बच्चे को शौचालय का इस्तेमाल करना कैसे सिखाएं? (Bachhe ko toilet use karna kaise sikhaye)

बच्चे को शौचालय का इस्तेमाल करना कैसे सिखाएं? (Bachhe ko toilet use karna kaise sikhaye)

हमें उम्मीद है आपका बच्चा सही ढंग से बढ़ रहा है और हम दुआ करते हैं कि वह आगे भी अच्छी तरह से बढ़ता रहे! अब एक तय समय के बाद उसे मलत्याग व पेशाब करने के लिए शौचालय का उपयोग करना सीखना चाहिए।

उसे शौचालय यानी टॉयलेट का उपयोग सिखाने की प्रक्रिया को शौचालय प्रशिक्षण (toilet training in hindi) या टॉयलेट ट्रेनिंग कहा जाता है। यह आपके लिए एक बड़ी मुश्किल प्रक्रिया साबित हो सकती है, लेकिन इसके बारे में कुछ ज़रूरी बातें जानकर आप बच्चे की पॉटी ट्रेनिंग (potty training in hindi) को आसान और मज़ेदार बना सकते हैं।

इस ब्लॉग में हम आपको टॉयलेट ट्रेनिंग जुड़ी सभी बातें बता रहे हैं। इससे आप अपने बच्चे को बड़ी ही आसानी से शौचालय का उपयोग करना सिखा सकते हैं।

बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग कब शुरू करें?

(Bache ki toilet training kab shuru kare)

Baby toilet training

जिस तरह बोलना, चलना या दौड़ना सीखने में हर बच्चे को अलग समय लगता है, उसी तरह से टॉयलेट का उपयोग करना सीखने में भी हर बच्चे को अलग समय लगता है। इसे अगर साधारण शब्दों में समझें तो इसका मतलब है कि बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) की कोई निश्चित उम्र नहीं होती है। यह उसके शारीरिक व मानसिक विकास पर निर्भर करता है कि वह कितनी जल्दी शौचालय का इस्तेमाल करना सीख सकता है।

हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार बच्चे के ढाई साल का होने पर, उसकी टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) की शुरुआत की जा सकती है। इससे पहले उसे टॉयलेट का उपयोग करना सिखाना थोड़ा मुश्किल और परेशानी भरा हो सकता है। साथ ही इससे वह चिड़चिड़ा भी हो सकता है। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार लड़कियां टॉयलेट का उपयोग करना, लड़कों की तुलना में थोड़ी जल्दी सीखती हैं।

ध्यान दें- बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) के लिए गर्मियों का समय सबसे बेहतर होता है, क्योंकि इस दौरान आप उसे दिन में कम कपड़ों में रख सकती हैं। हल्के कपड़े पहनने से वह उन्हें जल्दी उतार व पहन पाएगा। इससे उसे शौचालय का इस्तेमाल सीखने में काफी मदद मिलेगी।

बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग में कितना समय लगता है?

(Bache ki toilet training me kitna time lagta hai)

Baby toilet training

हम सभी जानते हैं कि छोटे बच्चों को नई चीजें सीखने में थोड़ा वक्त लगता है, इसलिए आप अपने बच्चे से ये उम्मीद ना रखें कि वो एक ही दिन में ‘सूसू’ या ‘छीछी’ करने के लिए बाथरूम का उपयोग करना सीख जाएगा। आमतौर पर बच्चों की टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) करीब तीन से छह महीने तक चलती है। हालांकि कुछ बच्चों को इसमें थोड़ा कम तो कुछ को थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है।

इस दौरान कुछ बच्चे रात में बिस्तर गीला करना बंद करके, शौचालय में पेशाब करने लगते हैं, यानी वो सामान्य टॉयलेट ट्रेनिंग के साथ ही रात के समय की टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) भी सीख लेते हैं। जबकि कुछ बच्चों को रात को बाथरूम में जाकर पेशाब करना सीखने में एक या दो महीनों का अतिरिक्त समय लगता है।

सभी स्थितियां सामान्य हैं, इसलिए घबराएं नहीं। धीरज रखें, सही समय आने पर आपका बच्चा भी टॉयलेट में ‘सूसू’ व ‘छीछी’ करने में माहिर हो जाएगा।

कैसे पहचानें कि बच्चा टॉयलेट ट्रेनिंग के लिए तैयार है?

