एक्टोपिक प्रेगनेंसी के लक्षण, कारण और इलाज (Ectopic pregnancy ke lakshan, karan aur ilaj)

एक्टोपिक प्रेगनेंसी के लक्षण, कारण और इलाज (Ectopic pregnancy ke lakshan, karan aur ilaj)

दुनिया की हर महिला को गर्भावस्था की खबर से खुशी होती है, लेकिन अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) की जानकारी मिलते ही वह खुशी निराशा में बदल जाती है। अस्थानिक गर्भावस्था या एक्टोपिक प्रेगनेंसी के ज्यादातर मामलों में निषेचन की प्रक्रिया महिलाओं के फैलोपियन ट्यूब में होती है। दुर्भाग्यवश निषेचन के बाद भ्रूण का विकास नहीं हो पाता और उसकी जगह ऊतकों की वृद्धि होने लगती है। अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) में अगर समय रहते ऊतकों को हटाया नहीं जाए तो इससे गर्भवती महिला को गंभीर शारीरिक समस्या हो सकती है। इस ब्लॉग में एक्टोपिक प्रेगनेंसी के लक्षण, कारण और इलाज से जुड़ी अहम जानकारियां बताई गई है।

1. एक्टोपिक प्रेगनेंसी क्या है?

(ectopic pregnancy kya hai)

गर्भावस्था की शुरुआत अंडा निषेचन के साथ होती है। इस दौरान जब महिला के शरीर में निषेचित अंडा (fertilized egg in hindi) गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगता है, तो इसे एक्टोपिक प्रेगनेंसी या अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) कहा जाता हैं।

यह सामान्य गर्भावस्था से अलग होती है, क्योंकि सामान्य गर्भावस्था की स्थिति में शिशु गर्भाशय के अदंर पलता है। आमतौर पर अस्थानिक गर्भावस्था, अंडाशय से अंडों को गर्भाशय तक ले जाने वाली नलिकाओं यानी फैलोपियन ट्यूब (fallopian tube in hindi) में होती है। प्रेगनेंसी के इस प्रकार को ट्यूबल प्रेगनेंसी (tubal pregnancy in hindi) भी कहते है। कई विशेष मामलों में एक्टोपिक प्रेगनेंसी (ectopic pregnancy in hindi) शरीर के अन्य हिस्सों में भी हो सकती है, जिनमें अंडाशय, पेट और गर्भाशय के नीचे या गर्भाशय ग्रीवा (cervix in hindi) के ऊपर का हिस्सा शामिल है।

2. क्या अस्थानिक गर्भावस्था सामान्य है?

(kya ectopic pregnancy samanya hai)

एक अध्ययन के अनुसार भारत में सिर्फ तीन प्रतिशत महिलाएं एक्टोपिक प्रेग्नेंसी (ectopic pregnancy in hindi) की शिकार होती हैं, इसीलिए इसे सामान्य नहीं माना जाता है।

3. एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के लक्षण क्या है?

(ectopic pregnancy ke lakshan kya hai)

प्रेगनेंसी की शुरुआत में अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) होने का पता नहीं चल पाता है। हालांकि, कुछ महिलाओं को अस्थानिक गर्भावस्था होने पर सामान्य गर्भावस्था के ही लक्षण दिखाई देते हैं, जिनमें मासिक धर्म का न आना, स्तनों का संदेवनशील होना (breast tenderness in hindi), जी मिचलाना और उल्टी आना (vomiting in pregnancy in hindi) आदि मुख्य हैं। निषेचित अंडे के बढ़ने के साथ ही अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। एक्टोपिक प्रेगनेंसी के लक्षण निम्न हैं-

नोट- ऊपर बताए गए लक्षणों में से कुछ लक्षण सामान्य गर्भावस्था में भी दिख सकते हैं, इसीलिए इनको आधार मान कर किसी भी नतीजे तक न पहुंचे बल्कि इस बारे में पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें।

