मोलर प्रेगनेंसी के लक्षण, कारण और इलाज (Molar pregnancy ke lakshan, karan aur ilaj)

मोलर प्रेगनेंसी के लक्षण, कारण और इलाज (Molar pregnancy ke lakshan, karan aur ilaj)

गर्भावस्था के नौ महीनों का सफर आसान नहीं होता, क्योंकि इस बीच महिलाओं को कई परेशानियों से गुजरना पड़ता है। गर्भावस्था के दौरान ज्यादातर परेशानियां खुद-ब-खुद ठीक हो जाती हैं, लेकिन कुछ परेशानियों का अंत असंतोषजनक होता है। इनमें मोलर प्रेगनेंसी या दाढ़ गर्भावस्था (molar pregnancy in hindi) एक है। गर्भावस्था में जिन महिलाओं को मोलर प्रेगनेंसी होती हैं, उनकी गर्भावस्था सुखद नहीं होती। इस ब्लॉग में हम आपको दाढ़ गर्भावस्था के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में बता रहे हैं।

1. मोलर प्रेगनेंसी क्या है?

(molar pregnancy kya hai)

molar pregnancy

मोलर प्रेगनेंसी एक असामान्य स्थिति है, जो निषेचन से जुड़ी समस्याओं की वजह से होती है। आमतौर पर भ्रूण के निर्माण के लिए कुल 23 जोड़ी क्रोमोजोम या अनुवांशिक गुणों की जरूरत होती है, जिनमें से आधे गुणसूत्र उन्हें मां के अंडे से और आधे गुणसूत्र पिता के शुक्राणु से प्राप्त होते है। गुणसूत्रों के गलत संयोजन से दाढ़ गर्भावस्था (molar pregnancy in hindi) की स्थिति बनती है। मोलर प्रेगनेंसी दो प्रकार की होती है, पहली पूर्ण दाढ़ गर्भावस्था (complete molar pregnancy in hindi) और दूसरी आंशिक दाढ़ गर्भावस्था (partial molar pregnancy in hindi)।

  • पूर्ण दाढ़ गर्भावस्था (complete molar pregnancy in hindi) क्या है?

पूर्ण दाढ़ गर्भावस्था में मां के अंडे में अनुवांशिक गुण (क्रोमोजोम) नहीं होते और वह एक या दो शुक्राणुओं से निषेचित होते हैं। ऐसे स्थिति में, मां के गुणसूत्र के अभाव में पिता के गुणसूत्र दोगुने हो जाते हैं, जिससे भ्रूण का विकास संभव नहीं हो पाता। पूर्ण दाढ़ गर्भावस्था (complete molar pregnancy in hindi) में गर्भाशय में भ्रूण की जगह ऊतकों की गांठ बनने लगती है।

  • आंशिक दाढ़ गर्भावस्था (partial molar pregnancy in hindi) क्या है?

आंशिक दाढ़ गर्भावस्था में एक सामान्य अंडे को दो सामान्य शुक्राणु निषेचित करते हैं, जिससे उसमें बहुत ज्यादा गुणसूत्र आ जाते हैं, इस स्थिति में निषेचित अंडा व प्लेसेंटा दोनों ही असामान्य या विकृत होते हैं। आंशिक दाढ़ गर्भावस्था (partial molar pregnancy in hindi) में भ्रूण का विकास होता है, लेकिन दुर्भाग्यवश वह शिशु के रूप में विकसित नहीं हो पाता।

2. क्या दाढ़ गर्भावस्था सामान्य है?

(kya molar pregnancy samanya hai)

molar pregnancy

भारत में दाढ़ गर्भावस्था (molar pregnancy in hindi) सामान्य नहीं है। वर्ष 2016 में, मोलर प्रेगनेंसी पर किए गए शोध के अनुसार भारत में हर वर्ष केवल तीन प्रतिशत महिलाएं दाढ़ गर्भावस्था से जूझती हैं। हालांकि यह संख्या भारत के सभी क्षेत्रिय इलाकों में अलग-अलग हो सकती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि जिन महिलाओं की उम्र 20 वर्ष से कम या 40 वर्ष से ज्यादा होती है, उन्हें मोलर प्रेगनेंसी (molar pregnancy in hindi) होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है।

3. मोलर प्रेगनेंसी के लक्षण क्या है?

