0 से 1 वर्ष के नवजात शिशु की लंबाई : कुछ ज़रूरी बातें (0-1 sal ke baby ki height)

0 से 1 वर्ष के नवजात शिशु की लंबाई : कुछ ज़रूरी बातें (0-1 sal ke baby ki height)

नवजात शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के बारे में जानना उसके माता पिता की पहली प्राथमिकता होती है। बच्चे की लम्बाई और वजन से हम उसके विकास का अंदाज़ा लगा सकते हैं। कई बार बच्चे अचानक तेजी से बढ़कर माता पिता को चौंका देते हैं, वहीं कुछ बच्चों के बढ़ने की रफ़्तार धीमी होने की वजह से उनके माता पिता चिंतित हो जाते हैं।

इस ब्लॉग में हम आपको नवजात शिशु की लम्बाई (baccho ki lambai) से संबंधित कुछ बेहद महत्वपूर्ण बातें बता रहे हैं, जिनसे आपको अपने शिशु के विकास (baby growth in hindi) की प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी।

जन्म के समय नवजात शिशु की लंबाई कितनी होती है?

(Janm ke samay baccho ki lambai kitni hoti hai)

Newborn baby height

औसत रूप से जन्म के समय सामान्य नवजात शिशु की लम्बाई (baccho ki lambai) 19.5 इंच होती है। जन्म के समय लड़के के सिर का आकार (सिर की गोलाई या व्यास) लगभग 13.5 इंच होता है, वहीं इस समय लड़कियों के सिर का आकार करीब 13.3 इंच होता है।

एक वर्ष की उम्र तक हर महीने शिशु कितना लम्बा होता है?

(Ek sal ka hone tak har mahine baccho ki lambai kitni badhti hai)

Newborn baby height

जन्म के बाद एक वर्ष की आयु तक नवजात शिशु की लंबाई इस प्रकार बढ़ती है -

  • जन्म से लेकर छह माह की उम्र तक शिशु की लम्बाई : जन्म के बाद छह माह की आयु तक हर महीने नवजात शिशु की लम्बाई (baccho ki lambai) लगभग आधा से एक इंच (1.5 से 2.5 सेंटीमीटर) तक बढ़ती है।
  • छह माह से एक वर्ष की उम्र तक शिशु की लम्बाई : छह महीने का होने के बाद शिशु के बढ़ने की रफ़्तार धीमी हो जाती है। इसके बाद एक वर्ष का होने तक हर महीने शिशु की लंबाई (baccho ki lambai) करीब 0.375 इंच (एक सेंटीमीटर) बढ़ती है।

एक वर्ष का होने तक तीव्र वृद्धि (baby growth in hindi) के दिनों (ग्रोथ स्पर्ट) में आपके शिशु की लम्बाई तेजी से बढ़ सकती है। उदाहरण के तौर पर, निम्न दिनों के दौरान नवजात शिशुओं की लम्बाई (baccho ki lambai) तेजी से बढ़ सकती है -

  • जन्म के बाद 10 से 14 दिन की उम्र में।
  • पांच से छह हफ़्ते की उम्र में।
  • तीन महीने की उम्र में।
  • चार महीने की उम्र में।

शिशु का लेंथ पर्सेंटाइल क्या होता है?

(Baby ka length percentile kya hota hai)

Newborn baby height

कई तरह के बेबी ग्रोथ चार्ट, लेंथ (लम्बाई) पर्सेंटाइल शब्द का उपयोग करते हैं, जिसे ज्यादातर माता पिता समझ नहीं पाते हैं। असल में लेंथ पर्सेंटाइल का मतलब यह होता है कि 100 बच्चों में से आपका बच्चा विकास (baby growth in hindi) के मामले में कौनसे स्थान पर है। उदाहरण के तौर पर, अगर आपके बच्चे का लेंथ पर्सेंटाइल 50 है, तो इसका मतलब है कि 50 बच्चों की लम्बाई (baccho ki lambai) उससे कम है और 50 बच्चों की लम्बाई उसकी लम्बाई से ज्यादा है, इसलिए 50 पर्सेंटाइल को शिशुओं की औसत लम्बाई भी माना जा सकता है। कम लेंथ पर्सेंटाइल से यह तय नहीं होता है कि शिशु का विकास (baby growth in hindi) सही तरह से हो रहा है या नहीं, क्योंकि बच्चे का विकास कई बातों (जैसे जन्म के समय उसके वजन व लम्बाई आदि) पर निर्भर करता है।

