बच्चों के पेट में कीड़े: कारण, इलाज व घरेलु उपाय (Bacho ke pet me kide: karan, upchar aur gharelu upay)

बच्चों के पेट में कीड़े: कारण, इलाज व घरेलु उपाय (Bacho ke pet me kide: karan, upchar aur gharelu upay)

बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम होने की वजह से अक्सर नवजात शिशु व छोटे बच्चे कई कीटाणुओं से पीड़ित हो जाते हैं। बच्चों के पेट में कीड़े होना या कृमि रोग (baby ke pet me kide) भी एक ऐसी परेशानी है, जिसका सामना लगभग हर बच्चा कभी ना कभी करता है। वैसे तो यह एक आम समस्या है, लेकिन इसका उचित इलाज और बचाव ज़रूरी है। इस ब्लॉग में हम आपको नवजात शिशु व बच्चों के पेट में कीड़े (baby ke pet ke kide) होने की समस्या के कारण, लक्षण, उपचार व बचाव के तरीकों की विस्तृत जानकारी दे रहे हैं।

बच्चों के पेट के कीड़े क्या होते हैं?

(Bacho ke pet ke kide kya hote hai)

बच्चों के पेट में पाए जाने वाले कीड़े या कृमि (baby ke pet me kide) असल में परजीवी (एक प्रकार के जीव जो दूसरे जीव के शरीर से पोषण ग्रहण करके पलते हैं) होते हैं, और ये विभिन्न तरीकों से बच्चों के शरीर में घुसकर उनके भोजन का पोषण खुद ग्रहण करने लगते हैं।

बच्चों के पेट के कीड़े कितने प्रकार के होते हैं?

(Bacho ke pet ke kide kitne type ke hote hai)

baby ke pet me kide

वैसे तो मानव शरीर को संक्रमित करने वाले कीड़े कई तरह के होते हैं, लेकिन मुख्य रूप से शिशुओं व बच्चों के पेट में चार तरह के कीड़े पाए जाते हैं-

  • टेपवर्म या चपटाकृमि (tapeworms in hindi)- टेपवर्म को फ्लैटवर्म भी कहा जाता है, ये कीड़े अपनी त्वचा के ज़रिए शिशु के शरीर से पोषण प्राप्त करते हैं, और अपनी त्वचा से ही साँस लेते हैं। इनमें हुक होते हैं जिससे ये बच्चे या शिशु की आंतों से चिपककर पोषक तत्व चूँसते रहते हैं। टेपवर्म कुछ इंच से लेकर करीब 40 फीट तक बढ़ सकते हैं। बच्चों व शिशुओं के शरीर में ये मुख्यतः दूषित भोजन के ज़रिए अंडे या लार्वा (कीड़े के छोटे छोटे बच्चे) के रूप में प्रवेश करते हैं।

  • राउंडवर्म या गोलकृमि (roundworms in hindi)- ये कीड़े दिखने में केंचुए की तरह लगते हैं और इनकी लम्बाई 30 से 35 सेमी तक बढ़ सकती है। राउंडवर्म खारे पानी, मिट्टी और मीठे पानी में पाए जाते हैं और आमतौर पर बच्चों में पालतू जानवरों के ज़रिए प्रवेश कर जाते हैं। ये कीड़े कभी कभी आंतों के ज़रिए खून की नस में घुस कर फेफड़ों में भी पहुँच जाते हैं।

  • पिनवर्म या फीताकृमि (pinworms or threadworms in hindi)- पिनवर्म या फीताकृमि के नाम से जाने जाने वाले ये कीड़े किसी पतले छोटे धागे की तरह दिखाई देते हैं और बच्चों या शिशुओं के मलाशय में रहते हैं। मादा कीड़े गुदा के आसपास अंडे देते हैं। ये अंडे बच्चे के शरीर के बाहर (जैसे कपड़े, बिस्तर या किसी और जगह) दो हफ़्तों तक ज़िंदा रह सकते हैं और छूने ,साँस लेने या मुँह के ज़रिए शरीर में पहुंच कर बड़े होते हैं। फीताकृमि का संक्रमण शिशुओं व बच्चों में सबसे ज्यादा आम है।

