नवजात शिशु की मालिश कैसे करें (Navjat shishu ki malish kaise kare)

नवजात शिशु की मालिश कैसे करें (Navjat shishu ki malish kaise kare)
शिशु जन्म के समय इतना ज्यादा कोमल होता है, कि कई बार माता पिता को उसे हाथ लगाने में भी डर लगता है। आपकी त्वचा का स्पर्श शिशु को अच्छा महसूस कराता है और साथ ही इससे शिशु के साथ आपका रिश्ता और भी ज्यादा मजबूत हो जाता है। शरीर के सही विकास के लिए बच्चों की मालिश ज़रूरी होती है, लेकिन इसके लिए आपको मालिश से जुड़ी कुछ ज़रूरी बातें पता होनी चाहिए। आज के ब्लॉग में हम "बच्चों की मालिश कब करनी चाहिए?" "शिशु की मालिश कैसे करनी चाहिए?" जैसे अहम सवालों के जवाब दे रहे हैं। बच्चों की मालिश कब कर सकते हैं? (Baby ki malish ki kab kar sakte hai) बच्चों की मालिश करने का सही समय क्या है? (Bache ki malish kis samay kare) एक दिन में कितनी बार शिशु की मालिश करनी चाहिए? (Din me kitni bar bache ki malish karni chahiye) बच्चों की मालिश कैसे करें? (Bache ki malish kaise kare) क्या नवजात शिशु के सिर की मालिश कर सकते हैं? (Kya bache ke sir ki malish karna safe hai) शिशु के सिर की मालिश कैसे करें? (Baby ke sir ki malish kaise kare) बच्चों की मालिश से उन्हें क्या फायदे होते हैं? (Bache ki malish ke kya fayde hote hai) किन स्थितियों में बच्चों की मालिश नहीं करनी चाहिए? (Bache ki malish kab nahi karni chahiye) बच्चों की मालिश करने के टिप्स (Baby massage tips in hindi) बच्चों की मालिश कब कर सकते हैं? (Baby ki malish kab kar sakte hai) बच्चों की मालिश कब कर सकते हैं? (Baby ki malish kab kar sakte hai) शिशु के जन्म के समय उसकी त्वचा अविकसित होती है, इसके अलावा उसकी गर्भनाल का घाव ताज़ा होता है, इसलिए जन्म के तुरंत बाद बच्चों की मालिश नहीं करनी चाहिए। शिशु के एक माह की आयु का होने से पहले मालिश करने से शिशु की त्वचा व नाभि में संक्रमण होने का खतरा होता है। विशेषज्ञों के अनुसार जन्म के एक माह बाद शिशु की मालिश करना सुरक्षित होता है, क्योंकि इस दौरान शिशु की त्वचा सही से विकसित हो जाती है और साथ ही उसकी गर्भनाल भी पूरी तरह ठीक हो जाती है। इसलिए जन्म के चार से छह सप्ताह बाद शिशु की मालिश की शुरुआत की जा सकती है। बच्चों की मालिश करने का सही समय क्या है? (Bache ki malish kis samay kare) बच्चों की मालिश करने का सही समय क्या है? (Bache ki malish kis samay kare) वैसे तो शिशु की मालिश का कोई निश्चित समय तय नहीं है, यह आपके शिशु की सोने, जागने और स्तनपान (stanpan) की दिनचर्या पर निर्भर करता है। बच्चों की मालिश का सही समय जानना ज़रूरी है, क्योंकि इससे मालिश के वक़्त आपको और शिशु दोनों को मज़ा आयेगा। शिशु की मालिश करने के सही समय सम्बंधी टिप्स (baby massage tips in hindi) शिशु की मालिश करने के सही समय सम्बंधी टिप्स (baby massage tips in hindi)
  • बेबी मालिश टिप्स 1 (baby massage tips in hindi) - स्नान से पहले बच्चों की मालिश करना उनकी सेहत के लिए अच्छा होता है।
  • बेबी मालिश टिप्स 2 (baby massage tips in hindi) - शिशु को नहलाने के बाद भी उसकी मालिश करना अच्छा होता है, क्योंकि इससे शिशु को बहुत आराम मिलता है और वो सो जाता है।
  • बेबी मालिश टिप्स 3 (baby massage tips in hindi) - शिशु को सुलाने से पहले शिशु की मालिश कर सकती हैं, इससे शिशु को अच्छी नींद आती है।
