प्रसव के समय शिशु का वजन कम होने के कारण और वजन बढ़ाने के उपाय (Janm ke samay baby ka vajan kam hone ke karan aur vajan badhane ke upay)

प्रसव के समय शिशु का वजन कम होने के कारण और वजन बढ़ाने के उपाय (Janm ke samay baby ka vajan kam hone ke karan aur vajan badhane ke upay)

प्रसव के समय नवजात शिशु का वजन कम होने के कारण और उसे बढ़ाने के उपाय (Janm ke samay baby ka vajan kam hone ke karan aur baby ka vajan badhane ke upay)

परिवार में नए बच्चे का जन्म होने पर हर तरफ ख़ुशियाँ छा जाती हैं। लेकिन जन्म के समय नवजात शिशु का वजन (baby weight in hindi) कम होने से भविष्य में शिशु को कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए जन्म के तुरंत बाद शिशु का वजन कराना चाहिए। डॉक्टर्स के मुताबिक जन्म के समय बच्चे का सामान्य वजन करीब 2.5 किलो से लेकर 4 किलो के बीच होता है, जब नवजात शिशु का वजन सामान्य से कम हो तो डॉक्टर से सलाह लेकर उसका उचित उपचार कराना चाहिए। इस ब्लॉग में हम आपको नवजात शिशु का वजन कम होने के कारण और उसका वजन बढ़ाने के उपायों के बारे में बता रहे हैं।

प्रसव के समय बच्चे का वजन कम क्यों होता है?

(prasav ke samay bachche ka vajan kam kyun hota hai)

prasaw ke samay bache ka wajan

जन्म के समय नवजात शिशु का वजन कम होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। यहाँ हम आपको नवजात शिशु का वजन (newborn baby weight in hindi) कम होने के कुछ विशेष कारणों के बारे में बता रहे हैं।

  • गर्भ में जुड़वां बच्चे होना- जब किसी महिला के गर्भ में जुड़वां बच्चे होते है, तब उन्हें गर्भ में विकसित होने के लिए पर्याप्त जगह और पोषण नहीं मिल पाता है, इसलिए जन्म के समय किसी एक शिशु का या फिर दोनों नवजात शिशुओं का वज़न कम हो सकता है।

  • प्री एक्लेम्पसिया- गर्भावस्था के दौरान अगर किसी महिला को प्री एक्लेम्पसिया (preeclampsia in hindi) की समस्या है, तब उस महिला से पैदा होने वाले नवजात शिशु का वजन कम हो सकता है। प्री एक्लेम्पसिया की समस्या अक्सर गर्भावस्था के दौरान हाई बीपी (high bp in hindi) से पीड़ित महिलाओं में देखने को मिलती है।

  • आनुवंशिक कारण- कभी-कभी जन्म के समय नवजात शिशु का वजन कम होने के पीछे कुछ पारिवारिक (आनुवंशिक) कारण भी हो सकते हैं। अगर गर्भवती महिला या उसके पति के परिवार में कम वजन के बच्चे पैदा होने की समस्या रही है, तो महिला से जन्म लेने वाले नवजात शिशु का वजन कम हो सकता है।

  • गर्भावस्था के समय महिला का तनाव में होना- अगर कोई महिला गर्भावस्था के दौरान तनाव (pregnancy me tanav) में रही है, तो उसके होने वाले नवजात शिशु का वजन कम हो सकता है।

  • खून की कमी- अगर गर्भावस्था के दौरान महिला में खून की कमी (anemia in hindi) रही है, तो उसके होने वाले नवजात शिशु का वजन कम हो सकता है।

  • पूर्व में गर्भपात होना- जिन महिलाओं को पहले गर्भपात (miscarriage in hindi) हो चुका हैं, उनके होने वाले नवजात शिशु का वजन कम हो सकता है।

  • महिला को कोई बिमारी होना- अगर गर्भवती महिला दमा (asthma in hindi), शुगर (diabetes in hindi) या किडनी की किसी समस्या से पीड़ित है, तो उसके होने वाले शिशु का वजन कम हो सकता है।

  • नशे की लत होना- जिन महिलाओं में शराब, सिगरेट या किसी अन्य नशे की लत होती है, उनके होने वाले शिशु का वजन कम हो सकता है।

  • एचआईवी-एड्स से पीड़ित होना- जो महिलाएं एचआईवी-एड्स (HIV AIDS in hindi) जैसी बीमारियों से पीड़ित होती है, उनके होने वाले नवजात शिशु का वजन अक्सर कम होता है।

  • गर्भावस्था में उचित देखभाल नहीं करना- गर्भावस्था के दौरान जिन महिलाओं के खान पान और अन्य चीजों की उचित देखभाल नहीं की जाती हैं, उनके होने वाले शिशु का वजन भी कम हो सकता है।

गर्भावस्था में बच्चे का वजन कैसे मापा जाता है?