  • हुकवर्म (hookworms in hindi)- ये कीड़े मुख्य रूप से गंदगी भरी जगहों पर पनपते हैं। हुकवर्म छोटे परजीवी कीड़े होते हैं, इनके मुँह में ब्लेड जैसे अंग होते हैं, जिनसे ये आंतों के अंदर चिपक जाते हैं। ये कीड़े बच्चों के पेट में दूषित मिट्टी के ज़रिए प्रवेश कर सकते हैं। हुकवर्म का लार्वा (कीड़े का छोटा बच्चा) शिशु के पैरों की त्वचा को काटकर नसों में घुस सकता है।

पेट के कीड़ों की समस्या किन बच्चों में होती है?

(Pet ke kide kin bacho me hote hai)

bacho ke pet me kide

पेट के कीड़ों (baby ke pet me kide) की समस्या मुख्यतः घुटनों के बल चलने वाले शिशुओं व इनसे बड़े बच्चों में होती है, क्योंकि ज़मीन पर चलने, खेलने, चीजें मुँह में डालने से ये कीड़े या उनके अंडों के सम्पर्क में आ जाते हैं। माँ का दूध पीने वाले छह माह या उससे कम उम्र के शिशुओं के पेट में कीड़े (baby ke pet me kide) नहीं होते, क्योंकि वो कीड़ों के सम्पर्क में नहीं आते। लेकिन कुछ दुर्लभ मामलों में छह माह से छोटे बच्चों के पेट में कीड़े हो सकते हैं।

बच्चों के पेट में कीड़े कैसे आते हैं?

(Baby ke pet me kide kaise aate hai)

baby ke pet me kide ke reason

बच्चों के पेट में कीड़े (baby ke pet ke kide) होने की कई वजह हो सकती हैं, लेकिन उनके पेट में कीड़े होने के प्रमुख कारण निम्न हैं-

  • खेलने, चलने या किसी अन्य कारण से प्रदूषित ज़मीन (ऐसी ज़मीन जिसमें कीड़े या उनके अंडे मौजूद हों) के संपर्क में आने पर बच्चे के पेट में कीड़े हो सकते हैं।
  • प्रदूषित भोजन या पानी (ऐसा खाना या पानी जिसमें कीड़े या उनके अंडे उपस्थित हों) का सेवन करने से बच्चे के पेट में कीड़े (baby ke pet me kide) पैदा हो सकते हैं।
  • बच्चे के आसपास साफ- सफाई ना होने से उसे पेट के कीड़ों की समस्या हो सकती है।
  • कच्चा या अधपका भोजन खाने से भी शिशु के पेट में कीड़े (baby ke pet me kide) पनप सकते हैं।
  • ठीक तरह से हाथ ना धोने से बच्चे के पेट में कीड़े पैदा हो सकते हैं।
  • अगर आपका बच्चा किसी ऐसे बच्चे के संपर्क में आ जाए जिसके पेट में कीड़े हैं, तो उसके पेट में कीड़े (baby ke pet ke kide) हो सकते हैं।
  • कीड़ों से संक्रमित पालतू जानवर के ज़रिए भी आपके शिशु के पेट में कीड़े (baby ke pet me kide) पहुंच सकते हैं।

बच्चों के पेट में कीड़े होने से उन्हें क्या नुकसान होता है?

(Bacho ke pet ke kide unki sehat par kya asar dalte hai)

bache ke pet me kide hone ke nukshan

यूँ तो बच्चों के पेट के कीड़े (baby ke pet ke kide) सीधे तौर पर उनकी सेहत को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाते हैं, लेकिन इनकी वजह से उन्हें निम्न परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है-

