आईवीएफ या कृत्रिम गर्भाधान से जुड़ी ज़रूरी बातें (IVF se judi jaruri baate)

आईवीएफ या कृत्रिम गर्भाधान से जुड़ी ज़रूरी बातें (IVF se judi jaruri baate)

माँ बनना हर महिला की ख़्वाहिश होती है, इसलिए एक निश्चित समय पर वो गर्भधारण करने की कोशिश करती है। अधिकांश महिलाएं प्राकृतिक रूप से गर्भवती हो जाती हैं, लेकिन कुछ महिलाएं ऐसा करने में सफल नहीं हो पाती हैं। ऐसे में उन्हें आईवीएफ (IVF in hindi) के ज़रिए कृत्रिम गर्भाधान या गर्भधारण करवाया जा सकता है।

कृत्रिम गर्भाधान की इस तकनीक का विकास सन् 1978 में हुआ था, तब से वर्तमान समय तक लाखों माँओं ने इससे गर्भधारण किया है। इस ब्लॉग में हम आपको आईवीएफ ट्रीटमेंट (IVF treatment in hindi) से जुड़ी सभी ज़रूरी बातें बता रहे हैं।

आईवीएफ क्या होता है?

(What is IVF in hindi)

IVF kya hota hai

आईवीएफ (in vitro fertilization in hindi) कृत्रिम गर्भाधान की एक ऐसी तकनीक है, जिसके ज़रिए गर्भाशय के बाहर अंडे व शुक्राणु का निषेचन करवाकर महिला को गर्भधारण करवाने की कोशिश की जाती है। आईवीएफ को वर्तमान समय में कृत्रिम गर्भाधान की सबसे सफल तकनीक माना जाता है।

आईवीएफ उपचार की प्रक्रिया कई हफ़्तों या महीनों तक चलती है और इसके कई चक्र (साइकल) हो सकते हैं। इसका एक चक्र करीब दो हफ़्तों तक चलता है।

आमतौर पर आईवीएफ (IVF in hindi) के दौरान पत्नी के अंडाणु (अंडे) व पति के शुक्राणु (वीर्य) का उपयोग करके निषेचित अंडा तैयार किया जाता है। मगर, पत्नी के अंडों या पति के शुक्राणुओं में किसी प्रकार की खराबी होने पर, विशेषज्ञ उनकी सलाह लेकर दान किये गए शुक्राणु या अंडाणु के ज़रिए प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकते हैं। आईवीएफ उपचार (IVF treatment in hindi) के दौरान, कुछ विशेष मामलों में पहले से निषेचित करके संरक्षित किये गए अंडों (frozen egg in hindi) का उपयोग भी किया जाता है।

आईवीएफ ट्रीटमेंट कब किया जाता है?

(IVF treatment kab kiya jata hai)

IVF kab kiya jaata hai

आईवीएफ (IVF in hindi) तकनीक का उपयोग महिला के प्राकृतिक रूप से गर्भधारण ना कर पाने पर किया जाता है। निम्न परिस्थितियों में इसका उपयोग किये जाने की ज़रूरत होती है -

  • महिला की फैलोपियन ट्यूब में रुकावट या चोट लगने पर - क्षतिग्रस्त या बाधित फैलोपियन ट्यूब की वजह से अंडे का निषेचन होना और भ्रूण का गर्भाशय तक आना मुश्किल हो जाता है, जिससे महिला को गर्भधारण करने में दिक्कत आती है। ऐसे में आईवीएफ उपचार (IVF treatment in hindi) के ज़रिए अंडे का गर्भाशय से बाहर निषेचन करके उसे गर्भाशय में स्थापित किया जाता है।

  • महिला को ओव्यूलेशन डिसऑर्डर होने पर - डॉक्टर, महिला को ओव्यूलेशन डिसऑर्डर (अंडाशय का विकार) होने पर आईवीएफ (IVF in hindi) करवाने की सलाह देते हैं। यह एक ऐसा विकार है, जिसमें अंडाशय में अनियमित या कम संख्या में अंडे बनते हैं और उनके निषेचन में समस्या आती है।

