बच्चा चलना कैसे सीखता है और इससे जुड़ी अन्य ज़रूरी बातें (Bacha chalna kaise sikhta hai or isse judi kuch anya jaruri bate)

बच्चा चलना कैसे सीखता है और इससे जुड़ी अन्य ज़रूरी बातें (Bacha chalna kaise sikhta hai or isse judi kuch anya jaruri bate)
माँ-बाप को अपने बच्चे को बढ़ते हुए देखने से ज्यादा सुकून, किसी और चीज़ में नहीं मिलता है। नवजात शिशु का विकास (child development in hindi) कभी धीरे तो कभी तेजी से (ग्रोथ स्पर्ट्स के ज़रिए) होता है और वह नई नई चीजें सीखता रहता है। शिशु का चलना उसके विकास (bache ka vikas) का एक अहम पड़ाव होता है। अक्सर माता पिता के मन में यह सवाल होता है कि, "बच्चा चलना कब शुरू करेगा?" इस ब्लॉग में इसी सवाल का जवाब देते हुए, हम आपको बच्चे के चलने से जुड़ी सभी अहम जानकारियाँ दे रहे हैं। बच्चा चलना कब शुरू करता है? (Bacha chalna kab shuru karta hai) प्रीमैच्योर बच्चे चलना कब शुरू करते हैं? (Premature baby chalna kab shuru karte hai) बच्चा चलना कैसे सीखता है? (Bacha chalna kaise sikhta hai) आप अपने बच्चे की चलने में मदद कैसे कर सकते हैं? (Aap apne bache ki chalne me madad kaise kar sakte hai) बच्चे के देर से चलने के क्या कारण होते हैं? (Bacha der se kyun chalta hai) बच्चे को चलने में देरी होने पर डॉक्टर के पास कब लेकर जाएँ? (Bache ko chalne me deri hone par doctor ke pas kab lekar jaye) क्या बच्चे के लिए वॉकर खरीदना चाहिए? (Kya baby ke liye walker kharidna chahiye) क्या बच्चों के चलने से उनके व्यक्तित्व का पता लगा सकते हैं? (Kya bacho ke chalne se unke vyaktitva ka pata laga sakte hai) बच्चों के जूते कैसे खरीदें? (Bacho ke jute kaise kharide) बच्चा चलना कब शुरू करता है? (Bacha chalna kab shuru karta hai) ज्यादातर बच्चे आठ से सोलह महीने की उम्र में चलना शुरू कर देतें हैं। अगर आपका बच्चा इस समय तक चलना शुरू नहीं करता है, तो चिंता ना करें, यह बिल्कुल सामान्य है। हर बच्चा अलग तरीके से बढ़ता है, ऐसे में कुछ बच्चे इससे जल्दी या देर से भी चल सकते हैं। जन्म के बाद पहले साल में शिशु अपने शरीर की मांसपेशियों को नियंत्रित करना सीखता है। सबसे पहले वह करवट लेना सीखता है, उसके बाद बैठना, फिर घुटनों के बल चलना सीखता है। छह महीने से दस महीने की उम्र के बीच में ज्यादातर बच्चे चीजों (टेबल, अलमारी, कुर्सी, बेड आदि) को पकड़ कर खड़ा होना सीख लेते हैं। एक बार खड़ा होना सीख लेने के बाद, बच्चा कभी भी बिना सहारे के चलना शुरू कर सकता है। प्रीमैच्योर बच्चे चलना कब शुरू करते हैं? (Premature baby chalna kab shuru karte hai) आमतौर पर प्रीमैच्योर बच्चे (premature baby in hindi) उसी समय चलना शुरू करते हैं, जब सामान्य बच्चे चलने की शुरुआत करते हैं। कभी कभी वो थोड़ी देर से चलते हैं, लेकिन अगर शिशु सामान्य रूप से बढ़ रहा है, तो इस बारे में चिंता ना करें। समय से पहले पैदा हुए बच्चों (प्रीमैच्योर बच्चों) के विकास (premature baby development in hindi) के लिए डॉक्टर एडजस्टेड एज (व्यस्थित की गई उम्र) का उपयोग करते हैं। उदाहरण के लिए, अगर बच्चा प्रसव की अनुमानित तिथि (ड्यू डेट) से दो महीने पहले पैदा हुआ है, तो डॉक्टर उसकी उम्र में से दो महीने घटाकर उसके विकास का पता लगाते हैं। यानी एक साल का होने पर, प्रीमैच्योर शिशु का विकास दस महीने के सामान्य बच्चे जितना होना चाहिए। बच्चा चलना कैसे सीखता है? (Bacha chalna kaise sikhta hai) अपना पहला कदम रखने के बहुत पहले से ही बच्चा चलना शुरू करने की तैयारी करने लगता है। नीचे हम आपको इस प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बता रहे हैं -
