प्रेगनेंसी में बीपी के कारण, लक्षण और उपचार (Pregnancy me bp ki problem ke karan, lakshan aur upchar)

प्रेगनेंसी में बीपी के कारण, लक्षण और उपचार (Pregnancy me bp ki problem ke karan, lakshan aur upchar)

प्रेगनेंसी की अवस्था महिलाओं के जीवन में कईं खुशियां लेकर आती हैं, लेकिन महिलाओं को अक्सर प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) का सामना करना पड़ सकता है।

प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम अक्सर पहली बार मां बनने वाली महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती है। डॉक्टर्स के मुताबिक प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) करीब 8 प्रतिशत महिलाओं में देखने को मिलती है। प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम होने के बावजूद सही सलाह और उपचार की सहायता से महिलाएं स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती है। आज के ब्लॉग में आपको प्रेगनेंसी में हाई बीपी की प्रॉब्लम से जुडी कुछ ज़रूरी जानकारियां दे रहे हैं।

गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर या जेस्टेशनल हाइपरटेंशन क्या होता है?

(garbhavastha me high bp kya hota hai)

pregnancy me high bp

प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) अक्सर महिलाओं में 20 सप्ताह के गर्भ के बाद अधिक देखने को मिलती हैं। गर्भावस्था के दौरान जब महिला का ब्लड प्रेशर (bp in hindi) 140/90 mm hg से अधिक हो जाता हैं, तो इस अवस्था को हाई बीपी (high bp in hindi) कहा जाता है।

प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम से प्रेग्नेंट महिला के पेशाब में प्रोटीन आने लगता हैं जिससे प्रेगनेंसी इंड्यूस हाइपरटेंशन (PIH in hindi) का खतरा बढ़ जाता हैं।

प्रेगनेंसी इंड्यूस्ड हाइपरटेंशन (पीआईएच) क्या होता है?

(pregnancy induced hypertension kya hota hai)

pregnancy induced hypertension

प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) से पीड़ित महिला को प्रेगनेंसी इंड्यूस्ड हाइपरटेंशन (पीआईएच) होने का खतरा अधिक होता है। इस अवस्था में गर्भवती महिलाओं की खून की नसें सिकुड़ जाती है, जिससे दिल पर खून का दबाव बढ़ने लगता है।

पीआईएच से शुरुआत में गर्भवती महिलाओं में चक्कर आना और उल्टियां (vomiting in hindi) होने जैसी आम समस्याएं होती है। लेकिन आगे जाकर इससे गर्भावस्था में प्री एक्लेमप्सिया (preeclampsia in hindi) जैसी बीमारी भी हो सकती है।

गर्भावस्था में प्री एक्लेमप्सिया क्या होता है?

(garbhavastha me preeclampsia kya hota hai)

garbhavastha me preeclampsia

प्री-एक्लेम्प्सिया गर्भवती महिला के शरीर में अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ने की वजह से पैदा होने वाली एक समस्या है। इस समस्या से पीड़ित महिलाओं के पेशाब में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा पायी जाती है और इसके अलावा उनके पैरों व हाथों में अक्सर सूजन भी आ जाती है।प्लेसेंटा के सही तरह से काम ना करने की वजह से प्री-एक्लेम्प्सिया (preeclampsia in hindi) की स्थिति पैदा होती है।

विशेषज्ञ पिछले कई वर्षों से प्री-एक्लेम्प्सिया (preeclampsia in hindi) का सही कारण खोजने में लगे हुए हैं, लेकिन अभी तक कोई सफलता हाथ नहीं लग पायी है। कुछ शोधकर्ताओं का कहना है कि गर्भवती के भोजन में सही मात्रा में पोषक तत्व ना होने की वजह से प्री-एक्लेम्प्सिया की समस्या का खतरा पैदा हो सकता है। इसके अलावा कुछ विशेषज्ञ शरीर में ज्यादा फैट होने को भी प्री-एक्लेम्प्सिया का एक कारण मानते हैं।

प्री-एक्लेम्प्सिया के लक्षण निम्न हैं-

  • तेजी से वज़न बढ़ना
  • पेट में दर्द
  • तेज़ सिरदर्द
  • पेशाब कम आना या ना आना
  • थकान
  • बहुत ज्यादा उल्टी व जी घबराना
  • नज़र कमज़ोर होना

अगर प्री-एक्लेम्प्सिया (preeclampsia in hindi) की समस्या का सही तरह से इलाज ना किया जाये, तो यह एक्लेम्प्सिया में बदल सकती है और इससे आपके गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए अगर आपको अपने शरीर में प्री-एक्लेम्प्सिया के लक्षण नज़र आएं, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

गर्भावस्था में प्री एक्लेमसिया से बच्चे को क्या खतरा हो सकता है?