(Kaise pehchane ki bacha toilet training ke liye taiyar hai)

Baby toilet training

दो-तीन साल का होने तक ज्यादातर बच्चे साफ बोलना नहीं सीख पाते हैं। इसलिए जाहिर सी बात है कि वो खुद बोलकर आपको नहीं बता सकता है- “मैं टॉयलेट ट्रेनिंग के लिए तैयार हो गया हूँ!” ऐसे में आपको कैसे पता चलेगा कि बच्चा टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) के लिए तैयार है या नहीं?

निम्न बातों के ज़रिए आप इस बात का पता लगा सकते हैं कि वह टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) के लिए तैयार है-

  • वह बाथरूम या टॉयलेट के अंदर जाने में काफी रुचि दिखाता है और अक्सर टॉयलेट सीट पर बैठने की कोशिश करता है।
  • अब वह कम डायपर गीले करता है, यानी अब उसकी पेशाब की थैली ज्यादा समय तक पेशाब को रोककर रख सकती है।
  • वह जब सो कर उठता है, तो उसका डायपर सूखा होता है।
  • डायपर या लँगोटी गीली होने पर, वह उसे बदलने के लिए कहता है या इशारा करता है।
  • बच्चा लगभग नियमित समय पर पेशाब व शौच करता है।
  • वह आवाज़ों और चेहरे के हावभावों से पेशाब या शौच करने का संकेत देने लगा है।
  • वह हर जगह पेशाब या पॉटी नहीं करता है। इसका मतलब है कि अब उसने गुदा व पेशाब के रास्ते की मांसपेशियों को नियंत्रित करना सीख लिया है।
  • वह अपने नीचे के कपड़ों जैसे पायजामे, चड्डी, निक्कर आदि को खुद उतार व पहन लेता है।
  • वह ज्यादातर मामलों में आपकी नकल करने की कोशिश करता है।
  • उसमें स्वतन्त्र व्यवहार करने की क्षमता और व्यक्तित्व का विकास हो रहा है।
  • बच्चा सामान्य निर्देशों का पालन कर सकता है।
  • वह चलने-फिरने, बैठने-खड़े होने, दरवाजे खोलने व बन्द करने लगा है।
  • वह अपनी ज़रूरतें बोलकर बता सकता है और टॉयलेट ट्रेनिंग से जुड़ी साधारण बातें समझ सकता है।
  • वह एक जगह पर कम से कम पांच मिनट तक बैठ सकता है।

ये संकेत बताते हैं कि आपका बच्चा टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) के लिए तैयार है, लेकिन क्या आप इसके लिए सही तरह से तैयार हैं?

बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग के लिए खुद को कैसे तैयार करें?

(Bache ki toilet training ke liye khud ko kaise taiyar kare)

Baby toilet training

सही तैयारी की मदद से बच्चे को शौचालय का उपयोग करना सिखाना आपके लिए बेहद आसान हो जाएगा। इसलिए आप खुद को बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) के लिए ऐसे तैयार करें-

  • सही समय चुनें- बच्चे को शौचालय का उपयोग करना ऐसे समय पर सिखाएं, जब वह किसी भी तरह की चिंता या तनाव में ना हो। अगर वह किसी बात से परेशान है, तो अभी उसकी टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) शुरू ना करें। जैसे- आपने घर बदला है, बच्चे ने स्कूल जाना शुरू किया है, आपके घर में एक और नन्हा मेहमान आने वाला है, आदि।

  • सप्ताह के अंत में शुरू करें- बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) शुरू करने के लिए सप्ताहांत यानी वीकेंड का समय सबसे सही होता है। अगर आप कामकाजी हैं, तो इस समय आप अपना पूरा वक़्त बच्चे को दे पाएंगी और उसे आराम से चीज़ें समझा पाएंगी। इसके साथ ही, आमतौर पर इस दौरान आपके पति की छुट्टी होती है, तो आप घर के कामों में उनकी मदद लेकर बच्चे पर ज्यादा ध्यान दे सकती हैं।

  • ज़रूरत की सभी चीज़ें तैयार रखें- इस दौरान बच्चे के काम आने वाली सभी चीज़ें घर में तैयार रखें। इनमें बच्चे के लिए अतिरिक्त कपड़े, टिश्यू पेपर, कुछ डायपर, आदि शामिल हैं। अगर वह कपड़ों में पेशाब या शौच कर देता है, तो अतिरिक्त कपड़े उसे पहनाने के काम आएंगे। इसके अलावा अगर बच्चा शौचालय में पेशाब या मलत्याग करने में सहज नहीं हो पाता है, तो घर पर मौजूद डायपर उसके काम आ सकते हैं।

