बच्चे को दें तीन दिनों में टॉयलेट ट्रेनिंग (Bache ko de teen dino me toilet training)

बच्चे को दें तीन दिनों में टॉयलेट ट्रेनिंग (Bache ko de teen dino me toilet training)

ज्यादातर माता-पिताओं के लिये बच्चे को टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) देना यानी शौचालय का उपयोग सिखाना बेहद मुश्किल काम होता है। इसमें उन्हें काफी समय लगता है और बहुत मेहनत भी करनी पड़ती है।

ऐसे में अगर कोई आपसे कहे कि आप तीन दिनों में बच्चे को शौचालय में पेशाब व मलत्याग करना सिखा सकते हैं, तो शायद आप इसे एक घटिया मज़ाक समझेंगे, है ना?

भले ही इस बात पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन आप वाक़ई तीन दिनों में अपने बच्चे को टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) दे सकते हैं। आपका अगला सवाल होगा- आखिर कैसे?

इस ब्लॉग में हम आपके इसी सवाल का जवाब देते हुए, बच्चे को तीन दिन में शौचालय का उपयोग सिखाने का तरीका बता रहे हैं। तो अब जल्दी से ब्लॉग पढ़िए और आप भी इस तरीके को आज़माइए!

बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग कब शुरू करनी चाहिए?

(Bache ki toilet training kab shuru karni chahiye)

3 day potty training - kab shuru kare

असल में बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) शुरू करने की कोई निश्चित उम्र नहीं होती है, यह मुख्य रूप से उसके विकास और सीखने की इच्छा पर निर्भर करता है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे को बाथरूम में शौच करना सिखाने की सुरक्षित उम्र ढाई से चार साल है। इसे पहले बच्चे को सिखाना आप दोनों के लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है।

कैसे जानें कि बच्चा टॉयलेट ट्रेनिंग के लिए तैयार है?

(Kaise jane ki bacha toilet training ke liye taiyar hai)

3 day potty training - kaise jaane ki baccha taiyar hai

आप निम्न लक्षणों से जान सकते हैं कि बच्चा टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) के लिए तैयार है-

  • वह बाथरूम या टॉयलेट के अंदर जाने में काफी रुचि दिखाता है।
  • अब वह कम डायपर गीले करता है, यानी अब उसकी पेशाब की थैली ज्यादा समय तक पेशाब को रोककर रख सकती है।
  • वह जब सो कर उठता है, तो उसका डायपर सूखा होता है।
  • डायपर या लँगोटी गीली होने पर, वह उसे बदलने के लिए कहता है या इशारा करता है।
  • बच्चा लगभग नियमित समय पर पेशाब व शौच करता है।
  • वह आवाज़ों और चेहरे के हावभावों से पेशाब या शौच करने का संकेत देने लगा है।
  • वह अपने नीचे के कपड़ों जैसे पायजामे, चड्डी, निक्कर आदि को खुद उतार व पहन लेता है।
  • वह ज्यादातर मामलों में आपकी नकल करने की कोशिश करता है।
  • बच्चा सामान्य निर्देशों का पालन कर सकता है।
  • वह चलने-फिरने, बैठने-खड़े होने, दरवाजे खोलने व बन्द करने लगा है।
  • वह अपनी ज़रूरतें बोलकर बता सकता है और टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) से जुड़ी साधारण बातें समझ सकता है।
  • वह एक जगह पर कम से कम पांच मिनट तक बैठ सकता है।

बच्चे को तीन दिनों में टॉयलेट ट्रेनिंग देने की तैयारी कैसे करें?

