गर्भावस्था में जांच: क्या आप ये जरूरी बातें जानते हैं? (Garbhavastha me janch: kya aap ye jaruri bate jante hain)

गर्भावस्था में जांच: क्या आप ये जरूरी बातें जानते हैं? (Garbhavastha me janch: kya aap ye jaruri bate jante hain)

प्रेगनेंसी में गर्भवती महिलाओं को अपने साथ-साथ गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्हें अपने और शिशु के स्वास्थ्य की जानकारी हासिल करने के लिए कुछ चेकअप कराने चाहिए, जिन्हें प्रसवपूर्व चेकअप (prenatal check-up in hindi) कहा जाता है।

इस ब्लॉग में हम आपको गर्भावस्था में जांच (garbhavastha me janch) से जुड़ी सारी जानकारी दे रहे हैं।

1. प्रसवपूर्व जांचें क्या होती हैं?

(pregnancy me janche kya hoti hai)

Pregnancy me doctor checkup

डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी में कई तरह के चेकअप या जांच कराने की सलाह देते हैं, इन्हें प्रीनेटल यानि प्रसवपूर्व जांच (prenatal check-up in hindi) कहते हैं। ये जांचें गर्भावस्था की प्रत्येक तिमाही में गर्भवती महिला और उसके शिशु के स्वास्थ्य को परखने के लिए की जाती हैं।

2. प्रेगनेंसी के दौरान नियमित तौर पर कौन सी जांचें होती हैं?

(Pregnancy ke dauran niyamit rup se kaun si janche hoti hai)

Pregnancy me doctor checkup

प्रेगनेंसी की शुरूआत से ही डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को नीचे लिखी गई कुछ प्रमुख जांचें नियमित रूप से कराने की सलाह देते हैं और इसके लिए उन्हें समय समय पर अस्पताल बुलाते हैं-

  • प्रेगनेंसी में रक्त की जांच (blood test during pregnancy in hindi)
  • प्रेगनेंसी में पेशाब की जांच (urine test during pregnancy in hindi)
  • प्रेगनेंसी में ब्लड प्रेशर की जांच (bp test during pregnancy in hindi)
  • प्रेगनेंसी में वजन की जांच (weighing during pregnancy in hindi)

3. प्रेगनेंसी में चेकअप के लिए महिलाओं को डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

(Pregnancy me check-up ke liye mahilao ko doctor ke paas kab jana chahiye)

प्रेगनेंसी के समय गर्भवती महिलाओं को अपना विशेष ध्यान रखना चाहिए, इसके लिए उन्हें समय समय पर डॉक्टर से संपर्क करते रहना चाहिए-

  • गर्भावस्था के 4 सप्ताह से 28वें सप्ताह- गर्भवती महिलाओं को इस दौरान हर महीने चेकअप के लिए अपने डॉक्टर से एक बार ज़रूर मिलना चाहिए।

  • गर्भावस्था के 28वें सप्ताह से 36वें सप्ताह- गर्भवती महिलाओं को इस दौरान हर दो हफ्ते में एक बार चेकअप के लिए डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

  • गर्भावस्था के 36वें सप्ताह से 40वें सप्ताह- गर्भवती महिलाओं को इस दौरान हर एक हफ्ते में एक बार चेकअप के लिए डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

4. प्रेगनेंसी में चेकअप के दौरान महिलाओं को डॉक्टर से क्या पूछना चाहिए?

(pregnancy check up ke dauran mahilao ko doctor se kya puchhna chahiye)

Pregnancy me doctor checkup

जब भी गर्भवती महिलाएं चेकअप के लिए अस्पताल जाएं, तो उन्हें अपने डॉक्टर से नीचे लिखे गए सवाल पूछने चाहिए-

  • मुझे ये टेस्ट कराने के लिए क्यों कहा गया है?
  • क्या मुझे यह टेस्ट कराना ज़रूरी है?
  • इस जांच की कितनी कीमत है?
  • इस जांच में कितना समय लग सकता है?
  • मुझे यह जांच किस जगह से करानी चाहिए?
  • मुझे और मेरे शिशु को कोई दिक्कत तो नहीं है?
  • इस टेस्ट का परिणाम क्या हो सकता है?
  • क्या इस जांच से मुझे और मेरे शिशु को कोई खतरा है?

