गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड : एक कंप्लीट गाइड (Pregnancy me ultrasound : ek complete guide)

गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड : एक कंप्लीट गाइड (Pregnancy me ultrasound : ek complete guide)

गर्भावस्था के दौरान शिशु के स्वास्थ्य या विकास का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड बहुत ज़रूरी होता है। गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड या सोनोग्राफी जाँच के ज़रिये डॉक्टर शिशु के शरीर में होने वाली बीमारियों और अंदरूनी अंगो की गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। अल्ट्रासाउंड एक तरह का साउंड वेव टेस्ट होता है, जिससे हमारे शरीर के अंदर के हिस्सों की गतिविधियों की विशेष तस्वीरें मिलती हैं। इस ब्लॉग में हम आपको गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड से जुड़ी ज़रूरी बातें बता रहे हैं।

प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड टेस्ट से किन बातों की जानकारी मिलती है?

(pregnancy me ultrasound test se kin bato ki jankari milti hai)

गर्भावस्था के दौरान महिला और बच्चे की देखभाल के लिए अल्ट्रासाउंड टेस्ट (ultrasound during pregnancy in hindi) कराना बेहद जरुरी होता है। प्रेगनेंसी में सोनोग्राफी टेस्ट के द्वारा महिला के गर्भ में पल रहे भ्रूण (fetus in hindi) के स्वास्थ्य की जानकारी प्राप्त की जा सकती हैं। नीचे हम आपको बता रहे हैं कि प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड में टेस्ट (pregnancy me ultrasound) कराने से किन बातों की जानकारी प्राप्त होती है।

गर्भावस्था की पहली तिमाही में सोनोग्राफी टेस्ट कराने से किन बातों की जानकारी मिलती है?

(garbhavastha ki pehli timahi me ultrasound test karane se kin bato ki jankari milti hai)


ultrasound in pregnancy 1st trimester

गर्भावस्था की पहली तिमाही में 6 से 9 सप्ताह के गर्भ के बाद पहला अल्ट्रासाउंड टेस्ट कराना चाहिए। डॉक्टर्स के मुताबिक गर्भावस्था की पहली तिमाही (first trimester of pregnancy in hindi) में अल्ट्रासाउंड कराने के निम्न फायदें होते हैं।

भ्रूण की धड़कन की जानकारी मिलती है पहली तिमाही (first trimester of pregnancy in hindi) में अल्ट्रासाउंड गर्भावस्था के दौरान गर्भ में पल रहे भ्रूण के स्वास्थ के बारे में जानकारी उपलब्ध कराता है। इस दौरान अल्ट्रासाउंड कराने से भ्रूण की धड़कन (baby ki heartbeat) की जानकारी भी मिलती है, हालांकि ये बहुत सटीक जानकारी नहीं होती है। गर्भ में भ्रूण के दिल की धड़कन सामान्य नहीं होने पर महिलाओं को डॉक्टर की सलाह से ज़रूरी इलाज लेना चाहिए।

अल्ट्रासाउंड गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के लिवर और किडनी में होने वाली कई अन्य बीमारियों की भी जानकारी देता है, जिससे गर्भवती महिला और बच्चे को समय पर उचित उपचार दिया जा सके।

एक्टोपिक प्रेगनेंसी की जानकारी मिलती है अल्ट्रासाउंड गर्भावस्था के दौरान एक्टोपिक प्रेगनेंसी (ectopic pregnancy in hindi) के बारे में भी जानकारी दे सकता है। एक्टोपिक प्रेगनेंसी की अवस्था में भ्रूण का विकास गर्भाशय के बाहर फैलोपियन ट्यूब या पेट में होता है। इसे ट्यूबल गर्भावस्था (tubal pregnancy in hindi) भी कहा जाता है। ऐसी अवस्था में डॉक्टर से उचित सलाह लेनी चाहिए।