  • एक्टोपिक प्रेगनेंसी के लक्षण: योनि से रक्तस्राव होना- अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) का एक लक्षण योनि से रक्तस्राव हो सकता है।

  • एक्टोपिक प्रेगनेंसी के लक्षण: पैल्विक क्षेत्र में असहनीय दर्द होना-

    pelvic me dard hona

    अगर किसी महिला को प्रेगनेंसी की शुरुआत में ही पैल्विक क्षेत्र यानी श्रोणि (pelvic in hindi) में असहनीय दर्द होता है तो यह अस्थानिक गर्भावस्था का संकेत हो सकता हैं।

  • एक्टोपिक प्रेगनेंसी के लक्षण: कंधे, गर्दन और गुदा में दर्द होना-

    ectopic pregnancy me kandhe dard hona

    गर्भधारण करने के कुछ दिनों बाद अगर महिला के कंधे, गर्दन और गुदा में दर्द होता है तो यह अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) का लक्षण हो सकता है।

  • एक्टोपिक प्रेगनेंसी के लक्षण: शरीर के एक तरफ दर्द होना- अगर प्रेगनेंसी के शुरुआती दौर में आपके शरीर के किसी एक तरफ दर्द हो रहा है तो यह अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) का संकेत हो सकता है।

  • एक्टोपिक प्रेगनेंसी के लक्षण: जी घबराना और उल्टी आना-

    ectopic pregnancy me ulti hona

    यूं तो सामान्य प्रेगनेंसी में जी घबराना और उल्टी आना आम होता है, लेकिन प्रेगनेंसी के पहले तीन हफ्तों में जी घबराना और उल्टी आना अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) का लक्षण हो सकता है।

  • एक्टोपिक प्रेगनेंसी के लक्षण: पेट में ज्यादा ऐंठन होना- आमतौर पर प्रेगनेंसी के दौरान पेट में ऐंठन होने को स्वस्थ गर्भावस्था का लक्षण माना जाता है, लेकिन अगर आपको पेट में ज्यादा ऐंठन है तो यह अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) का लक्षण हो सकता है।

  • एक्टोपिक प्रेगनेंसी के लक्षण: कमजोरी और चक्कर आना-

    ectopic pregnancy me kamjori hona

    प्रेग्नेंसी में कमजोरी और चक्कर आना सामान्य होता है लेकिन यह अस्थानिक गर्भावस्था का लक्षण भी हो सकता है।

4. अस्थानिक प्रेगनेंसी के क्या कारण होते हैं?

(ectopic pregnancy ke kya karan hote hai)

ectopic pregnancy ke karan

ज्यादातर महिलाओं को अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) होने के सटीक कारणों का पता नहीं होता है, लेकिन महिलाओं को इसकी जानकारी होना जरूरी है। अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) होने के अन्य कारण भी हो सकते हैं, जो निम्न है-

  • एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का कारण: पैल्विक इंफ्लेमेटरी रोग- पैल्विक इंफ्लेमेटरी रोग (pelvic inflammatory disease/PID) महिलाओं के विभिन्न प्रजनन अंगों में होता है, जिनमें गर्भाशय, अंडाशय और श्रोणि शामिल है। इन अंगों में संक्रमण होने के कारण महिलाओं को अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) हो सकती है।
  • एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का कारण: यौन संचारित रोग- कई महिलाओं को यौन संचारित रोगों (sexually- transmitted diseases in hindi) के कारण अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) हो सकती है। आमतौर पर यौन संचारित रोग हमेशा यौन संबंधों के ज़रिए एक शरीर से दूसरे शरीर में संचारित होते है।
  • एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का कारण: श्रोणि की सर्जरी- अगर किसी महिला की श्रोणि की सर्जरी (pelvic surgery in hindi) हुई है तो यह संभव है कि उसकी श्रोणि में घाव रह गए हों। इनसे कई बार संक्रमण होने का खतरा होता है, जिसके कारण अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) हो सकती है।
  • एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का कारण: फैलोपियन ट्यूब में संक्रमण (fallopian tube infection in hindi)- यदि किसी महिला की फैलोपियन ट्यूब में संक्रमण या सूजन होती है तो यह अंडे को गर्भाशय तक जाने नहीं देती, जिस कारण अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) हो सकती है।
  • एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का कारण: फैलोपियन ट्यूब का क्षतिग्रस्त होना- विशेषज्ञ कहते हैं कि किसी महिला के शरीर में फैलोपियन ट्यूब का क्षतिग्रस्त होना एक्टोपिक प्रेग्नेंसी (ectopic pregnancy in hindi) का कारण हो सकता है। यह निषेचित अंडे को गर्भाशय में जाने से रोकता है, जिससे यह फैलोपियन ट्यूब या कहीं और बढ़ने के लिए मजबूर हो जाता है।
  • एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का कारण: अस्थानिक गर्भावस्था का इतिहास- अगर किसी महिला को पहले अस्थानिक गर्भावस्था हो चुकी है तो उसे दोबारा एक्टोपिक प्रेगनेंसी हो सकती है।
  • एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का कारण: प्रजनन की दवाओं का इस्तेमाल- विशेषज्ञ मानते हैं कि बाजार में उपलब्ध विभिन्न प्रकार की प्रजनन की दवाओं (fertility drugs in hindi) से भी गर्भवती महिला को अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) हो सकती है। प्रजनन की दवाएं गोलियां और इंजेक्शन दोनों के रूप में हो सकती हैं।
  • एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का कारण: आईवीएफ (IVF in hindi)- अस्थानिक गर्भावस्था का एक और कारण कृत्रिम गर्भधारण होता है, जिसे इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (in-vitro fertilization in hindi) कहा जाता है।
  • एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का कारण: गर्भनिरोधक उपकरण- कई बार गर्भनिरोधक उपकरणों (intrauterine device in hindi) के इस्तेमाल को भी अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) का कारण माना जाता है।
  • एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का कारण: गर्भधारण करने से पहले अत्यधिक धूम्रपान- अगर कोई महिला गर्भधारण से पहले अत्यधिक धूम्रपान करती है तो इसका असर उसकी प्रेगनेंसी पर पड़ सकता है और यह अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) का कारण बन सकता है।

5. अस्थानिक गर्भावस्था का पता कैसे लगाया जाता है?

(ectopic pregnancy ka pata kaise lagaya jata hai)

अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) का पता लगाने से पहले महिला गर्भवती हैं या नहीं इसका पता लगाया जाना जरूरी होता है। इसके लिए डॉक्टर सबसे पहले महिला के खून की जांच करके उसके शरीर में प्रेगनेंसी हार्मोन यानी ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (hCG hormone in hindi) के स्तर का पता लगाते हैं। प्रेगनेंसी का पता लगने पर अस्थानिक गर्भावस्था के लक्षणों की जांच की जाती है। एक्टोपिक प्रेगनेंसी की अशंका होने पर डॉक्टर गर्भवती को अल्ट्रासाउंड की मदद से उसके पैल्विक क्षेत्र की जांच करने को कहते हैं, जिससे निषेचित अंडे के उचित स्थान का पता लगाया जाता है। अगर अल्ट्रासाउंड में अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) होती है तो डॉक्टर आगे की जानकारी देते हैं।

6. क्या एक्टोपिक प्रेगनेंसी का इलाज संभव है?

