गर्भ में बच्चे की हलचल (baby movement in pregnancy in hindi)

गर्भ में बच्चे की हलचल (baby movement in pregnancy in hindi)

गर्भ में बच्चे की हलचल (baby movement in pregnancy in hindi)

किसी भी महिला के लिए प्रेगनेंसी बेहद खूबसूरत दौर होता है, क्योंकि वह एक नई जिंदगी को इस दुनिया में लाने वाली होती है। गर्भावस्था की शुरूआत से ही महिलाएं अपने होने वाले बच्चे को लेकर काफी उत्साहित रहती हैं। इसलिए वे गर्भ में बच्चे की हलचल (fetal movement in hindi) को महसूस करने के लिए बेताब रहती हैं।

गर्भ में बच्चे की हलचल (baby movement in pregnancy in hindi) दूसरी तिमाही से ही शुरू हो जाती है, लेकिन आमतौर पर गर्भवती महिलाओं को यह थोड़ी देर से महसूस होती है। इस ब्लॉग में हम आपको गर्भ में बच्चे की हलचल (बेबी मूवमेंट) के बारे में सारी जानकारी दे रहे हैं।

1. गर्भ में बच्चे की हलचल पहली बार कब महसूस होती है?

(Garbh me baby movement pehli baar kab mehsus hoti hai)

Baby ki hulchul

गर्भवती को प्रेगनेंसी के 18 से 20वें सप्ताह के बीच गर्भ में बच्चे की हलचल (baby movement in pregnancy in hindi) थोड़ी सी कुलबुलाहट के रूप में महसूस होने लग सकती है। हालांकि यह हलचल बहुत थोड़ी होती है, इसलिए पहली बार मां बनने वाली ज्यादातर महिलाएं इसे महसूस करने में असमर्थ होती हैं।

पहली बार मां बन रही महिलाएं शिशु की पहली हलचल को 20 से 24वें सप्ताह में महसूस कर सकती हैं, तो वहीं अगर महिलाएं पहले भी मां बन चुकी हैं तो वे इन हलचलों को 18वें सप्ताह में भी महसूस कर सकती हैं।

2. सप्ताह दर सप्ताह गर्भ में बच्चे की हलचल कैसे महसूस होती है?

(week dar week garbh me bachche ki halchal kaise mehsus hoti hai)

Baby ki hulchul

गर्भ में बच्चे की हलचल (baby movement in pregnancy in hindi) कभी कभी सिर्फ एक सेकेंड के लिए होती है, जिसे गर्भवती महिलाएं महसूस करने में चूक जाती हैं। प्रेगनेंसी के सप्ताह दर सप्ताह गर्भ में बच्चे की हलचल निम्न तरह से होती है-

  • गर्भ में बच्चे की हलचल: 20 से 24वां सप्ताह (baby movement in pregnancy in hindi: 20 se 24th week)- जैसे जैसे गर्भावस्था का समय बढ़ता जाता है, वैसे वैसे ही शिशु की गतिविधियां तेज़ होने लगती हैं। प्रेगनेंसी के 20 से 24वें सप्ताह में अधिकांश गर्भवती महिलाएं गर्भ में शिशु की गतिविधि महसूस कर सकती हैं। इस दौरान शिशु हाथ और पैर हिलाने लगता है।
  • गर्भ में बच्चे की हलचल: 24 से 28वां सप्ताह (baby movement in pregnancy in hindi: 24 se 28th week)- गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के 24 से 28वें हफ्ते में शिशु की हिचकियां महसूस कर सकती हैं। इस दौरान शिशु अपनी मर्जी से पूरे गर्भाशय में घूमता है। इसके अलावा शिशु इस दौरान आवाज़ों को सुनकर प्रतिक्रिया देने लगता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस समय तक वह अपनी मां की आवाज़ पहचान सकता है।
  • गर्भ में बच्चे की हलचल: 28 से 32वां सप्ताह (baby movement in pregnancy in hindi: 28 se 32th week)- गर्भावस्था के 28 से 32वें हफ्ते में शिशु की गतिविधियों में कमी आ जाती है, लेकिन इस समय वो स्पष्ट रूप से हलचलें करता है। दरअसल, शिशु का विकास होने की वजह से गर्भाशय में उसके लिए जगह कम पड़ जाती है, जिससे वो खुलकर हिल-डुल नहीं पाता है।
  • गर्भ में बच्चे की हलचल: 32 से 36वां सप्ताह (baby movement in pregnancy in hindi: 32 se 36th week)- गर्भावस्था के 32 से 36वें सप्ताह में शिशु सिर के बल नीचे की तरफ खिसक जाता है। इस दौरान गर्भवती महिलाएं, शिशु के हाथ-पैरों की गतिविधियों को काफी ज्यादा महसूस कर सकती हैं। दरअसल, अब शिशु तेज़ी से अपने हाथ पैर चलाने लगता है।
  • गर्भ में बच्चे की हलचल: 36 से 40वां सप्ताह (baby movement in pregnancy in hindi: 36 se 40th week)- प्रेगनेंसी के 36 से 40वें सप्ताह में शिशु काफी बड़ा हो जाता है, जिसकी वजह से अब वह ज्यादा नहीं गतिविधियां नहीं कर पाता है।

