नवजात शिशुओं में पाचन सम्बंधी 5 समस्याएं और उनके उपाय (Baccho me pet ki 5 problems aur unke upay)

नवजात शिशुओं में पाचन सम्बंधी 5 समस्याएं और उनके उपाय (Baccho me pet ki 5 problems aur unke upay)

नवजात शिशु इतना ज्यादा कोमल होता है, कि अक्सर नए माता पिता को उसे गोद में लेते समय यह डर लगता है कि कहीं बच्चे को चोट ना लग जाये। इसके अलावा शिशुओं की बीमारियों से लड़ने की क्षमता (immunity in hindi) भी बहुत कम होती है, इसलिए नवजात शिशु अक्सर बीमार हो जाते हैं। जन्म के समय शिशुओं का पाचन तंत्र पूरी तरह विकसित नहीं होता है, इसलिए नवजात शिशुओं में पाचन संबंधी समस्याएं जैसे उल्टी, दस्त, पेट दर्द आदि बेहद आम हैं। आज के ब्लॉग में हम आपको पाचनतंत्र संबंधी पांच सबसे आम नवजात शिशु के रोग, उनके लक्षण व उपचार के बारे में बता रहे हैं।

1. नवजात शिशु के रोग- बच्चे को उल्टी की समस्या

(Bache ko ulti ki samasya)

Baccho me pet ki problems - ulti

नवजात शिशुओं में उल्टी (vomiting in hindi) की समस्या बेहद आम होती है, स्तनपान (breastfeeding in hindi) करने के बाद शिशु अक्सर उल्टी कर देते हैं। अगर शिशु हर बार उल्टी करता है, तो डॉक्टर की सलाह लें क्योंकि आपके शिशु को माँ के दूध से भी समस्या हो सकती है।

नवजात शिशु के रोग- बच्चे को उल्टी क्यों होती है? (Bache ko ulti kyun hoti hai)

  • अविकसित पाचन तंत्र- शिशु का पाचन तंत्र अविकसित होने की वजह से शिशु दूध को अंदर रोक नहीं पाता और उल्टी कर देता है।
  • ज्यादा स्तनपान- कई बार ज़रूरत से ज्यादा स्तनपान (stanpan) करने की वजह से शिशु ज्यादा दूध पी लेता है, ऐसे में शिशु का पाचन तंत्र उसे झेल नहीं पाता और नवजात शिशु को उल्टी हो जाती है।
  • अन्य कारण- इसके अलावा ज्यादा रोने, कब्ज़ (bache ko kabj), संक्रमण आदि वजहों से नवजात शिशु को उल्टी हो सकती है।

नवजात शिशु के रोग- बच्चे को उल्टी होने के लक्षण क्या हैं? (Baby ko ulti hone ke lakshan kya hai)

  • दूध पीने के बाद शिशु के मुँह से दही जैसा पदार्थ बाहर निकलना
  • हिचकी के साथ शिशु के मुँह से दूध बाहर आना

नवजात शिशु के रोग- बच्चे की उल्टी रोकने के उपाय क्या हैं? (Baby ki ulti rokne ke upay kya hai)

  • नवजात शिशु को उल्टी होना एक आम समस्या है, इसलिए जैसे जैसे उसका पाचन तंत्र विकसित होगा यह अपने आप ठीक हो जाएगी।
  • अगर शिशु ज्यादा उल्टी करता है और उसका वजन नहीं बढ़ रहा तो उसे शिशु रोग विशेषज्ञ (pediatrician in hindi) को दिखाएं।
  • शिशु अक्सर दूध पीते वक़्त हवा निगल लेते हैं, इसलिए उसे दूध पिलाने के बाद डकार ज़रूर दिलवाएं।
  • शिशु को स्तनपान की सही अवस्था (breastfeeding position in hindi) में दूध पिलाने से उल्टी की समस्या कम हो सकती है।
  • अगर सफर या यात्रा कर रही हैं, तो बीच बीच में रुक जाएं, इससे शिशु को सफर के दौरान उल्टी की समस्या में आराम मिल सकता है।
  • अगर शिशु की नाक बंद है तो शिशु को दूध पिलाने से पहले उसकी नाक साफ करें।

