गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने के लिए टिप्स और सावधानियां (pregnancy ke 2nd trimester ke liye tips aur savdhaniya)

गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने के लिए टिप्स और सावधानियां (pregnancy ke 2nd trimester ke liye tips aur savdhaniya)

गर्भावस्था एक ऐसा समय है जिसमें हर महिला के अलग-अलग अनुभव होते हैं। लेकिन कुछ समस्याएं ऐसी हैं जिससे अधिकतर गर्भवती महिलाएं गुज़रती ही हैं। इन तमाम तकलीफों से बचने के लिए आपको अपनी जीवनशैली में बदलाव करने की ज़रूरत होती हैं। आज इस ब्लॉग के ज़रिये गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने (दूसरी तिमाही) के लिए खास टिप्स दे रहे हैं जो आपकी गर्भावस्था को और आसान बना देंगे-

गर्भावस्था की चौथे, पांचवें और छठे महीने में स्ट्रैच मार्क्स क्यों पड़ते हैं?

(causes of stretch marks during 2nd trimester of pregnancy)

Pregnancy 2nd trimester - stretch marks kyu aate hai

गर्भावस्था में स्ट्रैच मार्क्स (stretch marks in hindi) होना काफी आम समस्या है। इसकी शुरुआत गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने से हो जाती है क्योंकि इस समय आपका पेट बढ़ता है और त्वचा पर खिंचाव पड़ने लगता है। पेट के अलावा आपको स्तनों के आसपास और जांघों के आसपास भी स्ट्रैच मार्क्स (stretch marks in hindi) पड़ जाते हैं।

स्ट्रैच मार्क्स (stretch marks in hindi) से छुटकारा पाने के लिए हर महिला कुछ ना कुछ उपाय खोजती ही रहती हैं। आपको बता दें कि अगर इन स्ट्रैच मार्क्स (stretch marks in hindi) का लाल रंग के रहने पर ही इलाज कर लिया जाए तो इन्हें कम किया जा सकता है।

गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने में स्ट्रैच मार्क्स कम करने के घरेलू उपाय

(pregnancy ke 2nd trimester me stretch marks kam karne ke gharelu upay)

Pregnancy 2nd trimester - stretch marks ke liye gharelu upay

आप नींबू के रस, अरंडी का तेल (castor oil in hindi), नारियल तेल (coconut oil in hindi), ऐलोवीरा जेल (aloe vera gel in hindi), जैतून का तेल (olive oil in hindi), बायो ऑयल (bio oil in hindi) में से किसी एक चीज़ को रोज़ाना रात को इन निशानों पर लगाकर सोएं और सुबह उठकर धो लें। ऐसा कई दिनों तक करें। आप पाएंगी कि ये निशान धीरे-धीरे कम हो रहे हैं।

गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने में स्तनों की समस्या

(pregnancy ke 2nd trimester me stano ki samasya)

Pregnancy 2nd trimester - stano ki samasya

आपको गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान स्तनों में दर्द, सूजन (breast problems in pregnancy in hindi) आदि जैसी समस्याएं हुई होंगी लेकिन गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने में यह समस्या दूर हो जाती है। वहीं इस दौरान स्तनों का आकार बढ़ने लगता है क्योंकि इस तिमाही में महिला का शरीर स्तनपान (breastfeeding in hindi) के लिए तैयार हो रहा होता है। इसके अलावा स्तनों से पीला द्रव भी निकलता है जिसे कोलोस्ट्रम (colostrum in hindi) कहते हैं। ऐसे में आप ढीली और आरामदायक ब्रा पहनने की कोशिश करें।

गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने में कौन-कौन से टेस्ट होते हैं?