लड़के शिशु का औसत लम्बाई चार्ट

(Baby boy ka age ke hisab se height chart)

नीचे दिए गए बेबी ग्रोथ चार्ट में जन्म से लेकर एक साल की उम्र तक हर महीने लड़के शिशु की लम्बाई में वृद्धि को 50 पर्सेंटाइल के साथ ही तीसरे से 97वें पर्सेंटाइल (जिसे सामान्य सीमा या रेंज भी कहते हैं) के साथ दर्शाया गया है। ये बेबी ग्रोथ चार्ट सही समय पर जन्मे, स्वस्थ शिशुओं के लिए है और इसे सिर्फ एक नमूने (रेफरेंस) की तरह देखें। अगर आपको शिशु के विकास (baby growth in hindi) सम्बंधी कोई भी जानकारी चाहिए, तो इस बारे में अपने बच्चे के डॉक्टर से सलाह लें।

लड़के शिशु की उम्र 50 पर्सेंटाइल लम्बाई की सामान्य सीमा या रेंज (तीसरे से 97वां पर्सेंटाइल)
एक महीना 21.5 इंच (54.7 सेंटीमीटर) 20 - 23 इंच (51.1 - 58.4 सेंटीमीटर)
दो महीने 23 इंच (58.4 सेंटीमीटर) 21.5 - 24.5 इंच (54.7 - 62.2 सेंटीमीटर)
तीन महीने 24.25 इंच (61.1 सेंटीमीटर) 22.5 - 25.75 इंच (57.6 - 65.3 सेंटीमीटर)
चार महीने 25 इंच (63.9 सेंटीमीटर) 23.5 - 26.75 इंच (60 - 67.8 सेंटीमीटर)
पांच महीने 26 इंच (65.9 सेंटीमीटर) 24.5 - 27.5 इंच (61.9 - 69.9 सेंटीमीटर)
छह महीने 26.5 इंच (67.6 सेंटीमीटर) 25 - 28.25 इंच (63.6 - 71.6 सेंटीमीटर)
सात महीने 27.25 इंच (69.2 सेंटीमीटर) 25.5 - 28.75 इंच (65.1 - 73.2 सेंटीमीटर)
आठ महीने 27.75 इंच (70.6 सेंटीमीटर) 26.25 - 29.5 इंच (66.5 - 74.7 सेंटीमीटर)
नौ महीने 28.25 इंच (72 सेंटीमीटर) 26.75 - 30 इंच (67.7 - 76.2 सेंटीमीटर)
दस महीने 28.75 इंच (73.3 सेंटीमीटर) 27.25 - 30.5 इंच (69 - 77.6 सेंटीमीटर)
ग्यारह महीने 29.25 इंच (74.5 सेंटीमीटर) 27.5 - 31 इंच (70.2 - 78.9 सेंटीमीटर)
बारह महीने/एक वर्ष 29.75 इंच (75.7 सेंटीमीटर) 28 - 31.5 इंच (71.3 - 80.2 सेंटीमीटर)

लड़की शिशु का औसत लम्बाई चार्ट

(Baby girl ka age ke hisab se height chart)

नीचे दिए गए बेबी ग्रोथ चार्ट में जन्म से लेकर एक साल की उम्र तक हर महीने लड़की शिशु की लम्बाई में वृद्धि को 50 पर्सेंटाइल के साथ ही तीसरे से 97वें पर्सेंटाइल (जिसे सामान्य सीमा या रेंज भी कहते हैं) के साथ दर्शाया गया है। ये बेबी ग्रोथ चार्ट सही समय पर जन्मे, स्वस्थ शिशुओं के लिए है और इसे सिर्फ एक नमूने (रेफरेंस) की तरह देखें। अगर आपको शिशु के विकास (baby growth in hindi) सम्बंधी कोई भी जानकारी चाहिए, तो इस बारे में अपने बच्चे के डॉक्टर से सलाह लें।

