बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग के 7 ज़रूरी नियम (Bache ki toilet training ke 7 jaruri niyam)

बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग के 7 ज़रूरी नियम (Bache ki toilet training ke 7 jaruri niyam)

बच्चे के बड़े होने के साथ ही ज्यादातर माता-पिता उसे जल्द से जल्द शौचालय का इस्तेमाल सिखाना चाहते हैं। इसके पीछे कई कारण होते हैं, जैसे डायपर बदलने के झंझट से छुटकारा पाने की चाहत, बच्चे को फैशनेबल कपड़े पहनाने की इच्छा या उसे स्कूल भेजना आदि। हालाँकि बच्चों को टॉयलेट का उपयोग सिखाना थोड़ा मुश्किल होता है। इसलिए उनकी टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) के लिए लोग कई तरीके आज़माते हैं। कुछ माता पिता इसके लिए तोहफों का सहारा लेते हैं, तो कुछ प्यार और तारीफों से अपने बच्चे को प्रोत्साहन देते हैं।

बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) का लक्ष्य केवल उसे टॉयलेट का इस्तेमाल सिखाना ही नहीं होना चाहिए। इसके बजाय इस दौरान आपको उसे उसके शरीर के बारे में जागरूक भी करना चाहिए और शौचालय से जुड़ी सभी बातें सिखानी चाहिए।

इस ब्लॉग में हम आपको बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग के सात नियम बता रहे हैं, इनसे आप उसे सही तरह से टॉयलेट का उपयोग सिखा पाएंगे।

1. बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग के नियम : ट्रेनिंग से पहले उसका मल नर्म होना चाहिए।

(Rules of toilet training in hindi : training se pehle uska mal narm hona chahiye)

बच्चे को टॉयलेट का उपयोग सिखाने का पहला नियम ये है कि इसकी शुरुआत करने से पहले बच्चे का मल नर्म होना चाहिए। अगर उसका मल कठोर है, तो इसका मतलब यह है कि वह कब्ज से पीड़ित है। इस स्थिति में उसकी टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) शुरू ना करें, क्योंकि कब्ज से बच्चे व आपको काफी परेशानी हो सकती है।

इस दौरान उसे शौच करने के दौरान काफी दर्द होता है, जिसकी वजह से वह मल को अंदर रोकने लग सकता है। ऐसे में, उसकी कब्ज गम्भीर रूप ले सकती है। इसलिए टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) शुरू करने से पहले उसकी कब्ज का इलाज करें।

2. बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग के नियम : बच्चे पर कोई समयसीमा या दबाव ना थोपें।

(Rules of toilet training in hindi : bache par koi timeline ya dabav na thope)

potty training time limit

शौचालय का इस्तेमाल सिखाने के दौरान बच्चे को किसी समयसीमा में ना बांधें (जैसे - “तुम्हें एक हफ्ते के अंदर शौचालय का उपयोग करना सीखना होगा।”), इससे उसके दिमाग पर बुरा असर पड़ता है और वह तनावग्रस्त हो सकता है। इसके साथ ही, इस दौरान बच्चे पर किसी तरह का दबाव ना बनाएं। दबाव की वजह से वह अपना मल रोकने लग सकता है। इससे उसे कब्ज व अन्य कई समस्याएं हो सकती हैं और आपको उसे सिखाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

इसलिए आप बच्चे को प्यार से सिखाएं और हर कदम पर उसकी मदद करें। उसे शौचालय की ज़रूरत और इसके उपयोग के बारे में सभी बातें बताएं। हर बच्चे के विकास अलग ढंग से होता है, इसलिए उसकी तुलना बाकी बच्चों से ना करें और उसे उसके अंदाज़ में सीखने दें।

3. बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग के नियम : दो साल के बाद मगर तीन साल से पहले शुरू करें।

(Rules of toilet training in hindi : do sal ke baad magar tin sal se pehle shuru kare)

potty training age

एक शोध के अनुसार, जिन बच्चों को दो साल की उम्र से पहले टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) दी जाती है, उन्हें दिन के समय कपड़े गीले करने की समस्या होने की आशंका, उन बच्चों की तुलना में तीन गुना ज्यादा होती है, जिन्हें दो से तीन साल की उम्र के बीच में टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) दी जाती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि बच्चे केवल दो से तीन साल के बीच में ही शौचालय का उपयोग करना सीख सकते हैं। मगर, यह सच है कि बच्चे को दो साल की उम्र से पहले सिखाने से, उसे बाद में बिस्तर गीला करने की परेशानी होने की आशंका ज्यादा होती है।