  • महिला के अंडाशय समयपूर्व खराब होने पर - अंडाशय ख़राब होने पर या उनके ठीक से काम ना करने पर, उनमें एस्ट्रोजन का उत्पादन सामान्य मात्रा में नहीं होता है और साथ ही उनमें नियमित रूप से अंडे बनना भी बन्द हो जाता है। इसलिए अगर महिला के अंडाशय 40 वर्ष की उम्र से पहले ही काम करना बंद कर दें, तो उसे गर्भधारण करने के लिए आईवीएफ ट्रीटमेंट करवाने की ज़रूरत होती है।

  • महिला को एंडोमेट्रियोसिस होने पर - जब गर्भाशय के उत्तक इसके बाहर प्रत्यारोपित होकर विकसित होने लगते हैं, तो इसे एंडोमेट्रियोसिस कहा जाता है। ऐसा होने पर फैलोपियन ट्यूब्स, गर्भाशय और अंडाशय सामान्य रूप से काम नहीं कर पाते हैं, इसलिए महिला को आईवीएफ ट्रीटमेंट (IVF treatment in hindi) की सहायता से गर्भधारण करवाया जाता है।

  • महिला को यूटेराइन फाइब्रॉइड्स होने पर - गर्भाशय की दीवार के ऊपर या अंदर मौजूद माँस की गाँठ जैसी संरचना को यूटेराइन फाइब्रॉइड (गर्भाशय में गाँठ होना) कहा जाता है। ये 20 वर्ष से 40 वर्ष की महिलाओं की एक आम समस्या है।

कुछ गंभीर मामलों में इसकी वजह से निषेचित अंडे के प्रत्यारोपण (या गर्भाशय की दीवार पर जुड़ने) में समस्या होती है, ऐसी स्थिति में डॉक्टर दम्पति (पति-पत्नी) को आईवीएफ उपचार (IVF treatment in hindi) के ज़रिए कृत्रिम गर्भाधान करने की सलाह देते हैं।

  • महिला को नसबंदी के बाद गर्भधारण की इच्छा होने पर - नसबंदी गर्भनिरोधन का एक स्थायी उपाय है, जिसके अंतर्गत महिला की फैलोपियन ट्यूब को या तो बंद कर दिया जाता है या काटकर अलग कर दिया जाता है। ऐसा होने पर शुक्राणु अंडे तक नहीं जा पाते हैं और महिला गर्भवती नहीं हो पाती है।

अगर नसबंदी करवाने के बाद कोई महिला फिर से गर्भवती होने की इच्छा रखती है, तो वह आईवीएफ (IVF in hindi) की मदद से ऐसा कर सकती है।

  • पति को वीर्यदोष होने पर - जीवनसाथी के वीर्य में निम्न प्रकार की खराबी होने पर शुक्राणुओं द्वारा अंडे को निषेचित करने की संभावना बेहद कम होती है -

    • वीर्य में पर्याप्त मात्रा में शुक्राणु ना होना
    • शुक्राणुओं कम सक्रिय होना
    • शुक्राणुओं का आकार अनियमित होना
    • शुक्राणुओं में कोई अन्य दोष होना

ऐसा होने पर डॉक्टर जाँच करके सबसे पहले वीर्य में मौजूद दोष का पता लगाते हैं और फिर आईवीएफ ट्रीटमेंट (IVF treatment in hindi) करवाने की सलाह देते हैं।

  • पति या पत्नी को आनुवांशिक दोष या जीन सम्बंधी विकार होने पर - अगर आपके जीवन-साथी या आप के ज़रिए शिशु को किसी प्रकार का आनुवांशिक दोष या जीन सम्बंधी विकार होने का ख़तरा हो, तो विशेषज्ञ आपको भ्रूण प्रत्यारोपण से पूर्व जीन चिकित्सा करवाने की सलाह देते हैं। इस उपचार में आईवीएफ (IVF in hindi) का अहम योगदान होता है।

अंडों को आईवीएफ के ज़रिए निषेचित करने के बाद, उनमें कुछ विशेष जीन सम्बंधी दोषों या विकारों की जाँच की जाती है। हालाँकि इससे सभी जीन सम्बंधी समस्याओं का पता नहीं लगाया जा सकता है, लेकिन इससे कुछ ज्ञात दोषों का पता लगाया जा सकता है। जिन अंडों में जीन संबंधी या आनुवांशिक दोष नहीं पाए जाते हैं, उन्हें महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है।

