गर्भावस्था में गर्भाशय संकुचन से जुड़ी अहम बातें (garbhavastha me gharbhashay sankuchan se judi aham bate)

गर्भावस्था में गर्भाशय संकुचन से जुड़ी अहम बातें (garbhavastha me gharbhashay sankuchan se judi aham bate)

ज्यादातर गर्भवती महिलाएं अक्सर गर्भाशय संकुचन के बारे में सोचती रहती हैं, क्योंकि यह उनकी डिलीवरी शुरू होने का सबसे अहम लक्षण होता है। अगर आप पहली बार मां बन रही हैं, तो आपको यह जानकर हैरानी होगी कि आपको डिलीवरी से पहले भी प्रेगनेंसी में गर्भाशय संकुचन (contractions during pregnancy in hindi) महसूस हो सकते हैं।

ऐसे में आपके मन में यह सवाल जरूर आता होगा कि आखिर गर्भावस्था में गर्भाशय संकुचन क्या होते हैं? इस ब्लॉग में हम आपको प्रेगनेंसी में गर्भाशय संकुचन (contractions during pregnancy in hindi) से जुड़ी सभी जानकारियां दे रहे हैं।

1. प्रेगनेंसी में गर्भाशय संकुचन क्या हैं?

(pregnancy me garbhashay sankuchan kya hai)

Contractions in pregnancy - kya hai

प्रेगनेंसी में गर्भाशय संकुचन (contractions during pregnancy in hindi) के ज़रिए ही सामान्य प्रसव संभव होता है, जिससे बच्चा योनि की तरफ निरंतर खिसकता रहता है और पहली बार मां के गर्भ से बाहर निकलता है। यह एक एेसी प्रक्रिया होती है, जिसमें महिला के शरीर से निकलने वाले हार्मोनों की वजह से उसके गर्भाशय की दीवार सिकुड़ती और फैलती है।

दूसरे शब्दों में, गर्भाशय संकुचन के समय इस अंग की मांसपेशियां एक लयबद्ध ढंग से कसती और ढीली होती हैं और बच्चे को आगे धकेलती हैं, ताकि उसका जन्म हो सके।

डॉक्टरों के अनुसार गर्भावस्था में गर्भाशय संकुचन (contractions during pregnancy in hindi) प्रसव के काफी पहले से शुरू हो जाते हैं, लेकिन ऐसे संकुचनों की अवधि प्रसव के संकुचनों की तुलना में बेहद कम होती है।

2. प्रेगनेंसी में गर्भाशय संकुचन क्यों होते हैं?

(pregnancy me garbhashay sankuchan kyu hote hai)

Contractions in pregnancy - kyu hote hai

असल में, गर्भावस्था पूरी होने पर गर्भाशय संकुचन (contractions during pregnancy in hindi) होना एक बेहद जटिल प्रक्रिया है और अभी तक वैज्ञानिक इसे पूरी तरह से समझ नहीं पाए हैं। एक शोध के अनुसार गर्भावधि पूरी होने पर गर्भाशय दो हार्मोन स्रावित करता है- प्रोस्टेग्लैंडिन (prostaglandin in hindi) और ऑक्सीटोसिन (oxytocin in hindi)। ये हार्मोन दिमाग को ऐसे संकेत भेजते हैं, जिनसे गर्भाशय में संकुचन होने लगते हैं और प्रसव पीड़ा शुरू हो जाती है।

हालांकि, प्रसव से पहले होने वाले गर्भाशय संकुचनों के बारे में वैज्ञानिकों ने कुछ चीजों का पता लगा लिया है, लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले गर्भाशय संकुचनों (contractions during pregnancy in hindi) का सटीक कारण अभी भी अज्ञात है। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार ऑक्सीटोसिन हार्मोन इनका प्रमुख कारण हो सकता है।

निम्न स्थितियों में आप गर्भावस्था में गर्भाशय संकुचन (contractions during pregnancy in hindi) महसूस कर सकती हैं-

  • योनि की जांच- गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर विभिन्न कारणों से महिलाओं की योनि की जांच करते हैं, जैसे गर्भाशय में रसौली होना, गर्भाशय सम्बंधी अन्य समस्याएं आदि। इस दौरान आपको गर्भाशय संकुचन महसूस हो सकते हैं। इन संकुचनों का कारण अज्ञात है। इस दौरान आपको पेट के निचले भाग में थोड़ा दर्द महसूस हो सकता है।