लड़की शिशु की उम्र 50 पर्सेंटाइल लम्बाई की सामान्य सीमा या रेंज (तीसरे से 97वां पर्सेंटाइल)
एक महीना 21.25 इंच (53.7 सेंटीमीटर) 19.75 - 22.75 इंच (50 - 57.4 सेंटीमीटर)
दो महीने 22.5 इंच (57.1 सेंटीमीटर) 20.75 - 24 इंच (53.2 - 60.9 सेंटीमीटर)
तीन महीने 23.25 इंच (59.8 सेंटीमीटर) 22 - 25 इंच (55.8 - 63.8 सेंटीमीटर)
चार महीने 24.25 इंच (62.1 सेंटीमीटर) 22.75 - 26 इंच (58 - 66.2 सेंटीमीटर)
पांच महीने 25.25 इंच (64 सेंटीमीटर) 23.5 - 27 इंच (59.9 - 68.2 सेंटीमीटर)
छह महीने 25.75 इंच (65.7 सेंटीमीटर) 24.25 - 27.5 इंच (61.5 - 70 सेंटीमीटर)
सात महीने 26.5 इंच (67.3 सेंटीमीटर) 24.75 - 28.25 इंच (62.9 - 71.6 सेंटीमीटर)
आठ महीने 27 इंच (68.7 सेंटीमीटर) 25.25 - 28.75 इंच (64.3 - 73.2 सेंटीमीटर)
नौ महीने 27.5 इंच (70.1 सेंटीमीटर) 25.75 - 29.5 इंच (65.6 - 74.7 सेंटीमीटर)
दस महीने 28.25 इंच (71 सेंटीमीटर) 26.25 - 30 इंच (66.8 - 76.1 सेंटीमीटर)
ग्यारह महीने 28.75 इंच (72.8 सेंटीमीटर) 26.75 - 30.5 इंच (68 - 77.5 सेंटीमीटर)
बारह महीने/एक वर्ष 29.75 इंच (75.7 सेंटीमीटर) 27.25 - 31 इंच (69.2 - 78.9 सेंटीमीटर)

एक वर्ष की आयु तक प्रीमैच्योर शिशु की लम्बाई कैसे बढ़ती है?

(Ek sal ka hone tak premature baccho ki lambai kaise badhti hai)

Newborn baby height

सामान्य बच्चों की तरह ही समयपूर्व प्रसव से जन्मे बच्चों के वजन और विकास (baby growth in hindi) की नियमित रूप से निगरानी की जाती है। डॉक्टर प्रीमैच्योर शिशुओं की लंबाई (baccho ki lambai) उस समय के अनुसार नापते हैं, जब उन्हें वास्तव में पैदा होना चाहिए। उदाहरण के तौर पर, अगर आपका बच्चा 35वें सप्ताह में पैदा हुआ है, तो उसके 12 सप्ताह का होने पर डॉक्टर उसकी उम्र में से पांच सप्ताह घटा देंगे, क्योंकि वह प्रसव की अनुमानित तिथि से पांच सप्ताह पहले पैदा हुआ है। इसे एडजस्टेड एज (व्यवस्थित की गई उम्र) कहा जाता है। अतः 12 सप्ताह का होने पर आपके शिशु की लम्बाई 7 सप्ताह के सामान्य शिशु की लम्बाई (baccho ki lambai) के बराबर होनी चाहिए।

अगर शिशु को कोई शारीरिक समस्या नहीं है, तो आमतौर पर उसकी लम्बाई सामान्य शिशु की तरह ही बढ़ने लगती है। दो साल का होने तक अधिकांश प्रीमैच्योर शिशु लम्बाई के मामले में सामान्य शिशुओं की बराबरी कर लेते हैं।

नवजात शिशु की लम्बाई किन चीजों से प्रभावित होती है?

(Baccho ki lambai par kin cheejo ka asar hota hai)

Newborn baby height

नवजात शिशु की लम्बाई (baccho ki lambai) निम्न चीजों से प्रभावित होती है -

  • आनुवांशिक कारण - माता-पिता व परिवार के करीबी सम्बन्धियों की लम्बाई का शिशु की लम्बाई पर विशेष प्रभाव पड़ता है। अगर माता पिता ज्यादा लम्बे हैं, तो शिशु के ज्यादा लम्बे होने की संभावना बढ़ जाती है। मगर इसका मतलब यह नहीं है, कि अगर माता पिता की लम्बाई कम है तो शिशु की लम्बाई (baccho ki lambai) भी कम ही होगी। बच्चे का विकास (baby growth in hindi) कई और चीजों पर भी निर्भर करता है।

  • गर्भावस्था में माँ का स्वास्थ्य - अगर गर्भावस्था में माँ की सेहत अच्छी रहती है, तो शिशु को पर्याप्त पोषण मिलता है और इससे जन्म के समय तक उसकी लम्बाई सामान्य रूप से बढ़ने में मदद मिलती है। लेकिन अगर गर्भावस्था के दौरान माँ की सेहत ठीक ना हो और वह ढंग से भोजन ना खा पाए, तो पर्याप्त पोषण के अभाव से शिशु का विकास (baby growth in hindi) प्रभावित हो सकता है। शिशु के उचित विकास के लिए गर्भवती को अपनी सेहत का खास खयाल रखना चाहिए।