(molar pregnancy ke lakshan kya hai)

symptoms of molar pregnancy

प्रेगनेंसी के शुरुआती दौर में यानी पहली तिमाही में दाढ़ गर्भावस्था (molar pregnancy in hindi) आपको सामान्य एवं स्वस्थ गर्भावस्था जैसी लग सकती है और इसीलिए अधिकतर मामलों में इसका पता लगा पाना मुश्किल होता है। दाढ़ गर्भावस्था की दोनों स्थितियों में लक्षण एक समान होते हैं। मोलर प्रेगनेंसी के लक्षण निम्न हैं -

  • दाढ़ गर्भावस्था के लक्षण : पहली तिमाही में रक्रस्राव होना- दाढ़ गर्भावस्था (molar pregnancy in hindi) होने पर गर्भवती महिला को पहली तिमाही में अत्यधिक मात्रा में रक्तस्राव हो सकता है।

  • दाढ़ गर्भावस्था के लक्षण : पहली तिमाही में ब्राऊन डिस्चार्ज होना- सामान्य गर्भावस्था में पहली तिमाही के दौरान ब्राऊन डिस्चार्ज (Brown discharge in pregnancy in hindi) यानी गर्भवती महिला की योनि से गहरे भूरे रंग का तरल बाहर आना, सामान्य होता है, लेकिन अगर इसकी मात्रा ज्यादा होती है तो यह दाढ़ गर्भावस्था का लक्षण हो सकता है।

  • दाढ़ गर्भावस्था के लक्षण : योनि से छोटी थैलियों जैसी खून की गांठें निकलना- प्रेग्नेंट महिलाओं की योनि से छोटी थैलियों जैसी खून की गांठें निकलना मोलर प्रेगनेंसी (molar pregnancy in hindi) का संकेत हो सकता है। ये छोटी थैलियां अंगूर के गुच्छों जैसी होती है।

  • दाढ़ गर्भावस्था के लक्षण : पैल्विक क्षेत्र में असहनीय दर्द- अगर प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को पैल्विक क्षेत्र यानी श्रोणि (pelvic in hindi) में असहनीय दर्द हो रहा है तो यह मोलर प्रेगनेंसी (molar pregnancy in hindi) का लक्षण हो सकता है। दरअसल, मोलर प्रेगनेंसी के दौरान ऊतकों के असामान्य रूप से बढ़ने के कारण गर्भाशय के निचले हिस्से पर इनका दबाव पड़ता है, जिसके कारण श्रोणि में असहनीय दर्द होता है।

  • दाढ़ गर्भावस्था के लक्षण : ज्यादा जी मिचलाना और उल्टी आना- यूं तो गर्भावस्था के दौरान जी मिचलाना या उल्टी आना (vomiting in hindi) आम होता है, लेकिन अगर ये समस्या गर्भवती महिलाओं को दिन में कई बार हो रही है तो यह दाढ़ गर्भावस्था (molar pregnancy in hindi) का लक्षण हो सकता है।

  • दाढ़ गर्भावस्था के लक्षण : अचानक गर्भाशय का आकार बढ़ना- मोलर प्रेगनेेंसी (molar pregnancy in hindi) होने पर ऊतकों के असामान्य रूप से वृद्धि के कारण गर्भाशय का आकार बढ़ने लगता है।

  • दाढ़ गर्भावस्था के लक्षण : हाइपरथाइरायडिस्म की समस्या का बढ़ना- अगर गर्भावस्था के दौरान किसी महिला की हाइपरथायरायडिस्म (hyperthyroidism in hindi) की समस्या बढ़ने लगती है तो यह दाढ़ गर्भावस्था (molar pregnancy in hindi) का लक्षण हो सकता है।

ध्यान दें- ऊपर बताए गए लक्षणों में से कुछ लक्षण सामान्य गर्भावस्था में भी दिख सकते हैं, इसीलिए इनको आधार मान कर किसी भी नतीजे तक न पहुंचे बल्कि इस बारे में पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें।

4. दाढ़ गर्भावस्था के क्या कारण होते हैं?