  • कैंसर या किसी अन्य रोग के इलाज से पहले महिला की प्रजनन क्षमता के संरक्षण के लिए - अगर आप कैंसर का इलाज शुरू करवाने वाली हैं, जैसे विकिरण (रेडिएशन) या कीमोथेरेपी आदि, तो इससे आपकी प्रजनन क्षमता कम या नष्ट हो सकती है। ऐसे में आपकी प्रजनन क्षमता को बचाकर रखने के लिए विशेषज्ञ आपको आईवीएफ ट्रीटमेंट (IVF treatment in hindi) करवाने की सलाह देते हैं।

इसके लिए महिला के अंडों को अंडाशय से निकालकर बिना निषेचित किये, प्रशीतित (फ्रीज़) करके भविष्य में उपयोग करने के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके अलावा अंडों को शुक्राणुओं से निषेचित करवाकर भी भविष्य में इस्तेमाल करने के मकसद से प्रशीतित (egg freezing in hindi) करके सुरक्षित रखा जा सकता है।

आईवीएफ उपचार कैसे किया जाता है?

(IVF kaise hota hai)

IVF kaise hota hai

आईवीएफ उपचार (IVF treatment in hindi) की प्रक्रिया की शुरुआत में महिला को कुछ ऐसे हॉर्मोन्स के इंजेक्शन लगाए जाते हैं, जिनसे उसका मासिक चक्र रुक जाता है। इसके बाद एक विशेष दवा के ज़रिए मास ओव्यूलेशन करवाया जाता है, जिससे महिला के अंडाशय में एक बार में एक के बजाय 15 से 20 अंडे बन जाते हैं।

फिर एक तरफ छोटी सर्जरी के ज़रिए अंडों को बाहर निकाला जाता है और दूसरी तरफ पुरुष के वीर्य को निकालकर एकत्र किया जाता है। इसके बाद अंडों को प्रयोगशाला में निषेचित करके पांच दिनों तक विकसित होने दिया जाता है। फिर अल्प विकसित भ्रूण (ब्लास्टोसिस्ट) को एक विशेष उपकरण के ज़रिए महिला के गर्भ में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है।

भारत में आईवीएफ उपचार का खर्च कितना है?

(India me IVF treatment ki cost kitni hai)

IVF ki cost kitni hai

भारत में आईवीएफ (IVF in hindi) करवाना विकसित देशों की तुलना में काफी सस्ता है, इसलिए हर वर्ष यहाँ कई विदेशी नागरिक भी कृत्रिम गर्भाधान करवाने के लिए आते हैं। आईवीएफ उपचार के एक सामान्य चक्र की औसत कीमत ढाई लाख से लेकर साढ़े चार लाख रुपए तक होती है।

अगर इस दौरान आप किसी विशेष प्रक्रिया जैसे प्रशीतित भ्रूण के प्रत्यारोपण (फ्रोज़न एग ट्रांसफ़र) आदि का सहारा ले रहे हैं, तो औसत रूप से आईवीएफ के एक चक्र की कीमत (IVF cost in hindi) निम्न होती है -

  • आई.सी.एस.आई. उपचार (intracytoplasmic sperm injection in hindi) - आईवीएफ की कीमत + 1,50,000₹
  • फ्रोज़न एग ट्रांसफर (frozen embryo transfer in hindi) - आईवीएफ की कीमत + 1,20,000₹

ध्यान दें - दिए गए आँकड़े आईवीएफ की अनुमानित औसत कीमतों पर आधारित हैं। वास्तविक कीमत हर क्लिनिक के अनुसार अलग हो सकती है, इसलिए आईवीएफ (IVF in hindi) करवाने से पहले क्लिनिक या डॉक्टर से इसके ख़र्च (IVF cost in hindi) से जुड़ी सभी जानकारियां हासिल कर लें।

आईवीएफ उपचार की सफलता की दर कितनी है?