  • जन्म के समय शिशु की लम्बाई - माना जाता है कि जन्म के समय जिन शिशुओं की लम्बाई (baccho ki lambai) अधिक होती है, उनकी लम्बाई आम बच्चों की तुलना में ज्यादा बढ़ती है।

  • शिशु का लिंग - जी हाँ, शिशु के लिंग का उसकी लम्बाई पर प्रभाव पड़ता है। आमतौर पर लड़के, लड़कियों की तुलना में ज्यादा लम्बे होते हैं।

  • प्रेगनेंसी के बाद माँ का स्वास्थ्य - डिलीवरी के बाद भी माँ के स्वास्थ्य का शिशु के विकास (baby growth in hindi) व लम्बाई पर सीधा असर पड़ता है। अगर माँ की तबियत सही नहीं है, या वह तनाव में है, तो वह ना तो शिशु को ठीक तरह से दूध पिला सकेगी और ना ही उसके स्तनों में पर्याप्त दूध बन पाएगा। ऐसे में शिशु की लम्बाई (baccho ki lambai) बढ़ना कम हो सकती है। इसलिए डिलीवरी के बाद भी माँ को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए और तनाव से दूर रहना चाहिए।

  • शिशु को मिलने वाला पोषण - शिशु की लम्बाई (baccho ki lambai) पर उसे मिलने वाले पोषण का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है। अगर उसके शरीर में बढ़ने के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की कमी होगी, तो वह ठीक तरह से बढ़ ही नहीं पायेगा। इसलिए शिशु के पोषण का ध्यान रखना ज़रूरी है।

  • शिशु की नींद - विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों के सोने के दौरान उनकी लम्बाई सबसे ज्यादा बढ़ती है, इसलिए सही तरह से बढ़ने (baby growth in hindi) के लिए शिशु का अच्छी तरह से सोना बहुत ज़रूरी है।

  • शारीरिक सक्रियता - जो बच्चे शारीरिक रूप से ज्यादा सक्रिय होते हैं, उनकी मांसपेशियां व हड्डियां मजबूत होती हैं और तेजी से बढ़ती हैं।

  • शिशु का स्वास्थ्य - गम्भीर बीमारियां या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं शिशु के शारीरिक व मानसिक विकास (baby growth in hindi) को प्रभावित कर सकती हैं।

क्या यह पता लगाया जा सकता है कि बड़ा होने पर शिशु कितना लम्बा होगा?

(Kya ye pata lagaya ja sakta hai ki bada hone par shishu ki lambai kitni hogi)

Newborn baby height

शिशु की लम्बाई के आधार पर यह पता करना, कि बड़ा होने पर वह कितना लम्बा होगा, बेहद मुश्किल है। बच्चे की उम्र थोड़ी बढ़ने पर उसकी लम्बाई के बारे में अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

  • दो वर्ष की आयु में लड़के की लम्बाई को दो से गुणा करके यह अंदाजा लगाया जा सकता है, कि बड़ा होने पर वह कितना लम्बा होगा।
  • 18 महीने की उम्र में लड़की की लम्बाई को दो से गुणा करके यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है, कि बड़ी होने पर उसकी लम्बाई कितनी होगी।

ध्यान दें - यह तरीके वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हैं, इन्हें यहाँ केवल आपकी जानकारी व अनुमान के लिए दिया गया है। अपने बच्चे के शारीरिक विकास (baby growth in hindi) से जुड़ी किसी भी प्रकार की सलाह लेने के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।

नवजात शिशु की लम्बाई पर नज़र रखना क्यों ज़रूरी है?