बच्चे की डिलीवरी की संभावित डेट की जानकारी मिल सकती है अल्ट्रासाउंड गर्भावस्था की पहली तिमाही (first trimester of pregnancy in hindi) में महिला की संभावित डिलीवरी की तारीख के बारे में भी जानकारी दे सकता हैं।

भ्रूण की संख्यां के बारे में जानकारी मिल सकती है प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में अल्ट्रासाउंड (ultrasound in hindi) द्वारा गर्भ में पल रहे शिशुओं की संख्या के बारे में भी जानकारी मिल सकती है। हालांकि गर्भावस्था की पहली तिमाही में बच्चो की संख्या की सटीक जानकारी नहीं मिलती है।

गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में सोनोग्राफी टेस्ट कराने से क्या जानकारी मिलती है?

(garbhavastha ki dusri timahi me sonography test karane se kya jankari milti hai)

ultrasound in pregnancy 2nd trimester

पहली तिमाही में अल्ट्रासाउंड (ultrasound during pregnancy in hindi) कराने के बाद डॉक्टर अक्सर गर्भवती महिलाओं को 18 से 24 सप्ताह के गर्भ के समय दोबारा अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देते हैं। दूसरी तिमाही (second trimester of pregnancy in hindi) में अल्ट्रासाउंड कराने पर गर्भवती महिला और भ्रूण के बारे निम्न जानकारी मिल सकती है।

भ्रूण के स्वास्थ्य की जानकारी मिलती है दूसरी तिमाही में सोनोग्राफी टेस्ट के द्वारा महिलाओं के पेट में पल रहे भ्रूण के स्वास्थ के बारे में और अधिक जानकारी मिल सकती है। इस दौरान महिलाएं अल्ट्रासाउंड टेस्ट (ultrasound test in hindi) करवा कर बच्चे के सभी अंगो के विकास और अंगों के आकार की जानकारी प्राप्त कर सकती हैं।

बच्चे का लिंग पता चल सकता है गर्भावस्था की दूसरी तिमाही के दौरान शिशु के शरीर की रूपरेखा तैयार होने लगती है और उसके अंगों का बेहद तेजी से विकास होता है। दूसरी तिमाही में होने वाले अल्ट्रासाउंड से शिशु के लिंग का पता चल सकता है, लेकिन आमतौर पर डॉक्टर ऐसा नहीं करते हैं।

ध्यान दें - गर्भ में बच्चे के लिंग की जांच करवाना क़ानूनन अपराध है। इससे आपको जेल की सजा हो सकती है। इसलिए भ्रूण के लिंग की जांच ना करवाए।

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में अल्ट्रासाउंड करवाने से क्या जानकारी मिलती है?

(garbhavastha ke third trimester me ultrasound karane se kya jankari milti hai)

ultrasound in pregnancy 3rd trimester

ज्यादातर गर्भवती महिलाओं का आखिरी अल्ट्रासाउंड दूसरी तिमाही के अंत में, यानी करीब 20वें सप्ताह में होता है, लेकिन अगर डॉक्टर्स को आपकी ड्यू डेट (प्रसव की अनुमानित तारीख) आगे पीछे होने की आशंका है, तो वो आपकी गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में भी अल्ट्रासाउंड करते हैं। इसके अलावा गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में अल्ट्रासाउंड के कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं -

  • प्लेसेंटा के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए (जैसे प्लेसेंटा स्वस्थ है या नहीं आदि)।
  • शिशु के विकास के बारे में किसी प्रकार की आशंका होने पर, उसके विकास की सही जानकारी प्राप्त करने के लिए।
  • आपके गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की मात्रा की सही जानकारी प्राप्त करने के लिए।
  • समय से पहले गर्भाशय में संकुचन शुरू होने पर।
  • तीसरी तिमाही में रक्तस्राव की सही वजह पता लगाने के लिए।

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही के दौरान किए जाने वाले अल्ट्रासाउंड से आपको निम्न जानकारी मिल सकती है -

