शिशु का प्राथमिक उपचार: एक कम्प्लीट गाइड (Baby ka prathmik upchar: ek complete guide)

शिशु का प्राथमिक उपचार: एक कम्प्लीट गाइड (Baby ka prathmik upchar: ek complete guide)

हम उम्मीद करते हैं कि आपका बच्चा हमेशा स्वस्थ और खुश रहे, लेकिन उसके नाज़ुक शरीर को विभिन्न कारणों से चोट लग सकती है। ऐसे में आपका यह जानना बहुत ज़रूरी है कि अगर बच्चे को चोट लग जाए तो क्या करें। शिशुओं में स्वास्थ्य संबंधी आपातकालीन स्थिति उत्पन्न होने पर छोटे बच्चों के प्राथमिक उपचार (baby first aid in hindi) की जानकारी उनकी जान बचा सकती है। इस ब्लॉग में हम आपको शिशु के प्राथमिक उपचार या प्राथमिक इलाज के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें बता रहे हैं।

ध्यान दें- यह ब्लॉग आपको शिशुओं के प्राथमिक उपचार (baby ka prathmik upchar) की जानकारी देने के लिए लिखा गया है, लेकिन बच्चे को गंभीर चोट लगने पर आप केवल प्राथमिक उपचार (first aid in hindi) पर निर्भर ना रहें और उसे तुरंत अस्पताल लेकर जाएं या एम्बुलेंस को 108 नम्बर पर फोन करें।

प्राथमिक उपचार क्या होता है?

(Prathmik upchar kya hota hai)

Shishu ka prathmik upchar- kya hota hai

किसी व्यक्ति को किसी प्रकार की चोट लगने या बीमार होने पर मैडिकल मदद (एम्बुलेंस या अस्पताल) पहुंचने से पहले प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा दिया जाने वाला उपचार, प्राथमिक उपचार (first aid in hindi) कहलाता है। यह गंभीर हालातों में रोगी की हालत को ज्यादा बिगड़ने से बचाता है और उसके जीवन की रक्षा करता है। मगर अप्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा दिया गया प्राथमिक उपचार रोगी के लिए हानिकारक हो सकता है, इसलिए बिना जानकारी के किसी को प्राथमिक उपचार (first aid in hindi) ना दें।

शिशु का प्राथमिक उपचार कैसे करें?

(Baby ka prathmik upchar kaise kare)

छोटे बच्चों की प्राथमिक चिकित्सा (baby ki prathmik chikitsa) बड़ों की प्राथमिक चिकित्सा से थोड़ी अलग होती है, क्योंकि उनका शरीर बहुत नाज़ुक होता है और उन्हें खास देखभाल की ज़रूरत होती है। नीचे हम आपको विभिन्न स्थितियों में शिशु के प्राथमिक उपचार की जानकारी दे रहे हैं-

1. छोटे बच्चे के सिर में चोट लगने पर प्राथमिक उपचार कैसे करें?

(Bache ke sir me chot lagne ka prathmik upchar kaise kare)

Shishu ka prathmik upchar- chot lagne par

छोटे बच्चों के सिर में चोट लगना बेहद आम है, क्योंकि उनका सिर उनके बाकी शरीर की तुलना में थोड़ा बड़ा होता है और इस वजह से वो अपना सिर संतुलित नहीं रख पाते। दो फुट से ज्यादा ऊंचाई से गिरने पर या वाहन दुर्घटना में शिशु के सिर या गर्दन में चोट लग सकती है। बच्चे के सिर में चोट लगने पर इन लक्षणों पर नज़र डालें-

  • अगर बच्चे के नाक या कान से खून या अन्य द्रव निकल रहा है।
  • बच्चा बेहोश है।
  • शिशु को मिर्गी का दौरा पड़ा है।
  • शिशु की आंख या कान के पास नील (आंतरिक रक्तस्राव) हो गयी है।
  • बच्चा सुस्त हो गया है।

अगर बच्चे में इनमें से कोई भी लक्षण नजर आए तो तुरंत एम्बुलेंस को कॉल करें या उसे नज़दीकी हॉस्पिटल लेकर जाएं। प्राथमिक उपचार (baby ka prathmik upchar) करते समय शिशु के सिर को हिलाएं नहीं, इससे उसे ज्यादा चोट लगने की आशंका होती है। अगर सिर से खून बह रहा है, तो घाव को एक साफ गौजपट्टी या कपड़े से हल्के हाथों से दबाकर खून रोकें।

2. शिशु की आँख में चोट लगने का प्राथमिक उपचार कैसे करें?

