जानिए ओवुलेशन क्या होता है (Janiye ovulation kya hota hai)

जानिए ओवुलेशन क्या होता है (Janiye ovulation kya hota hai)

अगर आप गर्भवती होने की तैयारी कर रही हैं, तो आपको ओवुलेशन (ovulation in hindi) की जानकारी होना बेहद ज़रूरी है। गर्भधारण करने का पहला चरण है - अंडे व शुक्राणु का मिलन होना। इसकी बदौलत ही आपकी गर्भावस्था शुरू हो पाएगी।

जिस तरह हर महिला का मासिक चक्र अलग-अलग होता है, ठीक उसी तरह ओवुलेशन का चक्र (ovulation cycle in hindi) भी सभी के लिए अलग होता है। इसके बारे में जानकर आप सही समय पर सेक्स कर सकती हैं, जिससे आपके गर्भधारण करने की संभावना बढ़ जाती है।

भले ही आप अभी गर्भवती होना ना चाहती हों, तब भी ओवुलेशन की प्रक्रिया को समझकर आप अपने मासिक धर्म को ढंग से समझ सकती हैं और इससे जुड़ी किसी भी समस्या का आसानी से पता लगा सकती हैं।

हम आपको इस ब्लॉग में ओवुलेशन (ovulation in hindi) से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण बातें बता रहे हैं, ताकि आप इसे अच्छी तरह से जान सकें और गर्भधारण करने के लिए उचित कदम उठा पाएं।

ओवुलेशन क्या होता है?

(Kya hota hai ovulation in hindi)

Ovulation Guide - kya hota hai

जन्म के समय से ही महिलाओं के अंडाशयों में लाखों अपरिपक्व (अविकसित) अंडे मौजूद होते हैं। एक निश्चित उम्र (लगभग 10 से 15 साल) के बाद ये विकसित होकर निषेचन के लिए तैयार होने लगते हैं। जब किसी महिला के अंडाशय में से परिपक्व (निषेचन के लिए तैयार) अंडा बाहर निकल कर फैलोपियन ट्यूब में पहुँचता है, तो इस प्रक्रिया को ओवुलेशन (ovulation in hindi) कहते हैं। यह उसके मासिक चक्र का एक बेहद अहम भाग होता है और यह लगभग 12 से 24 घण्टे तक चलता है। आमतौर पर सभी महिलाओं को महीने में एक बार ओव्यूलेशन होता है।

अगर अंडाशय से फैलोपियन ट्यूब में पहुंचने के बाद अंडा निषेचित यानी फर्टिलाइज हो जाता है, तो वह गर्भाशय में जाकर बच्चे के रूप में विकसित होने लगता है। अगर अंडाशय से निकलने के बाद अंडा निषेचित नहीं हो पाता है, तो वह नष्ट होकर अगले मासिक धर्म यानी पीरियड के ज़रिए बाहर निकल जाता है।

ओवुलेशन की प्रक्रिया को समझने से आपको गर्भधारण करने या गर्भवती होने से बचने में मदद मिल सकती है।

ओवुलेशन क्यों होता है?

(Kyun hota hai ovulation in hindi)

Ovulation Guide - kyu hota hai

किशोरावस्था की शुरुआत से ही, मासिक चक्र के प्रारंभ में महिलाओं के दिमाग में स्थित पीयूष ग्रन्थि (पिट्यूटरी ग्लैंड) फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन (एफ.एस.एच.) का स्राव करती है। यह हॉर्मोन अंडाशयों को निषेचन के लिए अंडे तैयार करने के लिए प्रेरित करता है। अंडाशय के अंदर छोटे छोटे छेद होते हैं, जिनमें एक तरह का तरल भरा होता है। हर छेद में एक अविकसित अंडा होता है, जो एफएसएच हॉर्मोन की वजह से विकसित होने लगता है। मगर, इनमें से कोई एक (विशेष स्थितियों में एक से अधिक) अंडा ही पूरी तरह से विकसित हो पाता है।

