गर्भधारण से पहले पीसीओएस: लक्षण, कारण और इलाज (pregnancy se pehle PCOS: lakshan, karan aur ilaj)

गर्भधारण से पहले पीसीओएस: लक्षण, कारण और इलाज (pregnancy se pehle PCOS: lakshan, karan aur ilaj)

गर्भधारण की कोशिश करने वाली महिलाओं को कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पीसीओएस यानी पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS in hindi) भी इन्हीं समस्याओं में से एक है। हालिया शोध में पाया गया है कि भारत में हर दस में से एक महिला पीसीओएस से पीड़ित होती हैं। इस समस्या से पीड़ित महिलाओं में करीब 60 प्रतिशत किशोरियां (13 से 20 साल की लड़कियां) शामिल हैं।

इस ब्लॉग में हम आपको गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस (pregnancy se pehle PCOS) से जुड़ी कुछ अहम जानकारी देंगे।

1. पीसीओएस क्या होता है?

(PCOS ya polycystic ovary syndrome kya hota hai)

PCOS - kya hota hai

आमतौर पर महिलाओं के शरीर में हार्मोनों के असंतुलन की वजह से पीसीओएस यानी पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (polycystic ovary syndrome in hindi / PCOS) की स्थिति बनती है। इसे पीसीओडी यानी पॉलिसिस्टिक ओवरी डिजीज (polycystic ovary disease in hindi / PCOD) भी कहा जाता है।

दरअसल, हार्मोनों के असंतुलन की वजह से महिला के अंडाशयों में सिस्ट बनने लगती हैं। शुरुआत में ये छोटी-छोटी थैलियों की तरह होते हैं, जिनमें तरल पदार्थ भरा होता है। इनका आकार धीरे-धीरे बढ़ता रहता है। महिला के अंडाशयों में एक से ज्यादा सिस्ट या गांठ (ovarian cyst in hindi) हो सकती हैं।

शोध बताते हैं कि जिन महिलाओं को पीसीओएस (PCOS in hindi) की परेशानी होती है, उनके शरीर में अक्सर पुरुष हार्मोनों की मात्रा अधिक पाई जाती है। हार्मोनों के इस असंतुलन के कारण, उनके मासिक धर्म में अनियमितता आती है और इससे ओवुलेशन की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होती है।

2. पीसीओएस कितने प्रकार के होते हैं?

(types of PCOS in hindi)

PCOS - prakaar

अगर गर्भधारण की तैयारी करने वाली महिला पीसीओएस (PCOS in hindi) की समस्या से जूझ रही है, तो उसे सबसे पहले यह जानना बेहद जरूरी है कि वह किस प्रकार के पीसीओएस से पीड़ित है। नीचे विभिन्न प्रकार के पीसीओएस (PCOS in hindi) के बारे में उल्लेख किया जा रहा है-

  • इन्सुलिन प्रतिरोधी पीसीओएस (insulin resistant PCOS in hindi)- इन्सुलिन प्रतिरोधी पीसीओएस महिलाओं में सबसे आम होता है। इस स्थिति में उनके शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता कम हो जाती है और खून में शुगर का स्तर बढ़ने लगता है। शरीर में इन्सुलिन और लेप्टिन हार्मोनों की मात्रा ज्यादा होने से उनके अंडाशयों में टेस्टोस्टेरोन नामक पुरुष हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे उनमें ओवुलेशन से संबंधित समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

  • पोस्ट पिल पीसीओएस (post-pill PCOS in hindi)- शोध बताते हैं कि गर्भनिरोधक गोलियां लेने की वजह से महिलाओं को पोस्ट पिल पीसीओएस की समस्या हो सकती है। दरअसल, इन गोलियों से उनके शरीर में हार्मोनल संतुलन बिगड़ने की वजह से एेसा होता है।

    डॉक्टर्स कहते हैं कि हालांकि गर्भनिरोधक गोलियां बंद करने के बाद ज़्यादातर महिलाओं के शरीर में हार्मोन संतुलित हो जाते हैं और वे गर्भधारण कर सकती हैं। लेकिन कई महिलाओं में हार्मोन्स का स्तर सामान्य होने में कुछ महीनों का समय लग सकता है।

  • इंफ्लेमेट्री पीसीओएस (inflammatory PCOS in hindi)- कई महिलाओं को आनुवांशिक कारणों की वजह से इंफ्लेमेट्री पीसीओएस हो सकता है। इस प्रकार के पीसीओएस से उनके शरीर में सूजन होने लगती है, जिससे हार्मोनों का संतुलन बिगड़ता है और ओवुलेशन में बाधा पड़ती है। विशेषज्ञों का कहना है कि कभी-कभी ग्लूटेन युक्त चीजों को खाने और ज्यादा चिंता की वजह से भी ये हो सकता है।

3. गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस के लक्षण क्या होते हैं?

