बच्चों का टीकाकरण क्यों ज़रूरी है? (Bache ko tike lagvana kyun zaruri hai)

बच्चों का टीकाकरण क्यों ज़रूरी है? (Bache ko tike lagvana kyun zaruri hai)
गंभीर बीमारियों के खतरे से बचाने के लिए नवजात शिशु का टीकाकरण (baby tikakaran) करवाया जाना जरूरी होता है। बच्चों का टीकाकरण करवाने से उनके शरीर में विभिन्न बीमारियों जैसे काली खाँसी, निमोनिया, टाइफाइड आदि के वायरस व बैक्टीरिया के प्रति रोग प्रतिरोधकता (immunity in hindi) विकसित हो जाती है। आज के ब्लॉग में हम आपको बच्चों का टीकाकरण (baby tikakaran) करवाने से जुड़ी कुछ जरूरी बातें बता रहे हैं। बच्चों का टीकाकरण क्या होता है? (Bacho ka tikakaran kya hota hai) नवजात शिशु का टीकाकरण कैसे काम करता है? (Bacho me tikakaran kaise kaam karta hai) बच्चों का टीकाकरण कितने प्रकार का होता है? (Bacho ka tikakaran kitne type ka hota hai) बच्चों के टीके कितने प्रकार के होते हैं? (Bacho ke tike kitne type ke hote hai) बच्चों का टीकाकरण करवाना क्यों ज़रूरी है? (Baby ko tike lagvana kyun zaruri hai) क्या बच्चों का टीकाकरण सुरक्षित है? (Kya bache ka tikakaran safe hota hai) क्या बच्चों के टीकाकरण के कोई साइड इफेक्ट होते हैं? (Kya bacho me tikakaran ke koi side effects hote hai) बच्चों का टीकाकरण क्या होता है? (Bacho ka tikakaran kya hota hai) बच्चों का टीकाकरण क्या होता है? (Bacho ka tikakaran kya hota hai) शरीर को संक्रमणों से बचाए रखने के लिए हमें बीमारियों से लड़ने की क्षमता की ज़रूरत होती है। जब भी हमारे शरीर पर कीटाणुओं का हमला होता है, तो इनका मुकाबला करने के लिए हमारे शरीर में एंटीबॉडीज़ (antibodies in hindi) नामक विशेष पदार्थ बनने लगते हैं। बच्चों का टीकाकरण (baby tikakaran) उनके शरीर में इन संक्रमणों से लड़ने की क्षमता पैदा करने के लिए अपनाए जाने वाली एक प्रक्रिया है, जिसमें डॉक्टर शिशु के शरीर में बहुत कम मात्रा में खास तरह के वायरस (virus in hindi) या बैक्टीरिया (bacteria in hindi) डालते हैं। इससे शरीर को इनकी पहचान करने और भविष्य में इन्हें रोकने की क्षमता पैदा करने में मदद मिलती है। नवजात शिशु का टीकाकरण कैसे काम करता है? (Bacho me tikakaran kaise kaam karta hai) नवजात शिशु का टीकाकरण कैसे काम करता है? (Bacho me tikakaran kaise kaam karta hai) टीके के जरिये शिशु के शरीर में पहुंचने के बाद ये बैक्टीरिया या वायरस सक्रिय हो जाते हैं और शिशु थोड़ा बीमार हो जाता है। इस दौरान शिशु का शरीर इन बैक्टीरिया या वायरस को मारने वाला पदार्थ यानी एंटीबॉडीज़ (antibodies in hindi) तैयार करने लगता है। ये एंटीबॉडीज़ बीमारी के कीटाणुओं को खत्म कर देते हैं। बीमारी को खत्म करने के बाद ज्यादातर एंटीबॉडीज़ खुदबखुद नष्ट हो जाती हैं, लेकिन शिशु का शरीर अपनी याददाश्त के लिए कुछ एंटीबॉडीज़ (antibodies in hindi) को संभाल कर रख लेता है। फिर भविष्य में कभी भी इस तरह के रोग का हमला होने पर, शिशु का शरीर उसे एंटीबॉडीज़ के ज़रिए खत्म कर देता है। बच्चों का टीकाकरण (baby tikakaran) करवाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे बच्चे पूरी तरह बीमार हुए बिना ही बीमारियों से लड़ने के क्षमता (immunity in hindi) विकसित कर लेते हैं। बच्चों का टीकाकरण कितने प्रकार का होता है? (Bacho ka tikakaran kitne type ka hota hai) बच्चों का टीकाकरण कितने प्रकार का होता है? (Bacho ka tikakaran kitne type ka hota hai) बच्चों का टीकाकरण मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है -
  • बच्चों का प्राथमिक टीकाकरण (Bacho ka primery vaccination) - इस प्रकार के टीके लगाने की शुरुआत शिशु के जन्म से ही हो जाती है और बच्चे के कुछ वर्षों का होने तक ये टीकाकरण जारी रहता है। प्राथमिक टीकों से बच्चों का टीकाकरण (baby tikakaran) करने से उनके शरीर में किसी खास बीमारी से लड़ने की क्षमता विकसित होती है और इनमें एक से पांच खुराक तक दी जा सकती हैं।
