शिशुओं के मल से जुड़ी कुछ ज़रूरी बातें (Baby ki potty ke bare me zaruri bate)

शिशुओं के मल से जुड़ी कुछ ज़रूरी बातें (Baby ki potty ke bare me zaruri bate)

नवजात शिशु बहुत नाज़ुक होते हैं और उनका पाचन तंत्र बेहद कोमल होता है। ऐसे में अक्सर माता पिता अपने बच्चे के मल (baby potty in hindi) के बारे में चिंतित रहते हैं। अगर शिशु एक दिन शौच ना करे तब भी उन्हें चिंता होती है और अगर शिशु दिन में चार पांच मल-त्याग करे तब भी उन्हें चिंता हो जाती है। नए माता पिता को इस बारे में ज्यादा फिक्र होती है, क्योंकि वो शिशु के मल (baby potty in hindi) सम्बंधी कुछ ज़रूरी बातें नहीं जानते हैं। असल में शिशु का मल हमें उसकी सेहत से जुडी कई महत्वपूर्ण बातों की जानकारी देता है। इस ब्लॉग में हम ऐसे सभी माता-पिताओं को शिशु के मल के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियाँ दे रहे हैं।

  1. मैकोनियम (शिशु का पहला मल) कैसा होता है? (Baby ki pehli potty kaisi hoti hai)
  2. नवजात शिशु का मल कैसा होता है?  (Baby ka mal kaisa hona chahiye)
  3. नवजात शिशु के मल की गंध कैसी होनी चाहिए? (Baby ki potty ki smell kaisi honi chahiye)
  4. शिशु को एक दिन में कितनी बार पॉटी करनी चाहिए? (Bache ko ek din me kitni bar potty karni chahiye)
  5. नवजात शिशु को एक बार में कितनी पॉटी करनी चाहिए? (Shishu ko ek baar me kitni potty karni chahiye)
  6. स्तनपान करने वाले शिशु का मल कैसा होता है? (Stanpan karne vale shishu ki potty kaisi hoti hai)
  7. फॉर्मूला दूध पीने वाले शिशु का मल कैसा होता है? (Formula milk pine vale baby ki potty kaisi hoti hai)
  8. ठोस आहार खाने वाले शिशु का मल कैसा होता है? (Solid food khane vale baby ki potty kaisi hoti hai)
  9. क्या पॉटी करते वक़्त शिशु का रोना सामान्य है? (Kya potty karte time baby ka rona normal hai)
  10. आमतौर पर शिशु के मल का रंग कैसा होता है? (Normally baby ki potty ka color kaisa hota hai)
  11. क्या स्तनपान करते वक़्त शिशु का पॉटी करना सामान्य है? (Kya dudh pite time baby ka potty karna normal hai)
  12. बच्चे के मल के बारे में कब चिंतित हों? (Bache ke mal ke bare me kab chintit hona chahiye)
  13. मेरा बच्चा पॉटी क्यों नहीं कर रहा है? (Bache ke potty na karne ke karan)
  14. अगर बच्चा पॉटी नहीं कर रहा तो क्या करें? (Agar bacha potty nahi kar raha to kya kare)
    1. फॉर्मूला दूध पीने वाले शिशु के पॉटी ना करने पर क्या करें? (Formula dudh pine vale baby ke potty na karne par kya kare)
    2. ठोस आहार खाने वाले शिशु के पॉटी ना करने पर क्या करें? (Solid food khane vale baby ke potty na karne par kya kare)
  15. शिशु की पॉटी सम्बंधी सावधानियां (Baby ki potty se judi savdhaniya)

1. मैकोनियम (शिशु का पहला मल) कैसा होता है? (Baby ki pehli potty kaisi hoti hai)

नवजात शिशु का पहला मल मैकोनियम (1) (meconium in hindi) कहलाता है। यह चिपचिपा और काले या गहरे हरे रंग का होता है। जन्म के बाद दो से तीन दिन तक शिशु मैकोनियम का मल-त्याग करता है। मैकोनियम में किसी भी तरह की गंध नहीं आती है। जब शिशु गर्भ में होता है तो दूध पीने का अभ्यास करने के दौरान वह अक्सर गर्भाशय का एमनियोटिक द्रव (amniotic fluid in hindi) निगल लेता है। यह एमनियोटिक द्रव जब शिशु की आंतों में जाता है तो इसके साथ ही पित्त लवण (bile salt in hindi), पित्त अम्ल आदि भी आंतों में इकट्ठे होकर शिशु के पेट मे मैकोनियम का निर्माण करते हैं। 