  • संभोग- गर्भावस्था की तीसरी तिमाही के अंतिम चरण में संभोग करने यानी शारीरिक संबंध बनाने से आपको गर्भाशय संकुचन (contractions during pregnancy in hindi) महसूस हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अगर गर्भवती ऑर्गेज़म यानी चरमसुख महसूस करती है, तो ऐसा होना पूरी तरह से सामान्य है। ये संकुचन थोड़े पीड़ादायी हो सकते हैं और कुछ ही देर में रुक जाते हैं। अगर संकुचन न रुकें, तो ये समयपूर्व प्रसव के लक्षण हो सकते हैं। इस स्थिति में डॉक्टर की सलाह लें।

  • व्यायाम- गर्भावस्था की तीसरी तिमाही के मध्य या अंतिम चरण में ज्यादा एक्सरसाइज करने से गर्भवती को गर्भाशय संकुचन (contractions during pregnancy in hindi) महसूस हो सकते हैं। आमतौर पर ये संकुचन कुछ देर बाद रुक जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में ये समयपूर्व प्रसव (premature delivery in hindi) के लक्षण हो सकते हैं। इसलिए अगर आपके साथ ऐसा हो, तो एक्सरसाइज न करें और डॉक्टर की सलाह लें।

  • शरीर में पानी की कमी- महिला के शरीर में पानी की कमी होने पर, उसे गर्भावस्था में गर्भाशय संकुचन (contractions during pregnancy in hindi) महसूस हो सकते हैं। दरअसल, इससे उसके शरीर में खून की मात्रा घट जाती है, जिसे बढ़ाने के लिए ऑक्सीटोसिन हार्मोन का स्राव होता है। अगर संकुचन कुछ देर बाद बंद ना हों, तो यह स्थिति खतरनाक हो सकती है और गर्भवती का समयपूर्व प्रसव हो सकता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

  • निप्पलों में उत्तेजना- संभोग करने या किसी अन्य कारण से गर्भवती के निप्पलों में उत्तेजना हो सकती है। इससे उसे गर्भाशय संकुचन (contractions during pregnancy in hindi) महसूस हो सकते हैं, जो कि कुछ ही देर में रुक जाते हैं। अगर आपको ये संकुचन एक घंटे बाद भी महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

3. गर्भावस्था में गर्भाशय संकुचन कितने प्रकार के होते हैं?

(pregnancy me garbhashay sankuchan kitne prakar ke hote hai)

Contractions in pregnancy - prakaar

विभिन्न विशेषज्ञों के अनुसार प्रेगनेंसी में गर्भावस्था संकुचन (contractions during pregnancy in hindi) मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं-

  • ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन (braxton hicks contractions in hindi)- ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन आमतौर पर गर्भावस्था की तीसरी तिमाही की शुरुआत में यानी 20वें सप्ताह के बाद शुरू होते हैं। इस दौरान महिला को गर्भाशय में अकड़न महसूस हो सकती है। आमतौर पर इस दौरान गर्भवती को पेट या पीठ में किसी भी प्रकार का कोई दर्द नहीं होता है, लेकिन कभी-कभी उसे पेट के निचले हिस्से में हल्का दर्द व एेंठन हो सकती है।

    • प्रेगनेंसी में ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन करीब 30 सेकेंड से भी कम समय से लेकर दो मिनट तक महसूस हो सकते हैं।
    • ये संकुचन नियमित नहीं होते हैं बल्कि आते-जाते रहते हैं, यानी ये प्रसव के संकुचनों की तरह लगातार महसूस नहीं होते हैं।
    • इसके साथ ही, पैदल चलने या सोने की अवस्था में बदलाव करने से ये बंद हो सकते हैं।
    • अगर आपको ये संकुचन हर दस मिनट या उससे कम समय अंतराल में लगातार महसूस हों, तो यह समयपूर्व प्रसव के लक्षण हो सकते हैं, इसलिए इस स्थिति में बिना कोई देर किए तुरंत अस्पताल जाएं।
  • फाल्स गर्भाशय संकुचन (false contractions in hindi)- ये गर्भाशय संकुचन (contractions during pregnancy in hindi) आमतौर पर वास्तविक प्रसव के संकुचन की शुरुआत से पहले महसूस किए जा सकते हैं। इनके जरिए सर्विक्स डिलीवरी के लिए तैयार होती है। इस दौरान गर्भवती को पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द, ऐंठन और अकड़न महसूस हो सकती है।