(Baccho ki lambai par nazar rakhna kyun jaruri hai)

Newborn baby height

शिशु की लम्बाई से आपको उसके शारीरिक विकास (baby growth in hindi) की स्पष्ट जानकारी मिलती है, इसलिए डॉक्टर नियमित रूप से शिशु की लम्बाई (baccho ki lambai) नापते हैं। शिशु का सामान्य से अधिक बढ़ना या धीरे बढ़ना उसके शरीर में किसी प्रकार की शारीरिक समस्या जैसे हॉर्मोन असंतुलन आदि का संकेत हो सकता है।

निम्न स्थितियों में डॉक्टर आपको विशेष जाँच करवाने की सलाह दे सकते हैं -

  • अगर जन्म के पहले साल में शिशु की लम्बाई (baccho ki lambai) नहीं बढ़ती है।
  • अगर जन्म के पहले वर्ष में शिशु की लम्बाई सामान्य से कम या बहुत धीरे बढ़ती है।
  • अगर शिशु की लम्बाई (baccho ki lambai) सामान्य से अधिक या बहुत तेजी से बढ़ रही है।

ऊपर बताई गई स्थितियों में विशेषज्ञ शिशु के खून की जाँच, एक्स-रे, शरीर या दिमाग का स्कैन आदि करके उसके शरीर में मौजूद समस्या का पता लगाने की कोशिश करते हैं। कुछ दुर्लभ मामलों में शिशु को निम्न समस्याएं हो सकती हैं -

  • हाइपरथायराइडिज्म (hyperthyroidism in hindi)
  • वृद्धि हॉर्मोन की कमी (growth hormone deficiency in hindi)
  • वृद्धि हॉर्मोन की अधिकता (excessive growth hormone in hindi)
  • टर्नर सिंड्रोम (turner syndrome in hindi)

आवश्यकता होने पर, इन समस्याओं के इलाज के लिए डॉक्टर शिशु को कुछ विशेष दवाएँ या इंजेक्शन दे सकते हैं।

बच्चे की लंबाई के बारे में चिंता होने पर क्या करें?

(Baccho ki lambai ke bare me chinta hone par kya kare)

Newborn baby height

शिशु को लेकर आपकी चिंता किसी भी तरह की हो सकती है, जैसे बच्चा ठीक से बढ़ नहीं रहा है, ठीक से खा नहीं रहा है या विकास के मामले में अपनी उम्र के बाकी बच्चों से पिछड़ रहा है आदि। जन्म से लेकर एक वर्ष का होने तक शिशु का शरीर औसत रूप से 10 इंच बढ़ता है। ऐसे में अगर आप अपने बच्चे की लम्बाई (baccho ki lambai) या शारीरिक विकास (baby growth in hindi) में असंतुलन को लेकर परेशान हैं, तो इस बारे आपको जल्दी ही शिशु विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन) से सलाह लेनी चाहिए।

शारीरिक विकास की निगरानी करने के लिए हर महीने शिशु की लम्बाई (baccho ki lambai) नापना बहुत ज़रूरी होता है। हर शिशु के बढ़ने की दर अलग हो सकती है, इसलिए बात बात में दूसरे बच्चों से उसकी तुलना करके दुखी ना हों, थोड़े ही समय में आपका बच्चा भी सही ढंग से बढ़ने लगेगा। अगर आपको शिशु के विकास (baby growth in hindi) में किसी भी तरह की रुकावट या बच्चे को कोई शारीरिक समस्या होने की आशंका है, तो शीघ्र ही डॉक्टर से संपर्क करें।

इस ब्लॉग के विषय - जन्म के समय नवजात शिशु की लंबाई कितनी होती है? (Janm ke samay baccho ki lambai kitni hoti hai)एक वर्ष की उम्र तक हर महीने शिशु कितना लम्बा होता है? (Ek sal ka hone tak har mahine baccho ki lambai kitni badhti hai)शिशु का लेंथ पर्सेंटाइल क्या होता है? (Baby ka length percentile kya hota hai)लड़के शिशु का औसत लम्बाई चार्ट (Baby boy ka age ke hisab se height chart)लड़की शिशु का औसत लम्बाई चार्ट (Baby girl ka age ke hisab se height chart)एक वर्ष की आयु तक प्रीमैच्योर शिशु की लम्बाई कैसे बढ़ती है? (Ek sal ka hone tak premature baccho ki lambai kaise badhti hai)नवजात शिशु की लम्बाई किन चीजों से प्रभावित होती है? (Baccho ki lambai par kin cheejo ka asar hota hai)क्या यह पता लगाया जा सकता है कि बड़ा होने पर शिशु कितना लम्बा होगा? (Kya ye pata lagaya ja sakta hai ki bada hone par shishu ki lambai kitni hogi)नवजात शिशु की लम्बाई पर नज़र रखना क्यों ज़रूरी है? (Baccho ki lambai par nazar rakhna kyun jaruri hai)बच्चे की लंबाई के बारे में चिंता होने पर क्या करें? (Baccho ki lambai ke bare me chinta hone par kya kare)
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