मैकोनियम सभी नवजात शिशुओं के पेट में होता है। असल में मैकोनियम (baby potty in hindi) गर्भ में पल रहे शिशु की बड़ी आंतों के विकास में मदद करता है और उसे खुली रखता है। 

जन्म के एक से तीन दिन में मैकोनियम शिशु के पेट से बाहर नहीं निकलने पर यह नवजात शिशु में पीलिया की समस्या पैदा कर सकता है। इसलिए शिशु के शरीर से मैकोनियम को समय रहते बाहर निकालने के लिए जन्म के बाद शिशु को भरपूर स्तनपान (stanpan) करवाना चाहिए। शिशु जितना ज्यादा दूध पीयेगा, उसके शरीर से मैकोनियम उतनी ही जल्दी बाहर निकल जायेगा। 

2. नवजात शिशु का मल कैसा होता है?  (Baby ka mal kaisa hona chahiye)

मैकोनियम के रूप में गहरे हरे या काले रंग का मल (baby potty in hindi) बाहर निकल जाने के बाद नवजात शिशु का मल धीरे धीरे हल्के हरे रंग का हो जाता है। करीब एक हफ्ते बाद शिशु सरसों जैसे पीले रंग का शौच करने लगता है। (2)

3. नवजात शिशु के मल की गंध कैसी होनी चाहिए? (Baby ki potty ki smell kaisi honi chahiye)

जन्म के बाद कुछ दिनों तक शिशु के मल (baby potty in hindi) में किसी भी प्रकार की गंध नहीं आती है। जैसे जैसे शिशु की आंतों में बैक्टीरिया रहने लगते हैं, वैसे ही धीरे धीरे शिशु का मल बदबूदार होने लगता है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है और आंतों में रहने वाले बैक्टीरिया शिशु के भोजन के पाचन में मदद करते हैं। आमतौर पर स्तनपान करने वाले शिशुओं के मल (baby potty in hindi) में फॉर्मूला दूध पीने वाले बच्चों की तुलना में कम बदबू आती है। साफ तौर पर कहें तो बढ़ते शिशु के मल का बदबूदार होना सामान्य है। (3)

कुछ मामलों में शिशु का मल (baby potty in hindi) बहुत ज्यादा बदबूदार होना इस बात का संकेत हो सकता है कि उसका पाचन तंत्र पोषक तत्वों को सही तरह से सोख नहीं पा रहा है। शिशु का ज्यादा बदबूदार मल उसके पेट में कीड़े होने का संकेत भी हो सकता है। लेकिन अगर बच्चा सामान्य रूप से बढ़ रहा है और उसके मल का रंग सामान्य है, तब शिशु के बदबूदार मल (baby potty in hindi) के बारे में चिंता की कोई बात नहीं होती है। 

4. शिशु को एक दिन में कितनी बार पॉटी करनी चाहिए? (Bache ko ek din me kitni bar potty karni chahiye)

विशेषज्ञ कहते हैं कि नवजात शिशु को एक दिन में कितनी बार पॉटी (baby potty in hindi) करनी चाहिए, इसकी कोई निश्चित संख्या नहीं है। नवजात शिशु का एक दिन में 5-7 बार शौच करना भी सामान्य है और तीन दिन में एक बार शौच करना भी एकदम सामान्य है। जब तक शिशु सामान्य रूप से स्तनपान (stanpan) कर रहा है और उसे शौच करने में कोई समस्या नहीं आती है, तब तक उसके मल-त्याग की संख्या के बारे में चिंतित होने की कोई ज़रूरत नहीं होती है। (4)

स्तनपान करने वाले शिशु आमतौर पर स्तनपान करने के दौरान या स्तनपान करने के बाद मल-त्याग करते हैं। ऐसे शिशु एक दिन में पांच से सात बार तक शौच कर सकते हैं। साथ ही कई शिशु पांच से छह दिन में एक बार मल-त्याग करते हैं, अगर शिशु का मल (baby potty in hindi) मुलायम है तो चिंता की कोई बात नहीं है।

फॉर्मूला दूध पीने वाले शिशु भी दूध पीने के दौरान या दूध पीने के बाद शौच कर सकते हैं। आमतौर पर ये एक दिन में एक से तीन बार ही शौच करते हैं, लेकिन कई शिशु चार से ज्यादा बार शौच करते हैं।

