एमनियोटिक द्रव की कमी : लक्षण, कारण और इलाज (low amniotic fluid in hindi : lakshan, karan aur ilaj)

एमनियोटिक द्रव की कमी : लक्षण, कारण और इलाज (low amniotic fluid in hindi : lakshan, karan aur ilaj)

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को कई समस्याओं से गुजरना पड़ता है, जिनमें से एक समस्या गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की कमी या गर्भ में पानी की कमी (oligohydramnios in hindi) होना है। हालांकि गर्भवती महिलाओं को यह समस्या प्रेगनेंसी के किसी भी चरण में हो सकती है, लेकिन ज्यादातर महिलाओं को यह तीसरी तिमाही में होती है।

गर्भ में पानी की कमी होना कई बार गर्भ में पल रहे शिशु के लिए जानलेवा हो सकता है। इस ब्लॉग में हम आपको गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की कमी (low amniotic fluid in hindi) से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं।

1. एमनियोटिक द्रव या गर्भाशय का पानी क्या होता है?

(amniotic fluid ya garbhashay ka pani kya hota hai)

Amniotic Fluid

गर्भ ठहरने के करीब 12 दिनों के बाद महिला के गर्भाशय में एमनियोटिक थैली (amniotic sac in hindi) बनती है और उसमें द्रव बनना शुरू होता है, इसे एमनियोटिक द्रव कहा जाता है। यह द्रव गर्भ में पलने वाले शिशु के लिए कई मायनों में फायदेमंद होता है। यह एक प्रकार से उसकी जीवनरक्षा प्रणाली होती है और इसके अंदर उसकी मांसपेशियों, फेफड़ों, पाचन तंत्र और विभिन्न अंगों का विकास होता है।

गर्भावस्था के शुरुआती चरण में शिशु को एमनियोटिक फ्लूइड मां से प्राप्त होता है। इस दौरान महिला के गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की उचित मात्रा होने की वजह से गर्भ में शिशु आसानी से घूम फिर सकता है, जिससे उसका विकास संभव हो पाता है।

डॉक्टर्स कहते हैं कि आमतौर पर शिशु दूसरी तिमाही में सांस लेने का अभ्यास करने लगता है। इस दौरान करीब 20वें हफ्ते के बाद वह इस पानी को निगलता है और फिर यह उसके पेशाब के रूप में बाहर निकालता है। इसके बाद वह इस प्रक्रिया को दोहराता रहता है और गर्भ में एमनियोटिक द्रव का स्तर बढ़ने लगता है।

2. गर्भ में पानी की कमी या ओलिगोहाइड्रेमनियोस क्या होता है?

(garbh me amniotic fluid ki kami or oligohydramnios kya hota hai)

Low Amniotic Fluid

प्रेगनेंसी के किसी भी चरण में, अगर गर्भ में एमनियोटिक द्रव की मात्रा सामान्य से कम होती है, तो इस स्थिति को एमनियोटिक द्रव की कमी (low amniotic fluid in hindi) या ओलिगोहाइड्रेमनियोस (oligohydramnios in hindi) कहते हैं। पूरी प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पानी की औसत मात्रा की सूची नीचे बताई गई है -

गर्भावस्था का समय गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की मात्रा
प्रेगनेंसी के 12वें सप्ताह में करीब 60 मिलीलीटर
गर्भावस्था के 16वें सप्ताह में करीब 175 मिलीलीटर
प्रेगनेंसी के 34वें सप्ताह से 38वें सप्ताह में करीब 400 से 1200 मिलीलीटर

सामान्यतः डॉक्टर्स गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूइड इंडेक्स (AFI in hindi) एवं मैक्सिमम वर्टिकल पॉकेट (maximum verticle pocket in hindi) के आधार पर इसके कम या ज्यादा होने की जांच करते हैं। अगर महिला की एएफआई पांच सेंटीमीटर से कम और एमपीवी दो सेंटीमीटर से कम पाई जाती है तो इसे गर्भ में पानी की कमी माना जाता है।

3. गर्भ में पानी की कमी कब होती है?

