प्रसव पीड़ा के लक्षण, दर्द कम करने के उपाय (prasav pida ke lakshan, dard kam karne ke upay)

प्रसव पीड़ा के लक्षण, दर्द कम करने के उपाय (prasav pida ke lakshan, dard kam karne ke upay)

लीजिए प्रेगनेंसी के नौ महीने आपने बिता लिए और अब कभी भी डिलीवरी का समय आ सकता है। आपके लिए यह ऐसा समय है जिसमें आपको अपने शिशु के आने का तो बेसब्री से इंतज़ार होगा ही, लेकिन कहीं ना कहीं डिलीवरी को लेकर मन में घबराहट भी बनी हुई होगी। यह डर होता है प्रसव पीड़ा (labour pain in hindi) सहन करने का। लेकिन आपने पूरे धैर्य के साथ अपनी प्रेगनेंसी के नौ महीने बिता लिए, बस अब कुछ समय का संयम और बनाएं रखें और अपने शिशु के स्वागत की तैयारियां करें।

आपको प्रसव पीड़ा (labour pain in hindi) को लेकर ज्यादा घबराहट ना हो इसलिए हम इस लेख में डिलीवरी से संबंधित कुछ बातें बताएंगे जो आपको जाननी ज़रूरी है। पढ़िए विस्तार से - 

  1. प्रसव पीड़ा क्या होती है? (prasav pida kya hoti hai?)
  2. प्रसव कितने प्रकार के होते हैं? (prasav kitne prakar ke hote hai?)
  3. प्रसव पीड़ा के लक्षण क्या हैं? (prasav pida ke lakshan kya hai?)
  4. डिलीवरी के दौरान कैसे पुश करें? (delivery ke dauran kaise push kare?)
  5. डिलीवरी कितनी देर तक चलती है? (delivery kitni der tak chalti hai?)
  6. डिलीवरी के दौरान होने वाली परेशानियां (delivery ke dauran hone wali pareshaniya)
  7. अगर प्रसव पीड़ा ना हो तो क्या करें? (agar prasav pida na ho to kya kare?)
  8. प्राकृतिक तरीके से प्रसव पीड़ा लाने के तरीके (prakaritik tarike se prasav pida dene ke tarike)
  9. प्रसव पीड़ा कम करने के उपाय (labour pain kam karne ke upay)
  10. डिलीवरी के लिए सही अस्पताल चुनने के तीन टिप्स (delivery ke liye sahi hospital kaisa hona chahiye?)
  11. डिलीवरी के लिए अस्पताल के बैग में क्या-क्या सामान रखें? (delivery ke liye hospital ke bag me kya kya saman rakhe?)
  12. बच्चे के लिए अस्पताल के बैग में क्या-क्या रखें? (bachche ke liye hospital ke bag me kya kya rakhe)
  13. प्रसव पीड़ा का डर और तनाव कैसे दूर करें? (prasav pida ka dar aur tanav kaise door kare?)

1. प्रसव पीड़ा क्या होती है? | (prasav pida kya hoti hai?)

प्रसव यानी डिलीवरी गर्भावस्था का अंतिम चरण होता है। गर्भ का समय पूरा होने के बाद एक विशेष हार्मोन निकलता है, जिससे गर्भाशय में लगातार संकुचन (contractions in hindi) होने लगते हैं और इसकी वजह से बच्चा नीचे की ओर आने लगता है। बच्चे के गर्भाशय से सर्विक्स (cervix) व योनि मार्ग से निकलने के दौरान होने वाली पीड़ा को प्रसव पीड़ा (labour pain in hindi) कहते हैं।  (1)

2. प्रसव कितने प्रकार के होते हैं? | (prasav kitne prakar ke hote hai)

प्रसव कितने तरह के होते हैं इस बारे में ज्यादातर लोग जानते ही हैं। लेकिन जिन्हें नहीं पता उनकी जानकारी के लिए बता दें कि डिलीवरी दो तरह की होती है।

 * नॉर्मल डिलीवरी (normal delivery in hindi) (2)

* सिज़ेरियन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) (3)