  • अगर शिशु के पेट के कीड़ों का इलाज ना किया जाए, तो ये पूरे शरीर में संक्रमण पैदा कर सकते हैं।
  • शिशु के पेट के कीड़े (baby ke pet ke kide) उसके भोजन के पोषण का बड़ा हिस्सा खुद ग्रहण कर लेते हैं, जिससे शिशु कुपोषण (malnutrition) का शिकार हो सकता है।
  • बच्चे के पेट में कीड़े (baby ke pet me kide) होने की वजह से वह सामान्य रूप से नहीं बढ़ पाता।
  • अगर समय पर इलाज ना करवाया जाए, तो ये कीड़े शिशु की आंतों में बहुत सारे अंडे देकर अपनी संख्या बढ़ाते जाते हैं और तब इन्हें दवाइयों के ज़रिए बाहर निकालने में भी परेशानी होती है। गम्भीर मामलों में बच्चों के पेट के कीड़े (baby ke pet ke kide) निकालने के लिए ऑपरेशन भी करना पड़ सकता है।
  • बच्चे के पेट में कीड़े (baby ke pet me kide) होने पर उसकी आँतें ठीक से काम नहीं कर पाती हैं, ऐसे में उसे पाचन संबंधी परेशानियां हो सकती हैं।

बच्चे के पेट में कीड़े होने के लक्षण क्या होते हैं?

(Shishu ke pet me kide ke lakshan kya hai)

bache ke pet me kide hone ke lakshan

अक्सर बच्चों में पेट के कीड़े (baby ke pet ke kide) होने के कोई खास लक्षण नज़र नहीं आते हैं, कीड़ों का संक्रमण भी ज्यादा हानिकारक नहीं होता, और ज्यादातर मामलों में शिशुओं को विशेष इलाज की ज़रूरत नहीं होती है। समस्या की गंभीरता के अनुसार शिशु के पेट में कीड़े (baby ke pet me kide) होने के लक्षण अलग अलग हो सकते हैं, आमतौर पर पेट में कीड़े होने पर बच्चों में निम्न लक्षण नजर आ सकते हैं-

  • कृमि रोग के लक्षण: शिशु के मल में कीड़े निकलना- अगर शिशु के मल में कीड़े निकलें, तो हमें कुछ कहने की ज़रूरत ही नहीं होनी चाहिए। जी हाँ, यह आपके बच्चे के पेट में कीड़े (baby ke pet me kide) होने का पुख़्ता सबूत है।

  • कृमि रोग के लक्षण: शिशु का ज्यादा लार टपकाना- अगर बच्चा बिना किसी कारण के बार बार मुँह से लार गिराने लगे तो यह उसके पेट में कीड़े (baby ke pet me kide) होने का लक्षण हो सकता है, क्योंकि पेट के कीड़े शिशु में लार का उत्पादन बढ़ा देते हैं।

  • कृमि रोग के लक्षण: शिशु के मल में तेज़ बदबू आना- हम सभी जानते हैं कि शिशुओं के मल में कम बदबू आती है। ऐसे में अगर अचानक शिशु का मल तेज बदबूदार हो जाए, तो यह उसके पेट में कीड़े (baby ke pet me kide) होने की वजह से संक्रमण का लक्षण हो सकता है।

  • कृमि रोग के लक्षण: शिशु की गुदा में खुजली होना- मादा कीड़े अंडे देने के लिए गुदा तक रेंगकर आते हैं, जिससे शिशु की गुदा और मलाशय के आसपास तेज खुजली होती है। अगर बच्चा बार बार गुदा खुजा रहा है, तो यह उसके पेट में कीड़े (baby ke pet me kide) होने का लक्षण हो सकता है।

  • कृमि रोग के लक्षण: बच्चे के पेट में दर्द और सूजन होना- यह बच्चों के पेट में कीड़े होने का सबसे आम लक्षण है। अगर बच्चे को पेट में दर्द हो रहा है और उसके पेट पर सूजन है, तो उसके पेट में कीड़े (baby ke pet me kide) हो सकते हैं।

  • कृमि रोग के लक्षण: शिशु का रात में बिना वजह बार बार जागना और रोना- अगर आपका बच्चा रात को बिना भूख लगे बार बार जाग जाता है या रोता है, तो उसे पेट के कीड़ों की समस्या हो सकती है। पेट के कीड़ों की वजह से शिशु के पेट में दर्द, गुदा में खुजली और बेचैनी की वजह से उसकी नींद बार बार खुल सकती है।