(Bache ko teen dino me toilet training dene ki taiyari kaise kare)

3 day potty training - kab shuru kare

आप तीन दिनों में बच्चे को शौचालय का इस्तेमाल सिखाने की तैयारी निम्न तरह से कर सकते हैं-

  • बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग से एक महीने पहले तैयारी

    • बच्चे के व्यवहार और उसकी दिनचर्या को गौर से देखें और जानने की कोशिश करें कि वह बाथरूम का उपयोग सीखने के लिए तैयार है या नहीं।
    • बच्चे को शौचालय के बारे में जानकारी देना शुरू करें। उसे सिखाएं कि वहां किस वस्तु का उपयोग कैसे किया जाता है।
    • जब भी आप टॉयलेट का उपयोग करें, तो बच्चे को अपने साथ ले जाएं। आपको देखकर वह यह समझ पायेगा कि शौच करने के लिए कपड़े कैसे उतारते हैं, टॉयलेट सीट पर कैसे बैठते हैं और कई अन्य जरूरी बातें भी जान सकेगा।
    • उसे समझाने की कोशिश करें कि आप पेशाब या शौच आने पर शौचालय का उपयोग क्यों करते हैं और ये क्यों जरूरी है।
    • बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) के लिए ज़रूरी समान की एक लिस्ट बना लें और धीरे धीरे उन्हें जमा करना शुरू कर दें।
  • बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग से एक हफ्ते पहले तैयारी

    • बच्चे को उसके डायपर्स की थैली दिखाएँ और बताएं कि अब इन्हें अलविदा कहने का वक़्त आ गया है।
    • बच्चे को टॉयलेट के बारे में जानकारी देना जारी रखें। उसे बताएं कि अब वो भी उसका उपयोग करना सीखेगा और बड़ा बच्चा बन जायेगा।
    • उसे समझाएं कि पेशाब या पॉटी आने पर वह आपको बताए, ताकि आप उसे शौचालय में ले जा सकें।
    • उसे बताएं कि अब से वो दिन के समय बिना डायपर के रहा करेगा और उसे इसमें बहुत मज़ा आएगा।

बच्चे को तीन दिनों में टॉयलेट ट्रेनिंग कैसे दें?

(Bache ko teen dino me toilet training kaise de)

3 day potty training - kaise de

हम बच्चे को तीन दिनों में टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) देने का तरीका, आपको नीचे विस्तार से बता रहे हैं-

  • बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग का पहला दिन (Bache ki toilet training ka pahla din)

    • बच्चे के जागने के तुरंत बाद उसका डायपर हटा दें और उसे कमर के नीचे कपड़े ना पहनाएं। कपड़ों के बिना उसे यह जल्दी समझ में आएगा कि वो पेशाब या पॉटी कैसे करता है।
    • आप और घर के बाकी लोग (मुख्य रूप से आपके पति/पत्नी) दिनभर बच्चे पर नज़र रखें और जब भी आपको लगे कि वो सूसू या छीछी करने वाला है, तो उसे टॉयलेट में लेकर जाएं।
    • बच्चे को दिनभर में काफी मात्रा में तरल पदार्थ देते रहें, जैसे जूस, दूध, पानी, सूप आदि। इससे उसे बार बार पेशाब लगेगा और आपको उसे सिखाने का ज्यादा मौका मिलेगा।
    • बच्चे को कहें कि जब भी उसे सूसू या छीछी आए, तो वो आपको बताए, ताकि आप उसे शौचालय ले जा पाएं।
    • जब भी आप या आपके जीवनसाथी बाथरूम का उपयोग करें, बच्चे को अपने साथ लेकर जाएं। उसे सिखाएं कि सूसू या छीछी करने के लिए कपड़े कैसे उतारे जाते हैं और टॉयलेट का इस्तेमाल कैसे किया जाता है।
    • बच्चे पर नज़र रखते हुए घर के दैनिक काम कर लें, लेकिन इस दौरान बाहर ना जाएं।
    • अगर आप बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) के लिए पॉटी चेयर का उपयोग कर रहे हैं, तो इसे बाथरूम के अंदर रखें। इससे उसे समझ आएगा कि उसे भी बाकी सब की तरह बाथरूम में ही सूसू व छीछी करनी चाहिए।
    • बच्चे का हौसला बढ़ाने के लिए आप बाथरूम में उसके साथ जाएं और कहें- “देखो! मम्मी/पापा भी आपके साथ हैं।”
    • जब भी वो फर्श पर या घर में किसी अन्य जगह पर पेशाब या मलत्याग करे, तो उसे डांटें नहीं और ना ही ये कहें कि “कोई बात नहीं।” इसके बजाय उसे सधी हुई आवाज़ में कहें कि “आपको सूसू या छीछी केवल शौचालय में ही करनी चाहिए। कोशिश करते रहो, धीरे धीरे आप सीख जाओगे।”
    • जब बच्चा शौचालय में मल या पेशाब करे तो उसे साफ करते हुए बताएं कि आप ये सब कैसे कर रही हैं। इससे उसे सीखने में मदद मिलेगी।
    • पेशाब या मलत्याग कर लेने के बाद बच्चे को अपने कपड़े खुद पहनने के लिए कहें और ज़रूरत पड़ने पर ही उसकी मदद करें।
    • सुलाने से पहले बच्चे को शौचालय में ले जाएं और पेशाब करवाएं।
    • रात के समय हर दो या तीन घण्टे बाद जागकर बच्चे को पेशाब करवाएं। ये थोड़ा मुश्किल है, लेकिन इससे वह रात में जागकर पेशाब करना सीख जाएगा और बिस्तर गीला नहीं करेगा।
    • बच्चे को रात के समय शौचालय का उपयोग करना सिखाना काफी मुश्किल और धीमी प्रक्रिया है। इसलिए आपको बार-बार कोशिश करनी चाहिए।
    • अगर आपको लगता है कि आपका बच्चा रात के समय शौचालय का उपयोग करने के लिए अभी ज्यादा छोटा है, तो फिलहाल उसे दिन के समय शौचालय का उपयोग सिखाने पर ध्यान दें और रात के समय उसे डायपर पहनाएं।
  • बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग का दूसरा दिन (Bache ki toilet training ka dusra din)