(Bache ki ankh me chot lagne ka prathmik upchar kaise kare)

Shishu ka prathmik upchar- aankh me chot lagne par

शिशु की आँख में किसी भी प्रकार की चोट लगने पर उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। अगर शिशु की आँख में मिट्टी, रँग, तेल, या कोई अन्य हानिकारक पदार्थ चला गया है, तो प्राथमिक उपचार (baby ka prathmik upchar) के रूप में आँख को साफ ठंडे (सामान्य) पानी से पांच से दस मिनट तक धोएं। इससे हानिकारक पदार्थ आँख से बाहर निकल सकता है। शिशु की आँख में चोट लगने पर निम्न हरकतें ना करें-

  • शिशु की आँख रगड़ना या मसलना
  • छोटे बच्चे की आँख में दवाई डालना
  • शिशु की आँख में चुभी वस्तु को खुद निकालना

शिशु की आँख में किसी भी प्रकार की चोट लगने पर उसे तुरंत डॉक्टर के पास लेकर जाएं।

3. शिशु की त्वचा पर चोट का प्राथमिक उपचार कैसे करें?

(Baby ki skin me chot lagne ka prathmik upchar kaise kare)

Shishu ka prathmik upchar- skin me chot lagne par

शिशु की त्वचा के हल्के घावों का घर पर ही उपचार (first aid in hindi) किया जा सकता है, लेकिन गहरे घाव होने पर शिशु को सावधानीपूर्वक तुरंत अस्पताल लेकर जाएं।

  • शिशु की त्वचा पर हल्का घाव या खरोंच लगने की प्राथमिक चिकित्सा- अगर त्वचा पर केवल खरोंच लगी है, जो ज्यादा गहरी नहीं है, तो प्रभावित जगह को ठंडे पानी व बच्चों के साबुन से अच्छी तरह धोएं और वहां बैंडेज या एंटीबायोटिक क्रीम (डॉक्टर की सलाह से बच्चे के लिए खरीदी हुई) लगाएं। घाव को साफ रखें और रोज़ बैंडेज बदलें, ताकि बच्चा इसे हटाकर निगल ना जाये। अगर खरोंच की जगह लाल हो गयी है या वहां से पस निकल रहा है या बच्चे के बुखार है तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।
  • शिशु की त्वचा पर आंतरिक रक्तस्राव होने (नील पड़ना) की प्राथमिक चिकित्सा- शिशु की नसें क्षतिग्रस्त होने की वजह से उसकी त्वचा में आंतरिक रक्तस्राव होता है, जिसे आम भाषा में नील पड़ना भी कहते हैं। आंतरिक रक्तस्राव वाली जगह शुरुआत में लाल या बैंगनी दिखती है और बाद में नीली या हरी-पीली हो सकती है। नील से प्रभावित जगह पर एक नर्म कपड़े में बर्फ़ लपेटकर लगाएं, इससे दर्द, सूजन और रक्तस्राव कम होता है। अगर आंतरिक रक्तस्राव सिर, पेट या चेहरे पर हुआ है, तो बच्चे को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं। इसके अलावा अगर बच्चे का आंतरिक रक्तस्राव व उसकी सूजन कम नहीं हो रही, तो बच्चे को जल्द से जल्द डॉक्टर के पास ले जाएं, यह गम्भीर हो सकता है।
  • शिशु की त्वचा पर गहरा घाव होने की प्राथमिक चिकित्सा- अगर घाव ज्यादा गहरा है, तो तुरंत 108 नम्बर पर एम्बुलेंस को कॉल करें या शिशु को तुरंत अस्पताल लेकर जाएं। इस स्थिति में प्राथमिक उपचार के रूप में एक गौजपट्टी या साफ कपड़े से शिशु के घाव को हल्के हाथों से दबाकर रखें, इससे उसका ज्यादा खून नहीं बहेगा या खून बहना बंद हो जाएगा। अगर प्रभावित अंग ऊपर उठाया जा सकता है, तो उसे बच्चे के स्तर से ऊपर उठाएं, इससे खून बहना कम हो सकता है। अगर कोई नुकीली चीज जैसे कील आदि शिशु की त्वचा में ज्यादा गहराई तक घुसी है, तो उसे बाहर ना निकालें, इससे बच्चे का ज्यादा खून बहने की आशंका होती है। एम्बुलेंस का इंतज़ार करें या हो सके बच्चे को तुरंत अस्पताल लेकर जाएं और रास्ते में त्वचा में घुसी वस्तु को हिलने ना दें।