ओवुलेशन (ovulation in hindi) के पहले दिन एस्ट्रोजन हॉर्मोन का स्तर सबसे कम होता है और धीरे-धीरे बढ़ने लगता है। इस हॉर्मोन की वजह से गर्भाशय में अंडे को पोषण देने वाली परत बनती है और आपका शरीर गर्भावस्था के लिए तैयार हो जाता है।

शरीर में एस्ट्रोजन हॉर्मोन की मात्रा लगातार बढ़ने की वजह से ल्युटीनाइजिंग हॉर्मोन (एलएच) का स्तर बढ़ जाता है। एलएच हॉर्मोन के बढ़ने की वजह से परिपक्व अंडे वाला छेद खुल जाता है और अंडा अंडाशय से बाहर फैलोपियन ट्यूब में आ जाता है।

ओवुलेशन कब होता है?

(Kab hota hai ovulation in hindi)

Ovulation Guide - kab hota hai

असल में, ओवुलेशन महिलाओं के मासिक चक्र की अवधि पर निर्भर करता है। इसलिए हर महिला का ओवुलेशन चक्र (ovulation cycle in hindi) अलग होता है। हालांकि इसका सटीक अनुमान लगाना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन अगर आपका मासिक चक्र 28 दिनों का है, तो आमतौर पर अगले मासिक धर्म यानी पीरियड से करीब 14 दिन पहले आपका ओव्यूलेशन हो सकता है। अगर सामान्य शब्दों में कहें, तो आपका ओवुलेशन (ovulation in hindi) आपके पिछले मासिक धर्म के 10वें और 18वें दिन के बीच में कभी भी हो सकता है।

अगर आपका मासिक चक्र अनियमित है, तो आपके ओव्यूलेशन की तारीख का अंदाज़ा लगा पाना कठिन है।

ओवुलेशन होने के लक्षण क्या हैं?

(Ovulation ke lakshan kya hote hai)

Ovulation Guide - lakshan

ओवुलेशन से पहले और इसके ठीक बाद आपके शरीर में हॉर्मोनल बदलाव आते हैं। इनकी वजह से आपको कई तरह के लक्षण महसूस हो सकते हैं। ओवुलेशन (ovulation in hindi) के कुछ प्रमुख लक्षण निम्न हैं -

1. योनि में मौजूद तरल में बदलाव होना (ovulation ke lakshan)

ओवुलेशन से पहले शरीर में एस्ट्रोजन हॉर्मोन की मात्रा बढ़ने की वजह से आपकी योनि से पानी जैसा चिपचिपा तरल निकलने लग सकता है। यह तरल अंडे तक तैर कर जाने में शुक्राणुओं की मदद करता है। हर महिला की योनि में पाया जाने वाला तरल थोड़ा अलग हो सकता है। आप एक साफ उंगली को योनि में डालकर थोड़ा तरल बाहर निकालें और इसे उंगली व अंगूठे से दबाकर देखें। अगर ये बहुत पतला, गीला और फिसलन भरा है, तो आपका ओव्यूलेशन होने वाला है।

2. सर्विक्स में बदलाव होना (ovulation ke lakshan)

ओवुलेशन (ovulation in hindi) के समय गर्भाशय के मुंह यानी सर्विक्स में कई बदलाव आते हैं। इस दौरान यह थोड़ी नर्म व चिपचिपी होती है और थोड़ी खुल जाती है। इस समय इसे छूने पर आपको ऐसा महसूस होगा मानो आप किसी के होठों को छू रही हैं। वहीं ओव्यूलेशन हो जाने के बाद इसे छूने पर आपको ऐसा लगेगा, मानो आप किसी की नाक के ऊपरी भाग को छू रही हैं, यानी ओवुलेशन (ovulation in hindi) के बाद सर्विक्स थोड़ी सख्त हो जाती है।