2. नवजात शिशु के रोग- बच्चे को कब्ज़ की समस्या

(Bache ko kabj ki pareshani)

Baccho me pet ki problems - kabz

नवजात शिशुओं की आँतें अविकसित होती हैं, ऐसे में शिशुओं में कब्ज (constipation in hindi) की समस्या बेहद आम है। आमतौर पर नवजात शिशु डेढ़ से दो दिन में मलत्याग (baby potty in hindi) करते हैं, लेकिन अगर शिशु मलत्याग करने में दो दिन से ज्यादा समय लेता है और कठोर मल करता है तो वह कब्ज की समस्या से पीड़ित होता है।

नवजात शिशु के रोग- बच्चे को कब्ज क्यों होती है? (Bache ko kabj kyu hoti hai)

  • माँ के दूध में आयरन की अधिक मात्रा- माँ के दूध में आयरन (iron in hindi) की अधिक मात्रा शिशु में कब्ज की समस्या की वजह हो सकती है।
  • फॉर्मूला दूध- फॉर्मूला दूध (formula milk in hindi) पीने की वजह से शिशु को कब्ज हो सकती है।
  • ठोस आहार- अगर शिशु छह माह से अधिक आयु का है, और ठोस आहार खाता है तो शिशु को कब्ज की समस्या (newborn baby potty problem in hindi) हो सकती है।
  • सर्दी- ज़ुकाम की दवा- इसके अलावा सर्दी- ज़ुकाम की दवा से भी शिशु को कब्ज़ की समस्या हो सकती है। कब्ज से शिशु के मलद्वार में चोट लग सकती है, इसलिए कब्ज (constipation in hindi) का इलाज ज़रूरी है।

नवजात शिशु के रोग- बच्चे में कब्ज के लक्षण क्या होते हैं? (Baby ko kabj hone ke lakshan kya hai)

  • शौच करते समय मल (baby potty in hindi) को बाहर निकलने से रोकने के लिए कूल्हों की पेशियों को भींचना।
  • पेट में नाभि के आसपास दर्द होना।
  • स्तनपान (stanpan) ना करना।
  • उल्टी करना।
  • बार बार पेशाब करना, बिस्तर गीला करना।

नवजात शिशु के रोग- बच्चों का पेट साफ करने के उपाय क्या हैं? (Bache ki kabj ka ilaj kya hai)

  • अगर शिशु छह माह से अधिक आयु का है तो उसे दिन में एक कप सेब का जूस पिलायें, और अगर शिशु की उम्र छह महीने से कम है तो उसे एक बार डॉक्टर को ज़रूर दिखायें।
  • नवजात के पैरों को हल्के हाथों से पेट की तरफ मोड़ें, इससे उसकी आंतों की एक्सरसाइज होगी और शिशु को कब्ज (constipation in hindi) से राहत मिलेगी।
  • शिशु के पेट की मालिश करें, नाभि से दो इंच नीचे हल्के हाथों से दबाव डालें और तीन मिनट तक दबाव बनाए रखें।
  • अगर बच्चा छह माह से अधिक आयु का है, तो उसे दाल का पानी व सब्जियों का सूप पिलायें। इससे शिशु को कब्ज (constipation in hindi) से राहत मिलेगी।
  • शिशु के शरीर में पानी की कमी ना होने दें, छह माह से कम आयु के शिशु को केवल स्तनपान करायें, पानी ना पिलायें।

3. नवजात शिशु के रोग- बच्चे को दस्त लगना

(Navjat shishu ko dast lagna)