(garbhavastha me bache ka vajan kaise mapa jaata hai)

गर्भावस्था के दौरान महिला के पेट में पल रहे नवजात शिशु का वजन मापने के लिए डॉक्टर अक्सर महिलाओं को गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में अल्ट्रासाउंड (ultrasound in hindi) कराने की सलाह देते हैं। इसके लिए डॉक्टर एक विशेष तरह के कैलकुलेटर का इस्तेमाल करते हैं। इस कैलकुलेटर को एस्टिमेटेड फीटल वेट कैलकुलेटर (EFW calculator) कहा जाता है। हालांकि डॉक्टर द्वारा बताया गया वजन हमेशा सही नहीं होता है।

गर्भ में शिशु का वजन बढ़ाने के लिए प्रेगनेंसी में क्या खाना चाहिए?

(garbh me shishu ka vajan badhane ke liye pregnancy me kya khana chahiye)

baby ka weight badhana

प्रेगनेंसी के दौरान मां और बच्चे के सामान्य विकास के लिए महिलाओं को दिन भर में 3000 अतिरिक्त कैलोरी की आवश्यकता होती हैं। इसलिए महिलाओं को प्रेगनेंसी में खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। नीचे हम महिलाओं को प्रेगनेंसी में क्या खाना चाहिए (pregnancy me kya khana chahiye) इसकी पूरी जानकारी दे रहे हैं।

  • प्रेगनेंसी में कैल्शियम, आयरन और प्रोटीन- गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अतिरिक्त कैल्शियम, आयरन और प्रोटीन की आवश्यकता होती है। इसलिए महिलाओं को प्रेगनेंसी में अपने भोजन में आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन की अधिक मात्रा लेनी चाहिए। इससे गर्भावस्था में गर्भ में शिशु का वजन बढ़ाने में मदद मिलेगी।

  • प्रेगनेंसी में विटामिन- महिलाओं को प्रेगनेंसी में लगभग सभी प्रकार के विटामिन की आवश्यकता होती है। गर्भावस्था में विटामिन से भरपूर भोजन लेने से आपको गर्भ में शिशु का वजन बढ़ाने में आसानी होगी।

  • प्रेगनेंसी में दूध- गर्भावस्था के दौरान दूध और इससे बने उत्पाद महिलाओं और उनके पेट में पल रहे बच्चे के लिए बेहद लाभकारी होते है। इसलिए प्रेगनेंसी में महिलाओं को दूध का रोज़ाना सेवन करना चाहिए।

  • प्रेगनेंसी में ताज़ा फल और सब्ज़ियाँ- गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को ताजे फल और सब्जियों का अधिक सेवन करना चाहिए।

गर्भ में शिशु का वज़न बढ़ाने के लिए खानपान संबंधी सावधानियां

(Pet me baby ka weight badhane ke liye khanpan sambandhi savdhaniya)

garbh me shishu ka wajan

  • गर्भावस्था में नमक कम खाएं- खाने में नमक का ज्यादा उपयोग करने से वजन कम होता है। इसलिए जो महिलाये अपना और अपने शिशु का वजन बढ़ाना चाहती है, उन्हें नमक का कम सेवन करना चाहिए।

  • प्रेगनेंसी में थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ खाते रहना चाहिए- गर्भवती महिलाओं को अतिरिक्त कैलोरी की आवश्यकता होती है, इसलिए उन्हें थोड़ी थोड़ी देर में कुछ खाते रहना चाहिए।

  • बाहर जाते वक़्त खाना साथ ले जाएं- अगर महिलाएं कहीं नौकरी करती हैं, या कहीं सफर पर जा रही हैं, तो उन्हें अपने साथ खाने-पीने की कुछ चीजें जैसे सूखे मेवे या फल आदि साथ ले जाना चाहिए।

  • कोल्डड्रिंक्स का सेवन बिलकुल ना करें- प्रेगनेंसी में महिलाओं को कोल्डड्रिंक्स का सेवन करने से बचना चाहिए। गर्भावस्था में महिलाओं को जूस और पानी पीते रहना चाहिए।

जन्म के समय वजन कम होने से बच्चे को क्या खतरा हो सकता है?

