प्रेगनेंसी में बवासीर : लक्षण, कारण और घरेलू उपाय (pregnancy me piles : lakshan, karan aur gharelu upay)

प्रेगनेंसी में बवासीर : लक्षण, कारण और घरेलू उपाय (pregnancy me piles : lakshan, karan aur gharelu upay)

गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव की वजह से गर्भवती महिला के शरीर में कई शारीरिक बदलाव होते हैं। इन बदलावों में कुछ अच्छे तो कुछ शरीर को तकलीफ देने वाले होते हैं। शरीर को तकलीफ देने वाली विभिन्न समस्याओं में प्रेग्नेंसी में बवासीर (pregnancy me bawasir) एक समस्या है। गर्भावस्था के दौरान प्रत्येक 10 में से एक महिला को गर्भावस्था में बवासीर होता है। प्रेगनेंसी में पाइल्स की समस्या अक्सर गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था की दूसरी तिमाही से शुरू होती है और पूरी प्रेग्नेंसी रहती है। इस ब्लॉग में आपको गर्भावस्था में बवासीर (garbhavastha me bawasir) के कारण, लक्षण, इलाज और उससे बचने के घरेलू उपाय के बारे में बताया जा रहा है।

1. गर्भावस्था में बवासीर क्या है?

(garbhavastha me bawasir kya hai)

garbhavastha me bawasir

प्रेगनेंसी में बवासीर (pregnancy me bawasir) होने पर गुदा के चारों ओर मस्से हो जाते हैं, जिन पर दबाव की वजह से अक्सर खून जमा होने लगता है। इन मस्सों में खून के थक्के जमने के कारण मल त्याग करते समय खून आने लगता है। ये मस्से अंगूर की तरह होते हैं और बड़े या छोटे दोनों ही आकार के हो सकते हैं।

2. क्या प्रेगनेंसी में बवासीर या पाइल्स की समस्या सामान्य है?

(kya pregnancy me bawaseer ya piles ki samasya samanya hai)

pregnancy me piles

प्रेगनेंसी में बवासीर या पाइल्स (pregnancy me bawasir/piles) होना सामान्य होता हैं, और यह करीब 40 प्रतिशत महिलाओं को होता है। आमतौर पर प्रेगनेंसी में पाइल्स दो प्रकार के होते है, जिनमें एक अंदरूनी पाइल्स (internal hemorrhoids in hindi) और दूसरा बाहरी पाइल्स (external hemorrhoids in hindi) होता है। महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान अंदरूनी बवासीर उनके मलाशय मार्ग में होता है और अक्सर मल त्याग करते समय इसमें दर्द होता है और खून आने लगता है। वहीं दूसरी ओर बाहरी पाइल्स गुदा (rectum in hindi) के बाहरी हिस्से में मस्सों के रूप में होता है। बाहरी बवासीर होने पर मल त्याग करते समय अक्सर गुदा में दर्द और खुजली होती है।

3. गर्भावस्था में बवासीर होने के लक्षण क्या हैं?

(garbhavastha me bawasir hone ke lakshan kya hai)

symptoms piles during pregnancy

गर्भावस्था में बवासीर (garbhavastha me bawasir) होने के कई लक्षण हो सकते हैं। नीचे बताए गए लक्षण दिखाई देते ही अपने विशेषज्ञ से सलाह लें।

  • प्रेगनेंसी में बवासीर के लक्षण : मलाशय के चारों ओर सूजन होना- गर्भावस्था के दौरान अगर मलाशय के चारों ओर सूजन हो रही है तो यह प्रेगनेंसी में पाइल्स (pregnancy me bawasir) का लक्षण हो सकता है।

  • प्रेगनेंसी में बवासीर के लक्षण : मलद्वार में मस्से होना- अगर किसी गर्भवती महिला के मलद्वार में मस्से हो रहे हैं तो यह गर्भावस्था में बवासीर (garbhavastha me bawasir) का लक्षण हो सकता है।