  • बच्चे को बाथरूम से रूबरू करवाएं- बच्चे को बाथरूम में लेकर जाएं और सभी चीजों के बारे में बताएं। जैसे- ‘ये नल है, इससे पानी आता है।’, ‘ये टॉयलेट सीट है, इस पर बैठकर सूसू और छीछी करते हैं।’ आदि। इससे धीरे धीरे वह बाथरूम के बारे में बहुत सी बातें जान लेगा और आपके लिए उसे इसका उपयोग करना सिखाना काफी आसान हो जाएगा।

  • बच्चे के लिए पॉटी चेयर खरीदें- अगर आप अंग्रेजी टॉयलेट का उपयोग करती हैं, तो बच्चे के लिए आकर्षक पॉटी चेयर खरीद सकती हैं। ये कई रंगों और डिजाइनों में ऑनलाइन उपलब्ध हैं। इनके जरिए बच्चा खेल-खेल में शौचालय का इस्तेमाल करना सीख सकता है। पॉटी चेयर खरीदते समय इस बात का ध्यान रखें कि वह हर तरह से बच्चे के लिए सुरक्षित हो।

  • टॉयलेट ट्रेनिंग शुरू करने से पहले ट्रायल करें- बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) शुरू करने के कुछ दिन पहले, उसे हर रोज़ दिन में कुछ घण्टे के लिए बड़े आकार की टीशर्ट या हल्के सूती पाजामे व टीशर्ट पहनाएं। इसके साथ ही उसे समझाएं कि उसे जब भी ‘सूसू’ या ‘छीछी’ आये, तो वह तुरंत आपको बताए या फिर आप खुद उसके हावभावों पर नज़र रखें।

अगर आपको लगे कि बच्चा पेशाब या शौच करने वाला है, तो उसे टॉयलेट लेकर जाएं। अगर बच्चा आपको इस बारे में बता नहीं पा रहा है और आप उसके हावभावों से भी यह समझ नहीं पा रहे हैं, तो कुछ समय तक उसे डायपर ही पहनाएं।

बच्चे को टॉयलेट ट्रेनिंग कैसे दें?

(Bache ko toilet training kaise de)

Baby toilet training

बच्चे को शौचालय का उपयोग करना सिखाने के लिए निम्न चरण अपनाएं-

  • उसे देखकर सीखने दें- नन्हे बच्चों का दिमाग तमाम जिज्ञासाओं से भरा होता है, उनमें हर नई चीज को जानने की इच्छा होती है। आप इसका फायदा उठाकर उसे टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) देने की शुरुआत करें। अगर आपका बच्चा लड़का है, तो उसे अपने पापा या बड़े भाई को शौचालय या टॉयलेट का इस्तेमाल करते हुए देखने दें ; और अगर आपका बच्चा लड़की है, तो उसे अपने साथ टॉयलेट में लेकर जाएं और सिखाएं की टॉयलेट का उपयोग कैसे करना है।

  • बच्चे को बैठने का अभ्यास करने दें- शुरुआत में कुछ दिनों तक, दिन में हर एक-दो घण्टे बाद, बच्चे को बिना कपड़े उतारे टॉयलेट सीट पर बिठाएं। अगर आप चाहें और बच्चा भी राजी हो, तो आप उसे वहां कपड़े उतार कर भी बिठा सकते हैं। इससे वह टॉयलेट सीट पर बैठना और खड़ा होना सीख जाएगा। साथ ही, इस दौरान ‘सूसू’ या ‘छीछी’ आने पर वह शौचालय का इस्तेमाल भी आसानी से कर सकता है।

    अगर बच्चा टॉयलेट सीट पर बैठना नहीं चाहता है, तो उसके साथ जबरदस्ती ना करें। इससे वह चिड़चिड़ा हो सकता है और आपको उसे टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) देने में ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