अगर आपका शिशु ठोस आहार खाता है, तो वो एक नियमित दिनचर्या के अनुसार शौच करता है और दिन में केवल एक या दो बार मल (baby potty in hindi) त्याग करता है।

5. नवजात शिशु को एक बार में कितनी पॉटी करनी चाहिए? (Shishu ko ek baar me kitni potty karni chahiye)

जिस तरह से शिशु के एक दिन में मल त्यागने की कोई निश्चित संख्या नहीं है, ठीक उसी तरह शिशु को एक बार में कितनी पॉटी करनी चाहिए, इसकी भी कोई तय मात्रा नहीं है। कुछ विशेष विकारों (disorders in hindi) की वजह से शिशु के मल (baby potty in hindi) की मात्रा कम हो सकती है या फिर शिशु मल त्याग नहीं पाता है। 

अगर जन्म के 72 घण्टे बाद भी नवजात शिशु का पहला मल बाहर नहीं आता है, तो यह शिशु में शारीरिक समस्या होने का संकेत हो सकता है। ऐसा होने पर डॉक्टर से इस बारे में सलाह जरूर लें।

जन्म के पहले सप्ताह के बाद, शिशु के मल (baby potty in hindi) की मात्रा उसके स्तनपान की मात्रा पर निर्भर करती है। यही बात फ़ॉर्मूला दूध पीने वाले शिशुओं पर भी लागू होती है। अगर आपको लगता है कि आपका बच्चा ठीक से पॉटी (baby potty in hindi) नहीं कर रहा है, तो उसके विकास पर नज़र रखें। 

अगर बच्चा सही तरह से बढ़ रहा है, उसका पेट ज्यादा बढ़ा हुआ और कठोर नहीं है, और अच्छी तरह से स्तनपान कर रहा है, तो सब कुछ ठीक है।

6. स्तनपान करने वाले शिशु का मल कैसा होता है? (Stanpan karne vale shishu ki potty kaisi hoti hai)

स्तनपान करने वाले शिशुओं का मल (baby potty in hindi) एक हफ़्ते बाद भूरे-हरे रंग से बदलकर सरसों के फूल की तरह पीला हो जाता है। स्तनपान करने वाले शिशुओं का मल थोड़ा पतला और दानेदार होता है। 

सके साथ ही शिशु का मल (baby potty in hindi) कभी कभी फटे हुए दूध की तरह भी नज़र आ सकता है। जन्म के पहले तीन चार हफ़्तों के दौरान शिशु के मल त्यागने की कोई निश्चित दिनचर्या नहीं होती है, लेकिन एक माह का होने पर शिशु एक नियमित अंतराल के बाद शौच करने लगता है। (5)

7. फॉर्मूला दूध पीने वाले शिशु का मल कैसा होता है? (Formula milk pine vale baby ki potty kaisi hoti hai)

फॉर्मूला दूध पीने वाले शिशुओं का मल (baby potty in hindi) स्तनपान करने वाले शिशुओं की तुलना में थोड़ा कम पतला होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शिशु का नाज़ुक पाचन तंत्र फॉर्मूला दूध को माँ के दूध की तरह ठीक से पचा नहीं पता है। फॉर्मूला दूध पीने वाले शिशुओं के मल (baby potty in hindi) का रंग हल्का पीला या पीला-भूरा होता है और उनके मल में से वयस्कों की ही तरह बदबू आती है। (6)

स्तनपान करने वाले शिशुओं की तुलना में फॉर्मूला दूध पीने वाले शिशुओं को कब्ज होने का खतरा ज्यादा होता है। इसलिए अगर शिशु में कब्ज होने के लक्षण नजर आएं, तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास लेकर जायें। 

8. ठोस आहार खाने वाले शिशु का मल कैसा होता है? (Solid food khane vale baby ki potty kaisi hoti hai)

ठोस आहार खाने वाले शिशुओं के मल (baby potty in hindi) का रंग उनके भोजन पर निर्भर करता है, जैसे अगर शिशु ने तरबूज या गाजर खाई है तो उसका मल नारंगी या हल्का लाल हो सकता है। इसके अलावा ज्यादा फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ जैसे किशमिश आदि बच्चे की पॉटी (baby potty in hindi) के साथ साबुत ही बाहर निकल आते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शिशु का नाज़ुक पाचन तंत्र फाइबर को ठीक से पचा नहीं पाता है। जैसे जैसे शिशु बड़ा होता जाएगा उसका मल बड़ों की ही तरह हो जायेगा। (7)