  • प्रेगनेंसी में बवासीर के लक्षण : अक्सर गुदा में खुजली होना- प्रेगनेंसी के दौरान अगर किसी महिला को अक्सर गुदा (rectum in hindi) में खुजली होती है तो इसे गर्भावस्था में बवासीर (garbhavastha me bawasir) का लक्षण माना जा सकता है। guda me khujli

  • प्रेगनेंसी में बवासीर के लक्षण : गुदा में दर्द होना- यदि गर्भावस्था के दौरान अगर मल त्याग करते वक्त या उसके बाद आपके गुदा में दर्द होता है तो यह प्रेगनेंसी में पाइल्स (pregnancy me bawasir) का लक्षण हो सकता है। गुदा में दर्द होने पर कई बार आपको बैठने में असहजता महसूस हो सकती है।

  • प्रेगनेंसी में बवासीर के लक्षण : मल त्याग करते समय खून आना- प्रेगनेंसी में बवासीर (pregnancy me bawasir) होने पर गर्भवती महिला के मलद्वार में खून के थक्के जमने लगते हैं और अक्सर मल त्याग करते समय खून आने लगता है।

  • प्रेगनेंसी में बवासीर के लक्षण : मलाशय मार्ग से म्यूकस आना- गर्भावस्था के दौरान अगर किसी महिला को मल त्याग करने के पहले या बाद में उसके मलाशय मार्ग से श्र्लेम यानी म्यूकस (mucus in hindi) आता है तो यह गर्भावस्था में बवासीर (garbhavastha me bawasir) के लक्षणों में से एक हो सकता है।

  • प्रेगनेंसी में बवासीर के लक्षण : मल त्यागने के बाद भी मल त्यागने की आशंका होना- प्रेगनेंसी के दौरान एक बार मल त्यागने के बाद अगर तुरंत आपको दोबारा मल त्यागने की आशंका हो रही हो तो यह गर्भावस्था में बवासीर (garbhavastha me bawasir) का संकेत हो सकता है।

4. प्रेगनेंसी में बवासीर होने के क्या कारण होते हैं?

(pregnancy me bawaseer hone ke karan kya hote hai)

गर्भावस्था में बवासीर (garbhavasta me bawasir) होने के कई कारण हो सकते हैं, जो नीचे बताए गए हैं -

  • प्रेगनेंसी में बवासीर के कारण : प्रेगनेंसी के पहले से बवासीर होना- अगर किसी महिला को प्रेगनेंसी के पहले से बवासीर की समस्या है तो उन्हें गर्भावस्था में बवासीर (garbhavastha me bawasir) होने की संभावना हो सकती है।

  • प्रेगनेंसी में बवासीर के कारण : गर्भाशय का आकार बढ़ना- गर्भावस्था की दूसरी तिमाही से गर्भ में पल रहे शिशु के बढ़ने की वजह से गर्भाशय (uterus in hindi) का आकार बढ़ने लगता है। गर्भाशय का आकार बढ़ने पर शरीर के निचले हिस्से की नसों पर इसका दबाव बनता है, जिसके फलस्वरूप महिला के शरीर के निचले हिस्से में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है। मलद्वार में अतिरिक्त दबाव के कारण सूजन होती है, जिससे बवासीर (piles in hindi) होता है।

  • प्रेगनेंसी में बवासीर के कारण : प्रोजेस्टेरोन हार्मोन की मात्रा बढ़ना- गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं। गर्भावस्था में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन (progesterone hormone in hindi) की मात्रा काफी बढ़ जाती, जिसकी वजह से नसें नर्म होकर सूज जाती हैं, इससे गर्भावस्था में बवासीर (garbhavastha me bawasir) की समस्या होती है।

  • प्रेगनेंसी में बवासीर के कारण : कब्ज होना- गर्भवती महिलाओं को अक्सर कब्ज की शिकायत होने की वजह से उनके मलाशय पर दबाव बनता है, जो प्रेगनेंसी में पाइल्स (pregnancy me bawasir) होने का कारण बन सकता है।

  • प्रेगनेंसी में बवासीर के कारण : वेरिकोज़ नसों की वजह से योनि पर दबाव पड़ना- हालांकि यह स्थिति काफी असामान्य है, लेकिन कई बार गर्भावस्था में महिला के पैरों की वेरिकोज़ नसें (varicose nerves in hindi) बढ़ जाने के कारण योनि पर दबाव पड़ता है और यह पाइल्स (hemorrhoids in hindi) का कारण बन सकता है।

5. गर्भावस्था में बवासीर का इलाज कैसे करें?