  • नवजात का बूस्टर टीकाकरण (Bacho ka booster vaccination) - प्राथमिक टीके का प्रभाव बढ़ाने के लिए बच्चों को बूस्टर टीके लगाए जाते हैं। प्राथमिक टीकाकरण के कुछ समय बाद शिशु के शरीर में एंटीबॉडीज़ (antibodies in hindi) की संख्या कम होने लगती है और इससे उसके बीमार होने की आशंका बढ़ जाती है। बूस्टर टीकों से नवजात शिशु का टीकाकरण करने से उसके शरीर में एंटीबॉडीज़ की सही मात्रा बनी रहती है और वह रोगों से सुरक्षित रहता है।
  • बच्चों का सार्वजनिक टीकाकरण (Government vaccination for kids in hindi) - कुछ विशेष बीमारियों को पूरी तरह ख़त्म करने के लिए सरकार द्वारा सार्वजनिक टीकाकरण अभियान चलाए जाते हैं। इस प्रकार का टीकाकरण देश को किसी विशेष महामारी से पूरी तरह मुक्त करने के लक्ष्य को पाने के लिए चलाए जाते हैं। सार्वजनिक टीकाकरण अभियान की वजह से ही हमारा देश चेचक या बड़ी माता (smallpox in hindi) और पोलियो (polio in hindi) से पूरी तरह मुक्त हो पाया है।
बच्चों के टीके कितने प्रकार के होते हैं? (Bacho ke tike kitne type ke hote hai) बच्चों के टीके कितने प्रकार के होते हैं? (Bacho ke tike kitne type ke hote hai) दवा के प्रकार के हिसाब से टीके पांच प्रकार के होते हैं -
  • लाइव वायरस टीके (Live attenuated vaccines in hindi) - वैज्ञानिक इस प्रकार के टीके किसी खास बीमारी के जीवित विषाणु (virus in hindi) या जीवाणु (bacteria in hindi) को प्रयोगशाला या लैब में कमज़ोर करके तैयार करते हैं। ये टीके बहुत ज्यादा असरदार होते हैं, लेकिन कुछ दुर्लभ मामलों में (बहुत ज्यादा कमज़ोर बच्चों में) इन टीकों से संक्रमण (infection in hindi) हो सकता है।
  • अक्रिय टीके (Inactivated vaccines in hindi) - इस तरह के टीके बीमारी के कीटाणुओं को विशेष कैमिकल्स द्वारा मारकर उनके मृत शरीर से तैयार किये जाते हैं। ये लाइव वायरस टीकों से ज्यादा सुरक्षित होते हैं। ये अक्रिय टीके शिशु के शरीर में एक कमज़ोर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (immune response in hindi) प्रेरित करते हैं और इनसे नवजात शिशु का टीकाकरण (baby tikakaran) करने के बाद भविष्य में उसे बूस्टर टीकों की ज़रूरत पड़ सकती है।
  • टॉक्सोइड टीके (Toxoid vaccines in hindi) - अगर किसी बीमारी की वजह कीटाणु द्वारा पैदा किया कोई जहरीला पदार्थ होता है, तो वैज्ञानिक उस पदार्थ की नकल करके टीका तैयार करते हैं। जब बच्चे को इस तरह का टीका लगाया जाता है, तो उसका शरीर उस कीटाणु के जहरीले पदार्थ को नष्ट करना सीख जाता है।
  • संयुग्मित टीके (Conjugate vaccines in hindi) - कुछ बैक्टीरिया (bacteria in hindi) खुद को एक विशेष आवरण में छिपा लेते हैं, जिसे प्रतिरोधक तंत्र (immune system in hindi) पहचान नहीं पाता। संयुग्मित टीकों में इस विशेष आवरण को किसी ऐसे बैक्टीरिया से जोड़ दिया जाता है, जिसे एंटीबॉडीज़ (antibodies in hindi) पहचान लेती हैं और शरीर में उस बीमारी से लड़ने की क्षमता विकसित हो जाती है।
  • सबयूनिट टीके (Subunit vaccines in hindi) - सबयूनिट शब्द का अर्थ है - किसी चीज का एक हिस्सा। जी हाँ, सबयूनिट टीके रोगाणु के शरीर के उस भाग से बनाये जाते हैं, जो शरीर को रोग से लड़ने के लिए प्रेरित करता है। इस प्रकार के टीके प्रयोगशाला (लैब) में कृत्रिम रूप से भी बनाये जा सकते हैं। इस टीके से संक्रमण होने की आशंका अन्य सभी टीकों से कम होती है।
