गर्भावस्था के पहली तिमाही के लिए टिप्स और सावधानियां (pregnancy care tips and precaution first 3 months in hindi)

गर्भावस्था के पहली तिमाही के लिए टिप्स और सावधानियां (pregnancy care tips and precaution first 3 months in hindi)

गर्भावस्था का समय यूं तो सभी गर्भवती महिलाओं के लिए खास होता है लेकिन यह समय तब और भी खास और आरामदायक बन जाता है जब यह बिना किसी समस्याओं के बीत जाए और वह एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकें।

गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने बेहद खास होते हैं इसलिए इस दौरान आपको अपनी जीवनशैली अच्छी रखनी चाहिए और कुछ ज़रूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। आज इस ब्लॉग में हम आपको गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने के बारे में कुछ ज़रूरी बातें बताएंगे और टिप्स देंगे। पढ़िए आप भी विस्तार से -

गर्भावस्था के पहली तिमाही में की जाने वाली जांच

(test during pregnancy 1st trimester in hindi)

test during pregnancy

गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में डॉक्टर आपको निम्न जांच कराने की सलाह देंगे -

  • खून की जांच (Blood test in pregnancy) - इसमें डॉक्टर एनीमिया (anemia in hindi), हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B in hindi), एचआईवी (HIV in hindi) आदि की जांच करेंगे।

  • पेशाब की जांच (Urine test in pregnancy) - गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान डॉक्टर पेशाब की जांच में देखेंगे कि कहीं आपको किडनी संक्रमण (Kidney infection in hindi) या यूरिन इन्फेक्शन (Urine infection in hindi) तो नहीं है।

  • अल्ट्रासाउंड (ultrasound in hindi) - गर्भावस्था की पहली तिमाही में आमतौर पर दो स्कैन किए जाते हैं। 6 से 9 सप्ताह के बीच डेटिंग स्कैन (dating scan in hindi) और वायबिलिटी स्कैन (viability scan in hindi)। 11 से 13 सप्ताह के बीच अर्ली मोर्फोलॉजी स्कैन (early morphology scan in hindi) या एनटी स्कैन (NT scan in hindi)।

गर्भावस्था के पहली तिमाही के अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) में डॉक्टर निम्न जांच करते हैं

  • शिशु के जन्म की अनुमानित तिथि (due date in hindi) की जांच। यह भ्रूण के आकार को मापकर निर्धारित किया जाता है।
  • भ्रूण की धड़कन की जांच।
  • गर्भ में भ्रूण की जगह देखना। मतलब यह कि कहीं भ्रूण गर्भाशय की बजाय फैलोपियन ट्यूब (fallopian tube in hindi) में तो नहीं है (ऐसी गर्भावस्था को एक्टोपिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) कहा जाता है)।

गर्भावस्था के पहली तिमाही में इन बातों का रखें ध्यान

(precautions and tips in pregnancy 1st trimester in hindi)

precaution and tips during pregnancy

  • नियमित रूप से डॉक्टर से अपने स्वास्थ्य की जांच कराएं। अगर कोई भी सवाल आपके मन में है तो डॉक्टर से पूछने में झिझक ना करें।
  • उन सभी चीज़ों से दूर रहें जो आपको और आपके बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती है जैसे तंबाकू, शराब आदि।
  • आप गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में घर के काम करें लेकिन इस बात को सुनिश्चित कर लें कि उस काम से आप पर और आपके होने वाले बच्चे पर कोई बुरा प्रभाव ना पड़े। घर के काम करना उन महिलाओं के लिए फायदेमंद हैं जो व्यायाम नहीं कर पातीं। लेकिन आप ज्यादा भार ना उठाएं।
  • यूं तो गर्भावस्था में सीढ़ी आप चढ़ सकती हैं लेकिन सीढ़ियां चढ़ते समय सावधानी बरतें। हमेशा धीरे-धीरे सीढ़ियां चढ़ें ताकि आपको गिरने का खतरा ना हो।
  • इन दिनों में आपको अपनी खास देखभाल शुरू कर देनी चाहिए। अगर आपने ताकत की दवाई लेनी शुरू नहीं की तो डॉक्टर की सलाह से ज़रूरी दवाएं लेना शुरू कर दें, जो आपको और आपके शिशु के विकास में फायदा पहुंचाएंगी जैसे कैल्शियम (calcium in hindi) की गोलियां, आयरन (iron in hindi) की गोलियां आदि।
  • आप नियमित रूप से व्यायाम करें और संतुलित भोजन का खाएं। अपने खाने में कार्बोहाइड्रेट, आयरन. प्रोटीन, कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों को ज़रूर शामिल करें।