मगर, सर्विक्स को छूकर इसमें होने वाले अंतर को पहचानना सीखने में आपको थोड़ा समय लग सकता है। इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए अपना एक पैर स्टूल या किसी अन्य ऊंची जगह पर रखें और फिर योनि में उंगली डालकर सर्विक्स को छूकर अंतर का पता लगाएं।

3. स्तनों का संवेदनशील होना (ovulation ke lakshan)

ओवुलेशन (ovulation in hindi) के दौरान, शरीर में होने वाले हॉर्मोनल बदलावों की वजह से महिलाओं के स्तन संवेदनशील हो सकते हैं। इसके साथ ही, उनमें हल्की सूजन या दर्द भी हो सकता है। हालांकि दो से पांच दिनों में उनके स्तन दोबारा सामान्य हो सकते हैं।

4. पेट के निचले भाग में दर्द होना (ovulation ke lakshan)

कुछ महिलाएं ओवुलेशन को महसूस कर सकती हैं। इस दौरान उन्हें पेट के निचले भाग में दाईं या बाईं तरफ दर्द हो सकता है। यह दर्द छेद से अंडा बाहर निकलने की वजह से होता है और यह कुछ मिनट से लेकर कुछ घण्टों तक हो सकता है।

ओव्यूलेशन (ovulation in hindi) के दौरान होने वाले दर्द से परेशान ना हों। आमतौर पर, यह अपने आप ठीक हो जाता है। आप गर्म पानी से नहाकर भी इससे राहत पा सकती हैं।

अगर आपको बहुत तेज या लगातार कुछ घण्टों से ज्यादा समय तक दर्द हो, तो डॉक्टर की सलाह लें। यह किसी समस्या का लक्षण हो सकता है।

5. सेक्स करने की इच्छा बढ़ना (ovulation ke lakshan)

शरीर में एस्ट्रोजन हॉर्मोन की मात्रा बढ़ने की वजह से, इस दौरान महिलाओं की सेक्स करने की इच्छा बढ़ सकती है। लेकिन, विशेषज्ञ कहते हैं कि कई अन्य कारणों से भी आपकी शारीरिक सम्बंध बनाने की इच्छा बढ़ सकती है, इसलिए इसे ओवुलेशन (ovulation in hindi) का पुख़्ता लक्षण नहीं माना जा सकता है।

6. शरीर के तापमान में बदलाव (ovulation ke lakshan)

विशेषज्ञों के अनुसार, ओवुलेशन होने के ठीक पहले महिलाओं के शरीर का तापमान थोड़ा कम हो जाता है। वहीं इसके ठीक बाद, उनके शरीर का तापमान थोड़ा सा बढ़ जाता है। हालांकि अन्य कई कारणों से उनके शरीर के तापमान में बदलाव हो सकते हैं, इसलिए इस लक्षण से ओवुलेशन (ovulation in hindi) का सटीक पता नहीं चलता है।

इसके अलावा ओवुलेशन के कुछ अन्य लक्षण निम्न हैं -

  • योनि से हल्का रक्तस्राव होना।
  • पेट फूलना।
  • सूंघने, चखने या देखने की क्षमता बढ़ना।
  • जी मिचलाना और सिरदर्द होना।

ओवुलेशन होने की जांच कैसे करें?

(Ovulation hone ki jaanch kaise kare)

Ovulation Guide - jaanch

हालांकि यह पता लगाना थोड़ा मुश्किल है कि आपका ओवुलेशन (ovulation in hindi) किस दिन हो रहा है, लेकिन आप निम्न तरीकों से ओव्यूलेशन होने के संभावित दिनों की जांच कर सकती हैं -

1. शरीर के तापमान में बदलाव की जांच (ovulation test in hindi)- इस जांच के लिए आपको अपना मासिक धर्म खत्म होने के बाद, अगले मासिक धर्म तक हर सुबह थर्मामीटर से अपने शरीर के तापमान की जांच करनी चाहिए। आमतौर पर आपका तापमान एक निश्चित अंतराल में (जैसे 97.2 से 97.7 डिग्री) दिखाई देगा।