  • कृमि रोग के लक्षण: बच्चे का वज़न कम होना या ना बढ़ना- लगातार सामान्य भोजन खाने के बावजूद अगर शिशु का वज़न बढ़ना बंद हो जाये या अचानक उसका वज़न कम होने लगे तो उसके पेट में कीड़े (baby ke pet me kide) हो सकते हैं।

  • कृमि रोग के लक्षण: शिशु को कम भूख लगना- ऐसा तब होता है, जब शिशु के पेट में बहुत ज्यादा कीड़े हो जाएं। बच्चे के पेट में ज्यादा कीड़े (baby ke pet me kide) होने पर उसकी आंतों में भोजन के लिए कम जगह होती है, इसलिए बच्चे की भोजन में रुचि कम हो जाती है। यह स्थित शिशु की सेहत के लिए गम्भीर हो सकती है, इसलिए लक्षण नजर आने पर उसे डॉक्टर के पास ले जाएं।

  • कृमि रोग के लक्षण: शिशु को ज्यादा भूख लगना- बच्चे के पेट में कीड़े (baby ke pet me kide) होने पर उसके भोजन का ज्यादातर पोषण कीड़े ग्रहण कर लेते हैं और उसे ठीक से पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं। ऐसे में बच्चे को सामान्य से अधिक भूख लगती है। अगर आपका बच्चा ज्यादा खाने लगा है, लेकिन उसका वज़न नहीं बढ़ रहा है तो यह उसके पेट में कीड़े होने का लक्षण हो सकता है।

  • कृमि रोग के लक्षण: बच्चे के शरीर में खून की कमी होना- बिना किसी ख़ास वज़ह के बच्चे के शरीर में खून की कमी होना, उसके शरीर में हुकवर्म नामक पेट के कीड़े (baby ke pet ke kide) का संक्रमण होने का लक्षण हो सकता है।

  • कृमि रोग के लक्षण: शिशु को ज्यादा थकान होना- अगर शिशु हर समय थका थका नज़र आता है, तो यह उसके पेट में कीड़े (baby ke pet me kide) होने का लक्षण हो सकता है। असल में शिशु के पेट में मौजूद कीड़ों द्वारा भोजन के पोषक तत्व ग्रहण कर लेने की वजह से उसके शरीर की पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती और वो हर समय थका हुआ रहने लगता है।

  • कृमि रोग के लक्षण: बच्चे के पेट में बार बार गैस बनना- अगर बच्चे के पेट में बहुत ज्यादा गैस बनती है, तो यह उसके पेट में कीड़े (baby ke pet me kide) होने का एक लक्षण हो सकता है। लेकिन बच्चे के पेट में गैस बनने की कई अन्य वजह हो सकती हैं, इसलिए समस्या का पता लगाने के लिए शिशु को डॉक्टर के पास ले जाएं।

बच्चे के पेट में कीड़ों का पता कैसे लगता है?

(Bacho ke pet ke kide ka pata kaise lagta hai)

bache ke pet me kide hone ki janch

वैसे तो बच्चों के पेट में कीड़े (baby ke pet me kide) होने का पता ऊपर दिये गए लक्षणों से लगाया जा सकता है, लेकिन कई लक्षण किसी अन्य रोग में भी नज़र आते हैं। इसलिए बच्चे के पेट में कीड़े की समस्या का पता लगाने के लिए डॉक्टर निम्न जाँच करते हैं-

  • स्टिकी टेप टेस्ट (sticky tape test)- ये बच्चे के पेट में कीड़ों (baby ke pet me kide) का पता लगाने के लिए डॉक्टरों द्वारा की जाने वाली सबसे सामान्य जाँच है। इस टेस्ट में, डॉक्टर शिशु की गुदा से कीड़े के अंडे इकट्ठा करने के लिए कागज़ की टेप का एक टुकड़ा उसकी गुदा पर चिपकाकर हटा लेते हैं। फिर टेप को जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया जाता है।