(garbhavastha me preeclampsia se bache ko kya khatra ho sakta hai in hindi)

pregnancy me preeclampsia

प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) से पीड़ित महिला के शरीर में खून का संचार कम होता है, इसलिए उसके गर्भाशय तक कम मात्रा में खून पहुंचता है। गर्भ में खून की कमी से गर्भाशय में पल रहे भ्रूण (fetus in hindi) को पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं।

इसलिए प्री एक्लेमसिया से पीड़ित महिला से पैदा होने वाला बच्चा कमजोर और कुपोषित (malnutrition in hindi) भी हो सकता है।

प्रेगनेंसी में हाई ब्लड प्रेशर या जेस्टेशनल हाइपरटेंशन होने के ये 9 मुख्य कारण

(pregnancy me high blood pressure hone ke ye 9 mukhya karan)

pregnancy me high blood pressure

डॉक्टर्स के मुताबिक प्रेगनेंसी में हाई बीपी (high blood pressure in pregnancy in hindi) की समस्या उन महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती हैं जिनके परिवार में माता-पिता या भाई बहन (करीबी रिश्तेदार) को ये समस्या पहले से रही हो। गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या के निम्न कारण हो सकते हैं।

  • महिला को गर्भावस्था से पहले हाई बीपी की समस्या रही हो- अगर किसी महिला को गर्भावस्था से पहले भी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या रही है, तो उन्हें प्रेगनेंसी में भी हाई बीपी (gestational hypertension in hindi) की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

  • 40 साल की उम्र के बाद गर्भ धारण करना- अगर कोई महिला 40 साल से अधिक की उम्र के बाद प्रेग्नेंट होती है, तो उसमे हाई ब्लड प्रेशर (gestational hypertension in hindi) की समस्या होने का खतरा अधिक होता है।

  • गर्भावस्था से पहले शुगर (डायबिटीज) की शिकायत होना- जिन महिलाओं को गर्भावस्था से पहले डायबिटीज की शिकायत होती हैं, उन्हें गर्भावस्था के दौरान हाई बीपी (gestational hypertension in hindi) होने का खतरा अधिक होता है।

  • आईवीएफ (IVF) से प्रग्नेंट होना- अगर कोई महिला कुदरती तरीके से गर्भ धारण नहीं कर पाती है, तो उसे आईवीएफ (IVF) तकनीक से गर्भ धारण कराया जाता है| इस तकनीक से गर्भ धारण करने पर भी महिलाओं को हाई ब्लड प्रेशर (high bp in hindi) की समस्या हो सकती है।

  • महिला का वजन अधिक होना या मोटापे की समस्या होना- प्रेगनेंसी के समय जिन महिलाओं का वजन अधिक होता है, उनमें प्रेगनेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर (high blood pressure in hindi) की समस्या होने का खतरा अधिक होता है।

  • गर्भ में जुड़वाँ बच्चे होना- अगर किसी महिला के गर्भ में एक से अधिक बच्चे होते हैं, तो उन्हें प्रेगनेंसी में हाइपरटेंशन (hypertension in hindi) की समस्या हो सकती है।

  • महिलाओं का कम सक्रिय होना- जो महिलाएं शारीरिक रूप से कम सक्रिय होती हैं, उन्हें गर्भावस्था के दौरान हाई बीपी की समस्या होने का खतरा अधिक रहता है।

  • शराब और सिगरेट का सेवन करना- शराब और सिगरेट का सेवन करने वाली महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान हाई बीपी की प्रॉब्लम अधिक देखने को मिलती है। हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित महिला को सिगरेट के धुंए से भी बचना चाहिए।

  • पहली बार मां बनने वाली महिलाओं में- गर्भावस्था के दौरान हाई बीपी (gestational hypertension in hindi) की समस्या अक्सर उन महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती है, जो पहली बार मां बनने वाली होती हैं।

प्रेगनेंसी में उच्च रक्तचाप के लक्षण क्या होते हैं?

(pregnancy me high bp ke lakshan kya hote hai)

pregnancy me high bp ke lakshan

प्रेगनेंसी में उच्च रक्तचाप के लक्षण (high blood pressure symptom in hindi) को पहचानना आसान नहीं होता है। हम आपको प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) से पीड़ित महिला के कुछ सामान्य लक्षणों के बारे में बता रहे हैं। अगर गर्भावस्था में आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

  • आंखों के सामने अंधेरा छा जाना- प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) से पीड़ित महिलाओं की आँखों के सामने अक्सर अंधेरा छा जाता हैं। इस दौरान महिलाओं की नजर भी कमजोर हो सकती हैं।

  • टॉयलेट कम आना- प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) से पीड़ित महिलाओं को पेशाब कम आता हैं। इसलिए प्रेगनेंसी में जब भी टॉयलेट कम आने की समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

