बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग के दौरान ये 13 गलतियां ना करें (Bache ki toilet training ke dauran ye 13 galtiya na kare)

बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग के दौरान ये 13 गलतियां ना करें  (Bache ki toilet training ke dauran ye 13 galtiya na kare)

बच्चे के थोड़ा बड़ा होने के साथ ही माता-पिता को उसकी टॉयलेट ट्रेनिंग की चिंता सताने लगती है। वो उसे शौचालय का उपयोग सिखाने के लिए कई उपाय अपनाते हैं, जिनमें अनुभवी लोगों की सलाह लेना, इंटरनेट पर ब्लॉग पढ़ना आदि शामिल हैं।

आप शायद जानते होंगे कि बच्चे को टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) या शौचालय प्रशिक्षण कैसे दिया जाना चाहिए। मगर, क्या आप जानते हैं - इस दौरान आपको कौनसी गलतियाँ नहीं करनी चाहिए?

इस ब्लॉग में हम आपको बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) के दौरान कई लोगों द्वारा की जाने वाली गलतियाँ बता रहे हैं, ताकि आप ऐसा करने से बचें और आपको इनकी वजह से किसी परेशानी का सामना ना करना पड़े।

गलती नम्बर 1: बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग ज्यादा जल्दी शुरू करना।

(Bache ki toilet training jyada jaldi shuru karna)

toilet training jyada jaldi shuru karna

एक बड़ी ही प्रचलित कहावत है - जल्दी का काम शैतान का होता है। यानी किसी भी काम में ज्यादा जल्दबाज़ी करने से उसके बिगड़ने की आशंका ज्यादा होती है। यही बात बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) पर भी लागू होती है, इसलिए समय से पहले उसे शौचालय का उपयोग सिखाने की कोशिश ना करें। यह बच्चे के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

इसके साथ ही, आप जितना जल्दी शुरू करेंगे, बच्चे के लिए यह सब सीखना उतना ही ज्यादा मुश्किल साबित होगा, क्योंकि उसका शरीर समय से पहले इसके लिए तैयार नहीं होता है। ज्यादातर विशेषज्ञ मानते हैं कि दो से ढाई वर्ष की उम्र में बच्चे को टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) देने की शुरुआत करना बेहतर होता है, क्योंकि तब तक वह अपने मूत्राशय और गुदा की मांसपेशियों को नियंत्रित करना सीखने लगता है।

गलती नम्बर 2: बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग गलत समय शुरू करना।

(Bache ki toilet training galat samay shuru karna)

toilet training galat samay shuru karna

छोटे बच्चों को अपनी नियमित दिनचर्या में ढले रहना पसंद होता है और उसमें किसी भी तरह का बदलाव होने पर वो उदास, परेशान या तनावग्रस्त हो सकते हैं। इसलिए बच्चे के जीवन में कोई भी नया बदलाव आने से पहले या आने के तुरंत बाद उसकी टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) शुरू ना करें। उदाहरण के लिए - अगर आपने घर बदला है, घर में नया शिशु आया है या आने वाला है या कोई अन्य कारण जिससे बच्चे की दिनचर्या प्रभावित हो रही है, तो आपको उसकी टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) शुरू करने से पहले कुछ हफ्ते इंतज़ार करना चाहिए।

गलती नम्बर 3: जबरदस्ती बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग शुरू करना।

(Jabardasti bache ki toilet training shuru karna)

Jabardasti bache ki toilet training shuru karna

बच्चों को कोई भी काम जबरदस्ती करना पसंद नहीं होता है। ऐसे में वो तनावग्रस्त व परेशान होने लगते हैं। इसलिए बच्चे की इच्छा के बिना उसकी टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) शुरू करने के बारे में ना सोचें। उसके हावभावों से पता लगाएँ कि क्या वो इसके लिए तैयार है? अगर आपका बच्चा अभी शौचालय का इस्तेमाल नहीं करना चाहता है, तो उसे जबरदस्ती ऐसा करने के लिए ना कहें। इससे वो परेशान होकर मल रोकने लग सकता है और उसे कब्ज हो सकती है।