(molar pregnancy ke kya karan hote hai)

molar pregnancy ke karan

मानव शरीर की कोशिकाओं में कुल 23 जोड़े गुणसूत्र होते हैं, जिनमें से हर जोड़े में एक गुणसूत्र मां के अंडे से तो दूसरा पिता के शुक्राणु से प्राप्त होता है। मुख्य रूप से गर्भधारण से पहले निषेचन संबंधी समस्याओं के कारण मोलर प्रेगनेंसी (molar pregnancy in hindi) होती है। इसके अन्य कई कारण हो सकते हैं, जो नीचे बताए गए हैं -

  • मोलर प्रेगनेंसी का कारण : महिला की उम्र 20 से कम या 40 से ज्यादा होना- दरअसल विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं की उम्र 20 से कम या 40 से ज्यादा होने पर गुणसूत्रों का संचारण सही ढंग से नहीं हो पाता है, जिसके कारण दाढ़ गर्भावस्था (molar pregnancy in hindi) हो सकती है।
  • मोलर प्रेगनेंसी का कारण : मोलर प्रेगनेंसी का इतिहास होना- अगर किसी महिला को पहले मोलर प्रेगनेंसी हो चुकी हो तो उसे दोबारा इसके होने का खतरा होता है। हालांकि बहुत कम महिलाओं को यह दोबारा होता है, लेकिन यह भी दाढ़ गर्भावस्था (molar pregnancy in hindi) का एक कारण हो सकता है।
  • मोलर प्रेगनेंसी का कारण : पहले कभी गर्भपात का होना- पहले कभी गर्भपात होना मोलर प्रेगनेंसी (molar pregnancy in hindi) का कारण हो सकता है।
  • मोलर प्रेगनेंसी का कारण : ज्यादा गर्भनिरोधक गोलियां लेना- कुछ शोधों में यह बताया गया है कि ज्यादा गर्भनिरोधक गोलियां लेने से दाढ़ गर्भावस्था (molar pregnancy in hindi) हो सकती है।
  • मोलर प्रेगनेंसी का कारण : आनुवांशिक मोलर प्रेगनेंसी होना- अगर किसी महिला के परिवार में दाढ़ गर्भावस्था का इतिहास रहा हो, तो ऐसे में उनमें मोलर प्रेगनेंसी (molar pregnancy in hindi) होने की संभावना बढ़ जाती है।

5. मोलर प्रेगनेंसी का पता कैसे चलता है?

(molar pregnancy ka pata kaise chalta hai)

molar pregnancy ka pata

दाढ़ गर्भावस्था (molar pregnancy in hindi) का पता लगाने से पहले, महिला के खून की जांच से प्रेगनेंसी हार्मोन यानी ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (hCG hormone in hindi) के स्तर का पता लगाया जाता है। आमतौर पर किसी सामान्य गर्भवती महिला के शरीर में मौजूद एचसीजी हार्मोन की मात्रा मोलर प्रेगनेंसी होने पर बढ़ जाती है, जिससे दाढ़ गर्भावस्था होने का पता आसानी से लगाया जाता है।

मोलर प्रेगनेंसी के लक्षणों की जांच करने के बाद, डॉक्टर गर्भवती को अल्ट्रासाउंड (ultrasound in pregnancy in hindi) कराने की सलाह देते हैं। पैल्विक क्षेत्र के माध्यम से जाने वाली इस जांच को ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड (transvaginal ultrasound in hindi) कहा जाता है। यह जांच गर्भावस्था के आठवें या नौवें सप्ताह के बीच की जाती है। इस अल्ट्रासाउंड में ध्वनि तरंगों (sound waves in hindi) की मदद से निषेचित अंडे में भ्रूण के होने की पुष्टि और उसका विकास, गर्भाशय में पानी (एमनियोटिक द्रव/ amniotic fluid) का स्तर, गर्भनाल में गांठ (cystic placenta in hindi), अंडाशय में गांठ (ovarian cyst in hindi) की जांच की जाती है। अगर अल्ट्रासाउंड में दाढ़ गर्भावस्था (molar pregnancy in hindi) होती है तो डॉक्टर आगे की जानकारी देते हैं।

6. क्या दाढ़ गर्भावस्था का इलाज संभव है?