(janm ke samay vajan kam hone se baby ko kya khatra ho sakta hai)

janm ke samay baby ka wajan

प्रसव के समय अगर नवजात शिशु का वजन सामान्य वजन (2.5 किलो से लेकर 4 किलो तक) से कम है, तो ये बच्चे के लिए कई समस्याएं पैदा कर सकता है। नीचे हम आपको नवजात शिशु का वजन कम होने से उसे होने वाले ख़तरों के बारे में बता रहे हैं।

  • संक्रमण का खतरा- जन्म के समय कम वजन वाले शिशुओं में अक्सर संक्रमण का खतरा बना रहता हैं, उन्हें कई बीमारियाँ अपनी चपेट में ले लेती है।

  • शरीर का तापमान सामान्य रखने में परेशानी- जन्म के समय जिस नवजात शिशु का वजन 2.5 किलो से कम होता है, उसमें वसा की मात्रा कम होती है। वसा की कमी के कारण बच्चे को अपने शरीर का तापमान नियंत्रित रखने में परेशानी होती है।

  • अचानक मृत्य का खतरा- अगर प्रसव के एक साल बाद तक किसी नवजात शिशु का वजन कम होता है, तो उसमे सोते समय अचानक मृत्यु का खतरा (SIDS in hindi) बढ़ जाता है। इसलिए अगर जन्म के समय आपके बच्चे का वजन कम है तो आपको तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

  • शुगर का खतरा- जन्म के समय अगर किसी नवजात शिशु का वजन कम होता है, तो उसमे आगे जाकर डायबिटीज़ या मधुमेह जैसी बीमारियों के होने का खतरा हो सकता हैं।

  • दिल की बीमारी का खतरा- जन्म के समय शिशु के कम वजन के कारण भविष्य में उसे दिल से संबंधित बीमारियाँ हो सकती है।

  • दिमाग में खून आना- कम वजन के साथ पैदा हुए नवजात शिशु में जन्म के शुरुआती दो तीन दिनों तक दिमाग में खून (bleeding in brain in hindi) आने जैसी समस्या भी हो सकती है।

  • हाई ब्लड प्रेशर- जिस नवजात शिशु का वजन जन्म के समय कम होता है, उसमे आगे जा कर हाई ब्लड प्रेशर (high blood pressure in hindi) जैसी बीमारी हो सकती है।

जन्म से 12 महीने की उम्र तक नवजात शिशु का वजन कितना होना चाहिए?

(janm se 12 mahine ki age tak navjat shishu ka vajan kitna hona chahiye)

डॉक्टर्स के मुताबिक जन्म के समय नवजात शिशु का वजन 2.5 किलो से लेकर 4 किलो के बीच होना चाहिए। अगर जन्म के समय किसी शिशु का वजन 2.5 किलो से कम है तो उसे कम वजन वाला शिशु माना जाता है। जन्म के बाद से लड़के और लड़की के बढ़ने वाले वजन की मात्रा में अंतर होता है। नीचे हम आपको एक चार्ट की सहायता से लड़के और लड़की के वजन के बारे में समझा रहे हैं।

उम्र (महीनों में) लड़के का वजन (KG में) लड़की का वजन (KG में)
नवजात 3.3 3.2
1 महीना 3.5-4.4 3.32-4.1
2 महीना 4.7-5.4 4.35-5
3 महीना 5.6-6.2 5.2-5.7
4 महीना 7 6.4
5 महीना 7.5 6.9
6 महीना 7.9 7.3
7 महीना 8.3 7.7
8 महीना 8.6 7.95
9 महीना 8.9 8.2
10 महीना 9.2 8.5
11 महीना 9.4 8.7
12 महीना 9.7 8.95

कम वज़न वाले नवजात शिशु की देखभाल कैसे करें?

(Kam vajan vale newborn baby ki dekhbhal kaise kare)

kam wajan wale shishu ki dekhbhal

जन्म के समय नवजात शिशु का वजन कम होना माता पिता के लिए चिंता का विषय हो सकता है। इसलिए हम आपको नवजात शिशु का वजन बढ़ाने के कुछ तरीके बता रहे हैं।

  • शिशु को स्तनपान करवाएं- बच्चे के लिए मां का दूध अमृत के सामान होता है, इसलिए जहाँ तक संभव हो बच्चे को मां का दूध ही पिलाना चाहिए। कम वजन वाले नवजात शिशु को मां का दूध पीने में परेशानी हो सकती है। अगर जन्म के समय नवजात शिशु का वजन कम है और वह दूध नहीं पी पा रहा है, तो महिलाओं को बार-बार बच्चे को दूध पिलाने की कोशिश करनी चाहिए। एकबार आपका बच्चा दूध पीना सीख गया तो बाद में आपको ज्यादा परेशानी नहीं आएगी।