गर्भावस्था के पहली तिमाही में फोलिक एसिड

(folic acid in pregnancy 1st trimester in hindi)

folic acid in pregnancy 1st trimester

गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में डॉक्टर आपको फोलिक एसिड (folic acid in hindi) लेने की सलाह दे सकते हैं। यह गर्भावस्था में काफी फायदेमंद होता है। फोलिक एसिड विटामिन बी का एक प्रकार (vitamin B9) है। यह गर्भ में आपके शिशु को स्पाइना बिफिडा (Spina bifida in hindi) जैसे तंत्रिका ट्यूब दोष (न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट-एनटीडी) से बचाता है। इसके अलावा फोलिक एसिड मां के लिए भी फायदेमंद है क्योंकि यह विटामिन बी 12 के साथ मिलकर लाल रक्त कोशिकाएं (red blood cells in hindi) बनाता है। फोलिक एसिड की पर्याप्त मात्रा ना लेने से आपको खून की कमी (anemia in hindi) हो सकती है।

गर्भावस्था के पहली तिमाही में कितना फोलिक एसिड लेना चाहिए? (pregnancy 1st trimester me kitna folic acid lena chahiye)

चूंकि हमारा रोज़ाना का भोजन भरपूर मात्रा में फोलिक एसिड नहीं देता इसलिए डॉक्टर इसके सप्लीमेंट लेने की सलाह देते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार गर्भावस्था की पहली तिमाही में रोज़ाना 400 MCG या 0.4 MG फोलिक एसिड सप्लीमेंट (गोलियां) लेना चाहिए।

गर्भावस्था के पहली तिमाही में आयरन की गोलियां (iron tablets in pregnancy 1st trimester)

गर्भावस्था में महिलाओं को खून की कमी की समस्या (anemia in hindi) आए दिन बनी रहती है जिसके लिए उन्हें भरपूर मात्रा में आयरन लेना चाहिए। कई बार हिमोग्लोबिन (HB in pregnancy) बढ़ाने के लिए आयरन की गोलियां खाने से जी घबराने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर आपको भी यह समस्या है तो आप अपने डॉक्टर की निगरानी में रहकर सही मात्रा में हिमोग्लोबिन (hemoglobin in hindi) बढ़ाने के लिए आयरन की गोलियां ले सकती हैं।

गर्भावस्था के पहली तिमाही में कैल्शियम की गोलियां (calcium tablets in pregnancy in hindi)

डॉक्टर गर्भवती महिला को कैल्शियम (calcium in hindi) की ज्यादा मात्रा लेने की सलाह देते हैं। कैल्शियम (calcium in hindi) मां और बच्चे दोनों की हड्डियों की मजबूती और विकास के लिए ज़रूरी है।

एक साथ ना लें आयरन और कैल्शियम की दवा

आयरन और कैल्शियम की दवा कभी भी एक साथ ना लें। इन दोनों गोलियों को खाने में करीब एक घंटे से दो घंटे का अंतर रखें।

गर्भावस्था के पहली तिमाही में मल्टीविटामिन गोलियां (multivitamin tablets in pregnancy in hindi)

इसके अलावा आपके डॉक्टर आपको गर्भावस्था के दौरान मल्टी विटामिन (multivitamin tablets in pregnancy in hindi) गोलियां भी देंगे जिससे आपके शरीर में इन दिनों में ताकत बनी रहेगी।

क्या गर्भावस्था के पहली तिमाही में सेक्स करना सुरक्षित है?