    आप एक मजेदार तरीका अपना सकते हैं। उसके पसंदीदा खिलौने जैसे गुड़िया, भालू आदि को एक खिलौने वाली छोटी पॉटी चेयर पर बिठा दें। फिर बच्चे को भी उसकी पॉटी चेयर या बाथरूम की टॉयलेट सीट पर बैठकर पेशाब या पॉटी करने के लिए प्रेरित करें। अपने खिलौने को पॉटी करता देखकर वह आसानी से टॉयलेट सीट का इस्तेमाल करना सीख सकता है।

  • सही उपकरणों का उपयोग करें- जब आपका बच्चा पेशाब या मलत्याग करने के लिए बैठे, तो यह ज़रूरी है कि उसके पैर जमीन को छुएँ और वह आगे की तरफ हल्का झुककर बैठे। इसलिए उसे टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) देने के लिए सही उपकरणों (जैसे टॉय पॉटी चेयर या असली टॉयलेट सीट) का उपयोग करें।

    विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआत में बच्चों को उनके लिए विशेष रूप से बनी खिलौने जैसी दिखने वाली रंगबिरंगी पॉटी चेयर पर बिठाना चाहिए। इससे वो पेशाब व शौच करते समय ज्यादा सहज और आरामदायक महसूस करते हैं और जल्दी सीख सकते हैं।

    अगर आप अपने बच्चे के लिए पॉटी चेयर खरीद रहे हैं, तो बिना यूरिन गार्ड वाली चेयर ही खरीदें, क्योंकि यूरिन गार्ड की वजह से बैठते या खड़े होते समय उसके लिंग में चोट लग सकती है। इससे उसे टॉयलेट सीट पर बैठने में डर लग सकता है और आपको उसे टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) देने में ज्यादा समय लग सकता है।

  • बच्चे को शौच से जुड़ी कहानियां सुनाएँ- आप अपने बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) के लिए रँगबिरंगी कहानियों की एक किताब खरीद सकती हैं, जिसमें शौच से जुड़ी कहानियां हों। इनसे उसे काफी रोमांचक महसूस होगा और वो पेशाब व पॉटी करने हेतु शौचालय का उपयोग करने के लिए प्रेरित होगा।

  • बाथरूम का माहौल सहज बनाएं- बच्चे को शौचालय का उपयोग करना सिखाते हुए इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उसे किसी तरह की परेशानी ना हो, वर्ना वह शौचालय जाने से कतराने लग सकता है। शुरुआत में कुछ हफ़्तों या महीनों तक आप बाथरूम में उसके साथ मौजूद रहें, इससे वह खुद को सुरक्षित महसूस करेगा।

    उससे चीजों के बारे में बात करें, जैसे- ‘आपको सूसू और छीछी हमेशा यहीं करनी चाहिए। इससे आप जल्दी बड़े हो जाओगे और पापा या मम्मी की तरह बन पाओगे।’ या ‘छीछी और सूसू करने के लिए आपको टॉयलेट का उपयोग करना चाहिए।’, ‘जो बच्चे बाथरूम या टॉयलेट में सूसू और छीछी करना सीख जाते हैं, उन्हें परी रानी अच्छा बच्चा मानती है और ढेर सारी अक्ल देती है।’ आदि।

  • उसके लिए नए अंडरवियर खरीदें- बच्चों में नई चीज़ों को पाने का चाव काफी ज्यादा होता है। इसलिए आप अपने बच्चे को टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) देने के दौरान नए अंडरवियर खरीदकर दे सकती हैं। वह उन्हें बहुत खुश होकर पहनेगा। साथ ही इनमें बच्चे को डायपर की तुलना में ज्यादा गीलापन महसूस होगा, जिससे वह टॉयलेट में पेशाब व मलत्याग करना जल्दी सीख सकता है।

    इसके अलावा आप उसे बाजार ले जा सकती हैं और उसकी मनपंसद अंडरवियर दिलवा सकती हैं। इससे वह उन्हें गंदा करने में थोड़ा हिचकिचाएगा और शौचालय का उपयोग करने के लिए प्रेरित होगा।

  • उसे नियमित रूप से नंगा घूमने दें- अपने बच्चे को हर दिन थोड़ी देर के लिए नंगा करें। इससे घूमते-फिरते समय वह पेशाब या शौच आने पर आसानी से आपको बता पायेगा और आप उसे टॉयलेट में पेशाब या शौच करवा पाएंगी। नीचे कपड़े ना पहनने की वजह से बच्चा शौचालय का उपयोग करना जल्दी सीख सकता है। साथ ही, इस दौरान अपने उसके हावभावों पर नज़र रखें और पहचानें की कब वह पॉटी करने वाला है।