दो वर्ष से पहले बच्चा अपनी मांसपेशियों को सही तरह से नियंत्रित करना नहीं सीख पाता है, इसलिए उसे टॉयलेट का उपयोग सीखने में परेशानी हो सकती है। हालांकि कुछ बच्चे दो साल के होने से पहले ही शौचालय का इस्तेमाल करना सीख लेते हैं, वहीं कुछ बच्चों को यह सीखने में तीन से चार साल लग जाते हैं। दोनों ही स्थितियां सामान्य हैं।

4. बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग के नियम : शौच करते समय बच्चे के पैर ज़मीन को छूने चाहिए।

(Rules of toilet training in hindi : potty karte samay bache ke pair zameen ko chhune chahiye)

potty training

बच्चे को शौचालय का इस्तेमाल सिखाने का चौथा नियम यह है कि मलत्याग करते समय उसके घुटने मुड़े हुए होने चाहिए और उसके पैर ज़मीन पर टिकने चाहिए। इससे उसे छीछी (मलत्याग) करने में आसानी होती है।

दरअसल, हमारा शरीर बैठकर मलत्याग करने के लिए ही बना है। हमारे मलाशय के चारों तरफ एक तार जैसी मांसपेशी होती है। जब बच्चे खड़े होते हैं तो यह मांसपेशी मलाशय को खुलने नहीं देती, इसलिए वो खड़े होकर शौच नहीं कर सकते हैं। जब वे बैठकर शौच करते हैं, तो यह पेशी मलाशय पर अपनी पकड़ ढीली कर देती है और मल आसानी से बाहर आ जाता है। इसलिए शौच करते समय बच्चे के पांव ज़मीन पर टिकने ज़रूरी हैं।

अगर आप इंग्लिश टॉयलेट का उपयोग करते हैं, तो बच्चे को सीट पर बिठाने के बाद उसके पैरों के नीचे एक स्टूल रख दें। इससे वह अपने पांव उसके ऊपर रखकर सही अवस्था में बैठ सकेगा और उसे मलत्याग करने में आसानी होगी।

5. बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग के नियम : ट्रेनिंग के दौरान बच्चे का मल नर्म होना चाहिए।

(Rules of toilet training in hindi : training ke dauran bache ka mal narm hona chahiye)

potty training

इस नियम के अनुसार, टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) के दौरान बच्चे का मल नर्म होना चाहिए और उसे शौच करने में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। हमें पता है इस वक़्त आप क्या सोच रहे हैं। जी हां, आपको हर बार बच्चे के शौच करने के बाद टॉयलेट में झांककर देखना पड़ेगा! आमतौर पर इस उम्र में उसका मल दलिए जैसा पतला होना चाहिए।

इसके साथ ही उसके मलत्याग करने के तरीके पर भी ध्यान देना ज़रूरी है, अगर वह दिन में सामान्य से कम बार मलत्याग करने लगे, तो यह उसे कब्ज होने का लक्षण हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, अगर आपका बच्चा पहले दिन में दो से तीन बार मलत्याग करता था और अब वह केवल एक बार मलत्याग कर रहा है, तो वह कब्ज से पीड़ित हो सकता है।

अगर टॉयलेट का उपयोग सिखाने के दौरान बच्चे को कब्ज हो जाए, तो ट्रेनिंग को रोक दें और पहले उसकी कब्ज का इलाज करें। जब वह पूरी तरह से ठीक हो जाए, तभी उसे दोबारा सिखाने की शुरुआत करें।

6. बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग के नियम : बच्चे को नियमित अंतराल में पेशाब करना चाहिए।

(Rules of toilet training in hindi : bache ko niyamit antaral me peshab karna chahiye)

potty training niymit peshab karna

टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) का छठा नियम यह है कि बच्चे को नियमित रूप से पेशाब करना चाहिए। कुछ लोग मानते हैं कि पेशाब रोककर रखने से बच्चे की पेशाब की थैली यानी मूत्राशय मजबूत और बड़ा बनता है, जिससे उसमें ज्यादा पेशाब इकट्ठा हो सकता है और वह कपड़े गीले करना कम कर सकता है। यह सच नहीं है!