इस समय तक शिशु अंगूठा चूसने लगता है और जब उसका अंगूठा छूट जाता है, तो वह उसे खोजने लगता है। इस दौरान गर्भवती महिलाएं शिशु के पैर और सिर स्पष्ट रूप से महसूस कर सकती हैं। सामान्य रूप से, 39वें सप्ताह के बाद वह शांत रहकर अपने जन्म का इंतज़ार करता है।

3. एक दिन में गर्भ में शिशु की गतिविधि कितनी बार महसूस होनी चाहिए?

(Ek din me garbh me shishu ki movement kitni baar mehsus honi chahiye)

Baby ki hulchul

गर्भवती महिलाएं अपने आने वाले नन्हें मेहमान को लेकर काफी ज्यादा चितिंत रहती हैं, जिसकी वजह से उनके मन में सवाल होता है कि गर्भ में उन्हें एक दिन में बेबी की गतिविधियां कितनी बार महसूस होनी चाहिए।

यूँ तो फिलहाल इनकी कोई संख्या निर्धारित नहीं है, लेकिन अगर आप अपने शिशु की गतिविधियां गिनना चाहती हैं, एक चार्ट बना लें और इसमें बच्चे के हिलने-डुलने का समय लिख लें।

इससे आप यह पता लगा पाएंगी कि आपका बच्चा एक दिन में कितनी गतिविधियां (जैसे लात मारना, स्थिति बदलना आदि) करता है। इस चार्ट की मदद से आप बच्चे की गतिविधियों में गिरावट का अनुमान भी लगा सकती हैं।

4. क्या बेबी मूवमेंट नहीं होना हानिकारक है?

(Kya baby movement nahi hona hanikarak hai)

Baby ki hulchul

अक्सर गर्भवती महिलाएं बेबी मूवमेंट (baby movement in hindi) न होने पर घबरा जाती हैं, लेकिन उन्हें थोड़ा धैर्य रखना चाहिए। कभी कभार बच्चा थोड़ी देर के लिए हलचल करना बंद कर सकता है, जोकि सामान्य है। ऐसा होने पर कामकाज छोड़ें और दाईं करवट से लेट कर बच्चे की हलचल (baby movement in hindi) पर ध्यान लगाएं।

अगर आधे से एक घंटे के बाद भी गर्भवती को बच्चे की हलचल महसूस न हो तो उसे नीचे लिखे गए तरीके आज़माने चाहिए-

  • ठंडा पानी पीएं- गर्भवती महिलाओं को बेबी को मूवमेंट कराने के लिए ठंडा पानी पीना चाहिए, इससे तापमान में बदलाव महसूस करने की वजह से शिशु गतिविधि कर सकता है।
  • तेज़ आवाज़ पैदा करें- गर्भवती महिलाएं बेबी को मूवमेंट कराने के लिए जोर से बोलें, तेज़ संगीत बजाएं या फिर दरवाज़े को जोर से धक्का मारें, ऐसा करने पर उनका बेबी हिलने की कोशिश कर सकता है।