Baccho me pet ki problems - dast

स्तनपान (stanpan) करने वाला शिशु सामान्य रूप से एक दिन में कई बार मल त्याग सकता है, आमतौर पर शिशु स्तनपान के बाद मलत्याग (baby potty in hindi) करता है, जो कि काफी पतला होता है। इसलिए शिशुओं में दस्त (navjat shishu ko dast) का पता लगाना नई माँओं के लिए काफी मुश्किल होता है। दस्त (navjat shishu ko dast) की समस्या शिशु की सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक होती है, इसलिए अपने शिशु को दस्त से बचाये रखने के लिए शिशु के आस पास साफ सफाई का खास खयाल रखें।

नवजात शिशु के रोग- शिशु को दस्त क्यों होते हैं? (Navjat shishu ko dast kyu lagte hai)

  • कीटाणुओं का संक्रमण- शिशु को दस्त (navjat shishu ko dast) लगने की वजह वायरस (virus in hindi) या बैक्टीरिया (bacteria in hindi) का संक्रमण हो सकती है।
  • अन्य कारण- इसके अलावा पेट में कीड़े, कान में संक्रमण (baby ke kan me infection) आदि समस्याओं की वजह से भी शिशु को दस्त (navjat shishu ko dast) लग सकते हैं।

नवजात शिशु के रोग- बच्चे को दस्त लगने के लक्षण क्या हैं? (Navjat shishu ko dast lagne ke lakshan kya hai)

  • शिशु का मल उसके सामान्य मल से ज्यादा पतला होना।
  • शिशु का दिन में चार से ज्यादा बार मलत्याग करना।
  • शिशु के मल का रंग बदलना।
  • शिशु के मल से अजीब बदबू आना।

नवजात शिशु के रोग- बच्चे के दस्त रोकने के उपाय क्या हैं? (Baby ke dast rokne ke upay kya hai)

  • दस्त (navjat shishu ko dast) लगने से शिशु के शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जो कि उसकी सेहत के लिए नुकसानदायक है, इसलिए शिशु के शरीर में पानी की कमी ना होने दें।
  • अगर शिशु उल्टी (vomiting in hindi) नहीं कर रहा है तो उसे स्तनपान (breastfeeding in hindi) करवाती रहें, लेकिन अगर शिशु उल्टी कर रहा है तो उसे डॉक्टर को दिखाएं।
  • शिशु को चीनी युक्त कोई पदार्थ ना खिलाना/पिलाना भी बच्चों के दस्त के उपाय में शामिल है। शिशु की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और समय समय पर उसके डायपर बदलती रहें।
  • समय समय पर अपने हाथ धोती रहें, क्योंकि दस्त (navjat shishu ko dast) के बैक्टीरिया (bacteria in hindi) आपके हाथों के ज़रिए शिशु के मुंह मे जाकर उसे बीमार कर सकते हैं।
  • बच्चे को हाथ लगाने से पहले सभी को अच्छी तरह हाथ धोने के लिए कहें।
  • शिशु के खिलौनों व कपड़ों को साफ करती रहें।
  • शिशु के हाथों को साफ रखें, क्योंकि वह अक्सर अपनी उंगलियाँ मुँह में डाल लेता है।
  • अगर शिशु फॉर्मूला दूध (formula milk in hindi) पीता है तो उसकी दूध की बोतल को नियमित रूप से साफ़ करें।

4. नवजात शिशु के रोग- बच्चों के पेट में दर्द की समस्या

(Baby ke pet me dard ki pareshani)

Baccho me pet ki problems - pet me dard

अक्सर आपने छोटे बच्चों को रोते हुए देखा होगा, नवजात शिशु कई कारणों से रोते हैं, जैसे भूख लगने पर, थकने पर, डायपर गीला होने पर, ठंड या गर्मी लगने पर आदि। लेकिन अगर आपका बच्चा पेट भरा होने पर भी बिना वजह बार बार रोता है तो इसकी वजह शिशु के पेट में दर्द (stomach pain in hindi) की समस्या हो सकती है।