(garbhavastha me bawasir ka ilaj kaise kare)

pregnancy me piles ka ilaj

गर्भावस्था में बवासीर (garbhavastha me bawasir) के इलाज के लिए कई प्रकार की दवाइयां बाजार में उपलब्ध हैं, लेकिन प्रेग्नेंसी में किसी भी प्रकार की दवाइयों का इस्तेमाल करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

  • पाइल्स (hemorrhoids in hindi) को खत्म करने के लिए डॉक्टर पहले क्रीम देते हैं, जिसे आपको प्रभावित क्षेत्र पर लगानी होती है।

  • क्रीम से ठीक न होने के बाद रसायन युक्त सूई (injection in hindi) का इस्तेमाल किया जाता है, इससे पाइल्स (piles in hindi) की गांठ सूख कर अलग हो जाती है।

  • पाइल्स (hemorrhoids in hindi) से प्रभावित क्षेत्र पर रबड़ भी बांधा जाता है, इससे खून आना बंद हो जाता है।

  • प्रभावित क्षेत्र पर इंफ्रारेड रोशनी (laser operation in hindi) डालकर पाइल्स (piles in hindi) को ठीक किया जाता है।

(नोट : आपके रोग की गंभीरता की जांच करने के बाद ही डॉक्टर आपके इलाज का तरीका तय करते हैं)।

6. प्रेगनेंसी में बवासीर पर नियंत्रण पाने के घरेलू उपाय

(pregnancy me bawaseer par niyantran ke gharelu upay)

home remedies piles during pregnancy

ज्यादातर मामलों में गर्भावस्था में बवासीर (garbhavastha me bawaseer) की समस्या होने पर डॉक्टर भी घरेलू उपायों के इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। गर्भावस्था में बवासीर (piles problem in pregnancy in hindi) पर नियंत्रण पाने के लिए आप कुछ सामान्य घरेलू उपायों को अपना सकती हैं, इससे आपकी समस्या खत्म तो नहीं होगी लेकिन बवासीर के दर्द से आपको कुछ हद तक राहत जरूर मिलेगी। बवासीर नियंत्रण के सभी घरेलू उपाय नीचे बताए गए हैं -

  • गरम या ठंडे पानी का सेक लें- प्रेगनेंसी में पाइल्स (pregnancy me bawasir) होने पर सूती के कपड़े में बर्फ के छोटे टुकड़े लपेटकर या फिर थंड़े पानी में कपड़े को डूबोकर प्रभावित क्षेत्र पर लगाने से सूजन, जलन और खुजली से तुरंत राहत मिलेगी।

  • गुनगुने पानी में बैठें- प्रेगनेंसी में बवासीर (pregnancy me bawasir) पर नियंत्रण पाने के लिए दिन में 3 से 4 बार 5-10 मिनट के लिए कमर तक गुनगुने पानी में बैठें। इससे शरीर में रक्त प्रवाह सुचारू रूप से होगा और आपको पाइल्स (piles in hindi) के दर्द से आराम मिलेगा।

  • मस्सों पर बेकिंग सोड़ा लगाएं- विभिन्न प्रकार की त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए बेकिंग सोडा (baking soda in hindi) का इस्तेमाल उत्तम माना जाता है। गर्भावस्था में बवासीर (garbhavastha me bawasir) के दर्द को कम करने के लिए महिलाएं प्रभावित क्षेत्र पर बेकिंग सोडा का इस्तेमाल कर सकती है। इससे उन्हें आराम मिलेगा।

  • स्वच्छता का ख्याल रखें- प्रेगनेंसी में पाइल्स की समस्या (piles problem in pregnancy in hindi) पर नियंत्रण पाने के लिए महिलाओं को अपनी स्वच्छता का ख्याल रखना भी बेहद जरूरी है, इसीलिए रोज़ अपने अंडरवियर और नहाने के बाद इस्तेमाल किए जाने वाले तौलिये को गुनगुने पानी से धोएं एवं एक ही कपड़े को दोबारा न पहनें।