5. गर्भावस्था की पहली तिमाही में कौन सी जांचें होती हैं?

(Pregnancy ki pehli timahi me kaun si janche hoti hai)

Pregnancy me doctor checkup

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में गर्भवती महिलाओं को हर महीने चेकअप के लिए अपने डॉक्टर से एक बार ज़रूर मिलना चाहिए। इस दौरान डॉक्टर उन्हें नीचे लिखे गए चेकअप कराने की सलाह देते हैं-

  • प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में खून की जांच- प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में गर्भवती महिला के खून की जांच होती है। इसके लिए उसके शरीर में से इंजेक्शन द्वारा थोड़ा सा खून लिया जाता है, जिसकी जांच प्रयोगशाला में की जाती है।

    कुछ जांचों के लिए खून, खाना खाने से पहले निकाला जाता है तो कुछ जांचों के लिए खाना खाने के बाद निकाला जाता है। खून की जांच निम्नलिखित चीज़ों का पता लगाने के लिए की जाती है-

    1. आरएच कारक (Rh factor in hindi)
    2. एचसीजी स्तर (hCG levels in hindi)
    3. यौन संक्रामक रोग, जैसे- हेपेटाइटिस बी, एचआईवी और सिफलिस (hepatitis B, HIV and syphilis in hindi)
    4. विटामिन डी की मात्रा (vitamin D in hindi)
    5. ब्लड शुगर लेवल (blood sugar level in hindi)
    6. हीमोग्लोबिन (hemoglobin in hindi)
    7. सिस्टिक फाइब्रोसिस (cystic fibrosis in hindi)
    8. थैलेसेमिया (thalassemia in hindi)

    इसके अलावा कुछ अन्य बीमारियों (जैसे- मलेरिया और डेंगू आदि) का पता लगाने के लिए गर्भवती महिलाओं के खून की जांच की जाती है।

  • प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में मूत्र की जांच- प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को मूत्र की जांच कराने की सलाह देते हैं। इसके लिए उन्हें पेशाब का नमूना डॉक्टर को देना होता है, जिसके बाद प्रयोगशाला में इसकी जांच होती है। आमतौर पर जांच के लिए सुबह के पहले पेशाब का नमूना लिया जाता है। मूत्र की जांच निम्नलिखित चीज़ों का पता लगाने के लिए की जाती है-

    1. डायबिटीज (gestational diabetes in hindi)
    2. प्रोटीन का स्तर (protein level in hindi)
    3. मूत्र पथ संक्रमण (urinary tract infections in hindi)
  • प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में कॉरियोनिक विलस सैम्पलिंग या सीवीएस (chorionic villus sampling, CVS in hindi)- सीवीएस (pregnancy me CVS in hindi) प्रसवपूर्व कराया जाने वाला एक टेस्ट है। इस टेस्ट के ज़रिए यह पता लगाया जाता है कि कहीं शिशु में कोई आनुवांशिक बीमारी तो नहीं है। यह टेस्ट गर्भावस्था के 11वें और 13वें सप्ताह के दौरान किया जाता है। सीवीएस टेस्ट निम्न चीज़ों का पता लगाने के लिए किया जाता है-

    1. आनुवांशिक विकार, जैसे सिस्टिक फाइब्रोसिस (cystic fibrosis in hindi)
    2. क्रोमोसोमल विकार, जैसे डाउन सिंड्रोम (down syndrome in hindi)
  • प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में अल्ट्रासाउंड (pregnancy me ultrasound)- गर्भावस्था के 6 से 9 सप्ताह के बीच में पहला अल्ट्रासाउंड (pregnancy me ultrasound) किया जाता है। इससे नीचे लिखी गई चीज़ों का पता लगाया जाता है-

