शिशुओं में ग्रोथ स्पर्ट : आपका बच्चा तेजी से कब बढ़ता है?- (Baby growth spurts : navjat shishu ka vikas teji se kab hota hai)

शिशुओं में ग्रोथ स्पर्ट : आपका बच्चा तेजी से कब बढ़ता है?- (Baby growth spurts : navjat shishu ka vikas teji se kab hota hai)

माता पिता के लिए उनके नवजात शिशु का विकास (navjat shishu ka vikas) सबसे अहम होता है। विशेषज्ञों के अनुसार सोते समय शिशु का विकास तेजी से होता है। ज़रा सोचिए, क्या एक रात में ही आपका बच्चा इतना बढ़ सकता है कि उसके कपड़े छोटे पड़ जाएं? आपको ये सवाल भले ही बेतुका लगे, लेकिन ऐसा सच में हो सकता है। ग्रोथ स्पर्ट (तीव्र वृद्धि के समय) के दौरान नवजात शिशु का विकास (navjat shishu ka vikas) बेहद तेजी से हो सकता है। इस ब्लॉग में हम आपको शिशुओं में ग्रोथ स्पर्ट की पूरी जानकारी दे रहे हैं।

शिशुओं में ग्रोथ स्पर्ट क्या होता है?

(Baby growth spurt kya hota hai)

वैसे तो नवजात शिशु का विकास (navjat shishu ka vikas) धीरे धीरे व नियमित रूप से लगातार होता रहता है, लेकिन ग्रोथ स्पर्ट (तीव्र वृद्धि का समय) एक ऐसा समय होता है, जब अचानक तेजी से नवजात शिशु का विकास (baby growth in hindi) होता है। इस दौरान उसकी दिनचर्या पूरी तरह से बदल सकती है, इसलिए शिशु का खास खयाल रखने की ज़रूरत होती है।

अगर आपका बच्चा अचानक बार बार दूध पीने लगता है, तो इसका मतलब यह नहीं कि आपके स्तनों में पर्याप्त दूध नहीं बन रहा है। असल में शिशु अतिरिक्त स्तनपान के ज़रिए बढ़ने के लिए ज़रूरी पोषक तत्व प्राप्त करता है, इसलिए ग्रोथ स्पर्ट (baby growth spurts in hindi) के दौरान उसका ज्यादा दूध पीना सामान्य है।

जन्म से एक वर्ष तक नवजात शिशुओं में ग्रोथ स्पर्ट्स कब होते हैं?

(Janm se ek sal tak bacho me growth spurts kab hote hai)

यूँ तो हर बच्चा दूसरे बच्चे से अलग होता है और अलग ढंग से बढ़ता है, लेकिन ग्रोथ स्पर्ट्स (baby growth spurts in hindi) के मामले में ज्यादातर शिशु एक तय पैटर्न में बढ़ते हैं। जन्म से लेकर एक वर्ष का होने तक शिशु आमतौर पर निम्न समय ग्रोथ स्पर्ट्स (तेजी से बढ़ने का समय) से गुज़रता है-

  • दो हफ्ते का होने पर
  • पांच से छह हफ्ते का होने पर
  • आठ हफ्ते का होने पर
  • तीन माह का होने पर
  • छह माह का होने पर
  • नौ माह का होने पर
  • बारह माह का होने पर

हर नवजात शिशु का विकास (navjat shishu ka vikas) अलग तरह से होता है, इसलिए अगर आपका बच्चा ऊपर बताए गए समय पर ग्रोथ स्पर्ट से नहीं गुज़रता है, तो चिंता ना करें। वह इनसे ज्यादा या कम ग्रोथ स्पर्ट्स (baby growth spurts in hindi) से गुज़र सकता है और कई बार आपको शायद इसका पता भी नहीं चलेगा। जब तक आपका बच्चा सामान्य रूप से बढ़ रहा है और स्वस्थ है, तब तक चिंता की कोई बात नहीं है। इसके अलावा समय से पहले जन्मे शिशुओं के विकास (navjat shishu ka vikas) का पैटर्न भी ऊपर दिए पैटर्न से अलग हो सकता है।

एक ग्रोथ स्पर्ट कितने समय तक रहता है?

(Ek growth spurt kitne samay tak rahta hai)

baby ka teji se badhna

नवजात शिशु का विकास तेजी से करने वाले ग्रोथ स्पर्ट्स (baby growth spurts in hindi) ज्यादा समय तक नहीं रहते हैं। आमतौर पर बहुत छोटे बच्चों में एक ग्रोथ स्पर्ट एक से दो दिन तक ही रहता है, लेकिन जैसे जैसे नवजात शिशु का विकास (navjat shishu ka vikas) होता है, वैसे वैसे ग्रोथ स्पर्ट्स की अवधि भी बढ़ती जाती है। बड़े शिशुओं में ग्रोथ स्पर्ट्स पांच दिन से एक हफ्ते तक रह सकते हैं।

नवजात शिशु में ग्रोथ स्पर्ट के क्या लक्षण होते हैं?