(garbh me amniotic fluid ki kami kab hoti hai)

Low Amniotic Fluid

आमतौर पर गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की कमी (oligohydramnios in hindi) कभी भी हो सकती है, लेकिन ज्यादातर महिलाओं को इसकी कमी प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में यानी 36वें हफ्ते के बाद होने लगती है। यह वह समय होता है जब गर्भवती महिला का शरीर प्रसव के लिए तैयार होने लगता है।

हालांकि दुर्लभ मामलों में प्रेगनेंसी की पहली या दूसरी तिमाही में महिला के गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की कमी (oligohydramnios in hindi) हो सकती है, लेकिन इसकी संभावना बहुत कम महिलाओं को होती है।

4. गर्भ में पानी की कमी क्यों होती है?

(garbh me amniotic fluid ki kami kyu hoti hai)

Low Amniotic Fluid

गर्भ में पानी की कमी (oligohydramnios in hindi) होने के कई कारण हो सकते हैं, जिनका उल्लेख नीचे किया जा रहा है -

  • गर्भ में पानी की कमी के कारण : जन्मजात विकलांगता - दरअसल, गर्भावस्था की दूसरी तिमाही के अंतिम दौर में शिशु के पेशाब से ही एमनियोटिक द्रव की मात्रा बढ़ती है। ऐसे में अगर गर्भ में पल रहे शिशु को किडनी या मूत्र मार्ग संबंधी कोई समस्या हो रही है, तो महिला के गर्भ में पानी की कमी (oligohydramnios in hindi) हो सकती है।

  • गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की कमी के कारण : झिल्ली का फटना - कभी-कभी गर्भवती के गर्भाशय की झिल्ली यानी पानी की थैली के फटने के कारण उसके गर्भ में एमनियोटिक द्रव की कमी (oligohydramnios in hindi) हो सकती है।

  • गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की कमी के कारण : पानी की थैली में छिद्र से द्रव का रिसना - कुछ मामलों में पानी की थैली में छिद्र हो जाता है, जिससे द्रव रिसने लगता है। इसके कारण महिला के गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की कमी (oligohydramnios in hindi) हो सकती है। कभी कभी यह छेद बहुत ज्यादा बारीक होता है।

  • गर्भ में पानी की कमी के कारण : प्लेसेंटा में समस्या - महिला के प्लेसेंटा में किसी प्रकार की समस्या होने से शिशु तक खून का प्रवाह सुचारू रूप से नहीं हो पाता। इससे शिशु के पेशाब पर और एमनियोटिक द्रव की पुनरावृत्ति पर असर पड़ता है, जिसकी वजह से गर्भ में पानी की कमी (oligohydramnios in hindi) हो सकती है।

  • गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की कमी के कारण : प्रसव में देरी - प्लेसेंटा की कार्यप्रणाली में कोई समस्या आने की वजह से महिला के प्रसव में देरी हो सकती है यानी प्रेगनेंसी 42 सप्ताह से ज्यादा बढ़ सकती है। इसके कारण महिला के गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की कमी (oligohydramnios in hindi) हो सकती है।

  • गर्भ में पानी की कमी के कारण : मां को अन्य समस्या - गर्भावस्था के दौरान मां को होने वाली शारीरिक या मानसिक समस्याओं (जिनमें तनाव, प्री-एक्लेम्पसिया, शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन), शुगर आदि मुख्य हैं) के कारण भी उसके गर्भ में पानी की कमी हो सकती है।

5. गर्भ में पानी की कमी होने के लक्षण क्या होते हैं?