4. शिशु का दम घुटने का प्राथमिक उपचार कैसे करें?

(Shishu ka dam ghutne ka prathmik upchar kya hai)

Shishu ka prathmik upchar- dum ghutne par

निम्नलिखित स्थितियों में तुरंत 108 नम्बर पर एम्बुलेंस को फोन करें-

  • अगर बच्चा बेहोश है।
  • उसके गले में कुछ अटका होने की वजह से शिशु साँस नहीं ले पा रहा है।
  • बच्चा अटक अटक कर साँस ले रहा है।
  • शिशु किसी भी प्रकार की आवाज़ नहीं कर पा रहा, ना ही बोल व रो पा रहा है।
  • शिशु का शरीर व चेहरा नीला पड़ रहा है।
  • शिशु गला पकड़ रहा है।
  • बच्चा घबराया हुआ दिख रहा है।

बेहोश शिशु का दम घुटने या साँस ना आने की स्थिति में उसे कृत्रिम साँसें (CPR in hindi) दी जानी बहुत ज़रूरी है। इसके अलावा अगर आपको लगता है कि बच्चे के गले में कुछ अटक गया है और बच्चा होश में है, तो प्राथमिक उपचार (baby ka prathmik upchar) के निम्न चरण अपनाएं-

  • बच्चे को सही अवस्था में लिटाएं- शिशु को अपने हाथ में पेट के बल लेटने वाली अवस्था में पकड़ें (मुँह नीचे की ओर)। बच्चे का सिर उसके धड़ से थोड़ा नीचे रखें।
  • शिशु की पीठ पर थपकी मारें- शिशु के कंधे की हड्डियों के बीच में अपनी एक हथेली से पांच बार हल्की थपकी मारें। हर थपकी के बीच 2 सैकण्ड का अंतराल रखें।
  • बच्चे को पलटें- अब शिशु को पीठ के बल लेटने वाली अवस्था में पलटें, इस दौरान उसकी गर्दन व सिर को सहारा दें। शिशु का मुंह खोलकर देखें कि अटकी हुई चीज बाहर आई या नहीं, अगर शिशु के गले में कुछ अटका हुआ है तो उसे अपनी छोटी उंगली के सहारे से धीरे धीरे बाहर निकाल लें। अगर शिशु के गले में अटकी वस्तु बाहर नहीं आई, तो अगला चरण अपनाएं।
  • शिशु की छाती दबाएं- अपने हाथ की दो या तीन उंगलियाँ शिशु की छाती के बीच में रखें और हर दो सैकेंड के अंतराल पर पांच बार दबाएं। शिशु की पीठ थपथपाने व छाती दबाने की प्रक्रिया तब तक जारी रखें, जब तक या तो उसके गले में अटकी चीज बाहर निकल जाए या बच्चा बेहोश हो जाए। शिशु का मुँह खोलकर एक बार देखें कि उसके गले में कुछ अटका हुआ दिखाई दे रहा है या नहीं। अगर कुछ अटका दिखाई दे रहा है, तो एक चिमटी की सहायता से उसे बाहर निकाल लें। अगर कुछ साफ दिखाई नहीं दे रहा, तो ज़बरदस्ती शिशु के गले में उंगली ना डालें, इससे वस्तु उसके गले में ज्यादा गहराई तक जा सकती है।

5. शिशु के जलने पर प्राथमिक उपचार कैसे करें?