ऊपर बताए गए तरीके आज़माने के बाद अगर बेबी मूवमेंट (baby movement in hindi) करने लगता है, तो सब ठीक है। लेकिन अगर वह कोई हलचल न करे, तो यह चिंता की बात हो सकती है।

5. बेबी मूवमेंट न होने पर डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

(Baby movement na hone par doctor ke paas kab jana chahiye)

Baby ki hulchul

गर्भवती महिलाओं को नीचे लिखी गई स्थितियों में फौरन डॉक्टर के पास जाना चाहिए-

  • अगर दो घंटे लेटने के बाद भी बेबी मूवमेंट (baby movement in hindi) महसूस नहीं हो रही है।
  • अगर तेज़ शोर सुनने पर भी आपका शिशु कोई हलचल नहीं कर रहा है।
  • अगर गर्भवती महिलाओं को शिशु की गतिविधि में बहुत ज्यादा (असामान्य) कमी नज़र आ रही है।

6. गर्भ में शिशु क्या गतिविधियां करता है?

(Garbh me shishu kya activities karta hai)

Baby ki hulchul

आमतौर पर शिशु गर्भ में निम्नलिखित गतिविधियां कर सकता है-

  • लात मारना- गर्भावस्था की दूसरी तिमाही से ही शिशु लात मारने लगता है और यह गर्भवती को महसूस होने वाली सबसे प्रमुख गतिविधि है।
  • हिचकियां लेना- गर्भावस्था की पहली तिमाही से ही शिशु हिचकियां लेना शुरू कर देता है, लेकिन ज्यादातर गर्भवती महिलाओं को यह दूसरी या तीसरी तिमाही में महसूस होता है।
  • रोना- रिसर्च की मानें तो, कभी कभी गर्भ में शिशु रोने जैसे हाव भाव बनाता है। यह गतिविधि शिशु दूसरी तिमाही से करता है। इतना ही नहीं, अल्ट्रासाउंड के ज़रिए भी कई बार गर्भ में शिशु को ऐसा करते हुए देखा गया है।
  • हंसना- गर्भावस्था के 26वें सप्ताह में शिशु कई चीज़ों पर अपनी प्रतिक्रिया देने लगता है, इसलिए वह कभी कभी मुस्कुराता है।
  • पेशाब करना- गर्भावस्था की पहली तिमाही के आखिरी से ही शिशु गर्भ में पेशाब करने लगता है।
  • मां की आवाज़ पहचानना- गर्भावस्था के आखिरी 10 सप्ताह में शिशु अपनी मां की आवाज़ को पहचानने लगता है। यही वजह है कि जब भी वह अपनी मां की आवाज़ सुनता है, तो हाथ पैर चलाने लगता है।
  • स्वाद लेना- गर्भावस्था के 10वें सप्ताह से 15वें सप्ताह के बीच शिशु स्वाद लेना सीख जाता है। ऐसे में गर्भवती महिलाएं जो भी खाती हैं, एमनियोटिक द्रव के ज़रिए उनका शिशु भी उसका स्वाद लेता है।
  • उंगली चूसना- गर्भावस्था के 9वें सप्ताह से ही शिशु पैर की उंगली को चूसने लगता है, इसके साथ ही कई बार वह हाथ या पैर का अंगूठा भी चूसता है।
  • आंखें खोलना- गर्भावस्था के 28वें सप्ताह से, जब महिलाएं सोती हैं, तो उनका शिशु जागता है और इस दौरान वह अपनी आंखें खोलता है। इसके अलावा इस दौरान कई बार वह अपनी पलकें झपकाता है।
  • गर्भ में घूमना- गर्भावस्था के 24 से 28वें सप्ताह के बीच में शिशु गर्भ में इधर उधर घूमता है। इस दौरान शिशु कभी घुटनों के बल के होता है, तो कभी पैर को सिर से सटा लेता है।

7. क्या अल्ट्रासाउंड में शिशु की गतिविधि देख सकते हैं?