(garbh me amniotic fluid ki kami hone ke lakshan kya hai)

Low Amniotic Fluid

विशेषज्ञों के अनुसार गर्भ में एमनियोटिक द्रव की कमी होने के लक्षण हर गर्भवती में अलग तरह से दिखाई दे सकते हैं। इसके कुछ सामान्य लक्षण निम्न हैं -

  • गर्भावस्था की अवधि के अनुसार पेट का आकार कम होना।
  • गर्भ में बच्चे की गतिविधि कम हो जाना।
  • अल्ट्रासाउंड जांच के दौरान गर्भ में पर्याप्त एमनियोटिक द्रव दिखाई न देना।
  • 32 से 36 सप्ताह की गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय में 500 मिलीलीटर से कम द्रव होना।
  • योनि से एमनियोटिक द्रव निकलना।

6. योनि से एमनियोटिक द्रव निकलने के लक्षण क्या होते हैं?

(yoni se amniotic fluid nikalne ke lakshan kya hote hai)

Low Amniotic Fluid

कभी-कभी प्रेगनेंसी में गर्भवती की योनि से निकलने वाला द्रव एमनियोटिक फ्लूइड भी हो सकता है, जिसकी वजह से उसके गर्भ में इस द्रव की कमी (oligohydramnios in hindi) हो सकती है। इसके कुछ प्रमुख लक्षण नीचे बताए जा रहे हैं -

  • अक्सर पैंटी भीग जाना।
  • पैंटी में स्पष्ट सफेद रंग का धब्बा दिखाई देना।
  • योनि स्राव के साथ म्यूकस अथवा पानी युक्त खून निकलना।
  • योनि स्राव से किसी प्रकार की दुर्गंध न आना।
  • गर्भ में पल रहे शिशु की गतिविधियां अचानक बंद हो जाना।

7. गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की कमी की जांच कैसे की जाती है?

(garbhashay me amniotic fluid ki kami ki janch kaise ki jati hai)

Low Amniotic Fluid

डॉक्टर निम्न जांच करके गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की कमी की पुष्टि करते हैं -

अल्ट्रासाउंड : आमतौर पर महिला के गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की कमी (oligohydramnios in hindi) होने की जांच सामान्य अल्ट्रासाउंड से की जाती है। इस जांच में ध्वनि तरंगों के माध्यम से एमनियोटिक फ्लूइड इंडेक्स (AFI in hindi) एवं मैक्सिमम वर्टिकल पॉकेट (maximum verticle pocket in hindi) के आधार पर गर्भ में पानी की मात्रा को मापा जाता है।

खून की जांच : खून की जांच से महिला के गर्भाशय में पानी की कमी (oligohydramnios in hindi) होने का पता लगाया जा सकता है। इसके साथ ही सीरम स्क्रीनिंग (serum screening test in hindi) नामक खून की जांच से शिशु में जन्मजात विकलांगताओं का पता भी लगाया जा सकता है, जिनमें स्पाइना बिफिडा और डाऊन सिंड्रोम मुख्य हैं।

8. गर्भ में पानी की कमी का इलाज कैसे किया जाता है?

(garbh me amniotic fluid ki kami ka ilaj kaise kiya jata hai)

Low Amniotic Fluid

महिला के गर्भ में पानी की कमी (oligohydramnios in hindi) का इलाज उसके गर्भकाल पर निर्भर करता है। गर्भ में पानी की कमी का इलाज निम्न तरीकों से किया जाता है -

  • प्राकृतिक उपाय : अक्सर महिला के गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की कमी (oligohydramnios in hindi) का इलाज घर पर कुछ सामान्य उपायों से किया जा सकता है। इस दौरान डॉक्टर उसे अधिक मात्रा में पानी और तरल पदार्थ पीने की सलाह देते हैं। कई बार तनाव और शुगर की वजह से महिला के गर्भ में पानी की कमी होने लगती है, जो इस सामान्य उपाय से दूर हो सकती है।

  • एमनियोफ्यूजन प्रक्रिया (amnioinfusion procedure in hindi) : महिला को प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में गर्भाशय में पानी की कमी (oligohydramnios in hindi) होने पर एमनियोफ्यूजन प्रक्रिया से उसके गर्भ में पानी की कमी को पूरा किया जाता है।