  • बच्चे का तापमान नियंत्रित रखें- जन्म के समय कम वजन वाले बच्चे में वसा कम होती है, इसलिए नवजात शिशु का शरीर अपना तापमान नियंत्रित नहीं रख सकता है। अगर जन्म के समय आपके नवजात शिशु का वजन कम है, तो आपको उसके तापमान को नियंत्रित रखने पर ध्यान देना चाहिए, इसके लिए कंगारू केयर तकनीक भी अपना सकती हैं। इसमें नवजात शिशु को हर समय मां के शरीर से चिपकाकर रखा जाता है।

  • पेट के कीड़े (Baby ke pet ke kide)- कई बार शिशु के पेट में कीड़े होने की वजह से उसका वजन सामान्य तरीके से नहीं बढ़ता है। पेट के कीड़े की वजह से बच्चों के पेट में दर्द हो सकता है। कभी-कभी कीड़ों की समस्या से शिशु के मल में खून भी आने लगता है।

नवजात शिशु का वजन बढ़ाने के लिए उसे क्या खिलाना चाहिए?

(navjat shishu ka vajan badhane ke liye use kya khilaye)

6 महीने तक केवल मां का दूध पिलाना चाहिए- जन्म के बाद शुरूआती 6 महीने बच्चों के लिए बेहद विशेष होते हैं। शुरू के 6 महीनों तक बच्चों को केवल मां का दूध ही पिलाना चाहिए। कुछ लोग 3 से 4 महीने में ही बच्चों को ठोस आहार देने की सलाह देते हैं, लेकिन माताओं को ऐसा करने से बचना चाहिए। डॉक्टर्स के मुताबिक बच्चों में खाना पचाने के लिए जरुरी एंजाइम 6 महीने की उम्र के बाद ही बनना शुरू होते हैं, इसलिए 6 महीने से पहले बच्चों को ठोस आहार देने से उनमें फूड एलर्जी हो सकती है।

6 महीने की उम्र तक पानी ना पिलाएं- डॉक्टर्स के मुताबिक 6 महीने से कम उम्र के बच्चों को पानी भी नहीं पिलाना चाहिए,क्योंकि इससे उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है।

6 से 12 महीने तक के बच्चों को वज़न बढ़ाने के लिए क्या खिलाएं?

(6 se 12 mahine tak ke bachon ko vajan badhane ke liye kya khilaye)

baby foods to increase weight

महिलाएं अपने शिशु के 6 महीने का होने के बाद उसे ठोस आहार देना शुरू कर सकती हैं। नीचे हम आपको 6 से 12 महीने के शिशु को दिए जाने वाले आहार के बारे में बता रहे हैं।

  • चावल से बने आहार खिलाएं- चावल से नवजात शिशु को संक्रमण होने की संभावना कम होती है, इसलिए महिलाएं अपने 6 से 12 महीने के बच्चों को चावल से बने आहार जैसे खीर, खिचड़ी आदि खिला सकती हैं।

  • गाजर और अंगूर खिलाएं- 6 से 12 महीने के बच्चों के लिए गाजर और अंगूर लाभदायक होते हैं, इसलिए उन्हें रोज़ाना थोड़ी मात्रा में गाजर और अंगूर खिलाए जा सकते हैं।

  • मूंग दाल का पानी पिलाएं- दाल का पानी बच्चों के लिए बेहद लाभदायक होता है, इसलिए महिलाएं अपने 6 से 12 महीने के शिशु को रोज मूंग दाल का पानी पिला सकती हैं।

  • बिना छिलके के फल खिलाएं- बच्चों को फलों के छिलके पचाने में परेशानी होती है, इसलिए उन्हें सेब जैसे फलों को छीलकर खिलाया जा सकता है।

एक साल से अधिक उम्र के बच्चे को मोटा कैसे करें?