अगर आपका बच्चा टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) में रुचि ले रहा है, तो उसे उसके हिसाब से सीखने दें। वो धीरे धीरे हर एक चरण को पार करके शौचालय का उपयोग करना सीख लेगा। उस पर थोड़े ही समय में सबकुछ सीखने का दबाव ना बनाएं।

गलती नम्बर 4: दो साल से छोटे बच्चे को छीछी के लिए शौचालय का उपयोग करना सिखाना।

(Do sal se chhote bache ko toilet me potty karna sikhana)

Do sal se chhote bache ko toilet me potty karna sikhana

विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ बच्चे अपनी गुदा की मांसपेशियों को नियंत्रित करना सीखने से काफी समय पहले ही, मूत्राशय की मांसपेशियों को नियंत्रित करना सीख लेते हैं। इससे उनके माता-पिता को लगता है कि वो टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) लेने के लिए तैयार हो गए हैं। जबकि ऐसा ज़रूरी नहीं है।

ज्यादा छोटा बच्चा टॉयलेट सीट को देखकर डर सकता है और मल को अंदर ही रोकने लग सकता है। अगर उसे डायपर ना पहनाया जाए, तो या तो वो अपने कपड़े खराब कर लेगा या फिर ज्यादा समय मल रोकने की वजह से उसे कब्ज हो जाएगी। इसके बाद जब वो मलत्याग करेगा, तो उसे दर्द होगा। इस वजह से वो फिर से मल को अंदर रोकने की कोशिश करेगा और इस तरह कब्ज का चक्र चलता रहेगा।

इसलिए डॉक्टर, दो साल का होने से पहले बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) शुरू ना करने की सलाह देते हैं।

गलती नम्बर 5: बच्चे को दिन व रात की टॉयलेट ट्रेनिंग एकसाथ देना।

(Bache ko din aur raat ki toilet training ek sath dena)

din aur raat ki toilet training ek sath dena

रात की तुलना में, दिन के समय बच्चे को शौचालय का उपयोग करना सिखाना काफी आसान है। वह दिन के ज्यादातर समय जागता रहता है, इसलिए पेशाब लगते ही शौचालय में जा सकता है। मगर, रात के समय बच्चा लगातार कई घण्टे सोता है और अभी उसका मूत्राशय इतना परिपक्व नहीं हुआ है कि रातभर का पेशाब इकट्ठा करके रख सके। इसलिए वह बिस्तर गीला कर सकता है और गीलेपन से बीमार हो सकता है।

ऐसे में, विशेषज्ञ टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) के दौरान रात के समय बच्चे को डायपर पहनाकर सुलाने की सलाह देते हैं। जब वह डायपर गीला किये बिना जागने लगे, तब उसे रात में डायपर पहनाना बंद कर सकते हैं।

गलती नम्बर 6: टॉयलेट ट्रेनिंग के दौरान गलतियाँ करने पर बच्चे को डांटना या सज़ा देना।

(Toilet training ke dauran galtiya karne par bache ko dantna ya saja dena)

toilet training ke dauran galtiya karne par bache ko dantna

इस बात को समझें कि गलतियाँ करना, बच्चे के सीखने का एक अहम भाग है। इसलिए शौचालय का इस्तेमाल करना सीखने के दौरान कपड़े गीले करना या कपड़ों में शौच करना सामान्य है। इसके लिए बच्चे को सज़ा ना दें और ना ही डांटें। उसे जताएं कि भले ही उसने गलती की है, लेकिन मम्मी-पापा उसे अब भी पहले की तरह ही प्यार करते हैं और कपड़े गीले होने में उसकी गलती नहीं है।

जब आप बच्चे को डांटते या सज़ा देते हैं, तो उसे बुरा लगता है और शर्मिंदगी महसूस होती है। इससे वह सीखने के बजाय इस प्रक्रिया से दूर भागने की कोशिश करेगा और आप दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जबकि प्यार से समझाने पर उसे अच्छा लगेगा और वह सीखने के लिए प्रेरित होगा।