  • जन्म से लेकर दो महीने का होने तक - जन्म से ही आपका बच्चा पैर चलाता रहता है, जैसे किसी को लात मार रहा है। उसे पैर के नीचे कुछ भी महसूस होने पर, वह उसे पैरों से दूर धकेलने की कोशिश करता है। असल में वह चलने के लिए ऐसा नहीं करता है, बल्कि यह आदत वह माँ के पेट से ही सीख कर आता है। इससे उसके पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
  • दो महीने से लेकर पांच महीने का होने तक - दो से पांच महीने के बीच में शिशु पेट के बल लेटकर अपना सिर ऊपर उठाना सीख जाता है। जैसे जैसे शिशु का विकास (navjat shishu ka vikas) होता रहता है, वैसे वैसे उसकी मांसपेशियों के बीच तालमेल बनने लगता है। इस दौरान शिशु करवट लेना भी सीख सकता है।
  • पांच महीने से आठ महीने का होने तक - अगर आप पांच महीने के शिशु के पैर अपनी जाँघों पर रखकर उसे खड़ा करेंगे, तो वह इस तरह उछलता है, मानो बार बार बैठने और खड़े होने की कोशिश कर रहा है। अगले कुछ महीनों तक इस तरह उछलना, बच्चे का पसंदीदा खेल बना रहता है। इससे बच्चे के पैर मजबूत होते हैं और वह संतुलन बनाना सीखता है।इस दौरान शिशु बिना सहारे के बैठना और घुटनों के बल चलना सीख सकता है। इन गतिविधियों से उसके हाथ, पींठ, गर्दन व पैरों की मांसपेशियां मजबूत होने लगती हैं, जो कि चलने के लिए बेहद ज़रूरी है।
  • आठ महीने से दस महीने का होने तक - आठ महीने का होने तक ज्यादातर शिशु घुटनों के बल चलने लगते हैं और चीजों को पकड़ कर खुद को खड़ा करने की कोशिश करते हैं। जैसे अगर आप बच्चे को टेबल के पास बैठा देते हैं, तो वह टेबल को पकड़ कर खड़ा होने की कोशिश करने लगता है। इसके अलावा कई बार बच्चे अपने माता पिता के पैरों को पकड़ कर भी खड़े हो जाते हैं, ये वाक़ई बहुत प्यारा एहसास होता है!
एक बार खड़ा होना सीखने के बाद बच्चे चीजों को पकड़-पकड़ कर चलना सीखते हैं, जिसे क्रूज़िंग कहते हैं। एक बार क्रूज़िंग शुरू कर देने के बाद बच्चा कभी भी बिना सहारा लिए चलना शुरू कर सकता है।
  • नौ महीने से एक साल का होने तक - नौ से दस महीने का होने पर शिशु अपने घुटनों को मोड़ना सीखता है और खड़ा होने के बाद खुद बैठने की कोशिश करता है। आपको सुनने में यह बहुत आसान लग रहा है ना? लेकिन नन्हें शिशु के लिए ये बहुत मुश्किल होता है जनाब!11 महीने का होने तक बच्चा बिना सहारे के बैठ कर व सहारे से खड़ा होकर चल सकता है। 12 महीने का होने तक वह आपका हाथ पकड़ कर चलना शुरू कर सकता है। हालाँकि अभी बच्चे को अपने आप चलने में थोड़ा समय और लग सकता है।
    • एक साल का होने के बाद - 13 महीने का होने पर, आपका बच्चा खुद चलने की शुरुआत कर सकता है। लेकिन अभी वह खुद को पूरी तरह संभालना नहीं सीख पाया है, इसलिए इस समय उसके चलते चलते गिरने की संभावना ज्यादा होती है।अगर आपके बच्चे ने अभी तक क्रूज़िंग करना (चीजों को पकड़ कर चलना) नहीं छोड़ा है, तो हो सकता है कि अभी उसे बिना सहारे के चलने में थोड़ा समय और लगे। कुछ बच्चे 17 या 18 महीने के होने तक ठीक से चलना सीख पाते हैं।