शिशु के विकास की जानकारी मिलती है गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में होने वाले अल्ट्रासाउंड से गर्भ में शिशु की स्थिति और उसके विकास की जानकारी मिलती है। इसके साथ ही इस अल्ट्रासाउंड से शिशु के शरीर के शारीरिक विकार (जैसे हाथ की उंगलियां विकसित ना होना आदि) का भी पता चलता है।

प्लेसेंटा की स्थिति की जानकारी मिलती है अगर 20वें सप्ताह की अल्ट्रासाउंड जांच में आपके प्लेसेंटा की स्थिति सर्विक्स के मुंह पर थी (प्लेसेंटा प्रिविया), तो डॉक्टर तीसरी तिमाही में अल्ट्रासाउंड के ज़रिए प्लेसेंटा की स्थिति का पता लगाते हैं। 95 प्रतिशत मामलों में आपकी ड्यू डेट आने से पहले प्लेसेंटा सर्विक्स पर से हट जाता है, लेकिन ऐसा ना होने पर डॉक्टर आपको सिजेरियन प्रसव की सलाह देते हैं।

शिशु के शरीर में रक्त और ऑक्सीजन आपूर्ति की जानकारी मिलती है गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में किए जाने वाले अल्ट्रासाउंड से डॉक्टर शिशु के शरीर में खून और ऑक्सीजन की आपूर्ति का पता लगाते हैं। कोई समस्या दिखाई देने पर डॉक्टर तुरंत इलाज शुरू कर सकते हैं।

एमनियोटिक द्रव की मात्रा की जानकारी मिलती है अगर डॉक्टरों को आपके गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की मात्रा कम होने की आशंका हो, तो वो गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह देते हैं। इस अल्ट्रासाउंड के ज़रिए आपके गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की सही मात्रा का पता चलता है।

गर्भ में शिशु की मृत्यु की जानकारी मिलती है अगर गर्भवती को पेट पर चोट लगी है या किसी अन्य वजह से डॉक्टर्स को आशंका है कि गर्भ में शिशु को नुकसान हुआ है, तो वो तीसरी तिमाही में अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह देते हैं। इस अल्ट्रासाउंड में शिशु की हलचल की जांच की जाती है और उसके दिल की धड़कन सुनी जाती है। अगर दुर्भाग्य से जाँच में शिशु के शरीर में कोई गतिविधि नहीं दिखती और ना ही उसकी धड़कन सुनाई नहीं देती, तो शिशु मृत हो सकता है।

गर्भावस्था में रक्तस्राव की वजह पता चलती है यह अल्ट्रासाउंड गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में रक्तस्राव की वजह की जानकारी देता है। यह रक्तस्राव गर्भाशय या प्लेसेंटा में किसी प्रकार की चोट लगने की वजह से हो सकता है।

प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड टेस्ट कैसे होता है?

(pregnancy me ultrasound test kaise kiya jata hai)


pregnancy me ultrasound test

  • जिस गर्भवती महिला का सोनोग्राफी टेस्ट (sonography test in hindi) करना होता है, उसे डॉक्टर सबसे पहले एक आरामदायक बेड पर लेटा देते हैं।

  • इसके बाद डॉक्टर प्रेग्नेंट महिला के पेट पर एक जैल (चिपचिपा लिक्विड) लगाते हैं।

  • पेट पर जैल लगाने के बाद डॉक्टर गर्भवती महिला के पेट पर एक मशीन लगाते हैं, जिसे अल्ट्रासोनिक ट्रांसड्यूसर (ultrasonic transducer in hindi) कहा जाता है।

  • इस अल्ट्रासोनिक ट्रांसड्यूसर या यू.टी. को महिला के पेट पर घुमाया जाता हैं। इससे निकलने वाली तरंगो से कंप्यूटर पर बच्चे की एक फोटो बनती है।