  • नाखूनों की जांच- अक्सर जिन बच्चों के पेट में कीड़े (baby ke pet me kide) होते हैं, उनके नाखूनों के नीचे कीड़ों के अंडे होते हैं, इसलिए डॉक्टर बच्चों में पेट के कीड़ों का पता लगाने के उनके नाखूनों की जांच करते हैं।

  • मल की जांच- यह बच्चे के पेट में कीड़ों (baby ke pet me kide) का पता लगाने का सबसे भरोसेमंद तरीका है। डॉक्टर बच्चे के मल की जांच करके यह पता लगाने की कोशिश करते हैं, कि क्या वाक़ई उसकी आंतों में कीड़े मौजूद हैं।

  • अल्ट्रासाउंड- अगर बच्चे के पेट में ज्यादा कीड़े (baby ke pet me kide) हैं, तो उनकी सही स्थिति का पता लगाने के लिए डॉक्टर अल्ट्रासाउंड जांच करवाने की सलाह देते हैं। हालांकि यह जांच केवल गंभीर मामलों में की जाती है।

बच्चे के पेट के कीड़ों का इलाज क्या है?

(Bache ke pet ke keede ki samasya ka ilaj kya hai)

baby ke pet me kide ka ilaj

सबसे पहले उचित जांच के ज़रिए डॉक्टर इस बात का पता लगाते हैं, कि बच्चे के पेट में कौनसे कीड़े हैं। इसके बाद उसके पेट के कीड़ों (baby ke pet me kide) को ख़त्म करने के लिए डॉक्टर बच्चों के पेट में कीड़े की दवा देते हैं। इस प्रक्रिया को डीवर्मिंग (deworming in hindi) कहा जाता है। लेकिन आमतौर पर बच्चों के पेट में कीड़े की दवा दो साल से छोटे बच्चों को नहीं दी जा सकती हैं, इसलिए डॉक्टर से पूछे बिना बच्चे को किसी भी प्रकार की दवाई ना दें।

एक वर्ष से दो वर्ष के बच्चों को डॉक्टर बच्चों के पेट में कीड़े की दवा के तौर पर पीने वाली दवाई (सिरप) दे सकते हैं।

अगर दुर्भाग्यवश आपके एक साल से छोटे बच्चे के पेट में कीड़े (baby ke pet me kide) हो गए हैं, तो इस बारे में डॉक्टर ही आपको सही सलाह दे पाएंगे। आपके शिशु की उम्र ,कीड़े का प्रकार और रोग की गंभीरता का पता लगाने के बाद डॉक्टर शिशु का विशेष उपचार शुरू कर सकते हैं।

कुछ मामलों में शिशु को उपचार की ज़रूरत नहीं होती, लेकिन एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लें। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार एक साल की उम्र से बड़े बच्चों को साल में दो बार बच्चों के पेट में कीड़े की दवा दी जानी चाहिए।

बच्चों के पेट में कीड़े की समस्या का घरेलू उपचार क्या है?

(Bache ke pet ke kide ki samasya ka gharelu upchar)

baby ke pet me kide gharelu upay

बच्चे के पेट के कीड़े (baby ke pet ke kide) की समस्या ख़त्म करने के लिए आप निम्न घरेलू नुस्ख़े आज़मा सकते हैं।

ध्यान दें- दो वर्ष से कम आयु के शिशुओं के लिए ये घरेलू उपचार डॉक्टर की सलाह से ही अपनाएं।

  • बच्चों के पेट में कीड़े की दवा: कच्चा पपीता

    • कच्चे पपीते में पपाइन (papain in hindi) नामक एक एंजाइम होता है, जो आंतों में जाकर बच्चे के पेट के कीड़े (baby ke pet ke kide) मार देता है।
    • एक गिलास गर्म दूध या पानी में एक चम्मच पिसा हुआ कच्चा पपीता और एक चम्मच शहद मिलाकर बच्चे को खाली पेट पिलाने से पेट के कीड़े (baby ke pet ke kide) दूर हो जाते हैं।
    • इसके अलावा बच्चे के पेट से कीड़े बाहर निकालने के लिए पपीते के बीजों का उपयोग भी किया जाता है। पपीते के बीजों को पीसकर एक चम्मच पेस्ट बना लें। इसे एक गिलास गर्म दूध या पानी में मिलाकर सुबह सुबह बच्चे को पिलायें।
  • बच्चों के पेट में कीड़े की दवा: लहसुन