आप अपने बच्चे की चलने में मदद कैसे कर सकते हैं? (Aap apne bache ki chalne me madad kaise kar sakte hai) बच्चे का चलना सीखना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, ऐसे में आपके मन में अपने बच्चे की मदद का खयाल ज़रूर आता होगा। आप निम्न तरीकों से चलना सीखने में अपने बच्चे की मदद कर सकते हैं -
  1. बच्चे पर विश्वास करें - आपके बच्चे की मदद करने का सबसे बेहतर तरीका यही है, कि आप उसे उसके हिसाब से बढ़ने दें। उस पर जबरदस्ती चलने या खड़े होने का दबाव ना बनाएं, इससे वह तनावग्रस्त हो सकता है। वह जब भी कुछ नया करने की कोशिश करे, तो उसका उत्साह बढ़ाएं और उसे नई चीजें सीखने के लिए प्रेरित करें।
    1. प्राकृतिक रूप से शिशु का विकास होने दें - बच्चे को विकास की सीढ़ी पर खुद चढ़ने दें, क्योंकि विकास का हर चरण अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण है। जैसे अगर बच्चा खुद बैठना नहीं सीखेगा, तो वह चलना भी नहीं सीख पाएगा, ऐसे ही, खुद करवट लेना सीखे बिना वह बैठना भी नहीं सीख पाएगा।
खड़ा होना सीखने के बाद शुरुआत में बच्चे को खुद वापिस बैठने में परेशानी होती है, क्योंकि उसे वापिस बैठना नहीं आता है। ऐसे में अगर बच्चा खड़ा होकर वापिस बैठने के लिए रोने लगे, तो जाकर उसे गोद में ना उठाएं। इसके बजाय उसे पकड़ें और उसके घुटनों को अपने हाथों के सहारे से मोड़कर उसे बैठना सिखाएं। धीरे धीरे वह खुद बैठना सीख जाएगा।
  1. बच्चे को प्रेरित करें - आप बच्चे को चलने के लिए प्रेरित करके चलना सीखने में उसकी मदद कर सकते हैं। बच्चे से थोड़ी दूर जाकर घुटनों के बल हाथ फैलाकर बैठ जाएं (बिल्कुल शाहरुख खान के अंदाज़ में!) और बच्चे को आवाज़ देकर अपने पास बुलाएं। इससे वह चलने के लिए प्रेरित होगा।
  1. बच्चे को हाथ पकड़कर चलाएँ - अगर आपका बच्चा चीज़ों को पकड़ पकड़ कर चलता है, तो आप उसे हाथ पकड़ कर थोड़ी दूर तक चला सकते हैं। उसे बीच बीच में बिना हाथ पकड़े चलने के लिए प्रेरित करें। मगर इस दौरान उसके इतने पास खड़े रहें, कि अगर वह लड़खड़ाए तो आप उसे गिरने से रोक सकें।
  1. बच्चे को धकेलने वाले खिलौने दें - आपका बच्चा जब घर में क्रूज़िंग (चीज़ों को पकड़ कर चलना) करना शुरू कर दे, तो उसे ऐसे खिलौने दें, जिन्हें वह खड़ा होकर धकेल सके। कोई बड़ा बॉक्स (जैसे कम्प्यूटर, मिक्सर आदि का बॉक्स) बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित होता है, क्योंकि इससे उसे चोट लगने का खतरा कम होता है। बच्चा धकेलने वाले खिलौनों के ज़रिए चलना सीख सकता है।
बच्चे के देर से चलने के क्या कारण होते हैं? (Bacha der se kyun chalta hai) शिशु को चलने में कई कारणों से देरी हो सकती है, जिनमें से कुछ प्रमुख कारण नीचे दिए गए हैं -
  • अगर बच्चे का वजन ज्यादा है, तो वह सामान्य या कम वजन वाले बच्चों की तुलना में थोड़ी देरी से चलना सीखता है।
  • शरीर की मांसपेशियों पर सही तरह से नियंत्रण विकसित ना हो पाने के कारण बच्चे को चलने में देरी हो सकती है।
  • अगर बच्चे के पैरों के तलवे सपाट (भरे हुए) हैं, तो उसे खड़ा होने में समस्या हो सकती है, जिसकी वजह से उसे चलने में देरी हो सकती है।