(kya molar pregnancy ka ilaj sambhav hai)

molar pregnancy treatment

मेडिकल की उन्नत पद्धतियों की मदद से मोलर प्रेगनेंसी (molar pregnancy in hindi) का इलाज संभव है। इलाज से पहले सही समय पर दाढ़ गर्भावस्था के लक्षणों का पता लगाना जरूरी होता है। इसके लक्षणों की जानकारी मिलने पर एवं विभिन्न जांच पद्धतियों से इसकी पुष्टि होने पर डॉक्टर से सलाह लेना ही सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। क्योंकि मोलर प्रेगनेंसी, सामान्य प्रेगनेंसी जैसी नहीं होती इसीलिए इसमें बढ़ने वाले ऊतकों को हटाया जाना जरूरी होता है। हालांकि, इसके इलाज का सबसे बेहतर तरीका डॉक्टर आपकी शारीरिक स्थिति को देख कर ही बता सकते हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में शैल्य चिकित्सा (surgery in hindi) की मदद से अविकसित भ्रूण या गर्भनाल की गांठ को निकाल दिया जाता है। सर्जरी की विभिन्न प्रक्रिया नीचे बताई गई हैं -

  • डाइलेशन एंड क्यूरेटेज (dilation and curettage in hindi) की प्रक्रिया- डाइलेशन एंड क्यूरेटेज (dilation and curettage in hindi) की प्रक्रिया को आम भाषा में डी एंड सी (D&C) भी कहा जाता है।

    • इस प्रक्रिया में महिला के कुल्हे में जनरल एनेस्थीसिया (general anaesthetic in hindi) दिया जाता है, ताकि प्रक्रिया के दौरान उसके पैर स्थिर रहें और उसे कुछ अनुभव न हो। इससे कमर के नीचे का भाग सुन्न पड़ जाता है।
    • इसके बाद एक पतली नली या ट्यूब के ज़रिए गर्भाशय ग्रीवा (cervix in hindi) को विस्तारित किया जाता है और अन्य यंत्रों की मदद से गर्भाशय के अंदर मौजूद ऊतकों को निकाला जाता है।
    • इस प्रक्रिया में कम से कम एक घंटे का समय लग सकता है और डी एंड सी के बाद महिला घर जा सकती है।
  • हिस्टेरेक्टॉमी (Hysterectomy in hindi) प्रक्रिया- यदि दाढ़ गर्भावस्था के दौरान किसी महिला को जेस्टेशनल ट्रॉफोब्लास्टिक नेपलाशिया (gestational trophoblastic neoplasia or GTN in hindi) हो जाता है तो हिस्टेरेक्टॉमी प्रक्रिया की मदद से उसके गर्भाशय को निकाल दिया जाता है। एेसा तब किया जाता है जब मोलर प्रेगनेंसी से पीड़ित महिला की दोबारा गर्भाधारण की इच्छा नहीं होती।

ऊपर बताए गए दोनों प्रक्रियाओं के बाद करीब एक साल तक प्रेगनेंसी हार्मोन यानी एचसीजी हार्मोन (hCG hormone in hindi) के स्तर की जांच की जाती है। एचसीजी का स्तर असामान्य होने पर इलाज के अन्य विकल्प अपनाए जाते हैं।

7. मोलर प्रेगनेंसी होने पर क्या जोखिम हो सकते हैं?

(molar pregnancy hone ke kya nuksan hote hai)

complication molar pregnancy

मोलर प्रेगनेंसी (molar pregnancy in hindi) के गंभीर मामलों में गर्भाशय में असामान्य रूप से ऊतकों की वृद्धि गर्भवती महिला के लिए जानलेवा हो सकती है। इसके अलावा महिलाओं को निम्न जोखिम भी हो सकते हैं -

