चिंतित हैं, तो आपको बच्चों के डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर आपको बच्चे के विकास के बारे में सही तरह से समझा सकेंगे और ज़रूरत पड़ने पर शिशु के लिए डाइट प्लान भी तैयार कर देंगे। जैसे आपको दिन में कितनी बार और किस समय शिशु को स्तनपान करवाना या खाना खिलाना है, आदि।

अगर नवजात शिशु का वजन सामान्य से कम बढ़ रहा है, तो डॉक्टर निम्न उपाय बता सकते हैं -

  • अगर माँ के स्तनों में शिशु के लिए पर्याप्त दूध नहीं बन पा रहा है, तो डॉक्टर शिशु के लिए फॉर्मूला दूध का सुझाव दे सकते हैं। इसके अलावा डॉक्टर माँ के स्तनों में दूध बढ़ाने की दवाई या एक्सरसाइज भी बता सकते हैं।
  • अगर बच्चे को दूध पीने में समस्या आ रही है, तो डॉक्टर माँ को स्तनपान कराने की सही अवस्था व स्तनपान के सही तरीके बता सकते हैं।
  • अगर शिशु किसी शारीरिक समस्या की वजह से पर्याप्त पोषण प्राप्त नहीं कर पा रहा है, तो डॉक्टर उसके इलाज के लिए भी सुझाव दे सकते हैं।

अगर नवजात शिशु का वजन सामान्य से अधिक बढ़ रहा है, तो आमतौर पर डॉक्टर शिशु के खून में शुगर व अन्य ज़रूरी हॉर्मोन्स के स्तर की जाँच करते हैं। अगर सब सामान्य है, तो शिशु के वजन को लेकर चिंतित ना हों। शिशु को शुगर या हॉर्मोन असंतुलन जैसी कोई समस्या होने की स्थिति में डॉक्टर लक्षणों व समस्या की गंभीरता के अनुसार इलाज करते हैं। अगर बच्चा ठोस आहार खाने लगा है, तो डॉक्टर की सलाह से उसके लिए एक डाइट चार्ट तैयार करवा सकते हैं।

अपने बच्चे के उचित शारीरिक व मानसिक विकास के बारे में जानने के लिए आपको उसके वजन पर लगातार नज़र रखनी चाहिए।

जब भी आपको अपने नवजात शिशु का वजन उसकी उम्र के अन्य बच्चों की तुलना में असामान्य रूप से कम या ज्यादा बढ़ता हुआ दिखे, तो इस बारे में डॉक्टर से बात करें, वो आपको उचित सलाह दे सकेंगे। उम्मीद करते हैं, हम इस ब्लॉग के ज़रिए आपको नवजात शिशु के वजन के बारे में सभी ज़रूरी बातों की जानकारी अच्छी तरह से दे पाए हैं। अगर इस बारे में आपके कोई सुझाव हैं, तो उन्हें हमसे साझा करें।

इस ब्लॉग के विषय - जन्म के समय नवजात शिशु का वजन कितना होता है? (Janm ke samay baby ka weight kitna hota hai)एक वर्ष की उम्र तक हर महीने नवजात शिशु का वजन कितना बढ़ता है? (Ek sal ki age tak har mahine baby ka weight kitna badhta hai)शिशु का वेट पर्सेंटाइल क्या होता है? (Baby ka weight percentile kya hota hai)लड़के शिशु का उम्र के हिसाब से वजन चार्ट : 0-1 वर्ष (Baby boy ka age ke hisab se weight chart : 0-1 sal)लड़की शिशु का उम्र के हिसाब से वजन चार्ट : 0-1 वर्ष (Girl baby ka age ke hisab se weight chart : 0-1 sal)एक वर्ष की आयु तक प्रीमैच्योर शिशु का वजन कैसे बढ़ता है? (Ek sal ka hone tak premature baby ka weight kaise badhta hai)नवजात शिशु का वजन किन चीजों से प्रभावित होता है? (Newborn baby ka weight par kin cheejo ka asar padta hai)शिशु के वजन पर नज़र रखना क्यों ज़रूरी है? (Baby ka weight check karvate rehna kyun jaruri hai)नवजात शिशु का वजन सामान्य से कम बढ़ने के क्या कारण हैं? (Baby ka weight normal se kam badhne ke kya karan hai)नवजात शिशु का वजन सामान्य से ज्यादा बढ़ने के क्या कारण हैं? (Baby ka weight normal se jyada badhne ke kya karan hai)अगर बच्चे का वजन सामान्य से कम या ज्यादा बढ़ रहा है, तो क्या करें? (Agar baby ka vajan samanya se kam ya jyada badh raha hai, to kya kare)
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