  • सोनोग्राफी टेस्ट (sonography test in hindi) के दौरान कंप्यूटर पर बनने वाली इस फोटो से गर्भ में पल रहे शिशु की सही स्थिति और उसकी गतिविधियों के बारे में जानकारी मिलती है। इस फोटो में बच्चे के ठोस उत्तक जैसे हड्डियों की आकृति सफेद रंग की बनती है और बच्चे के नरम उत्तक जैसे आंत, लिवर आदि भूरे और धब्बेदार रंग के दिखाई देते हैं।

  • गर्भ में बच्चा जिस द्रव्य (लिक्विड) में रहता है उसका कोई रंग नहीं होता है, इसलिए प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड (ultrasound during pregnancy in hindi) जांच के दौरान उसका रंग काला दिखाई देता है।

प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड से माँ और शिशु के किन अंगो की जानकारी प्राप्त की जा सकती है?

(pregnancy me ultrasound se ma or shishu ke kin ango ki jankari milti hai)


ultrasound in pregnancy information

वैसे तो अल्ट्रासाउंड के ज़रिए मां के शरीर के लगभग सभी अंगों की जांच की जा सकती है, लेकिन नीचे हम माँ और शिशु के उन अंगों की लिस्ट दे रहे हैं, जिनकी प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड (pregnancy me ultrasound) के ज़रिए जांच की जाती है।

प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड के ज़रिए माँ के इन अंगों की जाँच की जाती है -

  • गर्भाशय
  • मूत्राशय
  • अंडाशय
  • फैलोपियन ट्यूब्स
  • प्लेसेंटा
  • एमनियोटिक द्रव
  • सर्विक्स
  • किडनी

प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड के ज़रिए शिशु के इन अंगों की जाँच की जाती है -

  • दिमाग
  • दिल
  • किडनी
  • वृषण/अंडकोष
  • लिंग (भारत में यह जाँच करवाना दंडनीय अपराध है)
  • हाथ-पैर
  • हड्डियाँ
  • आँख
  • लिवर
  • मुँह / चेहरा

प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड टेस्ट कब कराया जाता है?

(pregnancy me ultrasound test kab karaya jata hai?)


pregnancy me ultrasound test

गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर महिलाओं को समय-समय पर अल्ट्रासाउंड टेस्ट कराने की सलाह देतें है। गर्भावस्था में सोनोग्राफी टेस्ट से महिलाओं और उनके गर्भ में पल रहे शिशु को हो सकने वाली कई प्रकार की बीमारियों का पता लगाया जा सकता है, इससे शिशु की बीमारियों को प्रारम्भिक अवस्था में ही ठीक किया जा सकता है। इसलिए महिलाओं को डॉक्टर्स की सलाह के अनुसार प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड टेस्ट (ultrasound during pregnancy in hindi) कराना चाहिए। आमतौर पर अल्ट्रासाउंड गर्भावस्था की पहली व दूसरी तिमाही में किया जाता है, लेकिन विशेष परिस्थितियों जैसे प्लेसेंटा प्रिविया, में डॉक्टर गर्भवती को तीसरी तिमाही में भी अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह देते हैं।

प्रेगनेंसी में कौन से अल्ट्रासाउंड टेस्ट होते हैं?

(pregnancy me kaun se ultrasound test hote hai?)


types of ultrasound test in pregnancy

गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड (ultrasound in hindi) कराने के बाद अगर भ्रूण के किसी अंग के कम विकसित होने की आशंका हो या भ्रूण को कोई खतरा हो तब, ऐसी अवस्था में डॉक्टर महिलाओं को 2डी, 3डी और 4डी अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देते है। 2डी, 3डी और 4डी अल्ट्रासाउंड में भ्रूण के हर अंग की बारीकी से जांच की जाती है।

ट्रांसवैजाइनल अल्ट्रासाउंड (transvaginal ultrasound in hindi) ट्रांसवैजाइनल अल्ट्रासाउंड गर्भावस्था की पहली तिमाही में कराया जाता हैं। इस अल्ट्रासाउंड टेस्ट में भ्रूण की स्पष्ट फोटो मिलना मुश्किल होता है।