9. क्या पॉटी करते वक़्त शिशु का रोना सामान्य है? (Kya potty karte time baby ka rona normal hai)

ज्यादातर शिशु मल (baby potty in hindi) त्याग करते समय एकदम शांत पड़ जाते हैं और इस दौरान चार माह से छोटे शिशु का चेहरा लाल होना सामान्य है। मल त्यागने में परेशानी होने पर शिशु रो सकता है, अगर कभी कभी ऐसा होता है तो परेशान ना हों। 

लेकिन अगर शिशु हर बार शौच करते समय रोता है, तो यह कब्ज या किसी अन्य समस्या का लक्षण हो सकता है। ऐसे में शिशु के गुदाद्वार की जांच करें कि कहीं उसे वहां चोट तो नहीं लगी है। शौच के समय बार बार रोने वाले शिशुओं को डॉक्टर को ज़रूर दिखाएँ, क्योंकि वो किसी प्रकार की पेट संबंधी समस्या से पीड़ित हो सकते हैं।(8)

10. आमतौर पर शिशु के मल का रंग कैसा होता है? (Normally baby ki potty ka color kaisa hota hai)

जन्म के पहले हफ्ते में काले या हरे चिपचिपे मैकोनियम मल को निकालने के बाद शिशु के सामान्य मल (baby potty in hindi) का रंग पीला, भूरा, नारंगी या हल्का हरा हो सकता है। 

कुछ माता पिता शिशु की भूरी पॉटी को देखकर चिंतित हो जाते हैं, लेकिन आमतौर पर इसमें चिंता की कोई बात नहीं होती है क्योंकि यह बिल्कुल सामान्य है। आपको शिशु के मल (baby potty in hindi) के बारे में तभी चिंतित होने चाहिए, जब मल का रंग सफेद, काला, गहरा हरा और लाल हो, क्योंकि ये रंग शिशु में गंभीर रोगों के लक्षण हो सकते हैं। (9)

11. क्या स्तनपान करते वक़्त शिशु का पॉटी करना सामान्य है? (Kya dudh pite time baby ka potty karna normal hai)

जी हाँ, जन्म के शुरुआती महीनों में अधिकतर शिशु स्तनपान करते समय या स्तनपान करने के बाद मल-त्याग करते हैं। शिशु की उम्र बढ़ने के साथ ही उसका पाचन तंत्र बेहतर होता जाता है, और शिशु के मल (baby potty in hindi) त्याग की संख्या घटने लगती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि माँ का दूध बहुत अधिक सुपाच्य होता है और इसका ज्यादातर हिस्सा पच जाता है। इसलिए करीब दो तीन महीने का होने के बाद स्तनपान करने वाले शिशु कभी कभी चार पाँच दिन तक मल त्याग नहीं करते हैं। 

वहीं फॉर्मूला दूध पीने वाले बच्चे का पाचन तंत्र दूध को पूरी तरह नहीं पचा पाता, इसलिए कब्ज की समस्या से बचने के लिए उसके लिए रोज एक से दो बार पॉटी (baby potty in hindi) करना ज़रूरी होता है। अगर तीन महीने का होने के बाद भी आपका शिशु हर बार स्तनपान करते समय पॉटी कर देता है और ठीक से बढ़ नहीं रहा है, तो उसे डॉक्टर को दिखाएं। तीन माह की आयु का होने के बाद ऐसा होना शिशु के पाचन तंत्र में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।

12. बच्चे के मल के बारे में कब चिंतित हों? (Bache ke mal ke bare me kab chintit hona chahiye)

नवजात का मल (baby potty in hindi) हमें उसके स्वास्थ्य के बारे में बहुत सी महत्वपूर्ण जानकारियां देता है, इसलिए बच्चे के मल के बारे में माता पिता का चिंतित होना सामान्य है। अगर आपको बच्चे के मल में निम्न लक्षण नजर आएं, तो यह चिंता का विषय होता है।