  • शौच के बाद गुदा को पौंछे- शौच करने के बाद महिलाएं गुदा को किसी सूती कपड़े से पौंछें। ज़ोर से रगड़ने की भूल न करें, इससे आपका दर्द और भी ज्यादा बढ़ सकता है।

  • टाइट कपड़ें न पहनें- गर्भावस्था में बवासीर की समस्या (piles problem in pregnancy in hindi) होने पर टाइट कपड़े न पहनें।

  • फाइबर युक्त भोजन करें- रेशेदार भोजन (fiber in hindi) खाएं, जिससे कब्ज नहीं होगी और बवासीर (hemorrhoids in hindi) की समस्या जल्दी दूर होगी। जैसे - दलिया, हरी सब्जियां, फल आदि।

  • ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ पीएं- गर्भावस्था में बवासीर (garbhavastha me bawasir) के दर्द को कम करने के लिए पानी को सबसे लाभदायक माना जाता है। आप ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ पीकर गर्भावस्था में बवासीर (garbhavastha me bawasir) की समस्या को नियंत्रण में रख सकती है। दिन में कम से कम 10 ग्लास पानी पीना श्रेष्ठ माना जाता है।

  • व्यायाम करें- प्रेगनेंसी में पाइल्स की समस्या (piles problem in pregnancy in hindi) को नियंत्रण में रखने के लिए आप योगा, स्ट्रैचिंग और कीगल एक्सरसाइज़ (kegel exercise in hindi) करें, इससे आपको बवासीर (hemorrhoids in hindi) के दर्द से आराम मिलेगा।

7. गर्भावस्था में बवासीर होने पर क्या खाएं?

(garbhavastha me bawasir hone par kya khaye)

foods for piles during pregnancy

स्वस्थ भोजन से शरीर को हर रोग से दूर रखा जा सकता है, इसीलिए गर्भावस्था में बवासीर (garbhavastha me bawasir) होने पर महिलाओं को अपने खान पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। नीचे बताए गए आहारों के बारे में जान कर एवं उन्हें खाकर महिलाएं पाइल्स (piles in hindi) की समस्या से थोड़ी राहत पा सकती है -

  • हरी पत्तेदार सब्जियां खाएं- हरी पत्तेदार सब्जियों में काफी मात्रा में पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इससे न केवल प्रेग्नेंसी में बवासीर (piles problem in pregnancy in hindi) से राहत मिलती है बल्कि शरीर की पाचन क्रिया में भी मदद मिलती है। हरी पत्तेदार सब्जियों में आप पत्ता गोभी, फूल गोभी, ब्रोकली, पालक, खीरा, गाजर और प्याज़ खा सकती हैं।

  • ताज़े फल खाएं- ज्यादातर फलों के छिलकों में फाइबर (fiber in hindi) होता हैं, इसीलिए फलों को बिना छीले खाएं। महिलाएं फलों में सेब, अंगूर, केला, संतरा और अच्छी तरह पका हुआ पपीता खा सकती हैं।

  • साबुत अनाज खाएं- गर्भावस्था में बवासीर (garbhavastha me bawasir) की समस्या पर नियंत्रण पाने के लिए साबुत अनाज लेना काफी फायदेमंद माना जाता है। साबुत अनाज में महिलाएं जौ, गेंहू, बाजरा, मक्का, मटर, बींस, ओटमील और आटा आदि को अपने रोज़ाना आहार में शामिल कर सकती हैं।

  • अंकुरित अनाज खाएं- अंकुरित अनाज में कई पोषक तत्व होते हैं, जिनमें प्रोटीन (protein in hindi), कैल्शियम (calcium in hindi) और विटामीन सी (vitamin C in hindi) शामिल हैं। अपने रोज़ाना के भोजन में अंकुरित अनाज को शामिल करने से आपको गर्भावस्था में बवासीर (garbhavastha me bawasir) से राहत मिलेगी। अंकुरित अनाज में मुख्य रूप से अंकुरित चने, अंकुरित मूंग आदि शामिल हैं। लेकिन ध्यान रखें कि कच्चे अंकुरित अनाज खाने से पाइल्स (hemorrhoids in hindi) बढ़ सकता है, इसीलिए इन्हें उबाल कर ही खाएं।

8. गर्भावस्था में बवासीर होने पर किन चीजों से परहेज करें?