गलती नम्बर 7: बच्चे से कम समय में बेहतर नतीजे की उम्मीद करना।

(Bache se kam samay me behtar natije ki ummeed karna)

toilet training galti kam samay me behtar natije ki ummeed karna

बच्चे को अपने हिसाब से सीखने दें, उस पर अपनी उम्मीदों का बोझ ना लादें। अगर उसे बार-बार जल्दी सीखने के लिए कहा जायेगा, तो वह तनावग्रस्त हो सकता है। इतना ही नहीं, गुस्सा आने पर बच्चा सीखने से इनकार भी कर सकता है।

शारीरिक व मानसिक विकास होने के साथ ही बच्चा अपनी मांसपेशियों को नियंत्रित करना सीख पाएगा। इसलिए उससे जल्दी सीखने की उम्मीद ना रखें। लगातार कोशिश करते रहें, धीरे-धीरे वह सबकुछ सीख सकता है।

गलती नम्बर 8: टॉयलेट ट्रेनिंग के दौरान बच्चे को ज्यादा गिफ्ट या तोहफे देना।

(Toilet training ke dauran bache ko jyada mehange gift dena)

toilet training ke dauran bache ko jyada mehange gift dena

बच्चे को शौचालय का उपयोग करने हेतु प्रेरित करने के लिए कभी-कभार छोटे-मोटे तोहफे देने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन, बच्चे को हर बार टॉफी, चॉकलेट, महंगे खिलौने आदि चीज़ें ना दें। इससे उसकी नज़रों में तोहफों की अहमियत कम हो जाएगी और फिर वो आपसे और भी ज्यादा तोहफे मांगने लग सकता है। इसके अलावा उसे मीठा खाने की लत लग सकती है, जिससे उसके दांत खराब हो सकते हैं।

हर बार तोहफे देने के बजाय उसे प्यार से बाहों में भरें, उसे चूमें और उसकी तारीफ करें। इससे उसे ज्यादा खुशी मिलेगी।

गलती नम्बर 9: अपने बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से करना।

(Apne bache ki tulna dusre bacho se karna)

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कई माता-पिता अक्सर अपने बच्चे को कहते हैं - ‘देखो, शर्मा अंकल की बेटी ने तो तुम्हारी उम्र में टॉयलेट में सूसू-छीछी करना सीख लिया था और एक तुम हो, जो अब तक डायपर पहनते हो।’ टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) के दौरान इस तरह की बातें उसके दिमाग पर गलत असर डालती हैं, इसलिए ऐसा ना करें।

हर बच्चा बाकी बच्चों से अलग होता है और अलग ढंग से बढ़ता है। शरीर की मांसपेशियों को नियंत्रित करना उसके विकास का ही एक हिस्सा है। इसलिए उसे उसके हिसाब से बढ़ने दें और किसी से उसकी तुलना ना करें। उसकी गलतियों को प्यार से स्वीकार करें और उन्हें सुधारने में उसकी मदद करें।

गलती नम्बर 10: बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग के दौरान उसे शौचालय में अकेला छोड़ना।

(Bache ki toilet training ke dauran use bathroom me akela chodna)

bache ki toilet training ke dauran use bathroom me akela chodna

छोटे बच्चे को शौचालय का इस्तेमाल करना सिखाने के दौरान किसी भी हालत में वहां अकेला ना छोड़ें, क्योंकि वहां उसके साथ दुर्घटना होने की आशंका होती है। एक डरावनी सच्चाई ये है कि छोटे बच्चे एक-दो इंच पानी में भी डूब सकते हैं। अगर आपका बच्चा टॉयलेट सीट कवर का उपयोग करता है, तो आपकी अनुपस्थिति में वो अंदर झांककर देखने की कोशिश कर सकता है। इस समय अगर वो फिसल कर अंदर गिर जाए, तो गम्भीर दुर्घटना हो सकती है। भगवान ना करे, आपके साथ कभी ऐसा हो, इसलिए बच्चे को शौचालय में कभी अकेला ना छोड़ें।