  • बेबी मालिश टिप्स 4 (baby massage tips in hindi) - शिशु के खेलने के समय उसकी मालिश कर सकती हैं, क्योंकि छोटे बच्चों को मालिश भी एक मजेदार खेल की तरह लगती है।
  • बेबी मालिश टिप्स 5 (baby massage tips in hindi) - शिशु को स्तनपान (stanpan) कराने के कम से कम एक घण्टे बाद ही शिशु की मालिश करें।
एक दिन में कितनी बार शिशु की मालिश करनी चाहिए? (Din me kitni bar bache ki malish karni chahiye) एक दिन में कितनी बार शिशु की मालिश करनी चाहिए? (Din me kitni bar bache ki malish karni chahiye) एक दिन में शिशु की मालिश कितनी बार की जा सकती है, इस बारे में कोई खास नियम नहीं बना है। अगर आपका बच्चा मालिश करवाना पसन्द करता है, तो आप दिन में एक से ज्यादा बार उसकी मालिश कर सकती हैं। हालांकि बच्चों की मालिश की एक दिनचर्या बनाना सबसे बेहतर होता है, क्योंकि इससे शिशु को मालिश करवाने में ज्यादा आनंद आता है और साथ ही उसके शरीर को मालिश के भरपूर फायदे भी मिलते हैं। अगर आप रोज शिशु की मालिश नहीं कर पाती हैं, तो चिंता ना करें हफ़्ते में दो से तीन दिन शिशु की मालिश करने से भी शिशु को मालिश के फायदे मिल जाएंगे। अगर बच्चे को स्वास्थ्य सम्बंधी कोई परेशानी है, तो उसे डॉक्टर को दिखाएं और मालिश के बारे में सलाह लें। बच्चों की मालिश कैसे करें? (Bache ki malish kaise kare) बच्चों की मालिश कैसे करें? (Bache ki malish kaise kare) बच्चों को एक खास अंदाज में छुआ जाना बहुत पसंद होता है, ऐसे में आप अगर एक खास तरीके से शिशु की मालिश करेंगी तो वह धीरे धीरे मालिश को पसन्द करने लगेगा। इससे शिशु के दिमागी विकास में भी मदद मिलती है, क्योंकि एक ही तरीके से शिशु की मालिश करने पर हर बार मालिश के समय वह अंदाजा लगाने लगता है कि अब आगे क्या होने वाला है। शिशु की मालिश इस तरह करें (baby massage tips in hindi)
  • सबसे पहले शिशु के कपड़े उतारें, चाहें तो उसका डायपर ना उतारें।
  • फिर बिस्तर के बीच में या ज़मीन पर एक नर्म तौलिया या चादर बिछाकर शिशु को उस पर लिटाएं।
  • तेल की कुछ बूंदें अपने हाथ में लेकर दोनों हथेलियों को आपस में रगड़ें और सबसे पहले शिशु के पैरों के तलवों पर हल्के हाथों से तेल लगाएं।
  • अब हाथों में दोबारा थोड़ा तेल लें और दोनों पैरों की एक एक करके मालिश करें।
  • हल्के हाथों से शिशु की टाँगों को चूड़ी पहनने के अंदाज में रगड़ें।
  • इसी तरह शिशु के हाथ की मालिश करते समय सबसे पहले उसकी हथेलियों पर तेल लगाएं और फिर दोनों हाथों की पैरों की तरह ही मालिश करें।
  • इसके बाद शिशु के हाथ और पैरों की अंगुलियों को हल्के हाथों से पकड़ कर बाहर खींचें, ज्यादा जोर ना लगाएं इससे उसे चोट लग सकती है।
  • अब शिशु के कंधों की मालिश करें।
  • शिशु की छाती और पेट की मालिश करते समय हाथों को शिशु की छाती और पेट पर गोल गोल घुमाते हुए मालिश करें। इससे उसका पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है। पेट की मालिश के दौरान शिशु के पेट को ना दबायें, क्योंकि इससे शिशु को चोट लग सकती है।
  • अब शिशु को पलट कर पेट के बल सुला दें, इसके बाद हल्के हाथों से पींठ व कूल्हों पर तेल लगाएं और हथेली से धीरे धीरे रगड़ें।
  • पींठ की मालिश के दौरान शिशु की रीढ़ की हड्डी पर दबाव ना डालें, इससे शिशु को चोट लग सकती है।