(garbhavastha me bawasir hone par kin cheezo se parhej kare)

precaution piles in pregnancy

जिस प्रकार गर्भावस्था में बवासीर (garbhavastha me bawasir) की समस्या को दूर करने के लिए जरूरी पोषक तत्वों को अपने आहार में शामिल करना जरूरी है ठीक उसी प्रकार प्रेगनेंसी में पाइल्स (pregnancy me bawasir) होने पर किन चीज़ों का परहेज किया जाना चाहिए यह जानना भी आवश्यक है। इन चीज़ों के बारे नीचे बताया गया है -

  • वसा युक्त भोजन न खाएं- गर्भावस्था में बवासीर (garbhavastha me bawasir) होने पर महिलाओं को वसा युक्त भोजन नहीं खाना चाहिए। यह पाचन क्रिया को धीमा कर देता है, जिससे कब्ज होती है और बाद में बवासीर (piles in hindi) का दर्द बढ़ जाता है।

  • धूम्रपान न करें- यूं तो धूम्रपान प्रेगनेंसी के लिए हानिकारक होता ही है, वहीं इससे प्रेगनेंसी में पाइल्स की समस्या (piles problems in pregnancy in hindi) भी बढ़ जाती है। इसीलिए गर्भावस्था में धूम्रपान से परहेज करें। डॉक्टर कहते हैं धूम्रपान करने से गुदा से अधिक रक्तस्राव (bleeding in hindi) होने लगता है।

  • तली हुई वस्तुएं न खाएं- प्रेगनेंसी में पाइल्स (pregnancy me bawasir) हो तो तली हुई वस्तुएं न खाएं, इससे पाचन क्रिया में रुकावट आती है और बवासीर (piles in hindi) की समस्या बढ़ जाती है।

  • ज्यादा मसालेदार खाना न खाएं- गर्भावस्था में बवासीर (garbhavastha me bawasir) होने पर ज्यादा मसालेदार खाना नहीं खाना चाहिए। इससे मल त्याग करते समय जलन होती है और बवासीर का दर्द बढ़ सकता है।

  • कैफीन युक्त पेय पदार्थों से परहेज करें- गर्भावस्था में कैफीन युक्त पेय पदार्थों लेने की वजह से अक्सर कब्ज की समस्या होती है। कब्ज बढ़ने पर बवासीर का दर्द भी बढ़ सकता है, इसीलिए गर्भावस्था में बवासीर (garbhavastha me bawaseer) होने पर कैफीन युक्त पेय पदार्थ जैसे चाय एवं कॉफी से परहेज करें।

9. गर्भावस्था में बवासीर से बच्चे को क्या नुकसान हो सकता है?

(garbhavastha me bawasir se bacche ko kya nuksan ho sakta hai)

effect of piles in pregnancy

गर्भावस्था में बवासीर (garbhavastha me bawaseer) होने पर बच्चे को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह गर्भावस्था के दौरान होने वाली एक आम समस्या है, जो अक्सर बच्चे के जन्म के बाद ठीक हो जाती है। हालांकि गर्भावस्था के दौरान कुछ सामान्य घरेलू उपायों को आज़मा कर आप इस पर नियंत्रण पा सकती है, लेकिन अगर इसके बावजूद आपकी समस्या कम नहीं होती है और बवासीर (piles in hindi) की पीड़ा निरंतर बढ़ती है तो आपको अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

10. प्रेगनेंसी में बवासीर से कैसे बचा जा सकता है?