(What is the success rate of IVF in hindi)

IVF kitni safal hai

आईवीएफ उपचार (IVF treatment in hindi) का सफल होना कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे गर्भधारण करने वाली महिला की उम्र, महिला के प्राकृतिक रूप से गर्भधारण ना कर पाने की वजह आदि। इसके अलावा हर आप पहले माँ बन चुकी हैं या गर्भवती रह चुकी हैं, तो आपके आईवीएफ की सफलता की संभावना ज्यादा होती है।

2010 के आँकड़ों के अनुसार, औसत तौर पर आईवीएफ (IVF in hindi) की सफलता की दर निम्न हैं -

  • अगर आप 35 वर्ष से कम उम्र की हैं, तो आपके स्वस्थ बच्चे को जन्म देने की संभावना 32 प्रतिशत है।
  • अगर आप 35 वर्ष से 37 वर्ष की हैं, तो आपके स्वस्थ बच्चे को जन्म देने की संभावना 28 प्रतिशत है।
  • अगर आप 38 वर्ष से 39 वर्ष की हैं, तो आपके स्वस्थ बच्चे को जन्म देने की संभावना 21 प्रतिशत है।
  • अगर आप 40 वर्ष से 42 वर्ष की हैं, तो आपके स्वस्थ बच्चे को जन्म देने की संभावना 14 प्रतिशत है।
  • अगर आप 43 वर्ष से 44 वर्ष की हैं, तो आपके स्वस्थ बच्चे को जन्म देने की संभावना पांच प्रतिशत है।
  • अगर आप 45 वर्ष या इससे अधिक उम्र की हैं, तो आपके स्वस्थ बच्चे को जन्म देने की संभावना दो प्रतिशत है।

ध्यान दें - ये आँकड़े एक शोध में पाए गए औसत आँकड़ों पर आधारित हैं। इसलिए आईवीएफ (IVF in hindi) के ज़रिए अपने गर्भधारण की संभावना की सही जानकारी लेने के लिए डॉक्टर की सलाह लें।

आईवीएफ उपचार की सफलता की दर कैसे बढ़ा सकते हैं?

(IVF treatment ki safalta ki dar ko kaise badhaye)

IVF ki safalta badhaye

निम्न उपायों के ज़रिए आप अपने आईवीएफ उपचार (IVF treatment in hindi) के सफल होने की संभावना (सफलता-प्रतिशत) बढ़ा सकते हैं -

  • अपना वज़न नियंत्रित रखें - अगर आपका बॉडी मास इंडेक्स (लम्बाई के अनुसार वजन) या बीएमआई 19 से 30 के बीच है, तो आईवीएफ (IVF in hindi) सफल होने की ज्यादा सम्भावना होती है। इसलिए अपना वजन नियंत्रित रखकर आप अपने आईवीएफ उपचार के सफल होने का प्रतिशत बढ़ा सकते हैं।

  • शराब ना पीएं - शराब पीने से आपके गर्भधारण करने की संभावना कम हो जाती है। इसलिए आईवीएफ उपचार (IVF treatment in hindi) से सफलतापूर्वक कृत्रिम गर्भाधान करने के लिए शराब पीना बंद कर दें। अगर शराब पीना बंद नहीं कर सकते, तो बिल्कुल कम कर दें।

  • धूम्रपान ना करें - धूम्रपान करने से महिलाओं के अंडों व पुरुषों के शुक्राणुओं की गुणवत्ता खराब हो जाती है, जो कि गर्भधारण करने के लिए ठीक नहीं है। इसलिए आईवीएफ (IVF in hindi) के ज़रिए स्वस्थ बच्चे को जन्म देने के लिए धूम्रपान ना करें और अपने जीवनसाथी को भी ऐसा करने से रोकें।

  • कैफीन युक्त पदार्थ सीमित मात्रा में लें - कैफीन की बेहद कम मात्रा भी आपके गर्भधारण करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में अपने आईवीएफ उपचार (IVF treatment in hindi) को सफल बनाने के लिए कैफीन युक्त पदार्थ जैसे कॉफी, सोडा आदि बेहद कम मात्रा में लें। अगर हो सके, तो इनका सेवन बंद कर दें।

आईवीएफ उपचार के फायदे क्या हैं?