एक ओर जहां नॉर्मल डिलीवरी (normal delivery in hindi) में शिशु योनि मार्ग से बाहर आता है तो वहीं सिज़ेरियन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) में शिशु का जन्म ऑपरेशन के ज़रिये होता है। महिला की सिज़ेरियन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) होगी या नॉर्मल डिलीवरी, यह गर्भ में पल रहे शिशु और महिला के स्वास्थ्य पर निर्भर होता है। अगर आपकी प्रेगनेंसी स्वस्थ रही है तो नॉर्मल डिलीवरी (normal delivery in hindi) की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

हालांकि डॉक्टर एक स्वस्थ प्रेगनेंसी में नॉर्मल डिलीवरी कराने की ही सलाह देते हैं लेकिन कभी-कभी प्रसव के दौरान ऐसी स्थिति भी पैदा हो जाती है जिसमें डॉक्टर को तुरंत ऑपरेशन करके बच्चे को बाहर लाना पड़ता है। यह निम्न परिस्थितियों में हो सकता है - 

* अगर बच्चे की पॉज़िशन ठीक ना हो तो (बच्चे का सिर नीचे की ओर ना होने पर)।

* अगर मां ज़ोर लगाते-लगाते थक जाए या बेहोश हो जाए तो। 

* ब्लीडिंग (bleeding in hindi) ज्यादा होने पर।

* अगर बच्चा बीच में अटक जाए तो।

* प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद रुक जाए तो।

ऐसी कुछ परिस्थितियां होती हैं जिनके कारण डॉक्टर को तुरंत लेबर रूम में सिज़ेरियन डिलीवरी करने का फैसला लेना पड़ता है। 

3. प्रसव पीड़ा के लक्षण क्या हैं? | (prasav pida ke lakshan kya hai?)

गर्भावस्था के आखिरी चरण में गर्भवती के मन में प्रसव को लेकर घबराहट होना सामान्य है। यूं तो डॉक्टर डिलीवरी की अनुमानित तिथि (due date in hindi) बता देते हैं लेकिन ऐसा ज़रूरी नहीं है कि जिस दिन की तारीख तय हुई हो आपका प्रसव उसी दिन पर हो जाए। डिलीवरी का दर्द (labour pain in hindi) इस तारीख से आगे पीछे भी हो सकता है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि डिलीवरी के लिए अस्पताल जाने का सही समय क्या है? यहां कुछ लेबर पेन (labour pain in hindi) के लक्षण बता रहे हैं जिन्हें समझकर आप सही समय पर अस्पताल जाएं - 

* पानी की थैली फट जाने पर - इसमें आपको योनि से सफेद पानी (safed pani) का तेज़ रिसाव होगा। (4)

* पेट में लगातार संकुचन (sankuchan) होने पर।

* पेट और पीठ के निचले हिस्से में असहनीय दर्द होने पर।

यह कुछ ऐसे लक्षण हैं जो बताते हैं कि आपके प्रसव का समय आ गया है। ऐसा होने पर आप तुरंत अस्पताल जाएं। 

4. डिलीवरी के दौरान कैसे पुश करें? | (delivery ke dauran kaise push kare?)

आपकी डिलीवरी में कितना समय लगेगा यह आपके ज़ोर लगाने की प्रक्रिया पर भी निर्भर करता है। नॉर्मल डिलीवरी (normal delivery in hindi) के दौरान जानिए आपको कैसे ज़ोर लगाना है (पुश करना) और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए - (5)

* डिलीवरी के दौरान पुश करते समय अपनी सांस का ध्यान रखें। ज़ोर लगाते समय आप सांस रोककर ना रखें। आप धीरे-धीरे सांस लेती रहें और ज़ोर लगाती रहें।

* अगर आप पुश करते-करते थक गई हैं तो डॉक्टर से पूछकर बाईं ओर करवट ले सकती हैं।

* आप जन्म देते समय नीचे की ओर देखें। इससे आप अंदाज़ा लगा पाएंगी कि आप ठीक से ज़ोर लगा पा रही हैं या नहीं। क्योंकि जैसे-जैसे शिशु के अंग बाहर निकलने लगेंगे आपको इस बात का अंदाज़ा हो जाएगा कि कैसे और कितना पुश करना चाहिए।

* इसके अलावा आप डॉक्टर द्वारा बताए गए सभी निर्देशों का पालन करें। 

5. डिलीवरी कितनी देर तक चलती है? | (delivery kitni der tak chalti hai?)