(kya ectopic pregnancy ka ilaj sambhav hai)

ectopic pregnancy ka ilaj

कई मामलों में एक्टोपिक प्रेगनेंसी (ectopic pregnancy in hindi) का इलाज संभव होता है, लेकिन यह अक्सर गर्भावस्था की स्थिति और महिला की शारीरिक अवस्था पर निर्भर करता है। इसीलिए अस्थानिक गर्भावस्था के लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लेना सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है। इलाज के दौरान शारीरिक पीड़ा के साथ ही अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) के दौर से गुजर रहीं मांओं को भावनात्मक पीड़ा भी होती है, और इस पीड़ा को समझने और इससे उबरने के लिए उन्हें अन्य एक्टोपिक प्रेगनेंसी से जूझ चुकी महिलाओं से बात करनी चाहिए। समय रहते एक्टोपिक प्रेगनेंसी का इलाज कराना जरूरी होता है और इसका इलाज दवाओं और सर्जरी के रूप में किया जाता है, जो नीचे बताए गए हैं-

  • दवाओं के ज़रिए अस्थानिक गर्भावस्था का इलाज- दवाओँ के रूप में इलाज करने से पहले महिला के शरीर में एचसीजी (hCG hormone in hindi) हार्मोन के स्तर की जांच की जाती है। जांच में हार्मोन का स्तर ज्यादा होने से डॉक्टर महिला को मिथोट्रेक्सेट (methotrexate in hindi) का इंजेक्शन लगाते हैं। आपको बता दें, मिथोट्रेक्सेट इंजेक्शन, फैलोपियन ट्यूब के ऊतकों को नष्ट करने के लिए दिया जाता है। मिथोट्रेक्सेट इंजेक्शन देने के कुछ समय बाद फिर एचसीजी हार्मोन की जांच की जाती है। अगर जांच में प्रेगनेंसी हार्मोन की मात्रा पाई गई तो डॉक्टर एक बार फिर इंजेक्शन लगाते हैं। आमतौर पर मिथोट्रेक्सेट इंजेक्शन का असर खत्म होने में तीन से ज्यादा महीनों का समय लगता है, जिसके बाद ही डॉक्टर आपको दोबारा गर्भधारण की सलाह दे सकते हैं।

  • सर्जरी के ज़रिए अस्थानिक गर्भावस्था का इलाज- एक्टोपिक प्रेगनेंसी (ectopic pregnancy in hindi) के कुछ गंभीर मामलों में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी (laparoscopy in hindi) से इसका इलाज किया जाता है। खासतौर पर उन महिलाओं की लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की जाती है, जिनके फैलोपियन ट्यूब में ऊतक एकाएक बढ़ने लगते हैं।

    • इस सर्जरी के दौरान सबसे पहले महिला को जनरल एनेस्थीसिया (general anaesthetic in hindi) का इनंजेक्शन दिया जाता है, जिससे सर्जरी के दौरान उसे दर्द की अनुभूति न हो।
    • सर्जरी में महिला के पेट में एक छोटा सा चीरा लगाया जाता है और उसमें से पतली नली के माध्यम से कैमरा और लाइट से ऊतकों की स्थिति की जांच की जाती है।
    • अन्य सर्जरी यंत्रों के उपयोग से फैलोपियन ट्यूब के ऊतकों को नष्ट किया जाता है। ज्यादातर मामलों में इस सर्जरी से महिला की फैलोपियन ट्यूब को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाता, लेकिन एक्टोपिक प्रेगनेंसी के ऊतकों की वजह से अगर फैलोपियन ट्यूब पहले से क्षतिग्रस्त होती है तो उसे निकालना जरूरी होता है।
    • आमतौर पर इस सर्जरी से उबरने में महिला को चार से छह हफ्तों का समय लगता है।

इसके अलावा अगर अस्थानिक प्रेगनेंसी (ectopic pregnancy in hindi) के दौरान ज्यादा रक्रस्राव होता है या फिर फैलोपियन ट्यूब क्षतिग्रस्त होती है तो डॉक्टर तुरंत सर्जरी के लिए कह सकते हैं। इस सर्जरी को लैप्रोटॉमी (laparotomy in hindi) कहते हैं। यह अक्सर आपातकालीन स्थितियों में ही की जाती है। फैलोपियन ट्यूब के क्षतिग्रस्त होने पर सर्जरी के दौरान उसे निकाल दिया जाताा है। सर्जरी के कुछ समय बाद ऊतकों की स्थिति की जांच की जाती है और महिला की फैलोपियन ट्यूब में ऊतक मौजूद होने पर मिथोट्रेक्सेट इंजेक्शन लगाया जाता है।

7. एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के क्या जोखिम होते हैं?