(Kya ultrasound me shishu ki activity dekh sakte hain)

Baby ki hulchul

गर्भवती महिलाओं के मन में यही चलता रहता है कि उनका शिशु गर्भ में क्या कर रहा होगा। वो अपने बच्चे की हलचल महसूस तो कर लेती हैं, लेकिन उसे देख नहीं पाती हैं। ऐसे में वो अल्ट्रासाउंड के ज़रिए अपने शिशु की हरकतों को देख सकती हैं।

अल्ट्रासाउंड में आपका शिशु कुछ इस तरह से दिख सकता है-

  • प्रेगनेंसी के सातवें या आठवें हफ्ते में अल्ट्रासाउंड- अगर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के सातवें या आठवें हफ्ते में अल्ट्रासाउंड कराती हैं, तो इस दौरान उन्हें शिशु हल्का हिलता डुलता हुआ नजर आ सकता है।
  • प्रेगनेंसी के नौवें हफ्ते में अल्ट्रासाउंड- अगर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के नौवें हफ्ते में अल्ट्रासाउंड कराती हैं, तो इस दौरान उन्हें अपना शिशु धीरे-धीरे पैर हिलाता हुआ या फिर पैर की उंगलियों को चूसता हुआ नज़र आ सकता है।
  • प्रेगनेंसी के दसवें हफ्ते में अल्ट्रासाउंड- अगर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दसवें हफ्ते में अल्ट्रासाउंड कराती हैं, तो इस दौरान वो अपने शिशु को मुंह खोलते हुए या हाथ से चेहरे को छूते हुए देख सकती हैं।
  • प्रेगनेंसी के ग्यारहवें हफ्ते में अल्ट्रासाउंड- अगर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के ग्यारह हफ्ते में अल्ट्रासाउंड कराती हैं, तो इस दौरान उन्हें उनका शिशु जम्हाई या उबासी लेते हुए दिख सकता है।

धीरे धीरे गर्भ में बच्चे की हलचल तेज़ होने लगती है, जिसे गर्भवती महिलाएं बिना अल्ट्रासाउंड के महसूस कर सकती हैं।

गर्भ में बच्चे की हलचल (baby movement in pregnancy in hindi) महसूस होने पर गर्भवती महिलाएं काफी ज्यादा खुश होती है और कई बार वे शिशु की गतिविधि (baby movement in pregnancy in hindi) महसूस नहीं होने पर परेशान हो जाती हैं। लेकिन, इस दौरान परेशान होने के बजाय ब्लॉग में बताए गए उपाय आज़माएँ। अगर बच्चे की सेहत आपको बच्चे के फ़िक्र हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

इस ब्लॉग के विषय- 1. गर्भ में बच्चे की हलचल पहली बार कब महसूस होती है? (Garbh me baby movement pehli baar kab mehsus hoti hai)2. सप्ताह दर सप्ताह गर्भ में बच्चे की हलचल कैसे महसूस होती है? (week dar week garbh me bachche ki halchal kaise mehsus hoti hai)3. एक दिन में गर्भ में शिशु की गतिविधि कितनी बार महसूस होनी चाहिए? (Ek din me garbh me shishu ki movement kitni baar mehsus honi chahiye)4. क्या बेबी मूवमेंट नहीं होना हानिकारक है? (Kya baby movement nahi hona hanikarak hai)5. बेबी मूवमेंट न होने पर डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए? (Baby movement na hone paas kab jana chahiye)6. गर्भ में शिशु क्या गतिविधियां करता है? (Garbh me shishu kya activities karta hai)7. क्या अल्ट्रासाउंड में शिशु की गतिविधि देख सकते हैं? (Kya ultrasound me shishu ki activity dekh sakte hain)
नए ब्लॉग पढ़ें