    • लहसुन कीड़े मारने की प्राकृतिक दवा है और यह बच्चों के पेट के कीड़े दूर करने में बहुत कारगर है।
    • सुबह खाली पेट लहसुन की तीन कलियाँ खाने से बच्चों के पेट के कीड़े (baby ke pet ke kide) बाहर निकालने में मदद मिलती है।
    • लहसुन की दो कलियाँ कुचलकर एक गिलास दूध में उबाल लें। इस दूध को बच्चे को पिलाने से उसके पेट के कीड़े (baby ke pet ke kide) आसानी से बाहर निकल जाते हैं।
  • बच्चों के पेट में कीड़े की दवा: अजवाइन

    • अजवाइन में थाइमोल (thymol) नामक एक पदार्थ पाया जाता है, जो पेट के कीड़ों (baby ke pet ke kide) को बढ़ने नहीं देता। इसे गुड़ में मिलाकर बच्चे को खिलाया जा सकता है।
    • बच्चे को सुबह खाली पेट गुड़ का एक छोटा टुकड़ा खिलायें। इसके 15 मिनट बाद, बच्चे को एक गिलास पानी के साथ एक चौथाई चम्मच पिसी अजवाइन खिलाएं।
  • बच्चों के पेट में कीड़े की दवा: करेला

    • यह शरीर में जाकर पेट के कीड़े (baby ke pet ke kide) मारता है। इसका कड़वा स्वाद दबाने के लिए एक कप करेले के रस में एक कप पानी और थोड़ा शहद मिलाकर बच्चे को दिन में दो बार पिलायें।
  • बच्चों के पेट में कीड़े की दवा: हल्दी

    • हल्दी एक प्राकृतिक एंटीसेप्टिक है और यह बच्चों के पेट के कीड़े मारने में बहुत कारगर है।
    • एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच हल्दी मिलाकर पिलाने से बच्चे के पेट के कीड़े दूर हो जाते हैं।
    • एक चम्मच हल्दी को एक गिलास छाछ में घोलकर पिलाने से बच्चे के पेट के कीड़े (baby ke pet ke kide) दूर हो सकते हैं।
  • बच्चों के पेट में कीड़े की दवा: कद्दू के बीज

    • कद्दू के बीज बच्चों के पेट में मौजूद कीड़ों को अक्रिय (लकवाग्रस्त) कर देते हैं और फिर कीड़े मल के ज़रिए बाहर निकल जाते हैं।
    • एक चम्मच पिसे हुए कद्दू के बीज में एक चम्मच शहद मिलाकर बच्चे को खिलाने से उसके पेट के कीड़े (baby ke pet ke kide) दूर हो सकते हैं।
    • एक चम्मच कद्दू के बीजों को कूटकर तीन कप पानी में डालकर आधे घण्टे तक उबालें। ठंडा करके बच्चे को पिलाने से पेट के कीड़े बाहर निकालने में मदद मिलती है।
  • बच्चों के पेट में कीड़े की दवा: नीम

    • नीम में विभिन्न रोगों व कीटाणुओं से लड़ने की क्षमता होती है और यह पेट के कीड़े (baby ke pet ke kide) ख़त्म करने की कारगर प्राकृतिक दवाओं में से एक है।
    • आधा चम्मच पिसी नीम की पत्तियों को एक गिलास पानी में घोलकर शिशु को पिलाने से बच्चे को पेट के कीड़ों से राहत मिल सकती है।
    • आधा चम्मच नीम की पिसी पत्तियों और एक चम्मच शहद को एक गिलास गर्म दूध में मिलाकर पीने से बच्चे के पेट के कीड़े (baby ke pet ke kide) दूर हो सकते हैं।
  • बच्चों के पेट में कीड़े की दवा: नारियल