इस प्रक्रिया के तहत सोडियम क्लोराइड के घोल को इंट्रायूटेराइन कैथेटर के माध्यम से महिला के गर्भ तक पहुंचाया जाता है। इससे सिजेरियन डिलीवरी की संभावना कम हो जाती है।

  • वेरिको एमनियोटिक शंट (verico amniotic shunt in hindi) : महिला के गर्भ में पल रहे शिशु के मूत्र मार्ग या किडनी में समस्या की अाशंका होने पर वेरिको एमनियोटिक शंट प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है। इससे उसके शरीर में पेशाब के रास्ते को परिवर्तित किया जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रक्रिया गर्भ में पानी की मात्रा को बढ़ाने में सहायक होती है, लेकिन इससे शिशु के किडनी, फेफड़ों और मूत्र मार्ग की समस्या का हल होता है या नहीं, इसका अभी तक कोई प्रमाण नहीं मिल सका है।

  • एमनियोसेंटेसिस (amniocentesis in hindi) : प्रसव से पहले, महिला के गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की कमी (oligohydramnios in hindi) होने पर, एमनियोसेंटेसिस (amniocentesis in hindi) प्रक्रिया के माध्यम से उसके गर्भ में पानी की कमी को पूरा किया जाता है।

इस प्रक्रिया के दौरान इंजेक्शन के माध्यम से गर्भ तक पानी पहुंचाया जाता है। इसके बाद कुछ दिनों तक महिला के गर्भ में एमनियोटिक द्रव की मात्रा की निगरानी की जाती है।

9. गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की कमी के क्या जोखिम हो सकते हैं?

(garbhashay me amniotic fluid ki kami ke kya jokhim ho sakte hai)

Low Amniotic Fluid

प्रेगनेंसी के किसी भी चरण में गर्भाशय में पानी की कमी (oligohydramnios in hindi) होना मां और शिशु दोनों के लिए हानिकारक हो सकता है।

प्रेगनेंसी में लो एमनियोटिक फ्लूइड की वजह से निम्न जोखिम हो सकते हैं -

  • शिशु के विकास में रुकावट : अक्सर गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की कमी (oligohydramnios in hindi) होने पर, उसमें पल रहे शिशु को विकसित होने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती है, और उसके विकास में बाधा आ सकती है। इससे उसमें जन्मजात विकलांगता हो सकती है। इनमें स्पाइना बिफिडा, डाऊन सिंड्रोम, किडनी, फेफड़ों और मूत्र मार्ग संबंधी समस्याएं मुख्य हैं।

  • गर्भपात : गर्भावस्था की पहली और दूसरी तिमाही के दौरान, शुरुआती 20 हफ्तों के भीतर, महिला के गर्भाशय में पानी की कमी (oligohydramnios in hindi) होने की वजह से उसका गर्भपात हो सकता है।

  • समय पूर्व प्रसव : गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की मात्रा बहुत कम होने पर महिला की समय पूर्व डिलीवरी हो सकती है। इस दौरान प्रसव की निर्धारित अवधि यानी 37वें सप्ताह से पहले ही शिशु का जन्म हो सकता है।

  • मृत बच्चे का जन्म : गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की कमी (oligohydramnios in hindi) होने से, उसमें पल रहे शिशु की मृत्यु हो सकती है और मृत शिशु का जन्म (still birth in hindi) हो सकता है।

  • प्रसव के दौरान समस्याएं : महिला के गर्भाशय में पानी की कमी (oligohydramnios in hindi) होने पर उसे प्रसव के दौरान विभिन्न प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं। इनमें शिशु का ब्रीच पोजिशन में आना, गर्भनाल का फंस जाना और दब जाना, बच्चे में अॉक्सीजन की कमी होना आदि मुख्य हैं।

  • सिजेरियन डिलीवरी : लंबे समय तक महिला के गर्भ में पानी की कमी (oligohydramnios in hindi) से उसकी सिजेरियन डिलीवरी होने की संभावना बढ़ जाती है। दरअसल, ज्यादा दिनों तक एमनियोटिक फ्लूइड की कमी होने की वजह से मां और शिशु को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, जिनकी वजह से डॉक्टर आपातकालीन सिजेरियन डिलीवरी कराने के लिए कह सकते हैं।

10. गर्भ में एमनियोटिक द्रव कम होने पर क्या करें?