    1. भ्रूण की धड़कन
    2. भ्रूण की संख्या
    3. एक्टोपिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi)
  • प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में नॉन-इनवैसिव प्रीनैटल टेस्टिंग या एनआईपीटी (non-invasive prenatal testing, NIPT in hindi)- गर्भावस्था के नौवें सप्ताह के बाद एनआईपीटी (pregnancy me NIPT in hindi) से बच्चे में जन्म से पहले पनपने वाली बीमारियों का पता लगाया जाता है। इसके ज़रिए नीचे लिखी गई समस्याओं के बारे में पता लगाया सकता है-

    1. डाउन सिंड्रोम (down syndrome in hindi)
    2. एडवर्ड सिंड्रोम (edwards syndrome in hindi)
    3. बच्चे की शारीरिक बनावट ठीक न होना

6. प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में कौन सी जांचें होती हैं?

(Pregnancy ki dusri timahi me kaun si janche hoti hai)

Pregnancy me doctor checkup

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को हर महीने या 15 दिन में अस्पताल आने के लिए कह सकते हैं। इस दौरान डॉक्टर उन्हें नीचे लिखी गई जांच कराने की सलाह देते हैं-

  • प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में रक्त की जांच- गर्भावस्था की दूसरी तिमाही के 17वें सप्ताह में डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को रक्त की जांच कराने की सलाह देते हैं। यह जांच उनके खून में हीमोग्लोबिन (hemoglobin in hindi) के स्तर और शुगर लेवल को जांचने के लिए की जाती है।

  • प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में एमनियोसेंटेसिस टेस्ट (amniocentesis test in hindi)- एमनियोसेंटेसिस टेस्ट सामान्य स्थितियों में नहीं कराया जाता है, डॉक्टर इस टेस्ट को कराने की सलाह तब देते हैं, जब गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य में कोई गड़बड़ी नज़र आए। यह टेस्ट गर्भावस्था के 15वें से 20वें सप्ताह के बीच में होता है। इसके लिए डॉक्टर गर्भवती महिला के गर्भ से एमनियोटिक द्रव का थोड़ा सा नमूना लेते हैं। इस टेस्ट से भ्रूण में निम्नलिखित बीमारियों का पता लगाया जाता है-

    1. डाउन सिंड्रोम (down syndrome in hindi)
    2. सिकल सेल एनीमिया (sickle cell anemia in hindi)
    3. थैलेसीमिया (thalassemia in hindi)
    4. हीमोफिलिया (haemophilia in hindi)
  • प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में भ्रूण रक्त परीक्षण- गर्भावस्था के 17वें सप्ताह में डॉक्टर शिशु में किसी भी तरह की बीमारी के लिए भ्रूण रक्त परीक्षण की सलाह देते हैं। इस जांच से निम्नलिखित जटिलताओं का पता लगाया जाता है-

    1. शिशु को एनीमिया (anemia in hindi) होना
    2. शिशु में ऑक्सीजन का स्तर कम होना
    3. शिशु को डाउन सिंड्रोम (down syndrome in hindi) होना
  • प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में क्वाड स्क्रीन जांच (quad screen test in hindi)- डॉक्टर, शिशु में आनुवांशिक और जन्मजात विकारों का पता लगाने के लिए, गर्भावस्था के 15वें सप्ताह से 18वें सप्ताह के बीच में क्वाड स्क्रीन टेस्ट की सलाह देते हैं। इसके लिए गर्भवती महिला के खून का नमूना लिया जाता है। इस टेस्ट से निम्नलिखित चीज़ों का पता लगाया जाता है-

    1. खून में अल्फा-फेटोप्रोटीन (alpha- fetoprotein in hindi) का स्तर
    2. खून में एचसीजी (hCG in hindi) का स्तर
    3. खून व प्लेसेंटा में एस्ट्रियल (एक तरह का ऐस्ट्रोजन हार्मोन) का स्तर
    4. खून में इनहिबिइन-ए10 (inhibin-A 10 in hindi) का स्तर
  • प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में अल्ट्रासाउंड (ultrasound in hindi)- गर्भावस्था के 18वें सप्ताह से 20वें सप्ताह के बीच में डॉक्टर गर्भवती महिला को अल्ट्रासाउंड (ultrasound during pregnancy in hindi) कराने की सलाह देते हैं। इसके ज़रिए डॉक्टर शिशु के विकास का पता लगाते हैं।