  • बच्चे के बाहर की तरफ मुड़े हुए पैरों की वजह से उसे चलना सीखने में सामान्य से ज्यादा समय लग सकता है।
  • बीमार होने की वजह से भी बच्चे को चलना सीखने में देरी हो सकती है। जैसे कान का संक्रमण होने पर शिशु को मांसपेशियों पर नियंत्रण सीखने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है।
  • बच्चे को हमेशा गोद में लेकर घूमने से भी उसे चलना सीखने में देरी हो सकती है।
  • कई बार बच्चे को आराम करना ज्यादा पसंद होता है और इस वजह से वह चलना सीखने में देरी करता है।
  • इसके अलावा रिकेट्स (rickets in hindi) नामक एक बीमारी की वजह से भी बच्चे को चलना सीखने में देरी हो सकती है।
बच्चे को चलने में देरी होने पर डॉक्टर के पास कब लेकर जाएँ? (Bache ko chalne me deri hone par doctor ke pas kab lekar jaye)   अगर बच्चे को चलने में थोड़ा ज्यादा समय लग रहा है, तो चिंता ना करें, धीरे धीरे वह इस कला में माहिर हो जाएगा। लेकिन निम्न स्थितियों में उसे तुरंत डॉक्टर के पास लेकर जाएं -
  • अगर 12 महीने का होने पर भी शिशु चीजों को पकड़ कर (या सहारे से) खड़ा नहीं हो पाता है।
  • अगर शिशु 18 महीने का होने के बावजूद चल नहीं सकता है।
  • अगर शिशु दो साल का होने पर भी अच्छी तरह (बिना लड़खड़ाए) चल नहीं सकता है।
क्या बच्चे के लिए वॉकर खरीदना चाहिए? (Kya baby ke liye walker kharidna chahiye) इसका एक ही जवाब है; नहीं! विशेषज्ञों के अनुसार वॉकर का उपयोग करने से बच्चे को चलना सीखने में कोई सहायता नहीं मिलती है। इसके बजाय, वॉकर का उपयोग करने से बच्चे के पैरों की मांसपेशियों का उचित विकास होने में भी देरी हो सकती है। वॉकर पर बच्चा बैठी हुई अवस्था में रहता है, जिससे उसके कूल्हों की मांसपेशियां ढंग से मजबूत नहीं बन पाती हैं और उसे चलना सीखने में देरी हो सकती है। इसके अलावा वॉकर को पैरों से धक्का देकर बच्चा कई बार तेजी से आगे जाता है, इससे उसे चोट लगने की आशंका बढ़ जाती है। हर साल कई बच्चे इस खिलौने की वजह से चोटिल हो जाते हैं, इसलिए अपने बच्चे की सुरक्षा और उचित विकास के लिए उसे वॉकर ना दें। क्या बच्चों के चलने से उनके व्यक्तित्व का पता लगा सकते हैं? (Kya bacho ke chalne se unke vyaktitva ka pata laga sakte hai) कुछ लोग मानते हैं, कि जल्दी चलने वाले बच्चों की रुचि खेलने में होती है और बड़े होकर वो अच्छे खिलाड़ी बनते हैं। हालांकि इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। लेकिन कुछ विशेषज्ञ कहते हैं, कि जो बच्चे जल्दी चलते हैं, वो आगे चलकर जोखिम उठाने वाले बनते हैं और जो बच्चे देरी से चलते हैं, वो आगे चलकर हर काम सोच समझकर कर करते हैं। जल्दी चलने वाले बच्चे बहुत ज्यादा जिज्ञासु होते हैं और हर चीज के बारे में जानना चाहते हैं। उन्हें जैसे ही पता चलता है कि, वो चल भी सकते हैं, तो वो चलने की कोशिशें शुरू कर देते हैं। ऐसे बच्चे अपने बार बार गिरने की रत्ती-भर भी परवाह नहीं करते हैं। इसके विपरीत, देरी से चलने वाले बच्चे बहुत सोच-विचार करने वाले होते हैं। ऐसे बच्चे कुछ भी नया करने से पहले आश्वस्त हो जाना चाहते हैं, कि वो इसे सफलतापूर्वक कर सकते हैं। इसलिए वो इंतज़ार करते हैं, फिर चलना सीखते हैं और संभल-संभल कर कदम रखते हैं। बच्चों के जूते कैसे खरीदें? (Bacho ke jute kaise kharide) ज्यादा लोग बच्चे के एक बार चलना शुरू करने के बाद उसे जूते पहनाना ज़रूरी समझने लगते हैं। अगर हो सके, तो घर के अंदर शिशु को जूते ना पहनाएं। इससे उसके पैर चिकनी सतह पर फिसलेंगे नहीं और उसे चलना सीखने में आसानी होगी। मगर, बच्चे को बाहर ले जाते समय जूते पहनाना ज़रूरी है। इसलिए नीचे बच्चों के जूते खरीदने से जुड़े कुछ टिप्स दिए गए हैं -