(ek saal se bade baby ko mota karne ka tarika kya hai)

bache ko mota karna

नीचे हम आपको एक साल से बड़े बच्चों को मोटा करने के तरीके बता रहे हैं।

  • बेबी को मोटा करने के लिए मलाई वाला दूध पिलाएं (baby ko mota karne ka tarika)- कम वजन वाले बच्चो के लिए मलाई वाला दूध पिलाना बेहद फायदेमंद माना जाता है। मलाई वाले दूध से बच्चे का वजन जल्दी बढ़ता है।

  • बेबी को मोटा करने के लिए अंडे की जर्दी खिलाएं (baby ko mota karne ka tarika)- अंडा प्रोटीन से भरपूर होता है, इसलिए कम वजन वाले शिशु को 8 महीने की उम्र में अंडे की जर्दी (अंडे का पीला भाग) खिलाई जा सकती है।

  • बेबी को मोटा करने के लिए आलू खिलाएं (baby ko mota karne ka tarika)- आलू में कार्बोहाइड्रेट बड़ी मात्रा में पाया जाता है, इसलिए बच्चों को आलू खिलाना चाहिए। आलू बच्चों के लिए फ़ायदेमंद होता है।

  • बेबी को मोटा करने के लिए शकरकंद खिलाएं (baby ko mota karne ka tarika)- शकरकंद में फाइबर के साथ साथ कई अन्य पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। ये बच्चों के लिए बेहद लाभकारी होता है।

  • बेबी को मोटा करने के लिए ड्राई फ्रूट्स खिलाएं (baby ko mota karne ka tarika)- ड्राई फ्रूट्स में विटामिन भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, इसलिए बच्चों को काजू- बादाम जैसे सूखे मेवों का पाउडर बनाकर दूध में मिलाकर पिलाया जा सकता है।

  • बेबी को मोटा करने के लिए केला खिलाएं (baby ko mota karne ka tarika)- केला ऊर्जा का बड़ा स्रोत है, ये बच्चों का वजन बढ़ाने और ताकत के लिए बेहद लाभकारी होता है।

  • बेबी को मोटा करने के लिए दाल पिलाएं (baby ko mota karne ka tarika)- दाल में बड़ी मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है, इसलिए छोटे बच्चों को रोज थोड़ी मात्रा में दाल पिलानी चाहिए। दाल बच्चों के विकास में लाभकारी होती है।

  • बेबी को मोटा करने के लिए दही खिलाएं (baby ko mota karne ka tarika)- दही बच्चों के लिए लाभकारी होता है, इसलिए दही में कुछ फल मिलाकर भी बच्चों को खिलाए जा सकते हैं।

  • बेबी को मोटा करने के लिए पनीर खिलाएं (baby ko mota karne ka tarika)- महिलाएं अपने बच्चों को रोज पनीर का एक छोटा सा टुकड़ा खिला सकती है। इससे बच्चे का वजन बढ़ता है।

  • बेबी को मोटा करने के लिए हरी सब्जियां खिलाएं (baby ko mota karne ka tarika)- महिलाओ को अपने बच्चों का वजन बढ़ाने के लिए हरी और पत्तेदार सब्ज़ियाँ खिलाने की आदत डालनी चाहिए। हरी सब्जियों में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व होते है।

  • बेबी को मोटा करने के लिए जिंक युक्त खाना खिलाएं (baby ko mota karne ka tarika)- नवजात शिशुओं में जिंक की कमी से भूख नहीं लगती है, इसलिए उन्हें जिंक से भरपूर भोजन देना चाहिए। इसके लिए पालक, तरबूज के बीज, बींस, मशरूम आदि खिलाए जा सकते हैं।

  • बेबी को मोटा करने के लिए घी खिलाएं (baby ko mota karne ka tarika)- बच्चों का वजन बढ़ाने के लिए घी बेहद उपयोगी है। इसलिए महिलाएं बच्चों का खाना घी में पका सकती हैं, या रोटी में घी लगाकर दे सकती हैं।

  • बेबी को मोटा करने के लिए जैतून का तेल खिलाएं (baby ko mota karne ka tarika)- नवजात शिशु का वजन बढ़ाने के लिए उनके भोजन को जैतून के तेल में पकाया जा सकता है। जैतून का तेल बच्चों के लिए बेहद लाभदायक होता है।

जन्म के समय नवजात शिशु का वजन कम होना एक बड़ी समस्या है, लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान कुछ ज़रूरी सलाह और उपचार लेकर महिलाएं एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती है। प्रसव के समय स्वस्थ बच्चे को जन्म देने के लिए महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान अपने खान पान और अन्य चीजों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। अगर प्रसव के समय महिलाएं कम वजन वाले शिशु को जन्म देती है, तो डॉक्टर की सलाह और बच्चे के खान पान का उचित ध्यान रखकर उसे मोटा और तंदुरुस्त बनाया जा सकता है।

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