मगर, ओवुलेशन (ovulation in hindi) के दो से तीन दिनों के बाद आपका तापमान 0.4 डिग्री से लेकर 1 डिग्री तक बढ़ जाएगा। करीब दो से तीन मासिक चक्रों तक रोज़ाना अपने तापमान की जांच करके आपको पता चल सकता है कि आपका ओवुलेशन कब होता है। यह ओवुलेशन (ovulation in hindi) के दिनों का पता लगाने का धीमा, लेकिन काफी असरदार और सटीक तरीका है।

मगर, इस तरीके से आपके पास गर्भवती होने के लिए काफी कम समय होता है, क्योंकि ओव्यूलेशन के बाद अंडा लगभग एक दिन तक ही जीवित रह सकता है। इसलिए आपको अपने शरीर का तापमान बढ़ने के तीन से पांच दिन पहले शारीरिक संबंध बनाने चाहिए, ताकि शुक्राणु सही समय पर अंडे से मिल पाए और आप गर्भधारण कर सकें।

2. सर्वाइकल म्यूकस की जांच (ovulation test in hindi)- आमतौर पर, मासिक धर्म के तीन से पांच दिन बाद तक आपकी योनि काफी सूखी रहती है। इसके बाद आपकी योनि में गाढ़ा चिपचिपा तरल (सर्वाइकल म्यूकस) बनने लगता है। सर्वाइकल म्यूकस आपकी योनि में मौजूद एक विशेष तरह का तरल होता है, जिसे आप अक्सर अपनी पैंटी में देख सकती हैं।

अपनी योनि में उंगली डालकर गर्भाशय के मुंह यानी सर्विक्स पर से थोड़ा सर्वाइकल म्यूकस लेने की कोशिश करें। अगर यह बिल्कुल पानी की तरह गीला, चिपचिपा और चिकना है, तो आपका ओवुलेशन (ovulation in hindi) होने वाला है और आपकी योनि शुक्राणुओं को अंडे तक ले जाने के लिए तैयार है। हर सुबह अपने शरीर का तापमान लेने के साथ ही, योनि में उंगली डालकर सर्वाइकल म्यूकस की जांच करें। इससे थोड़े ही समय में आपको समझ आने लगेगा कि आपका ओवुलेशन कब होता है।

3. ओवुलेशन किट से जांच (ovulation test in hindi)- आप अपने आसपास किसी भी दवाई की दुकान (मेडिकल स्टोर) से ओवुलेशन की जांच करने वाली किट (ovulation predictor kit in hindi) खरीद सकती हैं। यह आपके पेशाब में एलएच (ल्युटेनाइजिंग हॉर्मोन) के स्तर की जांच करता है।

किट के पैकेट पर लिखे निर्देशों के अनुसार उसका उपयोग करें। ओवुलेशन (ovulation in hindi) की संभावित तिथि से पांच-सात दिन पहले इस किट का उपयोग करना आरंभ कर दें। बेहतर परिणामों के लिए आपको सुबह के पहले पेशाब का उपयोग करना चाहिए।

एलएच हॉर्मोन का स्तर ओव्यूलेशन से दस - बारह घण्टे पहले सबसे अधिक होता है। अगर आपका मासिक चक्र 28 दिनों का है, तो करीब बारहवें से चौदहवें दिन के बीच आपके शरीर में एलएच का स्तर सबसे ज्यादा होगा। इस दौरान शारीरिक संबंध बनाने से आपके गर्भधारण करने की संभावना बढ़ जाती है।

कुछ महिलाओं में ओवुलेशन के बिना भी एलएच हॉर्मोन का स्तर बढ़ जाता है, इसलिए इस किट (ovulation predictor kit in hindi) से ओव्यूलेशन के सटीक दिन का पता लगा पाना थोड़ा मुश्किल है।