(pregnancy se pehle PCOS ke lakshan kya hote hai)

PCOS - lakshan

गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस (pregnancy se pehle PCOS) के लक्षण बहुत सामान्य होते हैं, इसीलिए इनकी पहचान कर पाना मुश्किल होता है। नीचे इससे जुड़े कुछ अहम लक्षणों का उल्लेख किया जा रहा है-

  • गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस के लक्षण: ओवुलेशन में कमी- अक्सर महिलाओं में ओवुलेशन की कमी होना प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस (pregnancy se pehle PCOS) का लक्षण हो सकता है।

  • प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस के लक्षण: अनियमित मासिक धर्म- अगर किसी महिला को लगातार कई महीनों से अनियमित मासिक धर्म हो रहा है, तो यह गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस (pregnancy se pehle PCOS) का लक्षण हो सकता है।

  • गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस के लक्षण: पीरियड्स में अत्यधिक रक्तस्राव- अगर किसी महिला को पीरियड्स के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा है, तो यह प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस (pregnancy se pehle PCOS) का लक्षण हो सकता है।

  • प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस के लक्षण: बालों का बढ़ना- कभी-कभी महिलाओं के शरीर के विभिन्न अंगों पर अनावश्यक रूप से बाल उगने लगते हैं, ये गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस (PCOS in hindi) का लक्षण हो सकता है। एेसी स्थिति में महिला के चेहरे, ठुड्डी, गले, पीठ और अन्य अंगों पर बाल उगते हैं।

  • गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस के लक्षण: मुँहासे- महिलाओं के चेहरे पर बहुत ज्यादा मुँहासे होना प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस (PCOS in hindi) का लक्षण हो सकता है।

  • प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस के लक्षण: अचानक वजन बढ़ना- यदि किसी महिला का वजन अचानक बढ़ रहा है तो यह पीसीओएस (PCOS in hindi) का लक्षण हो सकता है।

  • गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस के लक्षण: त्वचा का रंग काला होना- कई बार महिलाओं के शरीर के विभिन्न अंगों की त्वचा पर काले रंग के धब्बे हो जाते हैं, यह प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस (PCOS in hindi) का लक्षण हो सकता है।

  • प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस के लक्षण: यौन इच्छा में कमी- अक्सर महिलाओं में यौन इच्छा की कमी होना, गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस (pregnancy se pehle PCOS) का लक्षण हो सकता है।

  • गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस के लक्षण: सिर के बालों का झड़ना- अचानक सिर के बालों का झड़ना प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस (pregnancy se pehle PCOS) का संकेत हो सकता है।

ध्यान रखें- ऊपर बताए गए लक्षण किसी अन्य शारीरिक समस्या के संकेत भी हो सकते हैं, इसीलिए किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

4. प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस के कारण क्या होते हैं?

(pregnancy se pehle PCOS ke kya karan hote hai)

PCOS - karan

विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस (pregnancy se pehle PCOS) होने का कोई सटीक कारण नहीं होता। हालांकि एेसे कुछ कारण हैं, जिनकी वजह से प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस (PCOS in hindi) होने की संभावना बढ़ जाती है। इनका उल्लेख नीचे किया जा रहा है-

  • हार्मोनल बदलाव- गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस (PCOS in hindi) होने का सबसे बड़ा कारण महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव को माना जाता है। इससे उसे अंडोत्सर्जन यानी ओवुलेशन में परेशानी होती है। पर्याप्त अंडे न बनने की स्थिति में महिला को गर्भधारण करने में समस्या हो सकती है।

  • मोटापा- अक्सर महिलाओं में बढ़ते मोटापे के कारण, उन्हें गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस (pregnancy se pehle PCOS) की समस्या हो सकती है। दरअसल, अतिरिक्त चर्बी के कारण शरीर में एस्ट्रोजेन हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है और ओवरी में गांठें बनने लगती हैं।