(medical test during 2nd trimester in pregnancy)

Pregnancy 2nd trimester - medical tests

गर्भावस्था के दौरान समय-समय पर डॉक्टर से चेकअप कराना ज़रूरी है, ताकि शिशु के स्वास्थ्य आदि का पता चलता रहे। गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने में डॉक्टर बीपी (bp), बच्चे की दिल की धड़कन की जांच, सूजन, वज़न आदि के साथ-साथ आपके यह टेस्ट करेंगे-

  • यूरिन टेस्ट (urine test in hindi)- डॉक्टर गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने में पेशाब की जांच (urine test in hindi) करेंगे जिसमें ग्लूकोज़ (glucose in hindi), प्रोटीन (protein in hindi), बैक्टीरिया (bacteria in hindi) आदि की जांच होगी।
  • अल्ट्रासाउंड (ultrasound in hindi)- यूं तो हर तिमाही में अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) किया जाता है लेकिन गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने में डॉक्टर एक बार बच्चे के विकास की जांच करेंगे। आप इस दौरान अल्ट्रासाउंड (ultrasound in hindi) के ज़रिये अपने शिशु को देख पाएंगी।
  • ब्लड टेस्ट (blood test in hindi)- खून में शर्करा (blood sugar in hindi) और हीमोग्लोबिन (HB in pregnancy in hindi) का स्तर मांपने के लिए ब्लड टेस्ट करेंगे।
  • काड्रूपल टेस्ट (quadruple test in hindi)- इस टेस्ट को क्वाड टेस्ट (quad test in hindi) भी कहा जाता है। इसमे डाउन सिंड्रोम (down syndrome in hindi), एडवर्ड सिंड्रोम (adword syndrome in hindi), स्पाइना बाइफिडा (spina bifida in hindi) की जांच होती है।
  • इसके अलावा एमीनोसेंटिसिस टेस्ट (amniocentesis test in hindi) भी गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में किया जाता है। इस टेस्ट में शिशु की अनुवांशिक स्थिति की जांच की जाती है। यह टेस्ट उन महिलाओं का किया जाता है जिनमें अनुवांशिक जोखिम ज्यादा होते हैं।

क्या गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने में सेक्स करना सुरक्षित है?

(is sex safe during 2nd trimester of pregnancy?)

Pregnancy 2nd trimester - sex karna surakshit hai

अगर पहली तिमाही में सेक्स करने से किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हुई है तो गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने में सेक्स करना सुरक्षित है। दूसरी तिमाही में आपका पेट कुछ बढ़ जाता है तो इस दौरान विशेष सेक्स पॉजिशन में आप रिलेशन बनाएं (physical relation in hindi) जिससे पेट पर किसी तरह का भार ना पड़े।

गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में अपनाएं ये सेक्स पॉज़िशन

(sex position for 2nd trimester of pregnancy)

Pregnancy 2nd trimester - sex positions

  • स्पूनिंग पॉज़िशन (spooning positon in hindi)- इसमें आप करवट लेकर लेटेंगी और आपके पति पीछे की ओर से आपके साथ संबंध बनाएंगे।
  • ऑन टॉप पॉज़िशन (on top position in hindi)- आपका पति के ऊपर आकर संबंध बनाना इस तिमाही में सुरक्षित है।
  • अपने आराम के मुताबिक आप इस दौरान तकिये का प्रयोग भी कर सकती हैं।

गर्भावस्था की दूसरी तिमाही के दौरान ज़रूरी गोलियां

(pregnancy ke 2nd trimester me zaroori goli)

Pregnancy 2nd trimester - zaroori goliya

गर्भावस्था की पहली तिमाही में डॉक्टर आपको फोलिक एसिड (folic acid in hindi) लेने की सलाह देंगे लेकिन अगर आपका डॉक्टर कहता है तो गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने में फोलिक एसिड (folic acid in hindi) की मात्रा कम की जा सकती है या रोकी जा सकती है। इसके अलावा कैल्शियम (calcium in hindi) और आयरन (iron in hindi) की गोलियां दूसरी तिमाही में भी उतनी ही आवश्यक हैं जितने पहली तिमाही में थे।

कैल्शियम (calcium in hindi) से बच्चे की हड्डियां विकसित होती हैं और आयरन (Iron in hindi) से मां के शरीर में हीमोग्लोबीन (hemoglobin or HB in pregnancy in hindi) बनता है जिससे खून की कमी (iron in hindi) दूर होती है। ध्यान रहे कि आप सभी दवाएं डॉक्टर के बताए गए समय अनुसार ही लें।

एक साथ ना लें आयरन और कैल्शियम की दवा

आयरन (iron in hindi) और कैल्शियम (calcium in hindi) की दवा कभी भी एक साथ ना लें। दोनों दवाओं को खाने में करीब एक घंटे से दो घंटे का अंतर रखें। दोनों दवा साथ लेने से बच्चे पर बुरा असर पड़़ सकता है।

गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने में टीका लगवाना क्यों ज़रूरी है?