4. ओवुलेशन कैलेंडर से जांच (ovulation test in hindi)- आमतौर पर ओवुलेशन आपके मासिक चक्र के बीच में होता है। इस विधि के अनुसार, अगर आपका मासिक चक्र 28 दिनों का है, तो ओव्यूलेशन (ovulation in hindi) लगभग चौदहवें दिन के आसपास होगा। आजकल इंटरनेट पर कई ऐसे एप मौजूद हैं, जिनसे आप अपने अंतिम मासिक धर्म के खत्म होने की तारीख के ज़रिए आपका ओवुलेशन कैलेंडर प्राप्त कर सकती हैं।

इस दौरान आपका यह जानना बहुत ज़रूरी है कि इनमें से कोई भी तरीका आपके ओवुलेशन (ovulation in hindi) की सौ प्रतिशत सही जानकारी नहीं दे सकता है। इसलिए सभी तरीकों को मिला-जुला कर काम में लें। कुछ महीनों तक इन्हें आज़माने के बाद आपको अपने ओवुलेशन के दिनों की बेहतर समझ हो जाएगी।

ओवुलेशन और गर्भावस्था में क्या संबंध है?

(Ovulation aur pregnancy me kya relation hai)

Ovulation Guide - pregnancy ka relation

कोई भी महिला गर्भवती तभी हो सकती है, जब उसके अंडे को कोई शुक्राणु निषेचित करे। ओवुलेशन (ovulation in hindi) के ज़रिए अंडा अंडाशय से बाहर निकल कर फैलोपियन ट्यूब में आ पाता है, जहां उसका मिलन शुक्राणु से हो सकता है।

अगर फैलोपियन ट्यूब में अंडे को कोई शुक्राणु निषेचित (फर्टिलाइज) कर देता है, तो दोनों मिलकर एक कोशिका बन जाते हैं और तेजी से विभाजित होकर बढ़ने लगते हैं। एक से दो, दो से चार, चार से आठ और ऐसे बढ़ते हुए अंडा करीब 100 कोशिकाओं का एक गोला बन जाता है। अगर ये गोला गर्भाशय में जाकर जुड़ जाए, तो महिला गर्भवती हो जाती है।

अगर अंडा निषेचित ना हो पाए, तो वह खराब होने लगता है और बाद में पीरियड्स यानी मासिक धर्म के दौरान गर्भाशय की परत के साथ बाहर निकल जाता है।

गर्भवती होने के लिए सेक्स कब करना चाहिए?

(Garbhvati hone ke liye sex kab karna chahiye)

Ovulation Guide - sex kab kare

उचित परिस्थितियों में शुक्राणु आपकी योनि में करीब तीन से पांच दिन तक जीवित रह सकते हैं, लेकिन अंडा केवल 24 से 48 घण्टों तक ही जीवित रह सकता है। इसलिए आपको ओवुलेशन (ovulation in hindi) के चार दिन पहले से लगातार सेक्स करना चाहिए और ओव्यूलेशन वाले दिन खासतौर पर सेक्स करना चाहिए। इससे शुक्राणु सही समय पर अंडे तक पहुंच पाएंगे और आपके गर्भवती होने की संभावना बढ़ जाएगी।

अगर आपको अपने ओवुलेशन के समय की जानकारी नहीं है, तो हफ्ते में तीन से चार बार सेक्स करें या हर दूसरे दिन सेक्स करें। इससे आपके गर्भधारण करने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इस दौरान पर्याप्त आराम करें और अपने खान-पान का खास ख़याल रखें।

क्या ओवुलेशन हर महीने होता है?