(ectopic pregnancy ke kya nuksan hote hai)

गर्भवती महिलाओं में एक्टोपिक प्रेगनेंसी (ectopic pregnancy in hindi) आम नहीं है और बहुत कम महिलाओं को विभिन्न कारणों की वजह से इस दौर से गुजरना पड़ता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इस प्रकार की प्रेगनेंसी में अंडे का निषेचन गर्भाशय के बाहर फैलोपियन ट्यूब में होने के कारण उसका विकास संभव नहीं हो पाता और कई मामलों में महिलाओं का फैलोपियन ट्यूब फट जाती है। फैलोपियन ट्यूब का फटना कई बार जानलेवा भी हो सकता है, इसीलिए समय रहते इसके लक्षणों का पता चलना और इलाज करना बेहद जरूरी है।

8. क्या अस्थानिक गर्भावस्था के बाद नॉर्मल प्रेगनेंसी संभव है?

(kya ectopic pregnancy ke baad normal pregnancy sambhav hai)

हां, अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) के बाद अगली बार स्वस्थ गर्भधारण संभव है, लेकिन नॉर्मल प्रेगनेंसी में आपको कई चुनौतियां का सामना करना पड़ सकता है। डॉक्टर्स कहते हैं कि अगर अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) के दौरान या इलाज के समय महिला की फैलोपियन ट्यूब को किसी प्रकार से नुकसान पहुंचा है तो दोबारा गर्भधारण करने से पहले महिलाओं को प्रजनन विशेषज्ञ से इसकी जांच करवानी चाहिए।

एक बार एक्टोपिक प्रेग्नेंसी से गुजरने वाली महिला को अगली बार गर्भधारण करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए, ताकि दोबारा एक्टोपिक प्रेग्नेंसी (ectopic pregnancy in hindi) होने के खतरे को कम किया जा सके। अगर महिला की एक्टोपिक प्रेगनेंसी की सर्जरी गंभीर न हुई हो तो आमतौर पर डॉक्टर तीन से छह महीने के अंतराल के बाद ही दोबारा गर्भधारण की अनुमति देते हैं।

कई महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली समस्याओं की जानकारी नहीं होती और अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy in hindi) उनमें से एक हैं। क्योंकि एक्टोपिक प्रेगनेंसी के लक्षण नॉर्मल प्रेगनेंसी जैसे होते हैं, इसीलिए इसके होने का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। इस ब्लॉग में अस्थानिक गर्भावस्था से जुड़ी तमाम जानकारियां दी गई हैं। अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस होते है तो आपको डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

इस ब्लॉग के विषय - 1. एक्टोपिक प्रेगनेंसी क्या है? (ectopic pregnancy kya hai), 2. क्या अस्थानिक गर्भावस्था सामान्य है? (kya ectopic pregnancy samanya hai),3. एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के लक्षण क्या है? (ectopic pregnancy ke lakshan kya hai),4. अस्थानिक प्रेगनेंसी के क्या कारण होते हैं? (ectopic pregnancy ke kya karan hote hai),5. अस्थानिक गर्भावस्था का पता कैसे लगाया जाता है? (ectopic pregnancy hone ka pata kaise lagaya jata hai),6. क्या एक्टोपिक प्रेगनेंसी का इलाज संभव है? (kya ectopic pregnancy ka ilaj sambhav hai),7. एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के क्या जोखिम होते हैं? (ectopic pregnancy ke kya nuksan hote hai),8. क्या अस्थानिक गर्भावस्था के बाद नॉर्मल प्रेगनेंसी संभव है? (kya ectopic pregnancy ke baad normal pregnancy sambhav hai)
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