डिलीवरी की प्रक्रिया लंबे समय तक चलती है। खासतौर पर तब जब आप पहली बार मां बन रही हों। अगर आपकी नॉर्मल डिलीवरी हो रही है तो यह प्रक्रिया सात से आठ घंटे का समय ले सकती है। वहीं अगर यह आपकी पहली डिलीवरी नहीं है तो इस प्रक्रिया में कम समय लग सकता है। यह सब आपके गर्भाशय ग्रीवा (cervix in hindi) के फैलाव पर निर्भर करता है। (6)

वहीं सिज़ेरियन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) को लेकर बहुत से लोगों का कहना है कि यह प्रक्रिया 45 मिनट से एक घंटे में पूरी हो जाती है। हालांकि डिलीवरी में कितना समय लगेगा यह मां और शिशु के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। 

6. डिलीवरी के दौरान होने वाली परेशानियां | (delivery ke dauran hone wali pareshaniya)

**गर्भनाल का आगे की ओर आना**

गर्भनाल को बच्चे की जीवन रेखा कहा जाता है क्योंकि इसी के ज़रिये शिशु को मां से ऑक्सिजन और पोषक तत्व मिलते हैं। कभी-कभी गर्भनाल आगे की ओर आ जाती है जिससे डिलीवरी के दौरान समस्या का सामना करना पड़ता है।

**पहले सिर बाहर आने की बजाय पैर बाहर आना**

सामान्य डिलीवरी में बच्चे का सिर पहले बाहर आता है और फिर बाद में पूरा शरीर। लेकिन कई बार ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है जिसमें बच्चे की स्थिति उल्टी हो जाती है और उसके पैर नीचे की ओर आ जाते हैं। ऐसे में डॉक्टर को तुरंत ऑपरेशन करने का फैसला लेना पड़ता है। इस समस्या से बचने के लिए आपको नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए और सही खानपान अपनाना चाहिए। (7)

**लंबे समय तक प्रसव चलना** 

कई बार डिलीवरी की प्रक्रिया लंबे समय तक चल जाती है। ऐसा तब होता है जब गर्भाशय ग्रीवा (cervix in hindi) ठीक से खुल नहीं पाता। इसे खुलने में समय लगता है और प्रसव की प्रक्रिया लंबे समय तक चलती है। इसके अलावा जब बच्चे का सिर बड़ा होता है तो भी डिलीवरी की प्रक्रिया लंबे समय तक चलती है। आमतौर पर लंबे समय तक चलने वाली डिलीवरी की संभावना होने पर डॉक्टर ऑपरेशन से डिलीवरी करते हैं। 

7. अगर प्रसव पीड़ा ना हो तो क्या करें? | (agar prasav pida na ho to kya kare?)

तय तारीख (due date in hindi) पर डिलीवरी होना काफी कम मामलों में देखा गया है। ज्यादातर शिशु तय तिथि से एक सप्ताह पहले या एक सप्ताह बाद गर्भावस्था के 37वें से 41वें सप्ताह के बीच जन्म ले लेते हैं। वहीं अगर गर्भ में जुड़वा शिशु हैं तो बच्चे डिलीवरी की तारीख (delivery date in hindi) से पहले जन्म ले लेते हैं। अगर गर्भावस्था की अवधि 42 सप्ताह से ज्यादा हो जाए तो इसे दीर्घकालिक गर्भावस्था (लंबे समय तक चलने वाली प्रेगनेंसी) कहते हैं।