(Kya ovulation har mahine hota hai)

Ovulation Guide - har mahine

आमतौर पर जिन महिलाओं का मासिक धर्म नियमित (करीब 28 से 32 दिनों का) होता है, वो हर महीने ओवुलेशन (ovulation in hindi) की प्रक्रिया से गुजरती हैं। मगर, बीमारी या तनाव की वजह से उनके ओव्यूलेशन पर गलत असर पड़ सकता है। कभी-कभार ज्यादा तनाव, गलत खान-पान, ज्यादा एक्सरसाइज आदि की वजह से उनका ओवुलेशन चक्र (ovulation cycle in hindi) गड़बड़ा सकता है।

इस स्थिति में अंडाशय से अंडा नहीं निकलता है, लेकिन उनके गर्भाशय में परत का निर्माण होता है। इसकी वजह से ओव्यूलेशन ना होने के बावजूद उन्हें पीरियड आ सकता है।

क्या एक महीने में एक से ज्यादा बार ओवुलेशन हो सकता है?

(Kya ek mahine me ek se jyada baar ovulation ho sakta hai)

Ovulation Guide - mahine me jyada baar

आपको जानकर हैरानी होगी, लेकिन कुछ महिलाओं के अंडाशयों से एक मासिक चक्र में एक से ज्यादा अंडे निकल सकते हैं। एक शोध के अनुसार, कुछ महिलाओं में तो एक मासिक चक्र के दौरान तीन या इससे ज्यादा अंडे पैदा करने की क्षमता होती है। इस दौरान अगर शुक्राणु एक से अधिक अंडों को निषेचित कर दें, तो उनके पेट में दो या दो से अधिक गर्भ ठहर सकते हैं और वो एक बार में दो या दो से अधिक बच्चों की माँ बन सकती हैं।

इसके साथ ही कृत्रिम गर्भाधान अपनाने वाली महिलाओं को अंडे बनाने वाली दवाईयाँ दी जाती हैं। इसकी वजह से वो महीने में एक से ज्यादा बार ओवुलेट (अंडाशय से अंडे निकलना) कर सकती हैं।

ओवुलेशन अनियमित होने पर क्या करें

(Ovulation aniyamit hone par kya kare)

Ovulation Guide - aniyamit

अगर ओवुलेशन की जांच (ovulation test in hindi) करने पर आपको पता चलता है कि आपका ओवुलेशन नियमित रूप से नहीं हो रहा है, तो आपको इस बारे में डॉक्टर से बात करनी चाहिए। हालांकि ऐसा तनाव, अनियमित खान-पान, ज्यादा व्यायाम व धूम्रपान आदि की वजह से हो सकता है, लेकिन गर्भाशय में गांठ (pcod in hindi) आदि गंभीर समस्याएं भी इसकी वजह बन सकती हैं।

कुछ मामलों में तो महिलाओं का ओव्यूलेशन (ovulation in hindi) समय से पहले ही पूरी तरह से बंद हो जाता है, यह स्थिति किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकती है। इस मामले में डॉक्टर के पास जाने में देर ना करें, क्योंकि आप जितनी जल्दी उनसे सलाह लेंगी, आपके ठीक होने की संभावनाएं उतनी ही ज्यादा होंगी।

अगर आप गर्भधारण करने की तैयारी कर रही हैं, तो ओवुलेशन (ovulation in hindi) की प्रक्रिया को समझना आपके लिए बेहद ज़रूरी है। इससे आप जान पाएंगी कि महीने के किन दिनों में आपके गर्भवती होने की संभावना ज्यादा होती है और आपको किस समय सेक्स करना चाहिए।

ब्लॉग में दिए गए लक्षणों से आप पहचान सकती हैं कि आपका ओव्यूलेशन (ovulation in hindi) हो रहा है या नहीं। इसके अलावा आप ऊपर बताए गए तरीकों से जांच करके यह पता लगा सकती हैं कि आपका ओवुलेशन किस समय होता है। आपको इस बारे में जितनी ज्यादा जानकारी होगी, आपके गर्भवती होने की संभावना उतनी ही ज्यादा बढ़ जाएगी।

अगर आपका ओवुलेशन (ovulation in hindi) नियमित रूप से नहीं हो रहा है या आपको इस बारे में कोई अन्य चिंता है, तो इस बारे में डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।

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