(is sex safe during first trimester of pregnancy)

sex during pregnancy

अधिकतर गर्भवती महिलाओं के मन में प्रेगनेंसी के दौरान संबंध बनाने को लेकर सवाल बना रहता है। बात की जाए गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में संबंध बनाने की तो यह पूरी तरह से सुरक्षित है। लेकिन डॉक्टर इन परिस्थितियों में गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में सेक्स ना करने की सलाह देते हैं।

  • अगर पहले गर्भपात हो चुका हो।
  • अगर योनि से खून आ रहा हो तो।
  • अगर आपको पेट में दर्द या मरोड़ की समस्या हो।
  • अगर आपकी अपरा (placenta previa in hindi) नीचे की ओर हो तो।
  • अगर गर्भ में एक से ज्यादा बच्चे हों।

इसलिए अगर आप गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में सेक्स करना चाहती हैं तो एक बार अपने डॉक्टर से सलाह ले लें।

गर्भावस्था के पहली तिमाही में कैसे सेक्स करें?

(pregnancy ke 1st trimester me kaise sex kare)

sex during 1st trimester of pregnancy

  • महिला का ऊपर आना - इस पॉज़िशन में आप अपने पति के ऊपर होंगी। यह अवस्था प्रेगनेंसी में सेक्स की बेहतर अवस्था मानी जाती है।
  • पलंग की किनारे पर - आप बेड के किनारे पर लेटें और पैर खोलें, आपके पति सामने खड़े होकर सेक्स करेंगे। एक स्वस्थ गर्भावस्था में यह पॉज़िशन भी सुरक्षित है।
  • पीछे की तरफ से रिलेशन बनाना - पलंग पर एक करवट लेकर लेट जाएं, इसमें आपके पति आपके पीछे से आपके साथ संबंध बनाएंगे।

गर्भावस्था के पहली तिमाही में ना अपनाएं ये सेक्स पॉज़िशन (do not try these sex postion in pregnancy 1st trimester)

मिशनरी पॉजिशन (missionary position in hindi) - इस पॉज़िशन में आपके पति आपके ऊपर होते हैं। गर्भावस्था में इन अवस्थाओं में संबंध ना बनायें क्योंकि इससे आपके पति का भार आपके पेट पर पड़ता है।

खड़े होकर सेक्स करना - इसमें पति खड़े होकर आपको गोद में लेते हैं और आप हाथ पैरों से पति के शरीर को पकड़ती हैं। प्रेगनेंसी के दौरान इस अवस्था में रिलेशन (physical relation in hindi) ना बनाएं।

गर्भावस्था के पहली तिमाही में नींद क्यों नहीं आती?

(pregnancy ke 1st trimester me nind kyun nahi aati)

sleep during pregnancy

  • गर्भावस्था में नींद की समस्या होना भी आम है। रात में सोने की समस्या होने का एक कारण हार्मोनल बदलाव होता है। शरीर में प्रोजेस्टेरोन (progesterone in hindi) और एस्ट्रोजन (estrogen in hindi) की मात्रा बढ़ने के कारण नींद तो बहुत आती है लेकिन गर्भवती ठीक से सो नहीं पाती।

  • अक्सर गर्भवती को लेटने में परेशानी रहती है और रात भर ठीक से सो नहीं पाती। ठीक से नींद ना आने के कारण वह तनाव में आ सकती हैं और चिड़चिड़ी हो सकती है।

  • नींद में ज्यादा पेशाब आने के चलते (frequent urination in hindi) भी गर्भवती महिला को सोने में काफी परेशानी होती है।

गर्भावस्था के पहली तिमाही में कैसे सोएं?

(pregnancy ke 1st trimester me kaise soye)

  • इस दौरान आप एक ओर करवट लेकर सोएं।
  • सोते समय दोनों पैरों के बीच तकिया लगाकर सोएं।
  • आप कोशिश करें कि सोने से पहले पेशाब करके बिस्तर पर जाएं। इसके अलावा सोते समय तरल पदार्थ ना लें। इससे आपको और ज्यादा पेशाब लगने की समस्या होगी और नींद में रुकावट आएगी। वहीं, सोते समय चाय, कॉफी लेने से भी बचें क्योंकि चाय और कॉफी पीने से नींद नहीं आती।

गर्भावस्था के पहली तिमाही में कितना सोना चाहिए?