क्या नवजात शिशु के सिर की मालिश कर सकते हैं? (Kya bache ke sir ki malish karna safe hai) क्या नवजात शिशु के सिर की मालिश कर सकते हैं? (Kya bache ke sir ki malish karna safe hai बड़े बुजुर्ग नवजात बच्चों की मालिश के दौरान सिर की मालिश को बहुत ज़रूरी बताते हैं। कुछ सावधानियों के साथ शिशु के सिर की मालिश की जा सकती है। कई शिशुओं को सिर की मालिश करवाने में बड़ा मजा आता है, लेकिन कुछ शिशुओं को सिर की मालिश कराना पसन्द नहीं होता, ऐसे में जबरदस्ती शिशु के सिर की मालिश ना करें। शिशु के सिर की मालिश कैसे करें? (Baby ke sir ki malish kaise kare) शिशु के सिर की मालिश कैसे करें? (Baby ke sir ki malish kaise kare) छोटे बच्चों की मालिश के दौरान उनके सिर को बहुत सावधानी से छूना चाहिए, क्योंकि शिशुओं के सिर की हड्डी पूरी तरह जुड़ी हुई नहीं होती है। नवजात शिशु के सिर में ऊपरी और पिछले हिस्से में दो नरम स्थान होने हैं, यहाँ दबाव बिल्कुल ना डालें। शुरुआती एक दो महीने शिशु को पींठ के बल लिटाकर उसके सिर को हल्के हाथों से थपथपाकर तेल लगा दें, शिशु के सिर को रगड़ें नहीं। जब शिशु का सिर कठोर होने लगे तब आप शिशु के सिर में उंगलियों से हल्की मालिश कर सकती हैं। अगर शिशु के सिर पर पपड़ी/क्रेडल कैप (cradle cap in hindi) जमी हुई है, तो शिशु की मालिश के समय उसे हटाने की कोशिश बिल्कुल ना करें। इसके बजाय शिशु के सिर की पपड़ी पर रात को हल्के हाथों से थपथपाकर तेल लगा दें, सुबह तक शिशु के सिर की पपड़ी अपने आप नरम हो जाएगी और जब आप शिशु को नहलाएंगी तो धीरे धीरे यह अपने आप उतरने लगेगी। जैसे जैसे शिशु बड़ा होगा शिशु की क्रेडल कैप अपने आप ठीक हो जायेगी। बच्चों की मालिश से उन्हें क्या फायदे होते हैं? (Bache ki malish ke kya fayde hote hai) बच्चों की मालिश से उन्हें क्या फायदे होते हैं? (Bache ki malish ke kya fayde hote hai)
  • बच्चों की मालिश से उनका सामाजिक और मानसिक विकास होता है। एक रिसर्च के अनुसार मालिश के समय होने वाले स्पर्श से बच्चे का दिमाग अधिक सक्रिय होने लगता है।
  • बच्चों की मालिश करने से शिशु व माँ दोनों का तनाव कम होता है, क्योंकि मालिश से माँ और शिशु के शरीर में ऑक्सीटोसिन हार्मोन (oxytocin hormone in hindi) का स्तर बढ़ जाता है जो कि खुशी महसूस करवाने वाला हार्मोन (hormone in hindi) है।
  • छोटे बच्चों की मालिश करने से उनके शरीर का विकास सही तरह से होता है और इसके अलावा शरीर के अंगों के तालमेल में सुधार होता है।
  • सोने से पहले बच्चों की मालिश करने से उन्हें अच्छी और गहरी नींद आती है।
  • नियमित रूप से छोटे बच्चों की मालिश करने से उनकी मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
  • शिशु के पेट की मालिश करने से उसे कब्ज (baby constipation in hindi) की समस्या से राहत मिल सकती है। इसके साथ ही बच्चों की मालिश करना पेट की अन्य कई समस्याएं जैसे कोलिक (colic in hindi) आदि कम करने में सहायक है।
  • गुनगुने तेल से बच्चों की मालिश (छह माह से अधिक उम्र के बच्चे) करने से उन्हें खाँसी ज़ुकाम (baby cough cold in hindi) की समस्या से राहत मिलती है।
  • बच्चों की मालिश करने से उनमें हिचकी की समस्या कम हो सकती है।
  • अगर शिशु पीलिया (jaundice in hindi) की समस्या से पीड़ित है, तो ऐसे बच्चों की मालिश करने से उन्हें आराम मिलता है। हालांकि शिशु की मालिश करने से पीलिया ठीक नहीं होता।
किन स्थितियों में बच्चों की मालिश नहीं करनी चाहिए? (Bache ki malish kab nahi karni chahiye) किन स्थितियों में बच्चों की मालिश नहीं करनी चाहिए? (Bache ki malish kab nahi karni chahiye)