(Baby me growth spurt ke kya lakshan hote hai)

baby ke teji se badhne ke lakshan

ग्रोथ स्पर्ट्स (baby growth spurts in hindi) नवजात शिशु के विकास के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, उसमें दिखने वाले ग्रोथ स्पर्ट के मुख्य लक्षण निम्न हैं-

  • शिशु को बहुत ज्यादा भूख लगना- ग्रोथ स्पर्ट्स में नवजात शिशु का विकास (navjat shishu ka vikas) तेजी से होने की वजह से इस दौरान उसकी पाचन क्रिया बहुत तेजी से काम करने लगती है और उसे जल्दी जल्दी भूख लगती है। कई बार माँएं शिशु को बार बार भूख लगते देख कर घबरा जाती हैं कि कहीं उनके स्तनों में कम दूध तो नहीं आ रहा है। अगर आपका बच्चा सही मात्रा में पेशाब व मल त्याग रहा है, तो चिंता की कोई बात नहीं है।

    इसके अलावा ग्रोथ स्पर्ट (baby growth spurts in hindi) के समय फॉर्मूला दूध (बच्चों के लिए डॉक्टरों द्वारा सुझाया जाने वाला विशेष दूध) पीने वाले शिशु एक बोतल दूध पीने के बाद भी भूखे रह सकते हैं।

  • शिशु का चिड़चिड़ा होना- वैसे तो नन्हे बच्चों का चिड़चिड़ा होना सामान्य है, लेकिन ग्रोथ स्पर्ट के समय वो बहुत ज्यादा चिड़चिड़े हो जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस चिड़चिड़ेपन के मुख्य कारण ; ज्यादा भूख लगना, सोने की दिनचर्या में बदलाव व नवजात शिशु का विकास (navjat shishu ka vikas) आदि होते हैं।

  • शिशु के सोने की दिनचर्या में बदलाव होना- कुछ माता-पिताओं के अनुसार ग्रोथ स्पर्ट (baby growth spurts in hindi) के समय उनका बच्चा ज्यादा सोता है, वहीं अन्य माता-पिता कहते हैं कि इस दौरान उनका बच्चा ठीक से सो नहीं पाता है। यह कहना मुश्किल है, कि दोनों में से कौनसी बात ज्यादा सही है, लेकिन एक बात तय है कि ग्रोथ स्पर्ट के दौरान शिशु के सोने की दिनचर्या में बदलाव हो जाता है।

    सोने से बच्चे के शरीर में प्राथमिक वृद्धि हॉर्मोन (ग्रोथ हॉर्मोन) के उत्पादन में मदद मिलती है। इसलिए अच्छी नींद नवजात शिशु का विकास (navjat shishu ka vikas) करने में मददगार होती है।

  • शिशु के व्यवहार में बदलाव होना- ग्रोथ स्पर्ट (baby growth spurts in hindi) के समय शिशु का व्यवहार अचानक बदल सकता है। जैसे, विकास के इस समय में आपका हमेशा जिज्ञासु और खिलखिलाने वाला बच्चा, अचानक हिचकिचाने व अन्य लोगों से डरने लग सकता है।

  • शिशु का नए करतब सीखना- बच्चे के ताली बजाने या खिलौने पकड़ने के करतब को ग्रोथ स्पर्ट (baby growth spurts in hindi) से जोड़ना आपको अजीब लग सकता है, लेकिन यह गलत नहीं है। ग्रोथ स्पर्ट के दौरान दिमाग विकसित होने से शिशु की शारीरिक व मानसिक क्षमता बढ़ती है, और वह तेजी से नई चीज़ें सीखने लगता है।

ग्रोथ स्पर्ट के दौरान शिशु की देखभाल कैसे करें?

(Growth spurt ke samay shishu ki dekhbhal kaise kare)

teji se vikash ke dauran shishu ki dekhbhal

ग्रोथ स्पर्ट (baby growth spurts in hindi) के दौरान नवजात शिशु का विकास होने के साथ ही उसे कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए उसकी देखभाल के लिए आप निम्न तरीके अपना सकती हैं-

  • शिशु की ज़रूरतों का ध्यान रखें- नवजात शिशु का विकास (navjat shishu ka vikas) उचित ढंग से हो सके, इसके लिए उसकी सभी ज़रूरतों पर पूरा ध्यान दें। ये ज़रूरतें किसी भी प्रकार की हो सकती हैं, जैसे भोजन, नींद, प्यार आदि।