(Baby ke jalne ka prathmik upchar kya hai)

Shishu ka prathmik upchar- jalne par

शिशुओं की त्वचा गर्मी के प्रति हमारी तुलना में बहुत ज्यादा संवेदनशील होती है और बहुत जल्दी जल सकती है। शिशु के जलने को तीन श्रेणियों में बांटा गया है-

  • प्रथम डिग्री (त्वचा की लालिमा)
  • द्वितीय डिग्री (त्वचा पर फफोले पड़ना)
  • तृतीय डिग्री (त्वचा पूरी तरह जलकर काली होना)

अगर आपका बच्चा जल गया है, तो उसकी प्राथमिक चिकित्सा (baby ki prathmik chikitsa) के लिए निम्न चरण फॉलो करें-

  • बच्चे को खतरे से दूर हटा लें और जले हुए अंग को ठंडे पानी में डाल दें (अगर आपका बच्चा बिजली की वजह से जला है, तो ऐसा ना करें)। मगर जली हुई त्वचा पर बर्फ ना लगाएं, इससे त्वचा को और ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है।
  • बिजली से जलने पर (जैसे किसी स्विच में लोहे की चीज डालने से करंट लगना या कोई बिजली का उपकरण मुँह में लेने से करंट लगना) जले हुए अंग पर पानी ना डालें, इसके बजाय इसे एक साफ कपड़े से ढँक दें। बिजली से जलने के घाव भले ही हल्के या छोटे नज़र आएं लेकिन ये बेहद गंभीर हो सकते हैं।
  • बच्चे की त्वचा से कपड़े हटा दें, अगर कोई कपड़ा जली हुई त्वचा से चिपक गया है, तो उसे ज़बरदस्ती ना हटाएं। चिपके हुए कपड़े के आसपास से बाकी कपड़े को कैंची से काटकर हटा दें।
  • जले हुए अंग को एक साफ गौजपट्टी या कपड़े से ढीला ढीला ढँक दें, इससे दर्द कम होगा और संक्रमण की आशंका भी कम होती है।
  • जले हुए अंग पर कोई क्रीम नहीं लगाएं, इससे त्वचा से गर्मी बाहर नहीं निकल पाती और बहुत तेज़ जलन होती है।
  • घाव पर घी, ग्रीज़, बटर या हल्दी पाउडर लगाने जैसे घरेलू उपाय बिल्कुल ना अपनाएं, इनसे घाव नहीं भरता, बल्कि उसमें संक्रमण हो सकता है।
  • शिशु के गंभीर रूप से (द्वितीय व तृतीय डिग्री) जलने पर तुरंत एम्बुलेंस को 108 नम्बर पर फोन करें या उसे जल्दी अस्पताल लेकर जाएं। गंभीर रूप से जलने पर शिशु के शरीर में पानी की कमी हो सकती है और उसे साँस लेने में परेशानी हो सकती है। जले हुए अंग को बहते पानी में ठंडा करने के बाद, एक साफ कपड़े से ढँक दें और बच्चे को डॉक्टर को दिखाएं।
  • घर में रखे पेंट रिमूवर, टॉयलेट क्लीनर, तेज़ाब जैसे कैमिकल्स की वजह से शिशु के जलने पर तुरंत एम्बुलेंस को कॉल करें और एम्बुलेंस आने तक प्रभावित अंग को बहते हुए ठंडे पानी में भिगोएं। अगर संभव है, तो शिशु के शरीर से कैमिकल लगे सभी कपड़े हटा दें।

6. बच्चे के ज़हरीला पदार्थ खाने पर प्राथमिक उपचार कैसे करें?