(pregnancy ke 2nd trimester me tika lagwana kyun zaruri hai?)

Pregnancy 2nd trimester - teeka lagwana zaruri

हर व्यक्ति को इन्जेक्शन यानी टीके से डर तो लगता ही है। बच्चा हो या बड़ा टीका लगवाने से हर कोई बचता है। लेकिन सही समय पर ज़रूरी टीके लगवाना काफी ज़रूरी है। और बात की जाए गर्भावस्था में टीका लगवाने की तो इस दौरान यह और भी ज़रूरी है क्योंकि ज़रूरी टीके आपको और आपके आने वाले बच्चे को कई तरह की बीमारियों से बचाते हैं।

गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में डॉक्टर आपको टेटनस (TT or Tetanus injection) के टीके लगवाने की सलाह दे सकते हैं जो बच्चे को संक्रमण से बचाते हैं। इसके अलावा किसी-किसी गर्भावस्था में डॉक्टर हार्मोनल टीके (hormonal injection in hindi) भी दे सकते हैं ताकि समय से पहले डिलीवरी (premature delivery in hindi) या गर्भपात (miscarriage in hindi) के खतरे को कम किया जा सके। जिन महिलाओं को पहले प्रीमेच्योर डिलीवरी (premature delivery in hindi) हुई है या पहले गर्भपात हो चुका है उन्हें डॉक्टर हार्मोनल या प्रोजेस्टेरोन (progesterone in hindi) के टीके दे सकते हैं।

आप टीके से डरें नहीं, यह आपको और आपके बच्चे को कई बीमारियों से दूर रखते हैं। डॉक्टर आपको जो भी टीका लगवाने के लिए कहें उसे ज़रूर लगवाएं।

गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने में यात्रा करना कितना सुरक्षित है?

(is travelling safe during 2nd trimester of pregnancy?)

Pregnancy 2nd trimester - yatra karna

पूरी प्रेगनेंसी में दूसरी तिमाही के दौरान यात्रा करना सबसे सुरक्षित माना जाता है क्योंकि पहली तिमाही में आपको जी घबरानें, उल्टी आने सहित अन्य कई समस्याएं होती हैं और तीसरी तिमाही गर्भावस्था का आखिरी चरण होता है इसलिए इस दौरान पूरी तरह आराम करना ज़रूरी है। अगर आपको गर्भावस्था में यात्रा करनी है तो कुछ सावधानियां अपनाकर और डॉक्टर से सलाह लेकर यात्रा कर सकती हैं।

गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने में गाड़ी से यात्रा करने समय इन बातों का रखें ध्यान

(pregnancy ke 2nd trimester me gadi se yatra karte samay in baato ka rakhe dhyan)

  • सबसे पहले तो यह सुनिश्चित कर लें कि यात्रा ज्यादा लंबी ना हो।
  • इसके बाद आप जो भी रास्ता लें उसमें ज्यादा गड्ढे ना हों और रास्ता सीधा, सरल हो।
  • हमेशा सीट बेल्ट पेट के नीचे बांधकर बैठें।
  • बीच-बीच में रुक-रुक कर जाएं ताकि आपको पैर फैलाने और आराम करने का समय मिले।

गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने में रेल यात्रा करते समय इन बातों का रखें ध्यान

(pregnancy ke 2nd trimester me train se yatra karte samay in baato ka rakhe dhyan)

Pregnancy 2nd trimester - train se yatra

  • हमेशा नीचे की सीट लें।
  • अगर ट्रेन में आपको शौचालय जाना पड़े तो आसपास का सहारा लेकर चलें ताकि झटका लगने पर आप गिरे नहीं। हो सके तो हमेशा अपने साथ किसी ना किसी को लेकर जाएं।
  • अपनी ज़रूरी दवाएं साथ लेकर चलें।
  • ज्यादा लंबे समय के लिए यात्रा ना करें। कोशिश करें कि रेल से यात्रा करने का समय पांच-छह घंटे से ज्यादा का ना हो।
  • जिस दिशा की ओर ट्रेन चल रही हो उसी दिशा की ओर मुंह करने वाली सीट का चयन करें। अगर ऐसी सीट ना मिलें तो आसपास के लोगों को अपनी हालत के बारे में बताएं और उनसे सीट मांगे।

गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने में हवाई जहाज से यात्रा करते समय इन बातों का रखें ध्यान

(pregnancy ke 2nd trimester me aeroplane se yatra karte samay in baato ka rakhe dhyan)

Pregnancy 2nd trimester - hawai jahaaj se yatra

  • हमेशा बाहरी किनारे की सीट बुक करें ताकि अगर आपको पैर फैलाने या शौचालय जाने के लिए उठना पड़े तो परेशानी ना हो।
  • उड़ान से पहले गैस बनाने वाली खाने की चीज़ें ना खाएं जैसे पत्ता गोभी, फूल गोभी।
  • पेट के नीचे सीट बेल्ट बांधें।
  • अगर आपको ऊंचाई से डर लगता है या हवाई जहाज से सफर करने में सहज नहीं हैं तो ऐसे में यात्रा करने से बचें।

गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने में ब्रेस्ट मिल्क बनना

(pregnancy ke 2nd trimester me breast milk banna)

Pregnancy 2nd trimester - breastmilk banna

जी हां, आमतौर पर प्रेगनेंसी के 16 से 22 सप्ताह के बीच गर्भवती के स्तनों में दूध बनना शुरू हो जाता है जिसे शिशु के जन्म के बाद वो स्तनपान कराती हैं। शिशु के जन्म के बाद जब आपका दूध आना शुरू हो जाता है तो स्तन काफी भारी और भरे हुए दिखाई देते हैं। हो सकता है कि गर्भावस्था के दौरान कभी-कभी स्तनों से दूध टपकने लगे। ऐसा होने पर आप घबराएं नहीं, यह काफी सामान्य है। आप बस स्तनों में ठीक से दूध बनें इसका ख्याल रखें और पौष्टिक खाना खाएं।

गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

(Pregnancy ke 2nd trimester me kin bato ka dhyan rakhna chahiye)

Pregnancy 2nd trimester - dhyan rakhe

  • प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही के दौरान शिशु के सही विकास के लिए आपको सेहतमंद और पौष्टिक खाना खाना चाहिए।
  • गर्भावस्था की दूसरी तिमाही के दौरान खुद को सक्रिय रखें और हल्की एक्सरसाइज करें। विशेषज्ञ कहते हैं कि जो महिलाएं अपनी प्रेगनेंसी में एक्सरसाइज करती हैं, उनका सीजेरियन प्रसव (cesarean delivery) होने की संभावना 90 प्रतिशत तक घट जाती है।
  • अपने स्वस्थ की नियमित रूप से जांच करवाएं।
  • लगभग 20 हफ़्तों की गर्भावस्था के समय होने वाला अल्ट्रासाउंड (ultrasound) ज़रूर करवाएं। इससे आपको शिशु के विकास (fetal development in hindi) के बारे में पता चलता है।
  • गर्भावस्था की दूसरी तिमाही के दौरान आरामदायक कपड़े पहनें, कसे हुए कपड़े पहनने से आपका ब्लडप्रेशर कम (लो बीपी) हो सकता है।
  • प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही (pregnancy 2nd trimester) में शिशु का वज़न तेज़ी से बढ़ता है, इसलिए पेट की त्वचा की नियमित मालिश (massage) करें और इस पर त्वचा को नमी देने वाली क्रीम लगाएं। इससे स्ट्रैच मार्क्स (stretch marks in hindi) कम होंगे।
  • प्रेगनेंसी के चौथे, पांचवे और छठे महीने में खुद को आराम देने की शुरुआत करें और अपनी सेहत का खयाल रखें।
  • प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही के दौरान ऊंची एड़ी वाली सैंडल/जूते ना पहनें।
  • इस दौरान तनाव (tanav), धूम्रपान (cigarette in hindi) और शराब (alcohol in hindi) से खुद को दूर रखें।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी प्रकार की कोई दवा ना लें।

गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने का दौर ऐसा है जिसमें आप अपने बच्चे की हलचल महसूस कर सकेंगी। इस तिमाही में आपका आपके बच्चे से रिश्ता और भी मजबूत होता चला जाएगा। इसलिए अपना ख्याल रखें और अपने नन्हें के साथ इन पलों का आनंद उठाएं।

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