  • एण्ड्रोजेन हार्मोन की वृद्धि- महिला के शरीर में एण्ड्रोजेन हार्मोन के बढ़ने के कारण उसे प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस (pregnancy se pehle PCOS) की समस्या हो सकती है। असल में एण्ड्रोजेन एक प्रकार का पुरुष हार्मोन है, जिसके असंतुलन की वजह से महिला के शरीर में प्रजनन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

  • अनियमित जीवनशैली- कुछ मामलों में अनियमित जीवनशैली को भी गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस (pregnancy se pehle PCOS) का कारण माना जाता है। यहां अनियमित जीवनशैली में मुख्य रूप से खानपान की गलत आदतें, नशे की लत, उचित दिनचर्या का पालन न करना आदि शामिल हैं। इनसे न केवल गर्भधारण में समस्या होती है बल्कि अन्य कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी हो सकती है।

  • अानुवांशिक कारण- कई बार अानुवांशिक कारणों से महिला को प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस की समस्या हो सकती है। यानी कि गर्भधारण करने वाली महिला के परिवार में उसकी मां, बहन या किसी अन्य महिला रिश्तेदार को पीसीओएस (PCOS in hindi) की समस्या रही हो तो उसे इसके होने की अाशंका होती है।

5. प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस से बचने के उपाय क्या हैं?

(pregnancy se pehle PCOS se bachne ke upay kya hai)

PCOS - bachne ke upay

यूं तो प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस (pregnancy se pehle PCOS) से बचने का कोई उपाय नहीं है, लेकिन कुछ सामान्य उपायों को अाजमा कर इसके होने की संभावना को कम किया जा सकता है। इन उपायों का उल्लेख नीचे किया जा रहा है-

  • अपनी दिनचर्या में बदलाव लाएं।
  • नियमित समय पर, संतुलित और सेहतमंद भोजन खाएं। एक बार की बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाएं।
  • भरपूर मात्रा में यानी दिन में कम से कम 10 गिलास पानी ज़रूर पीएं।
  • रोजाना व्यायाम और योग करें।
  • चिंता और तनाव से दूर रहें।
  • डॉक्टर से नियमित जांच करवाएं।

6. गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस की जांच कैसे की जाती है?

(pregnancy se pehle PCOS ki jaanch kaise ki jati hai)

PCOS - jaanch kaise hoti hai

अधिकांश महिलाओं को गर्भधारण की कोशिशों के दौरान पीसीओएस (PCOS in hindi) होने का पता चलता है। इसीलिए अगर आपको प्रेगनेंसी की कोशिश करते हुए एक साल बीत जाने के बाद भी गर्भधारण में समस्या हो रही है, तो आपको डॉक्टर से इसकी जांच करवानी चाहिए।

डॉक्टर इसके लक्षणों के आधार पर निम्न जांचें कर सकते हैं-

  • सामान्य शारीरिक जांच- सामान्य शारीरिक जांच के दौरान डॉक्टर महिला के शरीर में पीसीओएस (PCOS in hindi) के लक्षणों की जांच करते हैं। इस बीच उसका बीपी और वजन मापा जाता है और अन्य लक्षणों जैसे शरीर पर अतिरिक्त बाल, मुँहासे और अनियमित मासिक धर्म आदि का परीक्षण किया जाता है।

  • पेल्विक क्षेत्र की जांच- गर्भधारण करने से पहले अगर किसी महिला को पीसीओएस (PCOS in hindi) होने की अाशंका होती है तो लक्षणों के आधार पर डॉक्टर उसके पेल्विक क्षेत्र की जांच करते हैं। इस बीच अंडाशय के आकार का परीक्षण किया जाता है।

  • अल्ट्रासाउंड की जांच- प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस (PCOS in hindi) होने का पता लगाने के लिए डॉक्टर महिला को अल्ट्रासाउंड के जरिए श्रोणि की जांच कराने की सलाह देते हैं। इस दौरान वे अंडाशय का आकार, उसमें बनने वाली गांठों और गर्भाशय की दीवार की जांच करते हैं।

  • खून की जांच- गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस (pregnancy se pehle PCOS) की अाशंका होने पर डॉक्टर महिला को खून की जांच कराने की सलाह देते हैं। इस जांच के दौरान उसके शरीर में एण्ड्रोजेन हार्मोन के स्तर का पता लगाया जाता है।

7. प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस का इलाज कैसे किया जाता है?