ज्यादा देर तक पेशाब रोकने से पेशाब की थैली की दीवार मोटी और कम लचीली हो जाती है, जिससे उसकी पेशाब जमा करने की क्षमता घट जाती है। जबकि पेशाब की थैली को नियमित रूप से खाली करते रहने से वह स्वस्थ रहती है। इसलिए जब भी आपको ऐसा लगे कि बच्चा पेशाब आने पर भी शौचालय में नहीं जा रहा है, तो उसे शौचालय जाने के लिए कहें या उसे खुद वहां लेकर जाएं।

7. बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग के नियम : बच्चे को पौष्टिक खाना खिलाएं।

(Rules of toilet training in hindi : bache ko healthy khana khilaye)

potty training food

इस उम्र के बच्चे बाहर का खाना बहुत ज्यादा पसंद करते हैं, इसलिए उन्हें कब्ज होने की आशंका ज्यादा होती है। टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) के दौरान अपने बच्चे को कब्ज से बचाने के लिए बाहर की वस्तुएं (खासतौर पर बर्गर, आलू टिक्की, पिज़्ज़ा, क्रीमरोल, नूडल्स आदि फास्टफूड) ना खाने दें। इनके बजाय उसे घर पर पौष्टिक व स्वादिष्ट खाना बनाकर खिलाएं।

बच्चे के खाने में फाइबर विशेष रूप से शामिल होना चाहिए, यह उसकी आँतो व पाचनतंत्र को स्वस्थ रखने में सहायक होता है और उसे कब्ज से बचा सकता है।

इसलिए बच्चे को दलिया, खिचड़ी, फल-सब्जियाँ आदि चीजें खिलाएं। इसके साथ ही उसे दिनभर में पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ दें। यह नियम उसे कब्ज से बचाने में बेहद कारगर साबित होगा, जिससे बच्चा शौच करने से नहीं डरेगा और ऐसे में उसकी टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) आसान हो सकती है।

ब्लॉग में बताए गए नियम वाक़ई बेहद कारगर हैं। अपने बच्चे को टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) देने के दौरान इन का उपयोग करके, आप इस बात का पता लगा सकते हैं। इनके ज़रिए बच्चा आसानी से शौचालय का उपयोग करना सीख सकता है। इस दौरान लगातार कोशिश करते रहें और सब्र से काम लें। जल्दी ही, आपकी ही तरह आपका बच्चा भी शौचालय का उपयोग करने लगेगा।

अगर आपको इस बारे में किसी भी प्रकार की कोई चिंता है या आपको बच्चे की सेहत की फ़िक्र है, तो एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

इस ब्लॉग के विषय - 1. बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग के नियम : ट्रेनिंग से पहले उसका मल नर्म होना चाहिए। (Rules of toilet training in hindi : training se pehle uska mal narm hona chahiye),2. बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग के नियम : बच्चे पर कोई समयसीमा या दबाव ना थोपें। (Rules of toilet training in hindi : bache par koi timeline ya dabav na thope),3. बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग के नियम : दो साल के बाद मगर तीन साल से पहले शुरू करें। (Rules of toilet training in hindi : do sal ke baad magar tin sal se pehle shuru kare),4. बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग के नियम : शौच करते समय बच्चे के पैर ज़मीन को छूने चाहिए। (Rules of toilet training in hindi : potty karte samay bache ke pair zameen ko chhune chahiye),5. बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग के नियम : ट्रेनिंग के दौरान बच्चे का मल नर्म होना चाहिए। (Rules of toilet training in hindi : training ke dauran bache ka mal narm hona chahiye),6. बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग के नियम : बच्चे को नियमित अंतराल में पेशाब करना चाहिए। (Rules of toilet training in hindi : bache ko niyamit antaral me peshab karna chahiye),7. बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग के नियम : बच्चे को पौष्टिक खाना खिलाएं। (Rules of toilet training in hindi : bache ko healthy khana khilaye)
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