  • प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में ग्लूकोज स्क्रीनिंग- गर्भावस्था के 26वें सप्ताह और 28वें सप्ताह में डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को ग्लूकोज स्क्रीनिंग कराने की सलाह देते हैं। इस टेस्ट के ज़रिए डॉक्टर गर्भवती महिलाओं के खून में शुगर के स्तर का पता लगाते हैं। इससे यह भी पता चलता है कि गर्भवती डायबिटीज (gestational diabetes in hindi) से पीड़ित है या नहीं।

7. गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में कौन सी जांचें होती हैं?

(Garbhavastha ki tisri timahi me kaun si janche hoti hai)

Pregnancy me doctor checkup

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को हर दो या चार सप्ताह में अस्पताल आने के लिए कह सकते हैं। इस दौरान डॉक्टर उन्हें नीचे लिखी गई जांच कराने की सलाह देते हैं-

  • प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में खून की जांच- गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में डॉक्टर नीचे लिखे गए जोखिमों का पता लगाने के लिए गर्भवती महिलाओं को खून की जांच कराने की सलाह देते हैं-

    1. एनीमिया (anemia in hindi)
    2. एचआईवी (HIV in hindi)
  • प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में अल्ट्रासाउंड (ultrasound in hindi)- डॉक्टर गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में गर्भवती महिलाओं को निम्नलिखित बातों का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड (ultrasound in hindi) कराने की सलाह देते हैं-

    1. शिशु का विकास
    2. प्लेसेंटा की स्थिति
    3. एमनियोटिक द्रव का स्तर
  • प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में नॉन स्ट्रेस टेस्ट (non stress test in hindi)- यदि गर्भवती महिला की गर्भावस्था जोखिमों से भरी हुई है, तो डॉक्टर उन्हें नॉन स्ट्रेस टेस्ट (non stress test in hindi) कराने की सलाह दे सकते हैं। इस टेस्ट से डॉक्टर निम्नलिखित बातों का पता लगाते हैं-

    1. शिशु का स्वास्थ्य
    2. शिशु पर संकट

महिलाओं को समय समय पर गर्भावस्था में जांच (garbhavastha me janch) करानी चाहिए, इससे उन्हें अपने और अपने शिशु के स्वास्थ्य की सही जानकारी मिलती रहती है। इसके अलावा जब भी गर्भवती महिलाएं डॉक्टर के पास जाएं, तो अपनी जानकारी और तसल्ली के लिए उनसे ऊपर बताए गए सवाल ज़रूर पूछें।

इस ब्लॉग के विषय- 1. प्रसवपूर्व जांचें क्या होती हैं? (Pregnancy me janche kya hoti hai)2. प्रेगनेंसी के दौरान नियमित तौर पर कौन सी जांचें होती हैं? (Pregnancy ke dauran niyamit rup se kaun si janche hoti hai)3. प्रेगनेंसी में चेकअप के लिए महिलाओं को डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए? (Pregnancy me check-up ke liye mahilao ko doctor ke paas kab jana chahiye)4. प्रेगनेंसी में चेकअप के दौरान महिलाओं को डॉक्टर से क्या पूछना चाहिए? (pregnancy check up ke dauran mahilao ko doctor se kya puchhna chahiye)5. गर्भावस्था की पहली तिमाही में कौन सी जांचें होती हैं? (Pregnancy ki pehli timahi me kaun si janche hoti hai)6. प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में कौन सी जांचें होती हैं? (Pregnancy ki dusri timahi me kaun si janche hoti hai)7. गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में कौन सी जांचें होती हैं? (Garbhavastha ki tisri timahi me kaun si janche hoti hai)
नए ब्लॉग पढ़ें