(garbh me amniotic fluid kam hone par kya kare)

Low Amniotic Fluid

नीचे बताए जा रहे सामान्य टिप्स आजमा कर महिलाएं गर्भ में एमनियोटिक द्रव की कमी (oligohydramnios in hindi) को नियंत्रण में रख सकती है -

नोट- गर्भावस्था के विभिन्न चरणों में महिलाओं के शरीर में एमनियोटिक फ्लूइड की मात्रा और उससे जुड़ी समस्याएं अलग हो सकती है, इसीलिए यहां बताए गए उपायों को अाजमाने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य ले लें।

  • भरपूर मात्रा में पानी पीएं : प्रेगनेंसी के दौरान गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की कमी (oligohydramnios in hindi) होने पर महिलाओं को भरपूर मात्रा में पानी पीना चाहिए। कई बार पानी की उचित मात्रा से एमनियोटिक द्रव की कमी दूर हो जाती है। डॉक्टर्स कहते हैं कि गर्भवती महिला को दिन में कम से कम आठ से दस गिलास पानी जरूर पीना चाहिए।

  • तरल पदार्थ युक्त भोजन खाएं : अक्सर महिलाओं के गर्भ में पानी की कमी (oligohydramnios in hindi) होने पर डॉक्टर उन्हें तरल पदार्थ युक्त भोजन खाने की सलाह देते हैं। इनमें विभिन्न प्रकार की हरी सब्जियां और फल शामिल हैं।

    • पानी की अधिक मात्रा वाले फल - टमाटर (94.5 प्रतिशत पानी), तरबूज (91.5 प्रतिशत पानी), अंगूर (90.5 प्रतिशत पानी), स्ट्रॉबेरी (91 प्रतिशत पानी) आदि।

    • पानी की अधिक मात्रा वाली हरी सब्जियां - खीरा (96.7 प्रतिशत पानी), शिमला मिर्च (93.9 प्रतिशत पानी), मूली (95.3 प्रतिशत पानी), फूल गोभी (92.1 प्रतिशत पानी), पालक (91.4 प्रतिशत पानी), गाजर (90.4 प्रतिशत पानी), ब्रोकली (90.7 प्रतिशत पानी), लेट्यूस (95.6 प्रतिशत पानी) आदि।

  • हमेशा बायीं ओर करवट लेकर लेटें : अगर किसी महिला को गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की कमी (oligohydramnios in hindi) होने की वजह से बेडरेस्ट करने के लिए कहा गया है, तो उसे हमेशा बायीं ओर करवट लेकर लेटना चाहिए।

विशेषज्ञ बताते हैं कि जब गर्भवती महिलाएं बायीं ओर करवट लेकर लेटती है, तब उनके गर्भ में पल रहे शिशु तक उचित मात्रा में खून और जरूरी पोषक तत्व पहुंच पाते हैं, जिससे उसका विकास संभव होता है। साथ ही इससे एमनियोटिक फ्लूइड की कमी (oligohydramnios in hindi) दूर हो सकती है।

  • नियमित व्यायाम करें : गर्भ में पानी की कमी (oligohydramnios in hindi) होने पर नियमित व्यायाम करना फायदेमंद माना जाता है। कुछ सामान्य व्यायाम करने से महिला के शरीर के विभिन्न अंगों तक खून का संचार सुचारू रूप से हो पाता है। इससे प्लेसेंटा का कार्य भी अच्छे से होता है और शिशु तक उचित मात्रा में तरल पहुंचता है।

इस दौरान घर पर आप कुछ सामान्य व्यायाम कर सकती हैं, जिनमें -

* पैदल चलना तैराकी (swimming) 
* पानी में एरोबिक्स (water aerobics)

नोट- गर्भावस्था के विभिन्न चरणों में महिलाओं के शरीर में एमनियोटिक फ्लूइड की मात्रा और उससे जुड़ी समस्याएं अलग हो सकती है, इसीलिए यहां बताए गए उपायों को अाजमाने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य ले लें।

11. गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की कमी से कैसे बचें?