  • अगर शिशु के मल (baby potty in hindi) का रंग फीका या चूने की तरह सफेद हो। इसका अर्थ यह है कि शिशु का लिवर दूध को पचाने के लिए पर्याप्त मात्रा में पित्तरस (bile juice in hindi) नहीं बना पा रहा है। 
  • अगर नवजात का पहला मल (meconium in hindi) बाहर निकल जाने के बाद भी शिशु का मल तारकोल (डामर) की तरह काला हो। इसका मतलब शिशु के पाचन तंत्र में खून की उपस्थिति हो सकती है, जो आंतों के रास्ते आने की वजह से काला हो गया होगा।
  • अगर शिशु का मल (baby potty in hindi) ज्यादा ठोस हो। ऐसे में शिशु को कब्ज की समस्या हो सकती है और उसे मल त्यागने में परेशानी हो सकती है।
  • अगर शिशु के मल में पानी जैसा पदार्थ आये तो यह डायरिया का लक्षण हो सकता है। इसके अलावा यह शिशु में अपच का लक्षण भी हो सकता है। 
  • अगर शिशु का मल (baby potty in hindi) म्यूकस, पानी या खून से युक्त हो तो यह एलर्जी या संक्रमण का लक्षण हो सकता है।

ध्यान दें - अगर आपको अपने शिशु के मल में ऊपर बताये गए लक्षणों में से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो शिशु को डॉक्टर के पास लेकर जाएं। 

13. मेरा बच्चा पॉटी क्यों नहीं कर रहा है? (Bache ke potty na karne ke karan)

तीन माह का हो जाने के बाद, स्तनपान करने वाले नवजात शिशु का कई दिनों तक मल त्याग ना करना बेहद सामान्य है। कई मामलों में दूध पीने वाले शिशु दो हफ़्ते तक पॉटी नहीं करते हैं। जब तक आपका बच्चा अच्छी तरह दूध पी रहा है और पर्याप्त मात्रा में पेशाब कर रहा है, तब तक चिंता की कोई बात नहीं है। लेकिन शिशु के एक सप्ताह तक पॉटी ना करने पर सावधानी के तौर पर उसे डॉक्टर के पास ले जायें।

फॉर्मूला दूध पीने वाले शिशु का मल त्याग ना करना, कब्ज का संकेत हो सकता है। फॉर्मूला दूध को बच्चे का पाचन तंत्र पूरी तरह पचा नहीं पाता है, इसलिए नियमित रूप से शिशु का मल त्याग करना ज़रूरी होता है। अगर फॉर्मूला दूध पीने वाला शिशु लगातार दो दिन तक शौच नहीं करता है तो यह बच्चे को कब्ज (baby ko kabj) होने का लक्षण हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह लेना बेहद ज़रूरी है। (10)

ठोस आहार खाने वाला शिशु आमतौर पर रोज एक से दो बार मल त्याग करता है। ऐसे में अगर वह लगातार 24 घण्टे तक पॉटी (baby potty in hindi) नहीं करता है, तो उसे कब्ज़ की समस्या हो सकती है। उसके लिए आप कब्ज के घरेलू उपाय आज़मा कर देख सकती हैं। अगर कब्ज भगाने के घरेलू उपाय आज़माने से भी बच्चे की कब्ज दूर ना हो, तो उसे डॉक्टर के पास ले जाएं और उनसे सलाह लें।

अगर आपके शिशु के मल त्यागने का रूटीन अचानक से बदल गया है (जैसे पहले वह दिन में तीन से चार बार पॉटी करता था, और एक दिन उसने पॉटी नहीं की), तो कब्ज या अन्य किसी समस्या का लक्षण हो सकता है, ऐसे में शिशु को डॉक्टर को दिखाएं। 

ध्यान दें : शिशु की पॉटी (baby potty in hindi) करने की दिनचर्या पर नज़र रखें और अचानक आये बदलाव के बारे में डॉक्टर से सलाह लें, यह बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत ज़रूरी है।

14. अगर बच्चा पॉटी नहीं कर रहा तो क्या करें? (Agar bacha potty nahi kar raha to kya kare)

आमतौर पर स्तनपान करने वाले शिशुओं को कब्ज की समस्या नहीं होती है, इसलिए यहाँ हम फॉर्मूला दूध की वजह से शिशु का पॉटी (baby potty in hindi) ना करना और ठोस आहार की वजह से शिशु के पॉटी ना करने की समस्या का समाधान बता रहे हैं -

  1. a. फॉर्मूला दूध पीने वाले शिशु के पॉटी ना करने पर क्या करें? (Formula dudh pine vale baby ke potty na karne par kya kare)