    • प्रसव के अभ्यास वाले गर्भाशय संकुचन का कोई निश्चित समय नहीं होता, ये कुछ सेकेंड्स से लेकर कुछ मिनट तक महसूस हो सकते हैं। ये संकुचन वास्तविक प्रसव के संकुचनों की तुलना में काफी कमजोर होते हैं।
    • ये गर्भाशय संकुचन अनियमित होते हैं और वास्तविक प्रसव के संकुचनों की तरह लगातार महसूस नहीं होते हैं। जैसे अगर आपको दिन में एक बजे 30 सेकेंड के लिए गर्भाशय संकुचन (contractions during pregnancy in hindi) महसूस हुआ और बंद हो गया। फिर करीब चार घंटे बाद फिर से गर्भाशय संकुचन महसूस हुआ, तो यह फाल्स संकुचन हो सकते हैं।
    • आपको अपनी अवस्था में बदलाव करने से इन गर्भाशय संकुचनों (contractions during pregnancy in hindi) से राहत मिल सकती है और इनसे सर्विक्स का द्वार नहीं खुलता है।
    • अगर आपको गर्भाशय में नियमित समय अंतराल पर लगातार संकुचन महसूस हो रहे हैं, तो ऐसा होना समय से पहले डिलीवरी का लक्षण हो सकता है। इस स्थिति में बिना किसी देरी के तुंरत डॉक्टर की सलाह लें और अस्पताल जाएं।
  • प्रसव के वास्तविक गर्भाशय संकुचन- गर्भवती को प्रसव के वास्तविक गर्भाशय संकुचन (contractions during pregnancy in hindi) तब महसूस होते हैं, जब बच्चा पैदा होने वाला होता है। आमतौर पर ये गर्भावस्था के अंतिम दौर में, यानी 37वें सप्ताह के बाद, कभी भी शुरू हो सकते हैं। प्रसव के ठीक पहले शरीर में ऑक्सीटोसिन हॉर्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो गर्भाशय संकुचन को प्रेरित करता है।

    इस दौरान गर्भवती को सबसे पहले पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द महसूस होता है, जो धीरे-धीरे पेट के निचले हिस्से तक फैल जाता है। इस दौरान गर्भवती का पेट कभी सख़्त तो कभी नर्म महसूस होने लगता है।

    • शुरुआत में ये संकुचन लगातार 30 सेकेंड से लेकर 70 सेकेंड तक महसूस होते हैं। फिर हर पांच मिनट या उससे कम समय में गर्भवती को बार बार गर्भाशय संकुचन (contractions during pregnancy in hindi) महसूस होते हैं और इनकी अवधि बढ़ती जाती है।
    • प्रसव के वास्तविक संकुचन नियमित होते हैं। सामान्य रूप से, एक बार शुरू हो जाने के बाद ये संकुचन तब तक लगातार होते रहते हैं, जब तक कि शिशु का जन्म नहीं हो जाता।
    • आपको अपनी अवस्था में बदलाव करने से इन संकुचनों से छुटकारा नहीं मिलता है। इनसे सर्विक्स का द्वार खुल जाता है, जिससे डॉक्टरों की भाषा में सर्विक्स डायलेशन (cervix dilation in hindi) कहते हैं।
    • असली प्रसव के गर्भाशय संकुचन धीरे-धीरे शुरू होते हैं, जोकि बाद में ये तेज़ होते जाते हैं।

नोट- हर महिला को गर्भावस्था में गर्भाशय संकुचन (contractions during pregnancy in hindi) अलग ढंग से महसूस हो सकते हैं। यह इन गर्भाशय संकुचनों की अवधि व इस दौरान दर्द की तीव्रता पर निर्भर करता है कि गर्भवती को ये कैसे महसूस होंगे।

4. गर्भावस्था में गर्भाशय संकुचन के लक्षण क्या हैं?

(pregnancy me garbhashay sankuchan ke lakshan kya hai)

Contractions in pregnancy - lakshan

गर्भावस्था में विभिन्न प्रकार के गर्भाशय संकुचनों (contractions during pregnancy in hindi) के बारे में नीचे बताया जा रहा है-

  • अभ्यास संकुचन या फाल्स संकुचन के लक्षण (symptoms of false contractions or practice contraction in hindi)

    • पेट का निचला भाग सख्त होना।
    • पेट के निचले हिस्से में एेंठन होना।
    • पेट के निचले भाग में हल्का या तीव्र दर्द होना।
    • गर्भाशय में संवेदनशीलता महसूस होना।
    • पेट के निचले भाग में अकड़न महसूस होना।
  • वास्तविक संकुचन के लक्षण (symptoms of actual contractions)