    • अगले दिन, पहले दिन की तरह ही सभी चरण दोहराएं।
    • सुबह उठकर जब बच्चा पेशाब, मलत्याग व नाश्ता कर ले, तो उसे दोबारा पेशाब करने के लिए कहें।
    • फिर अंडरवियर (चड्डी) और पायजामा पहनाकर उसे बाहर ले जाएं। उसे कहें कि जब भी उसे सूसू या छीछी लगे, तो वो आपको बताए।
    • घर से ज्यादा दूर ना जाएं। केवल आसपास किसी पार्क या घर की छत पर ही घूमें, ताकि ज़रूरत होने पर आप बच्चे को तुरंत शौचालय में ले जा सकें।
    • दूसरे दिन जब बच्चा शौच कर ले, तो उसे कहें- “क्या तुम आज खुद को साफ करना चाहोगे?” और उसे खुद को साफ करना सिखाएं।
    • साफ-सफाई में शामिल होने से बच्चे को टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) में मज़ा आने लगेगा।
  • बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग का तीसरा दिन (Bache ki toilet training ka tisra din)

    • तीसरे दिन भी पहले दिन के सभी चरण दोहराएं।
    • आज आप बच्चे को नाश्ता करने के बाद पेशाब करवाएं और पायजामा पहनाकर करीब एक घण्टे के लिए बाहर लेकर जाएं। उसे कहें कि पेशाब लगने पर वो आपको बताए।
    • इसके बाद शाम के समय उसे दोबारा बाहर लेकर जाएं।
    • बाहर ले जाने से पहले पेशाब करवाने से उसे इसकी आदत हो जाएगी, जिससे वो बाहर अपने कपड़े गीले करने से बच सकता है।

बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग के तीन दिनों के बाद क्या होता है?

(Bache ki toilet training ke teen dino ke baad kya hota hai)

तीन दिनों की टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) के बाद आपका बच्चा पेशाब या शौच आने पर टॉयलेट जा सकता है या फिर वो इस बारे में आपको कह सकता है। मगर, सबसे अहम बात ये है कि आप बच्चे को लगातार सिखाते रहें, ताकि भविष्य में उसे इसे लेकर कोई परेशानी ना हो।

अगले तीन महीनों तक उसे घर पर कमर से नीचे कपड़े ना पहनाएं (हालांकि बच्चे के सोने के समय आप उसे डायपर पहना सकते हैं)। घर से बाहर जाते समय उसे ढीला-ढाला पायजामा पहनाएं। अगर वह तीन महीने तक घर में इधर-उधर पेशाब या मलत्याग ना करे, बल्कि इसके लिए शौचालय का उपयोग करे, तो फिर उसे बिना कपड़ों के रखने की कोई ज़रूरत नहीं है। आप उसे घर पर भी पूरे कपड़े पहनाकर रख सकते हैं।

इस दौरान घर से बाहर जाते समय बच्चे के लिए अतिरिक्त कपड़े आदि ज़रूरी चीजें अपने साथ ज़रूर लेकर जाएं। आपको कभी भी इनकी ज़रूरत पड़ सकती है।

अगर बच्चा तीन दिनों में टॉयलेट ट्रेनिंग ना ले पाए, तो क्या करें?