(IVF treatment ke fayde kya hai)

IVF ke fayde kya hai

आईवीएफ (IVF in hindi) तकनीक से कृत्रिम गर्भाधान के कुछ मुख्य फायदे निम्न हैं -

  • शिशु में जीन संबंधी दोष होने की आशंका कम होती है - कई बार बच्चे में माता-पिता से आनुवांशिक दोष (जीन सम्बंधी दोष) आने का खतरा होता है। आईवीएफ उपचार के दौरान जीन चिकित्सा के ज़रिए इसे कम किया जा सकता है।

  • गर्भाधान के अन्य तरीक़े असफल होने पर आप इससे गर्भधारण कर सकते हैं - प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में असफल होने के बाद लोग कृत्रिम गर्भाधान के विभिन्न उपाय आज़माते हैं। अगर ये उपाय भी सफल ना हों, तो वो आईवीएफ (IVF in hindi) के ज़रिए कृत्रिम गर्भाधान कर सकते हैं। यह कृत्रिम गर्भाधान के अन्य सभी उपायों से ज्यादा प्रभावी होता है।

  • आईवीएफ का उपयोग कोई भी कर सकता है - आईवीएफ केवल बच्चे की माँ तक ही सीमित नहीं है, इससे कई लोग संतान प्राप्त कर सकते हैं, जैसे समलैंगिक जोड़े (दान किये गए निषेचित अंडे के ज़रिए)। इसके अलावा कई महिलाएं विभिन्न कारणों से भ्रूण को अपने शरीर में नहीं रख सकती हैं। ऐसे में आईवीएफ (IVF in hindi) के ज़रिए उनके अंडे को ऐसी महिलाओं (सेरोगेट माँ) के गर्भ में प्रत्यारोपित किया जा सकता है, जो उनके बच्चे को अपने गर्भ में पालने के लिए तैयार हों।

  • आप दान किये गए अंडों या शुक्राणुओं का उपयोग कर सकते हैं - कई बार पति के शुक्राणु या पत्नी के अंडे में कुछ खराबी होने की वजह से वो गर्भधारण नहीं कर पाते हैं। ऐसे में वो आईवीएफ (IVF in hindi) के ज़रिए दान किये गए स्वस्थ शुक्राणु और अंडे का उपयोग करके गर्भधारण कर सकते हैं।

  • नसबंदी के बाद भी गर्भधारण कर सकते हैं - कुछ महिलाओं को नसबंदी करवाने के बाद गर्भधारण होने की इच्छा हो सकती है, लेकिन वो प्राकृतिक रूप से गर्भवती नहीं हो सकती हैं। ऐसे में वो आईवीएफ उपचार (IVF treatment in hindi) के ज़रिए नसबंदी के बाद भी गर्भवती हो सकती हैं। इसके अलावा अधिक उम्र में गर्भधारण करने की इच्छा रखने वाले जोड़ों के लिए भी आईवीएफ बेहद मददगार होता है।

आईवीएफ उपचार के जोखिम क्या हैं?

(IVF treatment ke khatre kya hai)

IVF ke khatre hai

आईवीएफ (IVF in hindi) के ज़रिए कृत्रिम गर्भाधान करने के दौरान, उपचार के विभिन्न चरणों में महिला या होने वाले बच्चे को निम्न जोखिम हो सकते हैं -

  • गर्भ में एक से ज्यादा बच्चे होना - कई बार गर्भ ठहरने की संभावना को बढ़ाने के लिए विशेषज्ञ महिला के गर्भाशय में एक से अधिक भ्रूण प्रत्यारोपित कर देते हैं। ऐसे में गर्भ में एक से ज्यादा बच्चे विकसित होने का जोखिम रहता है। गर्भ में एक से ज्यादा शिशु होने की वजह से उनके विकास में बाधा आ सकती है और जन्म के समय उनका वजन सामान्य से कम हो सकता है।

  • महिला का समयपूर्व प्रसव होना - एक शोध के अनुसार, आईवीएफ से गर्भधारण करने वाली महिलाओं को समयपूर्व प्रसव (premature delivery in hindi) होने की आशंका आम गर्भवतियों की तुलना में ज्यादा होती है। हालाँकि सभी मामलों में ऐसा नहीं होता है, इसलिए इस बारे में डॉक्टर की सलाह लें और निश्चिंत रहें।