  • दाढ़ गर्भावस्था होने पर गर्भवती महिला की योनि से अत्यधिक रक्तस्राव (bleeding in pregnanacy in hindi) हो सकता है।
  • मोलर प्रेगनेंसी (molar pregnancy in hindi) होने पर महिलाओं को प्री-एक्लेस्पिया (preeclampsia in hindi) का खतरा हो सकता है।
  • दाढ़ गर्भावस्था (molar pregnancy in hindi) होने पर कुछ महिलाएं ट्रॉफोब्लास्टिक रोग (trophoblastic didease in hindi) का शिकार हो जाती हैं। इससे गर्भाशय के अंदर ऊतकों की वृद्धि तेजी से होती है। यह पूर्ण और आंशिक दाढ़ गर्भावस्था दोनों ही प्रकार में हो सकता है।
  • कई महिलाओं को मोलर प्रेगनेंसी (molar pregnancy in hindi) से होने वाले ट्रॉफोब्लास्टिक रोग से कैंसर हो सकता है।
  • कुछ दुर्लभ मामलों में मोलर प्रेगनेंसी शरीर के अन्य अंगों में भी फैल जाती है।
  • मोलार प्रेगनेंसी (molar pregnancy in hindi) से महिलाओं में खून की कमी (एनीमिया/anemia) हो सकती है।

8. क्या दाढ़ गर्भावस्था के बाद नॉर्मल प्रेगनेंसी संभव है?

(kya molar pregnancy ke baad normal pregnancy sambhav hai)

molar pregnancy ke baad normal pregnancy

जिन महिलाओं को एक बार दाढ़ गर्भावस्था (molar pregnancy in hindi) हो चुकी है, उनमें अगली प्रेगनेंसी को लेकर डर होना स्वाभाविक है, लेकिन डॉक्टर कहते हैं कि मोलर प्रेगनेंसी के बाद सामान्य एवं स्वस्थ गर्भधारण करना संभव है।

मोलर प्रेगनेंसी के इलाज के बाद पुनः गर्भधारण में मां और शिशु दोनों पर उसके असर की संभावना कम होती है, हालांकि मोलर प्रेगनेंसी के बाद अगली बार गर्भधारण करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी होता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि दाढ़ गर्भावस्था (molar pregnancy in hindi) के बाद अगली बार प्रेगनेंसी के पहले कम से कम एक वर्ष का अंतराल जरूरी है। इस बीच महिलाओं के शरीर में ऊतकों की वृद्धि पर निगरानी रखी जाती है और मोलर प्रेगनेंसी से पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद ही उन्हें अगली बार गर्भधारण की सलाह दी जाती है। इस दौरान जब तक महिला के शरीर में एचसीजी हार्मोन का स्तर कम नहीं हो जाता तब तक डॉक्टर गर्भनिरोधन की सलाह देते हैं। गर्भनिरोधन के उपायों के बारे में जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लें।

मोलर प्रेगनेंसी (molar pregnancy in hindi) होने पर महिलाओं को अनेक प्रकार की चिंताएं घेर सकती है क्योंकि इस दौर से गुजरने की पीड़ा बहुत ज्यादा होती है। क्योंकि मोलर प्रेगनेंसी (molar pregnancy in hindi) आम नहीं है, इसके लक्षणों को पहचानने में परेशानी हो सकती है। हालांकि लक्षणों की पहचान होने के बाद उचित समय पर डॉक्टर की सलाह ली जाने से दाढ़ प्रेगनेंसी का इलाज संभव हो सकता है।

इस ब्लॉग के विषय - 1. मोलर प्रेगनेंसी क्या है? (molar pregnancy kya hai),2. क्या दाढ़ गर्भावस्था सामान्य है? (kya molar pregnancy samanya hai),3. मोलर प्रेगनेंसी के लक्षण क्या है? (molar pregnancy ke lakshan kya hai),4. दाढ़ गर्भावस्था के क्या कारण होते हैं? (molar pregnancy ke kya karan hote hai),5. मोलर प्रेगनेंसी का पता कैसे चलता है? (molar pregnancy ka pata kaise chalta hai),6. क्या दाढ़ गर्भावस्था का इलाज संभव है? (kya molar pregnancy ka ilaj sambhav hai),7. मोलर प्रेगनेंसी होने पर क्या जोखिम हो सकते हैं? (molar pregnancy hone ke kya jokhim hote hai),8. क्या दाढ़ गर्भावस्था के बाद नॉर्मल प्रेगनेंसी संभव है? (kya molar pregnancy ke baad normal pregnancy sambhav hai)
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