(Bache ke jahar khane ka prathmik upchar kaise kare)

Shishu ka prathmik upchar- poison

अपने फोन में नेशनल पॉइजन कन्ट्रोल सेंटर के ये नम्बर सेव करके रखें-

  • 1800116117 (टोल फ्री- AIIMS)
  • 011-26589391 (AIIMS)
  • 011-26593677 (AIIMS)

अगर आपको लगता है कि बच्चे ने कोई ज़हरीला पदार्थ (जैसे कीटनाशक, कोई दवाई आदि) खा लिया है, तो तुरंत एम्बुलेंस को कॉल करें और ऊपर दिये गए नम्बरों पर कॉल करके बच्चे की स्थिति के बारे में विशेषज्ञों से सलाह लें। अगर आपको पता है कि बच्चे ने क्या खाया है, कब खाया है और कितना खाया है, तो डॉक्टर्स को बताएं, इससे उसके इलाज में बहुत मदद मिलेगी। विशेषज्ञ आपको बताएंगे कि कौनसा ज़हर खाने पर आप किस प्राथमिक उपचार (first aid in hindi) से एम्बुलेंस आने तक बच्चे को सुरक्षित रख सकती हैं। अगर शिशु उल्टी कर रहा है, तो उसे एक करवट से लिटा दें, ताकि उसकी साँस ना अटके। बच्चे की थोड़ी सी उल्टी, जांच के लिए एक डिब्बी में रख लें, इससे डॉक्टर पता लगा लेंगे कि बच्चे ने क्या खाया है, जिससे उसकी जान बचाने में आसानी होगी।

शिशु का प्राथमिक उपचार क्यों ज़रूरी है?

(Navjat shishu ka prathmik upchar kyun jaruri hai)

किसी के घायल होने पर किया जाने वाला प्राथमिक उपचार (first aid in hindi) उसकी ज़िन्दगी बचाने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसी स्थिति में शिशु की प्राथमिक चिकित्सा (baby ka prathmik upchar) बहुत ज़रूरी है, क्योंकि-

  • इससे शिशु की हालत को और बिगड़ने से रोका जा सकता है और उसकी जान बचाई जा सकती है।
  • शिशु का प्राथमिक उपचार यह सुनिश्चित करता है कि दुर्घटना के बाद डॉक्टर्स के पहुँचने से पहले उसकी सही देखभाल हो सके।
  • अगर शिशु को सही प्राथमिक उपचार दिया जाए, तो वह जल्दी ठीक हो सकता है।

छोटे बच्चे बहुत जिज्ञासु होते हैं और अक्सर चीजें मुँह में डाल लेते हैं या गिर जाते हैं, इसलिए उन्हें चोट लगना बेहद सामान्य है। ऐसे में आपको शिशुओं के प्राथमिक उपचार (baby ka prathmik upchar) की जानकारी होनी चाहिए, इससे आपातकालीन स्थिति में आप अपने बच्चे को सुरक्षित रख पाएंगे। ब्लॉग में बताई गई प्राथमिक चिकित्सा (first aid in hindi) सम्बंधी बातों का ध्यान रखें और अगर संभव हो, तो किसी विशेषज्ञ से बच्चों की प्राथमिक चिकित्सा की जानकारी लें।

इस ब्लॉग के विषय- प्राथमिक उपचार क्या होता है? (Prathmik upchar kya hota hai)शिशु का प्राथमिक उपचार कैसे करें? (Baby ka prathmik upchar kaise kare)1. छोटे बच्चे के सिर में चोट लगने पर प्राथमिक उपचार कैसे करें? (Bache ke sir me chot lagne ka prathmik upchar kaise kare)2. शिशु की आँख में चोट लगने का प्राथमिक उपचार कैसे करें? (Bache ki ankh me chot lagne ka prathmik upchar kaise kare)3. शिशु की त्वचा पर चोट का प्राथमिक उपचार कैसे करें? (Baby ki skin me chot lagne ka prathmik upchar kaise kare)4. शिशु का दम घुटने का प्राथमिक उपचार कैसे करें? (Shishu ka dam ghutne ka prathmik upchar kya hai)5. शिशु के जलने पर प्राथमिक उपचार कैसे करें? (Baby ke jalne ka prathmik upchar kya hai)6. बच्चे के ज़हरीला पदार्थ खाने पर प्राथमिक उपचार कैसे करें? (Bache ke jahar khane ka prathmik upchar kaise kare)शिशु का प्राथमिक उपचार क्यों ज़रूरी है? (Navjat shishu ka prathmik upchar kyun jaruri hai)
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