  • अगर शिशु को खुजली की समस्या (eczima in hindi) है, तो उसकी मालिश ना करें।
  • बुखार होने पर बच्चों की मालिश न करें।
  • अगर मालिश से शिशु को किसी तरह की समस्या हो रही है, तो उसकी मालिश ना करें और डॉक्टर से सलाह लें कि आपके शिशु के लिए क्या बेहतर होगा।
  • अगर शिशु को मालिश करवाना पसंद नहीं है, तो जबरदस्ती उसकी मालिश ना करें।
बच्चों की मालिश करने के टिप्स (Baby massage tips in hindi)
  • बच्चों की मालिश के टिप्स (baby malish tips in hindi) - शिशु की मालिश के लिए ऐसी जगह चुनें, जहाँ आप शिशु की आराम से मालिश कर सकें।
  • बच्चों की मालिश के टिप्स (baby malish tips in hindi) - अगर शिशु खुद पलटने लगा है तो शिशु की मालिश करने के लिए उसे ऐसी जगह लिटाएं, जहाँ उसे पलटने पर गिरने का खतरा ना हो, क्योंकि शिशु के शरीर पर तेल लगा होने की वजह से वो आपके हाथों से भी फिसल सकता है। बिस्तर के बीच में या जमीन पर लिटाकर बच्चों की मालिश करना सबसे सुरक्षित होता है।
  • बच्चों की मालिश के टिप्स (baby malish tips in hindi) - मालिश करने से पहले शिशु के नीचे एक नर्म तौलिया या चादर बिछा दें, ताकि चादर या तौलिया अतिरिक्त तेल सोख सके।
  • बच्चों की मालिश के टिप्स (baby malish tips in hindi) - बच्चों की मालिश के कमरे में बाहर से हवा सीधे अंदर नहीं आनी चाहिए।
  • बच्चों की मालिश के टिप्स (baby malish tips in hindi) - शिशु को मालिश के बीच में कभी अकेला ना छोड़ें।
  • बच्चों की मालिश के टिप्स (baby malish tips in hindi) - गर्मी के समय शिशु की मालिश वाले कमरे में थोड़ी ठंडक व सर्दी के समय बच्चों की मालिश के कमरे में थोड़ी गर्माहट होनी चाहिए।
  • बच्चों की मालिश के टिप्स (baby malish tips in hindi) - बच्चे की मालिश का ज़रूरी समान पहले से अपने पास रख लें।
  • बच्चों की मालिश के टिप्स (baby malish tips in hindi) - अगर किसी अंग की मालिश करते समय बच्चा रोने लगे तो वहाँ मालिश ना करें।
  • बच्चों की मालिश के टिप्स (baby malish tips in hindi) - बच्चों की मालिश करते समय हल्के हाथों का उपयोग करें, शिशु के शरीर पर ज्यादा दबाव ना डालें।
  • बच्चों की मालिश के टिप्स (baby malish tips in hindi) - बच्चे की मालिश करते समय उसकी तरफ़ मुस्कुराएं और उससे बात करें, जब वो आपकी तरफ देखे तो उससे नज़रें मिलायें, इससे उसे मालिश करवाने में मजा आने लगेगा।
  • बच्चों की मालिश के टिप्स (baby malish tips in hindi) - बच्चों की मालिश हो जाने के बाद उनकी हथेलियों व पैरों से तेल पौंछ दें, ताकि अगर शिशु हाथ या पैर मुँह में डाल ले, तो उसके मुंह में तेल ना जाये।
  • बच्चों की मालिश के टिप्स (baby malish tips in hindi) - शिशु की मालिश करने की एक दिनचर्या बनाएं।
बच्चों की मालिश करने से उन्हें कई शारीरिक और मानसिक फायदे होते हैं, साथ ही माँ व शिशु दोनों को अच्छा महसूस होता है। अपने शिशु के अच्छे स्वास्थ्य के लिए आप ब्लॉग में बताए गए तरीके से उसकी सुरक्षित मालिश कर सकती हैं। बच्चों की मालिश के समय उनकी सुरक्षा का खास खयाल रखें, क्योंकि शिशु के कोमल शरीर को हल्के से दबाव से भी चोट लग सकती है। मालिश करने से नवजात शिशु अपनी कोमल त्वचा पर माँ का स्पर्श पहचानने लगते हैं और धीरे धीरे माँ से उनका रिश्ता गहरा होने लगता है।
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