अगर डिलीवरी की तारीख (delivery date in hindi) काफी पीछे छूट गई है और अब तक प्रसव पीड़ा (labour pain in hindi) नहीं हो रही तो बहुत से अस्पतालों में प्रसव पीड़ा (labour pain in hindi) प्रेरित करने का फैसला लिया जाता है। इसे इंड्यूस लेबर (induced labour in hindi) (8) कहते हैं। इसमें आपको दवाओं और इन्जेक्शन के ज़रिये अप्राकृतिक तरीके से लेबर पेन (labour pain in hindi) उठाया जाता है। हालांकि यह प्रक्रिया भी आपकी और गर्भ में पल रही शिशु की सेहत को ध्यान में रखकर अपनाई जाती है। 

8. प्राकृतिक तरीके से प्रसव पीड़ा लाने के तरीके | (prakaritik tarike se prasav pida laane ke tarike)

**अपने निप्पल को उत्तेजित करें**

अपने हाथ से निप्पल को सहलाने और उत्तेजित करने से प्रसव पीड़ा (labour pain in hindi) शुरू हो सकती है। ऐसा करने से ऑक्सिटॉसिन हार्मोन (oxytocin hormone in hindi) निकलता है जो गर्भाशय को संकुचित (contractions in hindi) करने में मदद करता है। 

**शारीरिक संबंध बनाएं**

हालांकि प्रेगनेंसी के अंतिम समय में सेक्स करने के लिए आपको काफी सावधानियां बरतनी पड़ेगी लेकिन इस दौरान रिलेशन बनाने से ऑक्सिटॉसिन हार्मोन (oxytocin hormone in hindi) निकलता है, जिससे गर्भाशय में संकुचन (sankuchan) पैदा हो सकता है और आपको प्रसव पीड़ा (labour pain in hindi) शुरू हो सकती है। (9)

**अरंडी के तेल के कैप्सूल का इस्तेमाल करें**

माना जाता है कि अरंडी के तेल के कैप्सूल (casor oil capsules) से गर्भाशय में संकुचन (contractions in hindi) पैदा होता है और लेबर पेन (labour pain in hindi) शुरू होता है। लेकिन कभी-कभी इसे खाने से आपका जी भी घबरा सकता है। तो बेहतर है इसे इस्तेमाल करने से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें। 

ध्यान रखें - आप लेबर पेन (labour pain in hindi) लाने के लिए जो भी तरीका आज़माए, उससे पहले अपने डॉक्टर से सलाह ले लें।

 9. प्रसव पीड़ा कम करने के उपाय | (labour pain kam karne ke upay)

प्रसव पीड़ा (labour pain in hindi) को सहन करने के लिए सबसे पहला तरीका है कि आप इसके लिए मानसिक रूप से तैयार रहें और इस प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी रखें। बिना जानकारी और हौंसले के आप इस दर्द के बारे में सोच-सोचकर डरती रहेंगी जिस कारण आपको डिलीवरी के दौरान और ज्यादा दर्द (labour pain in hindi) का अहसास होगा। इसके अलावा आप डिलीवरी के दर्द (labour pain in hindi) को कम करने के लिए नीचे दिए गए तरीके अपना सकती हैं - 

* प्रसव के दौरान आपका साथी आपके दर्द को कम करने में साथ निभा सकता है। चूंकि डिलीवरी एक दर्दनाक प्रक्रिया है इसलिए इसमें आपको भावनात्मक समर्थन की भी पूरी ज़रूरत होती है। खासतौर पर आपके पति का साथ आपके लिए बेहद मायने रखता है। कोशिश करें कि डिलीवरी के दौरान आपका साथी आपके साथ रहे। इससे आपकी हिम्मत बंधी रहेगी। इसके अलावा इस दौरान आपकी मां, सास या अन्य करीबी मित्र भी आपके पास हों तो आपकी हिम्मत बनी रहेगी और आप प्रसव पीड़ा (labour pain in hindi) को आसानी से सह पाएंगी।