(pregnancy ke 1st trimester me kitna sona chahiye?)

sleep during 1st trimester of pregnancy

यूं तो हर व्यक्ति को दिन में सात से आठ घंटे सोना चाहिए लेकिन गर्भावस्था में आप ज्यादा से ज्यादा आराम करें। आपके शरीर को कितनी नींद की ज़रूरत है यह आप खुद-ब-खुद समझ जाएंगी। आपको जितनी नींद आए आप उतना सोएं। अगर आपको नींद ना आने की समस्या है तो इस बारे में अपने डॉक्टर से अवश्य संपर्क करें।

चूंकि गर्भावस्था में अनेक तरह की परेशानियां आती हैं लेकिन एक सही जीवनशैली अपनाकर और अपना ध्यान रखकर आप इन परेशानियों को कम कर सकते हैं और अपनी प्रेगनेंसी के पलों का आनंद उठा सकते हैं। गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में आपको अचानक से शारीरिक बदलाव और परेशानियां होती है जिसके लिए आपको पूरी सतर्कता बरतने की ज़रूरत है, ताकि आपकी प्रेगनेंसी की शुरुआत अच्छी हो सके।

गर्भावस्था के पहली तिमाही मे एक्सरसाइज़

(exercise in pregnancy 1st trimester in hindi)

exercise during pregnancy

व्यायाम हर व्यक्ति के लिए ज़रूरी है। आप गर्भावस्था के दौरान भी डॉक्टर की देखरेख में रहकर व्यायाम कर सकती हैं। गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में आप फ्लोर स्ट्रेच एक्सरसाइज़ (floor stretch exercise in hindi), एक्सरसाइज़ बॉल (exercise ball), स्टैंडिंग एक्सरसाइज़ (standing exercise in hindi), ऐरोबिक्स (aerobics in hindi), तैराकी, सुबह शाम सैर (morning walk and evening walk) आदि जैसी एक्सरसाइज़ (exercise in hindi) कर सकती हैं।

क्या गर्भावस्था के पहली तिमाही में यात्रा करना कितना सुरक्षित है?

(is travelling safe during 1st trimester of pregnancy)

travelling during pregnancy

ज्यादातर डॉक्टर गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में यात्रा ना करने की सलाह देते हैं क्योंकि यह गर्भावस्था का शुरुआती दौर होता है जिसमें आपको काफी सतर्कता बरतनी होती है। अगर बहुत ज्यादा ज़रूरी है तो आप अपने डॉक्टर से सलाह लें और पूरी सावधानियां बरतकर छोटी यात्रा करें।

क्या प्रेगनेंसी में अपने पहले बच्चे को दूध पिलाना सही है?

(kya pregnancy me apne pehle bache ko doodh pilana sahi hai)

breastfeeding during pregnancy

डॉक्टरी सलाह मानें तो बच्चा होने के 18 महीने तक आपको दोबारा प्रेगनेंट होने की योजना नहीं करनी चाहिए, लेकिन कई जगहों पर आज भी बच्चा बहुत छोटा होते हुए महिला गर्भवती हो जाती है। ऐसे में कई महिलाओं का ये सवाल आता है कि क्या प्रेगनेंसी में स्तनपान (breastfeeding in pregnancy in hindi) कराना ठीक है?

अगर आपकी गर्भावस्था बिल्कुल सही चल रही है और आप पूरी तरह स्वस्थ हैं तो आप अपने नवजात शिशु को गर्भावस्था में दूध पिला सकती हैं। इसे टेंडम स्तनपान (tandem breastfeeding in hindi) कहा जाता है। बस आपको अपने खानपान का खास ख्याल रखना हैं। अगर इस बारे में फिर भी आपको संदेह है तो एक बार डॉक्टर से सलाह ज़रूर ले लें।

ऐसा ज़रूरी नहीं है कि गर्भावस्था में हर महिला का अनुभव एक जैसा हो। सभी की शारीरिक स्थिति अलग होती है, तो हो सकता है कि उनके अनुभवों में भी कुछ-कुछ अंतर हो। लेकिन आमतौर पर ऊपर बताई गईं समस्याएं आम होती हैं और गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में अधिकतर महिलाओं में देखी जाती हैं। इसलिए आप इन समस्याओं को देखकर घबराएं नहीं, बल्कि एक सही डॉक्टर से परामर्श करके अपनी परेशानियों को दूर कर लें। ताकि आप खुद भी स्वस्थ रहें और एक स्वस्थ बच्चे को भी जन्म दे सकें।

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