(pregnancy se pehle PCOS ka ilaj kaise kiya jata hai)

PCOS - ilaaj

विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ विधियों के माध्यम से प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस (PCOS in hindi) का इलाज किया जा सकता है, लेकिन इसके पूरी तरह से ठीक होने की संभावना कम ही होती है। गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस के इलाज की विधियों का वर्णन नीचे किया गया है-

  • फर्टिलिटी की दवाओं से पीसीओएस का इलाज- गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस (pregnancy se pehle PCOS) के इलाज के लिए कई बार डॉक्टर महिला को फर्टिलिटी बढ़ाने की दवा देते हैं। इस प्रकार की दवाएं उसके शरीर में अंडोत्सर्जन की प्रक्रिया में सहायक होती हैं। इनसे पीसीओएस के लक्षणों को नियंत्रित किया जाता है, जिससे महिला को गर्भधारण करने में मदद मिल सकती है।

  • गर्भनिरोधक दवाओं से पीसीओएस का इलाज- कई मामलों में प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस (PCOS in hindi) का इलाज गर्भनिरोधक दवाओं से किया जाता है। इन दवाओं से महिला के शरीर में पुरुष हार्मोनों का स्तर नियंत्रित रहता है, जिससे उसकी प्रजनन क्षमता बढ़ सकती है।

  • लेप्रोस्कोपी सर्जरी से पीसीओएस का इलाज- कुछ गंभीर मामलों में गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस (PCOS in hindi) असामान्य रूप से बढ़ जाने पर डॉक्टर आपको लेप्रोस्कोपी सर्जरी कराने की सलाह दे सकते हैं। इस प्रक्रिया में एक सुईनुमा यंत्र की मदद से अंडाशयों की गांठों को को नष्ट किया जाता है। इससे महिला के अोवुलेशन में वृद्धि हो सकती है।

8. गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस के क्या जोखिम हो सकते हैं?

(pregnancy se pehle PCOS ke kya jokhim ho sakte hai)

PCOS - risks

गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस (pregnancy se pehle PCOS) से महिलाओं को कई स्वास्थ्य संबंधी जोखिम हो सकते हैं, जो नीचे बताए गए हैं-

  • स्लीप एप्निया- गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस (PCOS in hindi) की समस्या ज्यादा बढ़ जाने पर महिला को स्लीप एप्निया (sleep apnea in hindi) या नींद में सांस न ले पाने जैसी परेशानी हो सकती है।

  • प्रजनन क्षमता में कमी- प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस (PCOS in hindi) होने की स्थिति में महिला के शरीर में हार्मोनों का संतुलन बिगड़ता है, जिसका दुष्प्रभाव उसकी प्रजनन क्षमता (reproduction in hindi) पर पड़ सकता है और उसे गर्भधारण करने में परेशानी हो सकती है।

  • टाइप 2 डायबिटीज- गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस (pregnancy se pehle PCOS) बहुत ज्यादा बढ़ जाने से यह इन्सुलिन प्रतिरोधक संबंधी समस्या का कारण बनता है। इससे महिला के शरीर में रक्त शर्करा की मात्रा बढ़ने लगती है, जिससे उसे टाइप 2 डायबिटीज (type 2 diabities in hindi) हो सकता है।

  • हार्ट की समस्या- प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस होने की स्थिति में महिला को हृदय संबंधी समस्या हो सकती है। डॉक्टर्स का कहना है कि पीसीओएस (PCOS in hindi) से जूझ रही महिलाओं को बढ़ती उम्र के साथ हार्ट संबंधी समस्या होने की आशंका होती है।

  • हाई बीपी- जिन महिलाओं को गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस (PCOS in hindi) की समस्या होती है, उन्हें हाई बीपी (high BP in hindi) होने की आशंका होती है। गंभीर मामलों में ये समस्या बढ़ने पर महिला की रक्त वाहिकाएं (blood vesseles in hindi) क्षतिग्रस्त हो सकती हैं।