  • बच्चों के जूते सुबह ना खरीदें - बच्चों के जूते कभी भी सुबह के समय नहीं खरीदें, क्योंकि उनके पँजे शाम तक पांच प्रतिशत तक फ़ैल जाते हैं। इस वजह से सुबह के वक़्त खरीदे गए जूतों में बच्चा असहज महसूस कर सकता है और उसके पैरों का विकास बाधित हो सकता है।
  • जूतों का माप लेते समय बच्चे को खड़ा रखें - बच्चे के जूतों का माप लेते समय उसे खड़ा रखने से आप उसके पंजों के सही नाप के हिसाब से जूते खरीद सकेंगे।
  • बच्चों के जूते का सही साइज ऐसे चुनें - बच्चे को जूते पहनाने के बाद उसकी एड़ी की तरफ आपके हाथ की सबसे छोटी उंगली (तर्जनी) जूते में घुसनी चाहिए। इसके साथ ही सामने की तरफ से बच्चे के अंगूठे और जूते के आखिरी छोर के बीच आपके अंगूठे जितनी जगह खाली रहनी चाहिए।
  • बच्चे को पांच मिनट के लिए जूते पहनकर घूमने दें - जब बच्चे के लिए जूते खरीदने जाएं, तो उसे जूते पहनाकर पांच मिनट के लिए घूमने दें। फिर जूते उतारकर बच्चे के पैरों की जांच करें, अगर उसके पैरों पर लाल निशान दिखें, तो वो जूते ना खरीदें, क्योंकि उनमें बच्चा असहज महसूस करेगा।
  • शिशु के लिए ज्यादा महँगे जूते ना लें - छोटे बच्चों के लिए ज्यादा महंगे जूते ना खरीदें, क्योंकि उनका शरीर जल्दी जल्दी बढ़ता है और जूते एक या दो महीने में ही छोटे पड़ सकते हैं।
शिशु का चलना शुरू होने के बाद आपको घर को बेबी-प्रूफ यानी बच्चे के लिए सुरक्षित बना देना चाहिए, ताकि चलने-फिरने के दौरान उसे किसी प्रकार चोट ना लगे। अपने बच्चे को पहला कदम रखते हुए देखने के लिए सभी माता पिता बहुत उत्साहित होते हैं, लेकिन कभी कभी उसे चलने में देरी हो सकती है। ऐसे में निराश ना हों, क्योंकि हो सकता है वह थोड़े समय बाद चलने लगे। अगर आपको बच्चे के चलने से जुड़ी किसी भी प्रकार की कोई आशंका है, तो इस बारे में डॉक्टर से सलाह लें।

इस ब्लॉग के विषय - बच्चा चलना कब शुरू करता है? (Bacha chalna kab shuru karta hai), प्रीमैच्योर बच्चे चलना कब शुरू करते हैं? (Premature baby chalna kab shuru karte hai), बच्चा चलना कैसे सीखता है? (Bacha chalna kaise sikhta hai), आप अपने बच्चे की चलने में मदद कैसे कर सकते हैं? (Aap apne bache ki chalne me madad kaise kar sakte hai), बच्चे के देर से चलने के क्या कारण होते हैं? (Bacha der se kyun chalta hai), बच्चे को चलने में देरी होने पर डॉक्टर के पास कब लेकर जाएँ? (Bache ko chalne me deri hone par doctor ke pas kab lekar jaye), क्या बच्चे के लिए वॉकर खरीदना चाहिए? (Kya baby ke liye walker kharidna chahiye), क्या बच्चों के चलने से उनके व्यक्तित्व का पता लगा सकते हैं? (Kya bacho ke chalne se unke vyaktitva ka pata laga sakte hai), बच्चों के जूते कैसे खरीदें? (Bacho ke jute kaise kharide)

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