* डिलीवरी का दर्द (labour pain in hindi) आपकी लेटने की अवस्था पर भी निर्भर करता है। ऐसा माना जाता है कि सीधे खड़े रहने से डिलीवरी जल्दी और आसानी से हो जाती है। लेटी हुई अवस्था में डिलीवरी के दौरान आपका रक्त संचरण (blood circulation in hindi) धीमा पड़ जाता है और डिलीवरी होने में समय लगता है। डिलीवरी के दौरान पलंग पर बैठी हुई अवस्था में आने के लिए आप अपनी कमर के पीछे तकिया लगा लें। इससे डिलीवरी होने में आसानी होगी।

* इसके अलावा डिलीवरी के दौरान मालिश भी आपके दर्द (labour pain in hindi) को कम करने में सहायक होती है। आप अपनी पीठ पर मालिश करवाएं इससे आपको अच्छा महसूस होगा। (10)

* अगर आपकी पहली बार डिलीवरी हो रही है तो हो सकता है कि आपकी डिलीवरी लंबे समय तक चले। इसलिए डिलीवरी के पहले आप ऐसा खानपान खाएं जो आपको लंबे समय तक ऊर्जा दें जैसे केले, सूखे मेवे आदि। इससे प्रसव पीड़ा (labour pain in hindi) सहन करने के लिए आप में ताकत बनी रहेगी।

10. डिलीवरी के लिए सही अस्पताल चुनने के तीन टिप्स | (delivery ke liye sahi hospital chunne ke 3 tips)

एक सही और तमाम सुविधाओं से भरपूर अस्पताल का चुनाव काफी ज़रूरी है। आपको जिस अस्पताल में डिलीवरी करानी है उसमें सुविधाओं के साथ-साथ एक सही मेडिकल स्टाफ की भी ज़रूरत होती है। आइए नज़र डालते हैं कि डिलीवरी के लिए अस्पताल का चुनाव कैसे करें - 

**घर के नज़दीक का अस्पताल**

आपका अस्पताल आपके घर के जितना नज़दीक हो उतना अच्छा है ताकि अगर अचानक से प्रसव पीड़ा (labur pain in hindi) उठे तो अस्पताल पहुंचने में ज्यादा देर ना लगे।

**आधुनिक सुविधाओं से भरपूर**

ऐसे अस्पताल का चुनाव करें जो आधुनिक सुविधाओं से भरपूर हो। अस्पताल में मातृत्व यूनिट, 24 घंटे आपातकालीन सुविधाएं, ब्लड बैंक (blood bank), आईसीयू (ICU), बच्चों के लिए अलग वॉर्ड, अच्छा नर्सिंग स्टाफ और अच्छे डॉक्टर की सुविधा होनी चाहिए।

**साफ-सफाई पर ध्यान दें**

अस्पताल का चुनाव करते समय साफ-सफाई पर भी पूरा ध्यान देना होगा। आप देखें कि वार्ड कितना बड़ा है, वहां साफ-सफाई की कैसी व्यवस्था है और जिस कमरे में आप ठहरेंगी वहां धूप और रोशनी ठीक से आती है या नहीं। 

 11. डिलीवरी के लिए अस्पताल के बैग में क्या-क्या सामान रखें? | (delivery ke liye hospital ke bag me kya kya saman rakhe)

 

चूंकि अब आपकी डिलीवरी किसी भी समय हो सकती है इसलिए आपको एक बैग तैयार रखना होगा जिसमें डिलीवरी के दौरान और उसके बाद अस्पताल में इस्तेमाल किए जाने वाला ज़रूरी सामान हो। बेहतर होगा कि डिलीवरी के 36 सप्ताह पूरे होने पर आप ये बैग पैक करके तैयार कर लें ताकि जब भी आपको प्रसव पीड़ा (labour pain in hindi) हो तो सामान इकट्ठा करने में समय बर्बाद ना हो और आप मौके पर ही अस्पताल पहुंच सकें। आप अस्पताल ले जाने वाले बैग में इन सामान को रख लें - (11)