पेट दर्द नवजात शिशुओं की आम परेशानियों में से एक है। पेट में गैस की वजह से कोलिक (colic in hindi) या पेट दर्द (stomach pain in hindi) की समस्या शिशु के जन्म के कुछ हफ़्ते बाद पैदा होती है। कोलिक (colic in hindi) की समस्या चार से छह महीने की उम्र तक रहती है, लेकिन यह शिशु के लिए हानिकारक नहीं होती।

नवजात शिशु के रोग- शिशु को पेट में दर्द क्यों होता है? (Baby ko pet dard kyu hota hai)

विशेषज्ञ पिछले कई सालों से शिशुओं के पेट में दर्द (stomach pain in hindi) की समस्या का कारण जानने की कोशिशें कर रहे हैं, लेकिन अभी तक इसका सही कारण किसी को पता नहीं है।

कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि इसकी एक वजह शिशु के पेट में गैस या अपच हो सकती है। इसके अलावा कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि नवजात शिशुओं की आँतें अविकसित होने की वजह से वह दूध में उपस्थित कुछ खास पदार्थों के प्रति संवेदनशील हो सकती हैं, जिसकी वजह से शिशु को पेट दर्द (stomach pain in hindi) हो सकता है।

नवजात शिशु के रोग- बच्चे को पेट दर्द होने के लक्षण क्या हैं? (Baby ko pet dard hone ke lakshan kya hai)

  • शिशु रोज लगभग एक ही समय अचानक रोने लगता है। आमतौर पर शिशु को कोलिक (colic in hindi) का दर्द दोपहर या शाम के समय होता है।
  • शिशु का स्तनपान करते वक़्त बीच बीच में रोना।
  • रोते समय शिशु का डकार लेना।
  • शिशु का ठीक से ना सोना।
  • शिशु के सोने का तरीका या सोने की अवस्था बदलना।

नवजात शिशु के रोग- बच्चे के पेटदर्द का उपचार क्या है?(Bache ka pet dard ka upchar kya hai)

पेट दर्द (stomach pain in hindi) या कोलिक की समस्या शिशुओं के लिए हानिकारक नहीं होती है, इसलिए आमतौर पेट दर्द के लिए कोई दवाई नहीं दी जाती है। अगर आपको लगता है कि शिशु ज्यादा परेशान हो रहा है तो उसे डॉक्टर के पास ले जायें, डॉक्टर शिशु को पिलाने के लिए कुछ दवाएँ दे सकते हैं, जिनसे उसके पेट में गैस की समस्या कम हो जाती है। इसके अलावा अगर शिशु दूध को ठीक से पचा नहीं पा रहा है, तो डॉक्टर उसे लैक्टेज (lactase in hindi) नामक एक एंजाइम (enzyme in hindi) की दवा पिलाने की सलाह देते हैं, यह दूध की शुगर को ग्लूकोज (glucose in hindi) में बदलकर दूध के पाचन में सहायता करता है।

नवजात शिशु के रोग- बच्चे को कोलिक की समस्या से कैसे बचाएं? (Bache ke pet dard ka ilaj kya hai)

  • शिशु को स्तनपान (breastfeeding in hindi) करवाते समय उसका सिर ऊपर उठाकर ऐसे रखें जैसे बच्चा बैठता है, इस स्थिति में बच्चा दूध पीते वक़्त हवा कम निगलता है।
  • शिशु को एक साथ स्तनपान करवाने की जगह हर थोड़ी देर में थोड़ा थोड़ा स्तनपान (stanpan) करवाएं।
  • शिशु को दूध पिलाने के बाद उसका सिर कंधे से लगाकर उसकी पीठ थपथपाएं, इससे डकार के ज़रिए शिशु के पेट की गैस बाहर निकल जायेगी।
  • शिशु को गर्म पानी से नहलाने से उसके पेट में जमा गैस बाहर निकल जाती है, और शिशु को पेट दर्द (stomach pain in hindi) होने की संभावना कम होती है।
  • चाय व कॉफी में उपस्थित पदार्थ शरीर में दूध के पाचन में परेशानी पैदा करता है, जिससे पेट में गैस बनने लगती है, इसलिए स्तनपान करवाने वाली माँ के कम चाय या कॉफी पीने से शिशु को पेट में गैस बनने और पेट दर्द होने की संभावना कम होती है।