(Agar bacha teen dino me toilet training na le paye, to kya kare)

3 day potty training - kya kare

अगर आपका बच्चा तीन दिनों में शौचालय का उपयोग करना ना सीख पाए, तो निम्न चरण अपनाएं-

  • समस्या का पता लगाइए- पूरी स्थिति पर नज़र रखिए और बच्चे से प्यार से पूछिए कि वो शौचालय या पॉटी चेयर का उपयोग क्यों नहीं कर रहा है, जबकि उसे ऐसा करना चाहिए। शायद उसे शौचालय की जगह पसंद ना हो या टॉयलेट सीट या पॉटी चेयर उसके लिए आरामदायक ना हो।

    थोड़े बड़े बच्चे आपके सवालों को समझ सकते हैं, इसलिए आप उनसे पूछ सकते हैं कि उनके शौचालय का उपयोग ना करने की वजह क्या है। क्या उन्हें किसी चीज का डर लगता है? अगर ऐसा है, तो उनकी परेशानी को हल करें।

  • एक हफ्ते बाद कोशिश कीजिये- अगर अभी तक आपका बच्चा टॉयलेट का उपयोग करना नहीं सीख पाया है, तो उसे एक हफ्ते का आराम दीजिए। इस दौरान धीरे धीरे उससे शौचालय में पेशाब या मलत्याग ना करने की वजह जानने की कोशिश कीजिये और उसकी समस्या का समाधान कीजिये। फिर एक हफ्ते बाद दोबारा उसे टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) देने की कोशिश करें।

  • एक महीने बाद कोशिश करें- अगर आपके सभी उपाय असफल हो रहे हैं, तो एक महीने के लिए टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) रोक दें। इस दौरान शौचालय या पॉटी चेयर में बच्चे की रुचि जगाने की कोशिश करें। उसे इसके साथ खेलने दीजिए, इस पर बैठने दीजिए और इसे समझने दीजिए। साथ ही आप उसे इस बारे में कहानियां सुनाकर भी बाथरूम के इस्तेमाल के लिए प्रेरित कर सकते हैं। फिर एक महीने बाद दोबारा प्रयास करें।

  • बच्चे को थोड़ा बड़ा होने दीजिए- अगर अब भी आपका बच्चा शौचालय या टॉयलेट का उपयोग करना नहीं सीख पा रहा है, तो इसकी एक मुख्य वजह यह हो सकती है कि वह अभी ये सब सीखने के लिए थोड़ा छोटा है। इस स्थिति में आपको दोबारा टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) शुरू करने से पहले तीन से छह महीने इंतज़ार करना चाहिए। आपका बच्चा जितना बड़ा होगा, आप उसे उतनी ही आसानी से शौचालय का उपयोग करना सिखा पाएंगे।

हम सभी जानते हैं कि बच्चे को टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) देने कोई आसान काम नहीं है और इस दौरान माता-पिता को कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। मगर, इन तीन दिनों की टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) से आप इसकी अच्छी शुरुआत कर सकते हैं।

इन तीन दिनों में ज्यादातर बच्चे शौचालय का उपयोग करना शुरू कर देते हैं। इस दौरान आप जितनी ज्यादा मेहनत और लगन से बच्चे पर ध्यान देंगे, उसके सीखने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी।

अगर आपका बच्चा इन तीन दिनों में शौचालय का उपयोग करना नहीं सीख पाता है, तो निराश ना हों। थोड़ी देर से सही, लेकिन वो भी शौचालय का उपयोग करना ज़रूर सीख लेगा।

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