    इसके अलावा अगर आपने बच्चे के लिए पॉटी चेयर खरीदी है, तो उसे उसके आसपास ही रखें। इससे जब भी उसे शौच करने का मन होगा, वह अपनी पॉटी चेयर का उपयोग कर पाएगा।

  • सफलता पर उसे शाबासी दें- जब बच्चा अपने नित्यकर्मों यानी पेशाब व मलत्याग करने के लिए शौचालय का उपयोग करना सीख ले, तो उसे शाबासी दें और उसकी तारीफ करें। इसके साथ ही आप उसे कोई छोटा-सा तोहफा जैसे एक अतिरिक्त कहानी सुनाना, कोई स्टिकर देना या कुछ अच्छा खाना आदि दे सकती हैं।

    इस दौरान यह ध्यान रखें कि उसे ज्यादा महंगे तोहफे ना दें। इससे जब उसे तोहफे नहीं मिलेंगे तो वह उदास होगा और बच्चे पर उसका गलत असर पड़ेगा।

टॉयलेट ट्रेनिंग के दौरान बच्चे को संक्रमण से कैसे बचाएं?

(Toilet training ke dauran bache ko infection se kaise bachaye)

Baby toilet training

शौचालय का उपयोग करना सीखने के दौरान बच्चे को संक्रमण होने का खतरा हो सकता है। इसलिए उसे साफ-सफाई के बारे में भी अच्छी तरह से समझाएं।

अगर आपका बच्चा लड़का है, तो उसे साबुन से हाथ धोना, गुदा को सही तरह से साफ करना आदि सिखाएं। इसके साथ ही उसे यह भी समझाएं कि गंदे हाथ मुँह में नहीं लेने चाहिए, इससे गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

अगर आपका बच्चा लड़की है, तो उसे ऊपर बताई गई बातों के साथ ही शौच या पेशाब करने के बाद नीचे के अंगों को सही तरह से साफ करना भी सिखाएं। उसे बताएं कि हाथ को आगे से पीछे की तरफ ले जाते हुए गुदा व योनि को साफ करना चाहिए। इससे गुदा के हानिकारक कीटाणु योनि में नहीं जा पाते हैं और आपकी बेटी योनि के संक्रमणों से सुरक्षित रहती है।

अगर गुदा को साफ करना सीखना उसके लिए मुश्किल है, तो उसे ये समझाएं कि पेशाब करने के बाद योनि को कैसे धोना है और छीछी करने के बाद सफाई के लिए आपको कैसे बुलाना है।

बच्चों में मूत्रमार्ग (पेशाब के रास्ते) का संक्रमण होना सामान्य नहीं है, लेकिन यह लड़कों की तुलना में लड़कियों को ज्यादा जल्दी होता है। अपनी बेटी को डॉक्टर के पास लेकर जाएं, यदि-

  • वो सामान्य से ज्यादा बार पेशाब कर रही है या उसे अचानक पेशाब लग रहा है।
  • उसे पेशाब करने में जलन और दर्द हो रहा है।
  • उसके पेट व पैल्विक हिस्से में दर्द हो रहा है।

बच्चे को टॉयलेट ट्रेनिंग देने के क्या फायदे हैं?

(Bache ko toilet training dene ke kya fayde hai)

Baby toilet training

बच्चे को टॉयलेट का उपयोग करना सिखाने के फायदे निम्न हैं-

  • इससे आपका बच्चा स्वतन्त्र बनता है। साथ ही, कपड़ों में शौच करने के बजाय टॉयलेट का इस्तेमाल करना उसकी सेहत के लिए फायदेमंद है।

  • टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) से वो डायपर पर कम निर्भर हो जाता है। ऐसे में, डायपर का खर्च बचता है और आपको बार बार डायपर बदलने नहीं पड़ते। हालांकि अभी रात के समय आपको उसे डायपर पहनाना चाहिए।

  • बेबी पॉटी चेयर का उपयोग करके वह सामान्य शौचालय का इस्तेमाल करना जल्दी सीख सकता है। इससे उसे स्कूल भेजना या कहीं बाहर ले जाना, आपके लिए काफी आसान हो जाएगा।

  • डायपर कम पहनने की वजह से अब बच्चे की त्वचा छिलने या डायपर रैश होने की समस्या कम हो सकती है।

बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग के दौरान कौनसी परेशानियां सामने आ सकती हैं?