  • बच्चे का पेट में लात मारना- डॉक्टर्स के मुताबिक प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) से पीड़ित महिलाओं के प्लेसेंटा (placenta in hindi) में खून का संचार कम हो जाता है। इससे बच्चे को ज़रूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं और बच्चा मां के पेट में बार-बार लात मारता है।

  • गर्भावस्था में बिना कारण वजन बढ़ जाना- गर्भावस्था में महिलाओं का वजन बढ़ना आम बात है, लेकिन प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) से पीड़ित महिलाओं का वजन एक दम से बढ़ने लगता है। इस अवस्था में महिलाओं को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। गर्भावस्था में कितना वजन बढ़ना महिला के लिए सामान्य होता है, इसकी जानकारी के लिए महिलाओं को डॉक्टर से अपना बीएमआई इंडेक्स (bmi index in hindi) चेक कराना चाहिए। बीएमआई इंडेक्स (bmi index in hindi) के द्वारा डॉक्टर आपकी हाईट के अनुसार आपका सामान्य वजन बताएगा।

  • पेट के ऊपरी हिस्से में अधिक दर्द होना- प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) की वजह से महिलाओं के पेट के ऊपरी हिस्से में अधिक दर्द महसूस हो सकता है। इसलिए महिलाओं को जब भी पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द महसूस हों उन्हें तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। हालांकि कभी-कभी पेट दर्द किसी अन्य कारण से भी हो सकता है।

प्रेगनेंसी में हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित महिलाओं को कौन सी जांच करानी चाहिए?

(pregnancy me high blood pressure se pidit mahilao ko kaun si jaach karani chahiye)

pregnancy me high blood pressure ke liye janch

  • भ्रूण (fetus) की जांच- प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) होने पर महिलाओं को सबसे पहले गर्भ में पल रहे भ्रूण (fetus in hindi) की जांच करानी चाहिए।

  • बायो प्रोफाइल टेस्ट (bio profile test)- प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) होने पर महिलाओं को पहले डॉक्टर की सलाह से बायो प्रोफाइल टेस्ट (bio profile test in hindi) कराना चाहिए। इसमें नॉन स्ट्रेस टेस्ट (non stress test in hindi) के साथ एक अल्ट्रासाउंड टेस्ट (ultrasound test in hindi) भी होता हैं।

  • डॉप्लर फ्लो स्टडी (doppler flow study) टेस्ट- हाई ब्लड प्रेशर (high bp in hindi) की समस्या से पीड़ित गर्भवती महिलाएं अपनी डॉप्लर फ्लो स्टडी (doppler flow study in hindi) भी करा सकती हैं। ये भी एक प्रकार का अल्ट्रासाउंड टेस्ट (ultrasound test in hindi) होता है।

  • खून और पेशाब की जांच (blood test and urin test)- प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi से बचने के लिए गर्भवती महिलाओं को नियमित रूप से अपने खून (blood test in hindi) और पेशाब की जांच (urine test in hindi) करानी चाहिए।

प्रेगनेंसी में हाई ब्लड प्रेशर से बच्चे पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?

(pregnancy me high blood pressure se bache par kya prabhav padta hai)

effect of high bp on baby

  • बच्चे का कमजोर होना- अगर किसी महिला को प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) है, तो बच्चे पर इसका बुरा असर पड़ सकता हैं। प्रेगनेंसी में हाइपरटेंशन (gestational hypertension in hindi) से प्लेसेंटा (placenta in hindi) में खून का संचार कम हो जाता है। जिससे बच्चे को ज़रूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं, और कमजोर बच्चा पैदा हो सकता है।

  • बच्चे की समय से पहले डिलीवरी होना(प्री मैच्योर डिलीवरी)- महिला को प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) से गर्भ में बच्चे का विकास रुक जाता है, जिससे बच्चा छोटा (कुपोषित) और समय से पहले भी हो सकता हैं।

प्रेगनेंसी में हाई ब्लड प्रेशर से मां पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?

(pregnancy me high bp se ma par kya prabhav pad sakta hai)

pregnancy me high bp se ma par asar

  • किडनी और लिवर पर असर- प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) से महिलाओं की किडनी (kidney in hindi) और लिवर (liver in hindi) काम करना बंद कर सकते हैं।

  • समय से पहले बच्चे की डिलीवरी (premature delivery)- प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) से पीड़ित महिलाओं की कई बार समय से पहले डिलीवरी भी हो सकती है। इसके बाद शिशु को कुछ दिन आई.सी.यू में भी रखना पड़ सकता हैं।