  • खुद को व्यस्त ना रखें- ग्रोथ स्पर्ट (baby growth spurts in hindi) के समय शिशु की ज़रूरतें बहुत बढ़ जाती हैं, इसलिए इस दौरान खुद को व्यस्त ना रखें। अगर संभव है, तो अपने बाहर के सभी काम टालकर घर पर रहें और शिशु का खयाल रखें। कई बार बाहर काम करने वाली माँओं के लिए घर रुकना संभव नहीं होता है। ऐसे में इन दिनों में अपनी दिनचर्या को शिशु की ज़रूरतों के हिसाब से थोड़ा बदलने की कोशिश करें।

  • शिशु को भूख लगते ही दूध पिलाएं/खाना खिलाएं- स्तनपान करने वाले शिशु ग्रोथ स्पर्ट (baby growth spurts in hindi) के दौरान आम दिनों से ज्यादा दूध पीते हैं। इसलिए जैसे ही आपको शिशु में भूख लगने के संकेत दिखाई दें, उसे दूध पिलाएं। अगर शिशु ठोस आहार खाता है, तो उसे भूख लगते ही खाना खिलाने का पूरा इंतजाम करके रखें।

शिशु के ग्रोथ स्पर्ट के दौरान माँ की देखभाल के उपाय

(Baby growth spurt ke samay ma ki dekhbhal ke upay)

baby ke teji se badhne ke dauran ma ki dekhbhal

ग्रोथ स्पर्ट के दौरान माँ को अपनी देखभाल इस तरह करनी चाहिए-

  • अपने पोषण का ध्यान रखें- शिशु के ग्रोथ स्पर्ट (baby growth spurts in hindi) यानी तेजी से बढ़ने के दौरान वह बहुत ज्यादा स्तनपान करता है। ऐसे में आपके स्तनों में दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए भरपूर मात्रा में पौष्टिक भोजन खाएं और खूब पानी पीएं।

  • अपने स्तनों की देखभाल करें- शिशु को ज्यादा स्तनपान करवाने से आपके स्तनों में दूध की मात्रा बढ़ सकती है, जिससे स्तनों में तनाव व दर्द हो सकता है। ऐसा होने पर स्तनपान करवा कर या हाथों से दूध निकालकर स्तनों को समय समय पर खाली करें। स्तनों को नर्म रखने के लिए नियमित रूप से उनकी मालिश करें।

    इसके अलावा गर्म पानी से नहाने से भी आपको स्तनों में दर्द व तनाव से राहत मिल सकती है। ज्यादा स्तनपान से आपके निप्पलों में सूजन भी आ सकती है, इसलिए हो सके तो कुछ दिनों तक आरामदायक ब्रा और ढीले कपड़े पहनें।

  • पर्याप्त आराम करें- बार बार रोते हुए चिड़चिड़े शिशु को चुप करवाना, उसे थोड़ी थोड़ी देर में दूध पिलाना बहुत मेहनत का काम है। ऐसे में आप बहुत थक सकती हैं, जिससे स्तनों में दूध की मात्रा पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए स्तनपान करवाने वाली माँ को ग्रोथ स्पर्ट (baby growth spurts in hindi) के दौरान पर्याप्त मात्रा में आराम करना चाहिए।

क्या ग्रोथ स्पर्ट के लक्षण किसी बीमारी का संकेत भी हो सकते हैं?

(Kya growth spurts kisi bimari ka sanket bhi ho sakte hai)

अगर आपको शिशु में ग्रोथ स्पर्ट (baby growth spurts in hindi) के लक्षण कुछ दिन या एक हफ्ते से ज्यादा समय तक दिखें, तो ये किसी बीमारी या अन्य शारीरिक समस्या का लक्षण हो सकते हैं। इसलिए ऐसा होने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें और उनकी सलाह के अनुसार शिशु का खयाल रखें।

इसके अलावा यह भी ध्यान रखें, कि नवजात शिशु का विकास (navjat shishu ka vikas) होते समय उसमें बुखार जैसे लक्षण नहीं दिखते हैं। इसलिए अगर शिशु में चिड़चिड़ेपन के साथ बुखार आदि लक्षण दिखें तो उसे डॉक्टर के पास लेकर जाएं।

जन्म के बाद पहले वर्ष में नवजात शिशु का विकास (navjat shishu ka vikas) वाक़ई बहुत तेजी से होता है, इसमें ग्रोथ स्पर्ट्स (baby growth spurts in hindi) का बहुत योगदान होता है। इस दौरान माँ को शिशु की उचित देखभाल के साथ ही, अपनी सेहत का भी ध्यान रखना चाहिए। अगर आपको शिशु की सेहत के बारे में कोई भी आशंका हो, तो इस बारे में डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।

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