(Bache ki toilet training ke dauran kaunsi dikkate samne aa sakti hai)

Baby toilet training

बच्चे को शौचालय या टॉयलेट का उपयोग करना सिखाते समय आपको कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इनमें से प्रमुख परेशानियां निम्न हैं-

  • बच्चा खेलता रहता है- बच्चे अक्सर हर नई चीज को खिलौना समझ लेते हैं और खेलने लगते हैं। हो सकता है कि आपका बच्चा भी टॉयलेट सीट या पॉटी चेयर के साथ खेलता रहे और इसके आसपास उछलकूद मचाता रहे। ऐसे में, उसे यह समझाना काफी मुश्किल हो सकता है कि ये खेलने की वस्तुएं नहीं हैं और इनका उपयोग कैसे करना है।

  • समय की कमी- आमतौर पर सभी के घर में हर दिन कई ज़रूरी काम होते हैं। इनकी वजह से अपना पूरा समय बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) के लिए दे पाना, आपके लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है। अगर आप दोनों ही कामकाजी हैं, तब आपको और भी ज्यादा परेशानी हो सकती है।

  • बार-बार घर की सफाई- जब आपका बच्चा घर मे बिना कपड़ों के घूमेगा, तो इस दौरान वह कहीं भी पेशाब या पॉटी कर सकता है। ऐसे में, आपको बार-बार घर की सफाई करनी पड़ सकती है। इससे आप परेशान हो सकती हैं।

बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग के दौरान किन बातों का ध्यान रखें?

(Bache ki toilet training ke dauran kin bato ka dhyan rakhe)

Baby toilet training

अपने बच्चे को शौचालय या टॉयलेट का इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग (toilet training in hindi) देने के दौरान निम्न बातों का ध्यान रखें-

  • टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) एक सब्र से किये जाने वाला काम है। इस दौरान जल्दीबाज़ी ना करें और बच्चे को उसके हिसाब से सीखने दें।
  • ज्यादा जल्दी अच्छे परिणाम या सफलता मिलने की उम्मीद ना करें।
  • बच्चे को ऐसे कपड़े पहनाएं, जिन्हें आसानी से उतारा व दोबारा पहनाया जा सके।
  • लड़के को शुरुआत में बैठकर पेशाब करना सिखाएं और बाद में धीरे धीरे पति के ज़रिए उसे खड़े होकर पेशाब करना सिखाएं।
  • लड़की को बैठकर पेशाब करना सिखाएं। अगर वह खड़ी होकर पेशाब करना चाहती है, तो उसे ऐसा करने दें। जब दो-तीन बार उसके कपड़े खराब हो जाएंगे और उसे परेशानी होगी, तो वह खुद समझ जाएगी कि उसे बैठकर पेशाब करना चाहिए।
  • बच्चे को शौच करवाने के बाद उसके जननांगों की अच्छी तरह से सफाई करें।
  • घर से बाहर जाते समय बच्चे के लिए अतिरिक्त कपड़े व अन्य सभी जरूरी सामान साथ रख लें। कुछ डायपर भी रख लें, ताकि आपातकालीन स्थिति में आप उन्हें बच्चे को पहना सकें।
  • कुछ दिलचस्प कहानियों व खेलों से टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) को मज़ेदार बनाएं।
  • बच्चे के साथ जबरदस्ती ना करें। अगर वह अभी शौचालय का उपयोग करना नहीं सीख पा रहा है, तो सही समय का इंतजार करें।
  • जब भी बच्चा गलतियां करे, तो उसे डांटें नहीं। इसके बजाय उसे कहें, “कोई बात नहीं, ऐसा होना सामान्य है। धीरे-धीरे आप सब सीख जाओगे।”
  • अपने बच्चे की तुलना कभी भी अन्य बच्चों से ना करें। इससे वह निराश हो सकता है और उसे मानसिक तनाव हो सकता है।

बच्चे को रात के समय शौचालय का उपयोग करना कब सिखाएं?