  • फॉर्मूला दूध पीने वाले शिशुओं को दूध पिलाने के अलावा बीच बीच में थोड़ा पानी पिलाते रहें ताकि उनके शरीर में पानी की कमी ना हो।
  • अगर आपको लगता है कि फॉर्मूला दूध के ब्रांड या प्रकार की वजह से शिशु पॉटी (baby potty in hindi) नहीं कर रहा (उसे कब्ज हो रही है), तो ब्रांड बदलने और बच्चे के लिए फॉर्मूला दूध का सही ब्रांड चुनने के लिए डॉक्टर की सलाह लें। 
  • अगर शिशु का मल (baby potty in hindi) बहुत ज्यादा ठोस व कड़ा होने की वजह से बाहर नहीं आ पा रहा है, तो शिशु के गुदाद्वार में छोटी सिरिंज या ड्रॉपर के ज़रिए थोड़ी ग्लिसरीन डालें। इससे मल चिकना होकर बाहर आ जायेगा।
  1. b. ठोस आहार खाने वाले शिशु के पॉटी ना करने पर क्या करें? (Solid food khane vale baby ke potty na karne par kya kare)

  • शिशु के भोजन में तरल पदार्थों की मात्रा बढ़ाएं, उसे पर्याप्त मात्रा में सूप, सेब का रस, दाल का पानी आदि पिलायें।
  • अगर हो सके तो बच्चे को कुछ समय के लिए ठोस खाना देना कम कर दें। इससे उसके पाचन तंत्र को विकसित होने का समय मिलेगा और शिशु बाद में आसानी से ठोस भोजन पचा सकेगा। 
  • बच्चे को पर्याप्त मात्रा में फाइबर युक्त चीजें जैसे सब्जियों की प्यूरी, फलों का पिसा गूदा, पिसी किशमिश आदि खिलायें। इससे बच्चे को मल (baby potty in hindi) त्यागने में आसानी होगी। (11)

15. शिशु की पॉटी सम्बंधी सावधानियां (Baby ki potty se judi savdhaniya)

  • शिशु का डायपर समय समय पर चैक करते रहें, क्योंकि गंदे डायपर में ज्यादा देर तक रहने पर शिशु को संक्रमण का खतरा होता है।
  • शिशु का मल (baby potty in hindi) साफ करते समय ज्यादा जोर से ना रगड़ें और मुलायम कपड़े या टिश्यू पेपर का इस्तेमाल करें। जोर से रगड़ने पर शिशु की नाज़ुक त्वचा छिल सकती है। 
  • शिशु को ज्यादा आयरन युक्त फॉर्मूला दूध या ठोस आहार ना दें, क्योंकि ज्यादा मात्रा में आयरन लेने से शिशु को कब्ज हो सकती है।

बच्चा भले ही अपनी सेहत के बारे में अपने मुँह से कुछ ना कह पाता हो, लेकिन शिशु का मल (baby potty in hindi) उसकी सेहत के बारे में आपको कई ज़रूरी संकेत देता है। इसलिए जिस तरह आप शिशु के स्तनपान और नींद का खयाल रखते हैं, शिशु की पॉटी पर भी उसी तरह ध्यान दें। नवजात शिशुओं के मल में हर थोड़े दिनों में कुछ बदलाव आते रहते हैं, इस बारे में चिंतित ना हों। लेकिन अगर आपको अपने शिशु के मल के बारे में किसी तरह का संदेह है तो एक बार डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें। ब्लॉग में बताई गई शिशु के मल सम्बंधी बातों से आपको अपने बच्चे की पॉटी (baby potty in hindi) के बारे में ज्यादातर जानकारी मिल जाएगी। तो स्वस्थ रहें, मस्त रहें और अपने शिशु के ईट, स्लीप एंड पूप (खाना, सोना और पॉटी करना) चक्र को फॉलो करें।  

  1. newborn infant's first stool Meconium by ncbi
  2. Stool color by healthline
  3. Baby poop smell by health.howstuffworks
  4. Baby poop frequency by todaysparent
  5. normal stool of a breastfed baby by kellymom
  6. formula fed baby poop by whattoexpect
  7. baby eating solid food poop by babycentre
  8. Baby crying while passing stool by webmd
  9. Baby poop color by healthline
  10. baby not passing stool by childrensmd
  11. Constipation in children by mayoclinic
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