  • हार्ट अटैक या दिल की बीमारी- जिन महिलाओं को प्रेगनेंसी के समय हाई ब्लड प्रेशर (gestational hypertension in hindi) की समस्या होती हैं, उन्हें बाद में हार्ट अटैक (heart attack in hindi) या दिल से सम्बंधित अन्य बीमारियां भी हो सकती हैं।

  • टोक्सिमिआ (toxemia in hindi)- जिन महिलाओं में प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) होती है, उनमे प्री एक्लेम्पसिया (preeclampsia in hindi) का खतरा बढ़ जाता है, जिससे आगे जाकर टोक्सिमिआ हो सकता है।

  • कोमा में जाना- प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) से महिलाओं में एक्लेम्पसिया (eclampsia in hindi) भी हो सकता हैं जो महिलाओं के दिमाग (brain in hindi) के लिए खतरनाक हो सकता है। इससे महिलाएं कोमा (coma in hindi) में भी जा सकती है। कोमा एक ऐसी अवस्था है, जिसमे दिमाग काम करता है लेकिन शरीर में कोई हलचल नहीं होती है।

प्रेगनेंसी में हाई बीपी से कैसे बचें?

(pregnancy me high bp se kaise bache)

pregnancy me high bp

गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होने पर नीचे लिखें उपाय आजमा सकते हैं-

  • प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम होने पर आराम करें- प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) से पीड़ित महिलाओं को डॉक्टर की सलाह से अच्छी तरह आराम करना चाहिए।

  • प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम होने पर वजन नियंत्रित रखें- प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) से बचने के लिए महिलाओं को अपने वजन को नियंत्रित रखना चाहिए। इसके लिए महिलाओं को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

  • प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम होने पर खान-पान का ध्यान रखें- प्रेगनेंसी में महिलाओं को अपने खाने पीने की चीजों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। प्रेग्नेंट महिलाएं डॉक्टर की सलाह से अपना हाई ब्लड प्रेशर डाइट चार्ट बना सकती हैं।

  • प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम होने पर तनाव (tanav) से बचें- प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) से महिलाओं के हार्मोन में कई बदलाव होते है, जिनसे महिलाओं में तनाव (tanav) की समस्या बढ़ जाती है। इसलिए महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान तनाव से दूर रहना चाहिए।

  • प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम होने पर सिगरेट और शराब से दूर रहें- प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) से बचने के लिए महिलाओं को सिगरेट और शराब से दूर रहना चाहिए। हाई ब्लड प्रेशर (high bp in hindi) से पीड़ित महिला को गर्भावस्था के दौरान सिगरेट के धुंए से भी दूर रहना चाहिए।

  • प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम होने पर डॉक्टर की सलाह से ये गोलियां लें- प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) होने पर महिलाओं को रोज़ाना 2 से 3 ग्राम कैल्शियम (calcium in hindi) का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा महिलाएं रोज़ाना 3 ग्राम मैग्नीशियम ग्लूकोनेट (magnesium gluconate in hindi) का भी सेवन कर सकती हैं। हालांकि प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम होने पर महिलाओं को डॉक्टर की सलाह से ही दवाइयाँ लेनी चाहिए।

  • प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम होने पर ऐसे सोएं- प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) होने पर महिलाओं को बेड पर सीधे सोने के बजाय करवट लेकर सोना चाहिए। इससे गर्भवती महिलाओं का बीपी कंट्रोल में रहेगा।

  • प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम होने पर एक्सरसाइज और योग करें- प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) होने पर महिलाओं को हल्की एक्सरसाइज करनी चाहिए। अगर आप गर्भावस्था के दौरान रोज़ाना ध्यान (dhyan in hindi), योगासान, प्राणायाम, एक्सरसाइज करेंगी तो आप हाई ब्लड प्रेशर (gestational hypertension in hindi) से आसानी से बच सकती हैं।

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को जैसे ही हाई ब्लड प्रेशर (gestational hypertension in hindi) की समस्या का पता चले, तो उन्हें तुरंत इसका ज़रूरी उपचार शुरू कर देना चाहिए, साथ ही उचित सावधानियां भी बरतनी चाहिए।

नियमित देखभाल और सही खान-पान से प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) से काफी हद तक बचा जा सकता है। ज्यादातर मामलों में प्रेगनेंसी में होने वाली हाई ब्लड प्रेशर (gestational hypertension in hindi) की समस्या बच्चे की डिलीवरी के बाद अपने आप ठीक हो सकती है।

प्रेगनेंसी में बीपी की प्रॉब्लम (high blood pressure in pregnancy in hindi) से बचने के लिए महिलाओं को ज्यादा तनाव नहीं लेना चाहिए। प्रेगनेंसी में महिलाओं को हमेशा हल्के और खुशनुमा माहौल में रहना चाहिए। इस दौरान महिलाएं कुछ अच्छी किताबें भी पढ़ सकती हैं।

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