(Bache ko raat ke samay bathroom use karna kab sikhaye)

Baby toilet training

एक बार दिन के समय शौचालय का उपयोग शुरू करने के बाद, आप बच्चे को रात के समय के लिए टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) दे सकती हैं। अगर आपका बच्चा लगातार पंद्रह-बीस दिनों तक दिन में एक भी बार अपने कपड़ों में पेशाब या शौच नहीं करता है, तो वह रात के समय शौचालय का इस्तेमाल भी सीख सकता है।

कुछ बच्चे एक ही बार में दिन में, झपकी के समय और रात के समय शौचालय का उपयोग करना सीख लेते हैं, जबकि कुछ बच्चे इसे कई चरणों में सीखते हैं। दोनों ही स्थितियां पूरी तरह से सामान्य हैं, इसलिए चिंता ना करें।

अगर बच्चा टॉयलेट का इस्तेमाल नहीं सीख पा रहा है, तो क्या करें?

(Agar bacha toilet use karna nahi sikh pa rha hai, to kya kare)

Baby toilet training

अगर आपका बच्चा काफी सिखाने के बावजूद भी शौचालय में पेशाब व शौच करना नहीं सीख पा रहा है, तो परेशान ना हों। इसके बजाय उसके सीख ना पाने की सही वजह को पहचानने की कोशिश कीजिये। ये आप निम्न तरह कर सकते हैं-

  • पूरी स्थिति पर नज़र रखिए और बच्चे से प्यार से पूछिए कि वो शौचालय या पॉटी चेयर का उपयोग क्यों नहीं कर रहा है, जबकि उसे ऐसा करना चाहिए। शायद उसे शौचालय की जगह पसंद ना हो या टॉयलेट सीट या पॉटी चेयर उसके लिए आरामदायक ना हो। अगर ऐसा है, तो उनकी परेशानी को हल करें।

  • अगर अभी तक आपका बच्चा टॉयलेट का उपयोग करना नहीं सीख पाया है, तो उसे एक हफ्ते का आराम दीजिए। इस दौरान धीरे धीरे उससे शौचालय में पेशाब या मलत्याग ना करने की वजह जानने की कोशिश कीजिये और उसकी समस्या का समाधान कीजिये। फिर दोबारा उसे टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) देने की कोशिश करें।

  • अगर आपके सभी उपाय असफल हो रहे हैं, तो एक महीने के लिए टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) रोक दें। इस दौरान शौचालय या पॉटी चेयर में बच्चे की रुचि जगाने की कोशिश करें। उसे इसके साथ खेलने दीजिए, इस पर बैठने दीजिए और इसे समझने दीजिए। फिर एक महीने बाद दोबारा प्रयास करें।

  • अगर अब भी आपका बच्चा शौचालय या टॉयलेट का उपयोग करना नहीं सीख पा रहा है, तो इसकी एक मुख्य वजह यह हो सकती है कि वह अभी ये सब सीखने के लिए थोड़ा छोटा है। इस स्थिति में आपको दोबारा टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) शुरू करने से पहले तीन से छह महीने इंतज़ार करना चाहिए।

टॉयलेट ट्रेनिंग के दौरान डॉक्टर की सलाह कब लें?

(Toilet training ke dauran doctor ki salah kab le)

Baby toilet training

बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) के दौरान निम्न स्थितियों में आपको डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए-

  • वह साढ़े तीन या चार साल का होने के बाद भी दिन में अपने कपड़ों में पेशाब या शौच कर देता है।
  • वह पांच साल का होने के बाद भी रात में अपने कपड़े गीले कर लेता है।
  • उसने काफी दिनों से दिन के समय अपने कपड़े गीले नहीं किये, मगर अब अचानक से वह फिर से ऐसा करने लगा है।

शौचालय का उपयोग शुरू करना बच्चे की ज़िंदगी में एक बड़ा बदलाव होता है। इसलिए इसे सीखने और नियमित दिनचर्या में ढलने में उसे थोड़ा समय लगेगा। बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) के दौरान थोड़ी बहुत गंदगी और परेशानी होना सामान्य है। ऐसे में, उसे डांटें नहीं, इसके बजाय उसे प्रोत्साहन दें और शौचालय के इस्तेमाल के लिए प्रेरित करें।

हम उम्मीद करते हैं कि ब्लॉग में दी गयी जानकारी की मदद से, आपको अपने बच्चे को शौचालय का उपयोग करना सिखाने में काफी मदद मिलेगी।

बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग या शौचालय प्रशिक्षण (potty training in hindi) के दौरान अगर आपको कोई समस्या आ रही है या आप उसके बारे में चिंतित हैं, तो एक बार डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।

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