5. नवजात शिशु के रोग- बच्चे का पेट फूलना

(Bache ka pet fulna)

Baccho me pet ki problems - pet phoolna

दूध पीते समय हवा निगलने की वजह से शिशु की अविकसित आँतों व पाचनतंत्र में गैस इकट्ठी हो जाती है, और पेट में गैस की समस्या से शिशु का पेट फूल जाता है, इससे शिशु को पेट में दर्द (stomach pain in hindi) हो सकता है। नवजात शिशुओं के पेट में गैस की समस्या बहुत सामान्य है, 100 में से 70 नवजात शिशुओं को जन्म के बाद पेट फूलने की समस्या होती है। एक माह से चार माह की आयु के नवजात शिशु पेट में गैस की समस्या से सबसे ज्यादा परेशान रहते हैं।

नवजात शिशु के रोग- बच्चे का पेट क्यों फूलता है? (Baby ka pet kyun fulta hai)

  • गलत अवस्था में स्तनपान (stanpan) करवाना- ऐसा करने से शिशु दूध के साथ ज्यादा हवा निगलता है और पेट में गैस की समस्या की वजह से उसका पेट फूल जाता है। इसलिए शिशु को सही अवस्था में ही स्तनपान करवाएं।
  • ज्यादा स्तनपान करवाना- शिशु को ज़रूरत से ज्यादा स्तनपान (breastfeeding in hindi) करवाने से शिशु को पेट दर्द और पेट में गैस की समस्या हो सकती है।
  • शिशु का ज्यादा रोना- अगर शिशु ज्यादा रोता है, तो रोते समय हवा निगलने की वजह से उसे पेट में गैस की समस्या हो सकती है और उसका पेट फूल सकता है।

नवजात शिशु के रोग- शिशु के पेट में गैस के लक्षण क्या हैं? (Bache ka pet fulne ke lakshan kya hai)

  • शिशु का चिड़चिड़ा होना और रोना।
  • शिशु के पेट में दर्द होना।
  • शिशु का पेट कठोर और फूला हुआ होना।
  • शिशु का बार बार डकार लेना।
  • शिशु का बार बार दूध उगलना।

नवजात शिशु के रोग- बच्चे का पेट फूलने के घरेलू नुस्खे क्या हैं? (Baby ka pet fulne ke gharelu nuskhe kya hai)

  • शिशु को स्तनपान (breastfeeding in hindi) करवाते समय उसका सिर ऊपर उठाकर ऐसे रखें जैसे बच्चा बैठता है, इस स्थिति में बच्चा दूध पीते वक़्त हवा कम निगलता है।
  • हल्के हाथों से शिशु के पेट की मालिश करने से शिशु के पेट की गैस आसानी से बाहर निकल जाती है।
  • डॉक्टर शिशु के पेट की गैस बाहर निकालने की दवाई भी देते हैं, जो शिशु जो दूध पिलाने के बाद पिलाई जाती है।
  • दूध पिलाने के बाद शिशु को पेट के बल सुलायें और खेलने दें। इससे उसके पेट की गैस आसानी से बाहर निकल जायेगी।
  • शिशु के पैरों को हल्के हाथों से साइकिल की तरह चलाने से शिशु के पेट की गैस निकल जाती है।
  • शिशु को ज्यादा कसे हुए कपड़े ना पहनायें, जहां तक सम्भव हो शिशु को ढीले ढाले और आरामदायक कपड़े पहनायें।