    • नारियल में कीटाणुओं से लड़ने की जबरदस्त क्षमता होती है और यह पेट के कीड़े बाहर निकालने में सहायक होता है।
    • बच्चे को रोज़ सुबह एक चम्मच नारियल पीसकर खिलाने से बच्चे को पेट के कीड़े (baby ke pet ke kide) की समस्या से राहत मिलती है।
    • बच्चे को सुबह चार से छह चम्मच शुद्ध नारियल का तेल पिलाएं। इससे बच्चे की बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है, और पेट के कीड़े (baby ke pet ke kide) बाहर निकल सकते हैं।
  • बच्चों के पेट में कीड़े की दवा: लौंग

    • लौंग न केवल बच्चे के पेट में मौजूद कीड़े (baby ke pet me kide) और उनके अंडे बाहर निकालने में सहायक है, बल्कि यह बच्चों को पेट में दोबारा कीड़े होने से भी सुरक्षित रखती है।
    • एक चम्मच लौंग को एक कप गर्म पानी में 20 मिनट के लिए भिगो दें। बच्चे को हफ़्ते में तीन बार यह पानी पिलाने से उसके पेट के कीड़े (baby ke pet ke kide) दूर हो सकते हैं।
  • बच्चों के पेट में कीड़े की दवा: गाजर

    • गाजर में विटामिन A पाया जाता है और यह बच्चे के पेट के कीड़े दूर करने में सहायक है। बच्चे को खाली पेट एक गाजर खिलाने से उसके पेट के कीड़े (baby ke pet ke kide) बाहर निकल सकते हैं।

बच्चे को पेट के कीड़े की समस्या से कैसे बचाएं?

(Bache ke pet ke kide kaise dur rakhe)

bache ke pet me kide ki samsya

बच्चे को पेट के कीड़े (baby ke pet ke kide) की समस्या से बचाने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखें-

  • शिशु का डायपर समय समय पर बदलते रहें और हर बार उसके कूल्हे अच्छी तरह से साफ करें। इसके बाद अपने हाथ साबुन से अच्छी तरह धोयें।
  • अपना घर और घर के आसपास साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें।
  • जब भी बच्चा बाहर खेलने जाए, तो उसे जूते पहनाकर भेजें, ताकि उसका शरीर दूषित मिट्टी के संपर्क में ना आये।
  • शिशु को ऐसी जगह ना खेलने दें, जहां पानी इकट्ठा हो। ऐसी जगह से शिशु के शरीर में कीड़े घुस सकते हैं।
  • अपने बच्चे के नाखून समय समय पर काटते रहें, क्योंकि उनमें कीड़ों के अंडे जमा होने का ख़तरा रहता है।
  • बच्चे को पेट के कीड़ों से बचाने के लिए कच्चा या अधपका भोजन ना खिलाएं।
  • बच्चे को फल व सब्ज़ियाँ अच्छी तरह धोकर ही खिलाएं।
  • छोटे बच्चों को पानी उबालकर व ठंडा करके ही पिलाएं।
  • बच्चे का बिस्तर व कपड़े गर्म पानी से धोएं।
  • जब बच्चा थोड़ा समझदार हो जाये, तो उसे अँगूठा चूंसने, नाखून कुतरने, या मिट्टी खाने से मना करें।

छोटे बच्चे अक्सर किसी ना किसी शारीरिक समस्या से पीड़ित होते रहते हैं, उनके पेट में कीड़े (baby ke pet me kide) होना भी ऐसी ही एक आम समस्या है। अगर आपको अपने बच्चे में पेट के कीड़े (baby ke pet ke kide) की समस्या के लक्षण नज़र आएं तो घबराएं नहीं और उसे डॉक्टर के पास लेकर जाएं। लक्षणों के आधार पर डॉक्टर बच्चों के पेट में कीड़े की दवा देते हैं। हालाँकि इस समस्या से शिशु को बचाना ही सबसे बेहतर है, इसलिए ब्लॉग में बताई गयी बातों का ध्यान रखें और अपने बच्चे को स्वस्थ व सेहतमंद बचपन दें।

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