  • एंडोमेट्रियल कैंसर- प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस (pregnancy se pehle PCOS) की समस्या से जूझ रही महिलाओं को एंडोमेट्रियल कैंसर (endometrial cancer in hindi) होने की आशंका हो सकती है। दरअसल, पीसीओएस की वजह से उनके शरीर में हार्मोनल संतुलन बिगड़ता है, जिससे एंडोमेट्रियल कैंसर या यूटेराइन कैंसर (uterine cancer in hindi) होने की आशंका अपेक्षाकृत रूप से बढ़ सकती है।

  • चयापचय या मेटाबॉलिज्म संबंधी समस्या- कुछ हालिया शोधों में यह पता चला है कि जो महिलाएं प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस (pregnancy se pehle PCOS) से जूझ रही हैं, उन्हें चयापचय यानी मेटाबॉलिज्म संबंधी समस्या होने की आशंका हो सकती है। इसे मेटाबोलिक सिंड्रोम (metabolic syndrome in hindi) भी कहा जाता है।

9. प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस के घरेलू उपाय क्या हैं?

(pregnancy se pehle PCOS ke gharelu upay)

PCOS - gharelu upay

गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस (pregnancy se pehle PCOS) की समस्या को दूर तो नहीं किया जा सकता, लेकिन कुछ सामान्य घरेलू उपायों को अपना कर इसे नियंत्रित जरूर कर सकते हैं। इन उपायों में सौंफ का पानी पीना, तिल खाना, तुलसी की चाय पीना, विटामिन डी युक्त चीजें खाना आदि शामिल हैं।

10. गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस नियंत्रित करने के लिए कौन से योग कर सकते हैं?

(pregnancy se pehle PCOS niyantrit karne ke liye kon se yoga kar sakte hai)

PCOS - yoga

हमारे ऋषि मुनि हमें सदियों से योग का महत्व बताते आए हैं और वर्तमान समय में डॉक्टर्स भी योग को स्वस्थ रहने का एक महत्वपूर्ण तरीका मानते हैं। गर्भधारण से पहले पीसीओएस (pregnancy se pehle PCOS) नियंत्रित करने के लिए नियमित रूप से योग करना फायदेमंद होता है। इस दौरान किए जा सकने वाले कुछ योग आसन निम्न हैं-

  • तितली आसन (baddha konasana)
  • सुप्त बद्धकोणासन (supta baddha konasana)
  • भारद्वाजासन (bharadvajasana)
  • चक्की चलनासन (chakki chalanasana)
  • शवासन (shavasana)
  • पद्म साधना (padma sadhana)
  • सूर्य नमस्कार (surya namaskar)

विशेषज्ञों के अनुसार, पीसीओएस (PCOS in hindi) होने के लक्षण काफी महत्वपूर्ण होते हैं। इसीलिए इन्हें अनदेखा या नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए तो इससे महिला को गर्भधारण करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

इस ब्लॉग में बताई गई बातों का ध्यान रख कर आप प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस (pregnancy se pehle PCOS) होने की संभावना को कम कर सकती हैं। लेकिन किसी गंभीर समस्या की आशंका होने पर डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर विकल्प माना जाता है।

इस ब्लॉग के विषय - 1. पीसीओएस क्या होता है? (PCOS ya polycystic ovary syndrome kya hota hai)2. पीसीओएस कितने प्रकार के होते हैं? (types of PCOS in hindi)3. गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस के लक्षण क्या होते हैं? (pregnancy se pehle PCOS ke lakshan kya hote hai)4. प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस के कारण क्या होते हैं? (pregnancy se pehle PCOS ke kya karan hote hai)5. प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस से बचने के उपाय क्या है? (pregnancy se pehle PCOS se bachne ke upay kya hai)6. गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस की जांच कैसे की जाती है? (pregnancy se pehle PCOS ki jaanch kaise ki jati hai)7. प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस का इलाज कैसे किया जाता है? (pregnancy se pehle PCOS ka ilaj kaise kiya jata hai)8. गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस के क्या जोखिम हो सकते हैं? (pregnancy se pehle PCOS ke kya jokhim ho sakte hai)9. प्रेगनेंसी से पहले पीसीओएस के घरेलू उपाय क्या हैं? (pregnancy se pehle PCOS ke gharelu upay)10. गर्भधारण करने से पहले पीसीओएस नियंत्रित करने के लिए कौन से योग कर सकते हैं? (pregnancy se pehle PCOS niyantrit karne ke liye kon se yoga kar sakte hai)
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