कोई भी माँ अपने शिशु को रोता हुआ नहीं देख सकती, ऐसे में जब कोई नवजात शिशु बीमार हो जाता है तो उसके दिल की हालत एक माँ से बेहतर कोई नहीं समझ सकता। मगर शिशु का बीमार होना बेहद सामान्य है और नवजात शिशु के पेट के रोग आमतौर पर ज्यादा हानिकारक नहीं होते। शिशु की पाचन शक्ति कमजोर होने की वजह से उसे पाचन संबंधी समस्याएं होना आम है, असल में यह उनके विकास का एक अहम हिस्सा है। शिशु के बीमार होने पर उसका खास खयाल रखें और डॉक्टर की सलाह लें। साथ ही कुछ सामान्य सी सावधानियां बरत कर आप नवजात शिशु को दस्त (navjat shishu ko dast) जैसी पाचन संबंधी परेशानियों से सुरक्षित रख सकती हैं।

इस ब्लॉग के विषय- नवजात शिशु के रोग- बच्चे को उल्टी की समस्या (Bache ko ulti ki samasya)नवजात शिशु के रोग- बच्चे को उल्टी क्यों होती है? (Bache ko ulti kyun hoti hai)नवजात शिशु के रोग- बच्चे को उल्टी होने के लक्षण क्या हैं? (Baby ko ulti hone ke lakshan kya hai)नवजात शिशु के रोग- बच्चे की उल्टी रोकने के उपाय क्या हैं? (Baby ki ulti rokne ke upay kya hai)नवजात शिशु के रोग- बच्चे को कब्ज़ की समस्या (Bache ko kabj ki pareshani)नवजात शिशु के रोग- बच्चे को कब्ज क्यों होती है? (Bache ko kabj kyu hoti hai)नवजात शिशु के रोग- बच्चे में कब्ज के लक्षण क्या होते हैं? (Baby ko kabj hone ke lakshan kya hai)नवजात शिशु के रोग- बच्चों का पेट साफ करने के उपाय क्या हैं? (Bache ki kabj ka ilaj kya hai)नवजात शिशु के रोग- बच्चे को दस्त लगना (Navjat shishu ko dast lagna)नवजात शिशु के रोग- शिशु को दस्त क्यों होते हैं? (Navjat shishu ko dast kyu lagte hai)नवजात शिशु के रोग- बच्चे को दस्त लगने के लक्षण क्या हैं?(Navjat shishu ko dast lagne ke lakshan kya hai)नवजात शिशु के रोग- बच्चे के दस्त रोकने के उपाय क्या हैं?(Baby ke dast rokne ke upay kya hai)नवजात शिशु के रोग- बच्चों के पेट में दर्द की समस्या (Baby ke pet me dard ki pareshani)नवजात शिशु के रोग- शिशु को पेट में दर्द क्यों होता है? (Baby ko pet dard kyu hota hai)नवजात शिशु के रोग- बच्चे को पेट दर्द होने के लक्षण क्या हैं?(Baby ko pet dard hone ke lakshan kya hai)नवजात शिशु के रोग- बच्चे के पेटदर्द का उपचार क्या है? (Bache ka pet dard ka upchar kya hai)नवजात शिशु के रोग- बच्चे को कोलिक की समस्या से कैसे बचाएं? (Bache ko pet dard ke upay kya hai) नवजात शिशु के रोग- बच्चे का पेट फूलना (Bache ka pet fulna)नवजात शिशु के रोग- बच्चे का पेट क्यों फूलता है? (Baby ka pet kyun fulta hai)नवजात शिशु के रोग- शिशु के पेट में गैस के लक्षण क्या हैं? (Bache ka pet fulne ke lakshan)नवजात शिशु के रोग- बच्चे का पेट फूलने के घरेलू नुस्खे क्या हैं?(Baby ka pet fulne ke gharelu nuskhe kya hai)
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