(pregnancy me bawaseer se kaise bacha ja sakta hai)

pregnancy me bawaseer se bachne ke upay

प्रेगनेंसी के दौरान बवासीर की समस्या (piles problem in pregnancy in hindi) से बचने के लिए महिलाएं कुछ सामान्य उपायों को आज़मा सकती है। प्रेगनेंसी में पाइल्स (pregnancy me bawaseer) की समस्या से बचने के लिए कुछ महत्वपूर्ण उपायों की जानकारी नीचे दी गई है -

  • खूब पानी पीएं- प्रेगनेंसी में बवासीर (pregnancy me bawasir) से बचने का सबसे अच्छा उपाय यही है कि आप कब्ज से बचें। कब्ज से बचने के लिए आपको पूरे दिन में 8 से 10 गिलास पानी पीना चाहिए।

  • फाइबर युक्त आहार खाएं- गर्भावस्था के दौरान से ही महिलाओं को फाइबर युक्त भोजन खाना चाहिए, क्योंकि फाइबर युक्त आहार खाने से कब्ज की समस्या कम होती है। फाइबर युक्त आहार मेंं साबुत अनाज, हरी सब्जियां, नाशपाती फल, मेवे, ब्राउन चावल, ओटमील आदि शामिल है।

  • व्यायाम करें- व्यायाम करना स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है, ऐसे में गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था की शुरुआत से ही हल्का फुल्का व्यायाम करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं में अगर व्यायाम करने की आदत है, तो वह बवासीर (hemorrhoids in hindi) से बच सकती हैं। व्यायाम में प्राणायम और कीगल एक्सरसाइज (kegel exercise in pregnancy in hindi) करना फायदेमंद होता है।

  • मल आने पर उसे न रोकें- जब भी मल त्यागने की इच्छा हो तो उसे रोके नहीं। इसके अलावा मल त्यागते समय ज्यादा जोर न लगाएं, बल्कि थोड़ी देर बाद पानी पीकर दोबारा कोशिश करें।

  • अपनी अवस्था को बदलते रहें- प्रेगनेंसी में पाइल्स (pregnancy me bawasir) से बचने के लिए महिला को ज्यादा देर तक बैठना या खड़ा नहीं रहना चाहिए, बल्कि थोड़ी-थोड़ी देर बाद अपनी अवस्था को बदलते रहना चाहिए।

गर्भावस्था में बवासीर (pregnancy me bawasir) की समस्या से जूझ रहीं ज्यादातर महिलाएं अगर अपने खान पान और जीवनशैली में बदलाव लाती है, तो उन्हें इस समस्या से थोड़ी राहत मिल सकती है। इस ब्लॉग में बताए गए उपायों को आज़माने के बावजूद अगर आपके बवासीर (hemorrhoids in hindi) की पीड़ा कम नहीं होती है तो आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

इस ब्लॉग के विषय - 1. गर्भावस्था में बवासीर क्या है? (garbhavastha me bawasir kya hai),2. क्या प्रेगनेंसी में बवासीर या पाइल्स की समस्या सामान्य है? (kya pregnancy me bawaseer ya piles ki samasya samanya hai),3. गर्भावस्था में बवासीर होने के लक्षण क्या हैं? (garbhavastha me bawasir hone ke lakshan kya hai),4. प्रेगनेंसी में बवासीर होने के क्या कारण होते हैं? (pregnancy me bawaseer hone ke karan kya hote hai),5. गर्भावस्था में बवासीर का इलाज कैसे करें? (garbhavastha me bawasir ka ilaj kaise kare),6. प्रेगनेंसी में बवासीर पर नियंत्रण पाने के घरेलू उपाय (pregnancy me bawaseer par niyantran ke gharelu upay),7. गर्भावस्था में बवासीर होने पर क्या खाएं? (garbhavastha me bawasir hone par kya khaye),8. गर्भावस्था में बवासीर होने पर किन चीजों से परहेज करें? (garbhavastha me bawasir hone par kin cheezo se parhej kare),9. गर्भावस्था में बवासीर से बच्चे को क्या नुकसान हो सकता है? (garbhavastha me bawasir se bacche ko kya nuksan ho sakta hai),10. प्रेगनेंसी में बवासीर से कैसे बचा जा सकता है? (pregnancy me bawaseer se kaise bacha ja sakta hai)
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