गलती नम्बर 11: बच्चे को ऐसे कपड़े पहनाना, जिन्हें उतारने में परेशानी हो।

(Bache ko aise kapde pehnana jinhe utarne me pareshani ho)

toilet training galti

डॉक्टर कहते हैं कि बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) के दौरान आपको उसे ऐसे कपड़े पहनाने चाहिए, जिन्हें ज़रूरत पड़ने पर आसानी से उतारा जा सके। अगर आप उसे ऐसे कपड़े पहनाते हैं, जिन्हें उतारने में समय लगता है, तो हो सकता है कि बच्चा उनमें पेशाब या मलत्याग कर दे।

वह अभी अपने मूत्राशय और गुदा की मांसपेशियों को सही तरह से नियंत्रित नहीं कर पाता है, इसलिए वह अभी पेशाब या मल को ज्यादा देर तक अंदर रोककर रख पाना नहीं सीख पाया है, इसमें उसे अभी थोड़ा और वक्त लग सकता है। इसलिए आप उसे ढीले-ढाले आरामदायक कपड़े जैसे निक्कर, पायजामा, अंडरवियर (चड्डी) आदि पहनाएं।

गलती नम्बर 12: बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग के दौरान बहुत ज्यादा चिंता करना।

(Bache ki toilet training ke dauran bahut jyada chinta karna)

toilet training ke dauran bahut jyada chinta karna

बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) को लेकर परेशान ना हों जनाब! धीरे-धीरे वो शौचालय का अच्छी तरह से इस्तेमाल करना सीख ही जाएगा। कुछ माँओं के मन में ये डर होता है कि अगर उनके बच्चे ने डायपर का उपयोग करना नहीं छोड़ा, तो क्या होगा? घबराएं नहीं, अगर आपका बच्चा तैयार है, तो लगातार कोशिश करने से वह कुछ ही हफ़्तों में बाथरूम में पेशाब और पॉटी करना सीख सकता है।

अगर आप बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) के दौरान चिंतित या तनावग्रस्त रहेंगे, तो उसे इसका पता चल सकता है। इससे बच्चा भी तनाव में आ सकता है और उसे सीखने में ज्यादा समय लग सकता है। इसलिए खुश रहें और इस दौरान सामने आने वाली सभी चुनौतियों का मिलजुलकर सामना करें।

गलती नम्बर 13: किसी समयसीमा के अनुसार बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग शुरू करना।

(Kisi timeline ke anusar bache ki toilet training shuru karna)

timeline ke anusar bache ki toilet training shuru karna

छोटे बच्चे समयसीमा यानी डेडलाइन में रहकर काम नहीं कर सकते क्योंकि उनके लिए इसका कोई मतलब नहीं होता है। इसलिए अपने बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) शुरू करते समय, उसे किसी तरह की समयसीमा में ना बांधें।

इंटरनेट पर जो लोग बच्चों को तीन दिनों में, एक हफ्ते में या एक महीने में टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) सिखाने के तरीके बताते हैं, वो आपके बच्चे की निजी आदतों और ज़रूरतों को नहीं जानते हैं। केवल आप जानते हैं कि उसके लिए क्या सही है और क्या गलत। इसलिए अपने बच्चे को शौचालय का इस्तेमाल सिखाने के लिए खुद को या उसे किसी समयसीमा में ना बांधें और उसे आराम से सीखने दें।

आजकल ज्यादातर लोगों के पास समय की कमी है और इस वजह से वो सभी काम जल्दी-से-जल्दी पूरे करना पसंद करते हैं। मगर, बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग (toilet training in hindi) के दौरान आपको जल्दीबाज़ी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि उसे नई चीजें सीखने में थोड़ा वक्त लगता है।

बच्चे को यह विश्वास दिलाएँ कि आपको उस पर भरोसा है और वो हर दिन जितनी कोशिशें कर रहा है, आप उनसे बेहद खुश हैं। आपको खुश और सकारात्मक देखकर वो जल्दी सीखने के लिए प्रेरित होता है।

हम उम्मीद करते हैं कि आप बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग (potty training in hindi) के दौरान ब्लॉग में बताई गई गलतियाँ नहीं करेंगे और बच्चे के गलतियाँ करने पर उसे डांटने के बजाय प्यार से समझाएंगे।

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