3 डी अल्ट्रासाउंड (3 D ultrasound in hindi) 2 डी अल्ट्रासाउंड के विपरीत 3 डी अल्ट्रासाउंड टेस्ट में भ्रूण (fetus in hindi) और आपके अंगों की चौड़ाई, ऊंचाई और गहराई को आसानी से देखा जा सकता हैं। 3 डी अल्ट्रासाउंड टेस्ट गर्भावस्था के दौरान किसी भी गंभीर बीमारी की आशंका होने पर किया जाता है।

4 डी अल्ट्रासाउंड (4 D ultrasound in hindi) 4 डी अल्ट्रासाउंड टेस्ट में भ्रूण के अंगों का एक लाइव वीडियो बनता है। 4 डी अल्ट्रासाउंड टेस्ट भी अन्य अल्ट्रासाउंड टेस्ट (ultrasound test in hindi) की तरह ही किया जाता है, लेकिन इसमें उपयोग होने वाले उपकरण अलग होते है।

भ्रूण इकोकार्डियोग्राफी (fetal echocardiography in hindi) भ्रूण इकोकार्डियोग्राफी भी एक तरह का अल्ट्रासाउंड टेस्ट (ultrasound test) होता है। यह टेस्ट तब किया जाता है जब डॉक्टर को आपके भ्रूण के दिल में किसी बीमारी के होने की आशंका होती है। भ्रूण इकोकार्डियोग्राफी टेस्ट में दिल का आकार और उसकी बनावट साफ दिखाई देती है। भ्रूण इकोकार्डियोग्राफी टेस्ट भी अन्य अल्ट्रासाउंड टेस्ट (ultrasound during pregnancy in hindi) की तरह ही किया जाता है, लेकिन इसे पूरा करने में अधिक समय लगता है। इस टेस्ट को करने के उपकरण भी अलग होते है।

प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड कराने के टिप्स

(pregnancy me ultrasound karane ke tips)


pregnancy me ultrasound karane ke tips

हम आपको प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड (pregnancy me ultrasound) कराने के कुछ महत्वपूर्ण टिप्स दे रहे हैं -

प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड से 1 घंटे पहले पानी पीना प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड (pregnancy me ultrasound) कराने से करीब एक घंटे पहले महिलाओं को 2 से तीन गिलास पानी पीना चाहिए। पानी पीने से गर्भवती महिला का मूत्राशय बढ़ जाता हैं जिससे अल्ट्रासोनिक ट्रांसड्यूसर में मूत्राशय (bladder in hindi) की स्पष्ट छवि दिखाई देती है।

प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड से पहले पेशाब न करें गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड (pregnancy me ultrasound) से पहले महिलाओं को पेशाब नहीं करना चाहिए। इससे अल्ट्रासाउंड के दौरान कंप्यूटर स्क्रीन पर भ्रूण और गर्भवती के अंगों की स्पष्ट छवि दिखाई देती है।

अल्ट्रासाउंड से पहले कुछ ना खाएं डॉक्टर्स के मुताबिक प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड (pregnancy me ultrasound) से करीब 6-8 घंटे पहले तक महिलाओ को कुछ भी नहीं खाना चाहिए। अल्ट्रासाउंड से पहले कुछ नहीं खाने से पेट में गैस की मात्रा कम हो जाएगी, और खाली पेट से आपके सभी अंगों की बेहतर तरीके से जाँच की जा सकेगी।

प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड (pregnancy me ultrasound) टेस्ट से महिलाओं और गर्भ में पल रहे बच्चे की शारीरिक समस्याओं का समय पर पता चल जाता है, जिससे उनका उचित इलाज करवाया जा सकता है और माँ स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं। इसके अलावा गर्भावस्था के विभिन्न चरणों में सोनोग्राफी करवाकर आप अपने बच्चे के विकास की सही जानकारी हासिल कर सकती हैं, इससे आप गर्भावस्था में शिशु के विकास को लेकर निश्चिंत रह सकती हैं।

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