(garbhashay me amniotic fluid ki kami se kaise bache)

Low Amniotic Fluid

यूं तो गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की कमी (oligohydramnios in hindi) होने को रोका तो नहीं जा सकता, लेकिन कुछ सामान्य सावधानियों को आजमा कर इसके होने की संभावना को कम किया जा सकता है। ये सावधानियां नीचे बताई जा रही हैं -

  • धूम्रपान न करें।
  • शोध बताते हैं कि गर्भावस्था के दौरान किसी भी प्रकार की दवा को अधिक मात्रा में लेने से गर्भ में एमनियोटिक द्रव की कमी (low amniotic fluid in hindi) हो सकती है। इसीलिए कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लें। इन दवाओं में विटामिन सप्लीमेंट की गोलियां और हर्बल सप्लीमेंट (जड़ी बुटियों से निर्मित दवा) आदि शामिल हैं।
  • सेहतमंद खाना खाएं और एक बार में भरपेट खाने के बजाए, थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन करें। अपने भोजन में पोषक तत्वों को शामिल करें।
  • अगर आप गर्भकालीन शुगर से पीड़ित हैं, तो अपने आहार का ख्याल रखें। किसी डायटिशियन से नियमित अाहार की सूची की जानकारी अवश्य लें।
  • नियमित अंतराल पर डॉक्टर की सलाह लें। इससे वे किसी समस्या का अंदेशा होने पर जरूरी एहतियात बरतने को कह सकते हैं।

गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की कमी (oligohydramnios in hindi) होने का असर गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर पड़ सकता है। इसीलिए इससे बचाव के लिए पर्याप्त सावधानियां अपनाएं और पर्याप्त मात्रा में पानी पीती रहें।

इसके साथ ही नियमित अंतराल पर डॉक्टर की सलाह लें, ताकि वे गर्भ में पानी की कमी (low amniotic fluid in hindi) होने पर समय रहते इसे नियंत्रित कर सके।

इस ब्लॉग के विषय - 1. एमनियोटिक द्रव या गर्भाशय का पानी क्या होता है? (amniotic fluid ya garbhashay ka pani kya hota hai)2. गर्भ में पानी की कमी या ओलिगोहाइड्रेमनियोस क्या होता है? (garbh me amniotic fluid ki kami or oligohydramnios kya hota hai)3. गर्भ में पानी की कमी कब होती है? (garbh me amniotic fluid ki kami kab hoti hai)4. गर्भ में पानी की कमी क्यों होती है? (garbh me amniotic fluid ki kami kyu hoti hai)5. गर्भ में पानी की कमी होने के लक्षण क्या होते हैं? (garbh me amniotic fluid ki kami hone ke lakshan kya hai)6. योनि से एमनियोटिक द्रव निकलने के लक्षण क्या होते हैं? (yoni se amniotic fluid nikalne ke lakshan kya hote hai)7. गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की कमी की जांच कैसे की जाती है? (garbhashay me amniotic fluid ki kami ki janch kaise ki jati hai)8. गर्भ में पानी की कमी का इलाज कैसे किया जाता है? (garbh me amniotic fluid ki kami ka ilaj kaise kiya jata hai)9. गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की कमी के क्या जोखिम हो सकते हैं? (garbhashay me amniotic fluid ki kami ke kya jokhim ho sakte hai)10. गर्भ में एमनियोटिक द्रव कम होने पर क्या करें? (garbh me amniotic fluid kam hone par kya kare)11. गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव की कमी से कैसे बचें? (garbhashay me amniotic fluid ki kami se kaise bache)
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