    • पीठ के निचले हिस्से में दर्द होना जो धीरे-धीरे पेट की तरफ बढ़ता है।
    • पानी की थैली फट जाना, जिससे योनि से सफेद पानी (safed pani) का तेज़ रिसाव हो सकता है।
    • पेट और पीठ के निचले हिस्से में असहनीय दर्द और दबाव महसूस होना, क्योंकि इस दौरान बच्चा नीचे की ओर यानी योनि की ओर बढ़ता है।

5. प्रेगनेंसी में गर्भाशय संकुचन होने पर क्या करें

(pregnancy me garbhashay sankuchan hone par kya kare)

Contractions in pregnancy - kya kare

प्रेगनेंसी में गर्भाशय संकुचन (contractions during pregnancy in hindi) महसूस होने पर आप विभिन्न उपायों को अपनाकर संकुचन की असहजता से राहत पा सकती हैं। यह उपाय नीचे बताए जा रहे हैं-

  • ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन होने पर क्या करें (braxton hicks contractions hone par kya kare)-
    • ज्यादा देर तक एक ही जगह पर न बैठें और अपनी जगह बदलें। कभी-कभी पैदल चलने से इस दौरान होने वाली असहजता से राहत मिल सकती है।
    • कभी कभी गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी की वजह से, उसे गर्भाशय संकुचन महसूस हो सकते हैं, इसीलिए भरपूर मात्रा में पानी पीएं।
    • ब्रेक्सटन हिक्स संकुटन का संदेह होने पर महिलाएं सांस संबंधी क्रियाएं (relaxation exercises or breathing exercises ) कर सकती है। इन्हें काफी फायदेमंद माना जाता है। हालांकि इनसे आपका दर्द कम तो नहीं होगा, लेकिन इस दौरान होने वाली असहजता से आपको राहत मिल सकती है।
    • इस दौरान आप हल्के गरम पानी से स्नान भी कर सकती हैं।

याद रखें- अगर किसी महिला की गर्भावधि 37 सप्ताह से कम है और उसे प्रसव के वास्तविक गर्भाशय संकुचन जैसे लक्षण महसूस हों, तो यह समयपूर्व प्रसव के संकेत हो सकते हैं। इसीलिए किसी भी प्रकार के उपाय आजमाने से पहले डॉक्टर की सलाह ले लें।

  • प्रसव के वास्तविक गर्भाशय संकुचन होने पर क्या करें (actual contractions hone par kya kare)-

    गर्भावस्था के 37वें सप्ताह के बाद अगर आपको गर्भाशय संकुचन (contractions during pregnancy in hindi) महसूस हो रहे हैं, तो यह वास्तविक गर्भाशय संकुचन हो सकते हैं, जिससे अक्सर महिलाओं को प्रसव पीड़ा शुरू हो जाती है। इसीलिए इस दौरान लगातार संकुचन होने पर डॉक्टर से सलाह लें।

    प्रेगनेंसी के अलग अलग चरणों में गर्भवती को विभिन्न प्रकार के गर्भाशय संकुचन होते हैं। इनकी वजह से अक्सर उसे प्रसव के अभ्यास वाले और वास्तविक गर्भाशय संकुचनों को समझने में उलझन होती है।

हमेशा याद रखें कि हर महिला को प्रसव के संकुचन अलग ढंग से महसूस हो सकते हैं। इसके साथ ही गर्भावस्था में गर्भाशय संकुचनों (contractions during pregnancy in hindi) से जुड़ी किसी भी आशंका के लिए डॉक्टर से सलाह लें।

इस ब्लॉग के विषय- 1. प्रेगनेंसी में गर्भाशय संकुचन क्या हैं? (pregnancy me garbhashay sankuchan kya hai)2. प्रेगनेंसी में गर्भाशय संकुचन क्यों होते हैं? (pregnancy me garbhashay sankuchan kyu hote hai)3. गर्भावस्था में गर्भाशय संकुचन कितने प्रकार के होते हैं? (pregnancy me garbhashay sankuchan kitne prakar ke hote hai)4. गर्भावस्था में गर्भाशय संकुचन के लक्षण क्या हैं? (pregnancy me garbhashay sankuchan ke lakshan kya hai)5. प्रेगनेंसी में गर्भाशय संकुचन होने पर क्या करें? (pregnancy me garbhashay sankuchan hone par kya kare)
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