बच्चों का टीकाकरण करवाना क्यों ज़रूरी है? (Baby ko tike lagvana kyun zaruri hai) बच्चों का टीकाकरण करवाना क्यों ज़रूरी है? (Baby ko tike lagvana kyun zaruri hai) जन्म के बाद कुछ सालों तक शिशु की बीमारियों से लड़ने की क्षमता (immunity in hindi) का विकास होता रहता है। जब तक आप शिशु को अच्छी तरह स्तनपान करवाती हैं, तब तक शिशु बीमारियों से सुरक्षित रहता है, क्योंकि उसे दूध के ज़रिए आपके शरीर से एंटीबॉडीज़ (antibodies in hindi) मिलती हैं, जो बीमारियों से लड़ती हैं। मगर कुछ समय बाद माँ के दूध से मिली एंटीबॉडीज़ नष्ट होने लगती हैं और शिशु के शरीर को अपने लिए खुद एंटीबॉडीज़ बनाने की ज़रूरत होती है। बच्चों का टीकाकरण (baby tikakaran) करवाने से उनका शरीर एंटीबॉडीज़ बनाने के लिए प्रेरित होता है और वो कुछ खास बीमारियों से लड़ना सीख जाते हैं। ऐसे में बच्चों में पोलियो (polio in hindi), चेचक (smallpox in hindi) जैसी महामारी फैलने का खतरा नहीं होता, क्योंकि उनके शरीर में टीकाकरण (tikakaran) के ज़रिए ऐसे रोगों से लड़ने की क्षमता विकसित हो जाती है। क्या बच्चों का टीकाकरण सुरक्षित है? (Kya bache ka tikakaran safe hota hai) क्या बच्चों का टीकाकरण सुरक्षित है? (Kya bache ka tikakaran safe hota hai) ज्यादातर टीकों को शिशुओं की कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता (baby immunity in hindi) को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है और ये सुरक्षित होते हैं। बच्चों का टीकाकरण (baby tikakaran) करने के लिए बनाए गए सभी टीकों को पहले अनुभवी विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की निगरानी में सैकड़ों बार जाँचा जाता है, इसके बाद ही इन्हें शिशुओं को लगाए जाने की अनुमति दी जाती है। क्या बच्चों के टीकाकरण के कोई साइड इफेक्ट होते हैं? (Kya bacho me tikakaran ke koi side effects hote hai) क्या बच्चों के टीकाकरण के कोई साइड इफेक्ट होते हैं? (Kya bacho me tikakaran ke koi side effects hote hai) ज्यादातर शिशुओं को टीका लगने से कोई परेशानी नहीं होती, लेकिन कुछ बच्चों का टीकाकरण होने के बाद उनके शरीर पर निम्न साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं।
  • नवजात शिशु का टीकाकरण होने के बाद वो चिड़चिड़ा हो जाता है और अक्सर रोने लगता है।
  • कुछ टीके लगने के बाद आपके शिशु को हल्का बुखार हो सकता है। बच्चे का बुखार पांच - सात दिन में ठीक हो जाता है।
  • कई बार नवजात शिशु का टीकाकरण होने के बाद उसका शरीर टीके वाली जगह पर लाल हो सकता है। यह कुछ दिनों में ठीक हो जाता है।
  • कुछ बच्चों को टीका लगने के बाद उनके शरीर पर टीके वाली जगह पर सूजन आ जाती है, जो टीकाकरण (vaccination in hindi) के एक से दो हफ़्तों में अपने आप ठीक हो जाती है।
  • बीसीजी का टीका (BCG vaccine in hindi) लगने के बाद शिशु के शरीर पर टीके वाली जगह पर गाँठ बन सकती है। यह गाँठ छूने पर नरम लगती है और करीब 15 दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है। साथ ही टीके वाली जगह पर निशान पड़ सकता है।
  • डीपीटी का टीके (DPT vaccine in hindi) से नवजात शिशु का टीकाकरण होने बाद उसे टीके की जगह पर दर्द और सूजन हो सकती है। कभी कभी टीके के इंजेक्शन की जगह पर हल्की गाँठ भी पड़ जाती है, इसमें दर्द नहीं होता और यह कुछ हफ़्तों में अपने आप ठीक हो जाती है।
  • खसरे का टीका (एमएमआर का टीका) लगने के 5-10 दिनों बाद कुछ बच्चों को बुखार व सर्दी-ज़ुकाम की समस्या हो जाती है।
  • नवजात शिशु का टीकाकरण होने के बाद अगर वह ज्यादा बीमार हो रहा हो, तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।
आपके नाज़ुक बच्चे को स्वस्थ रखने के लिए उसका टीकाकरण (tikakaran) करवाना बहुत ज़रूरी है। नवजात शिशु का टीकाकरण (baby tikakaran) सही तरह से करवाने के लिए आपको बच्चे के डॉक्टर से बात करनी चाहिए। सभी सरकारी अस्पतालों में जन्म के समय ही बच्चों का टीकाकरण कार्ड (tikakaran card) बनाया जाता है। इस कार्ड के अनुसार शिशु का टीकाकरण करवाएं और अपने घर के खास सदस्य को हमेशा हँसता खिलखिलाता हुआ रखें।
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