* अपनी मेडिकल जांच की सभी रिपोर्ट।

* आरामदायक चप्पलें जिसे आप शौचालय में भी पहन सकें। 

* अगर ठंड का मौसम हो तो सूती जुराबें।

* मालिश करने वाला तेल ताकि ज़रूरत पड़ने पर आप अपनी मालिश करा सकें।

* अगर अस्पताल में ले जाने की अनुमति हो तो खाने के लिए कुछ स्नैक्स भी रख लें जैसे फल, जूस आदि।

* कुछ किताबें, मैग्ज़ीन आदि जो आपका टाइम पास करने में मदद करेंगे।

* नहाने-धोने का सामान।

* हेयर बैंड जिससे आप अपने बाल बांध सकें।

* मोबाइल फोन और उसका चार्जर। आप अपने फोन में बैलेंस रखें ताकि ज़रूरत पड़ने पर फोन कर सकें।

* आरामदायक तकिया। 

* दो तीन सैनिटरी पैड के पैकेट जो डिलीवरी के बाद आपके काम आएंगे। 

* ढीले-ढाले कपड़े। 

* वापिस घर जाने के दौरान पहने जाने वाले कपड़े।  

* आरामदायक ब्रा। इसके अलावा आप स्तनपान कराने के लिए आने वाली खास ब्रा भी अपने बैग में रख लें।

 12. बच्चे के लिए अस्पताल के बैग में क्या-क्या रखें? | (bachche ke liye hospital ke bag me kya kya rakhe)

* मौसम के अनुसार कपड़ों के चार से पांच जोड़े।

* दो तीन जोड़ी जुराबें और दो टोपी। 

* बिस्तर पर बिछाने के लिए दो चादर।

* शिशु को ओढ़ाने के लिए कंबल। अगर सर्दी का मौसम है तो गर्म कंबल वर्ना सूती चादर रखें।

* हाथ और मुंह पोछने के लिए छोटे तौलिये ताकि दूध निकालने पर उसका मुंह साफ कर सकें। 

* रोज़ाना के हिसाब से 12 से 15 नैपी पैड।

* चादर के नीचे बिछाने के लिए प्लास्टिक की शीट ताकि शिशु के पेशाब करने से गद्दा गीला ना हो।

13. प्रसव पीड़ा का डर और तनाव कैसे दूर करें? | prasav pida ka dar aur tanav kaise door kare?

बहुत सी महिलाओं में प्रसव पीड़ा (labour pain in hindi) को लेकर मन में काफी डर बना रहता है। खासतौर पर उन महिलाओं को जो पहली बार मां बनने वाली हैं। यह डर कभी-कभी इतना बढ़ जाता है कि डिलीवरी के दौरान तनाव (tanav) की वजह से कई सारी परेशानियां होती हैं। ऐसे में एक महिला को धैर्य रखने के साथ-साथ भावनात्मक समर्थन की ज़रूरत होती है। अगर आप गर्भवती हैं या आपके घर में किसी की डिलीवरी होने वाली है तो गर्भवती को भावनात्मक रूप से अपना सहारा ज़रूर दें। ऐसा करने से उसका हौंसला बढ़ेगा और डिलीवरी अच्छे से हो पाएगी। 

हम समझते हैं कि गर्भावस्था में प्रसव पीड़ा (labour pain in hindi) को लेकर आपके मन में काफी सवाल और डर बने रहते होंगे। लेकिन ऐसे में आपको सबसे ज्यादा ज़रूरत है बस संयम की, हौंसले की। आप ज्यादा तनाव ना लें और ऊपर बताई गई बातों का ध्यान रखें और अपने नन्हें मेहमान के स्वागत की तैयारियां करें। 

References

  1.  Labour pain by ncbi.nlm.nih
  2.  Normal delivery by healthengine.com.au
  3.  Cesarean delivery by nichd.nih.gov
  4.  Signs that labour has begun by nhs.uk
  5.  Pushing tips during delivery by whattoexpect
  6.  Average length of labor and delivery by verywellfamily
  7.  Delivery complications by webmd
  8.  Inducing Labor by kidshealth
  9.  Natural ways to bring labour pain by kidspot
  10.  How to reduce labour pain by motherandbaby.co.uk
  11.  What to pack in your hospital bag by babycentre.co.uk

 

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