  • महिला का गर्भपात होना - आईवीएफ उपचार (IVF treatment in hindi) के दौरान प्रशीतित अंडे के ज़रिए गर्भधारण करने वाली महिलाओं को गर्भपात होने का खतरा बाकी गर्भवतियों की तुलना में अधिक होता है। हालाँकि सामान्य आईवीएफ (ताज़ा अंडे का निषेचन) में गर्भपात होने की आशंका, प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने वाली महिलाओं के बराबर (करीब 15 से 25 प्रतिशत) हो सकती है।

  • अंडे निकालने के दौरान जटिलताएं सामने आना - आईवीएफ (IVF in hindi) के दौरान अंडाशय से अंडे निकालने के लिए एक छोटी सर्जरी की जाती है। इसके लिए गर्भाशय की दीवार से होते हुए अंडाशय में एक सुईं डाली जाती है। इससे आंतरिक रक्तस्राव, संक्रमण, आँत - मूत्राशय - नस में चोट लगने का खतरा होता है। इस प्रक्रिया के दौरान जनरल एनेस्थीसिया (बेहोश करने की एक विधि) का इस्तेमाल करने पर भी कुछ जोखिम हो सकते हैं।

  • एक्टोपिक गर्भावस्था होना - जब निषेचित अंडा गर्भाशय के अंदर जुड़ने के बजाय उससे बाहर (आमतौर पर फैलोपियन ट्यूब में) जुड़ जाता है, तो इसे एक्टोपिक गर्भावस्था कहा जाता है। आईवीएफ (IVF in hindi) के ज़रिए गर्भधारण करने वाली करीब दो से पांच प्रतिशत महिलाओं को एक्टोपिक गर्भावस्था होने की आशंका होती है।

निषेचित अंडा गर्भाशय से बाहर जीवित नहीं रह सकता है, इसलिए ऐसा भ्रूण मर जाता है और आईवीएफ चक्र असफल हो जाता है।

  • शिशु में जन्मजात विकृतियां होना - विशेषज्ञों के अनुसार, अगर माँ की उम्र ज्यादा है, तो आईवीएफ (IVF in hindi) से पैदा होने वाले शिशु में जन्मजात विकृतियां होने की आशंका होती है। कुछ अन्य विशेषज्ञ मानते हैं कि आईवीएफ के उपयोग से बच्चे में जन्मजात विकृतियां होने की आशंका नहीं होती है। वर्तमान समय में इस पर शोध जारी हैं और इनके नतीजे आने पर ही यह तय हो सकेगा कि कौनसी बात सच है।

  • महिला को ओवरियन हाईपरस्टिम्युलेशन सिंड्रोम होना - आईवीएफ (IVF in hindi) के दौरान महिला के अंडाशयों को ज्यादा अंडे बनाने के लिए प्रेरित करने के लिए कुछ हॉर्मोनल दवाएँ (जैसे hCG) दी जाती हैं। इन दवाओं की वजह से महिला को ओवरियन हाईपरस्टिम्युलेशन सिंड्रोम हो सकता है। इस सिंड्रोम में आपके अंडाशयों में सूजन व दर्द हो सकता है।

आमतौर पर इसके लक्षण (जैसे हल्का पेटदर्द, पेट में गैस बनना, उल्टी-दस्त आदि) करीब एक हफ्ते तक रहते हैं। हालाँकि, आपके गर्भवती होने पर ये लक्षण कई हफ़्तों तक बने रह सकते हैं। कुछ दुर्लभ मामलों में ओवरियन हाईपरस्टिम्युलेशन सिंड्रोम गंभीर हो सकता है, जिससे महिला को साँस फूलने व तेजी से वजन बढ़ने की समस्या हो सकती है।

  • महिला को अंडाशय का कैंसर होना - कई शोधों के अनुसार, अंडाशयों में ज्यादा अंडे बनाने के लिए महिला को दी जाने वाली दवाओं की वजह से, उसके अंडाशयों में एक विशेष प्रकार का ट्यूमर (अंडाशय का कैंसर) पैदा हो सकता है। हालाँकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस बारे में अभी और शोध किये जाने की ज़रूरत है।

  • महिला को तनाव होना - आईवीएफ (IVF in hindi) की प्रक्रिया काफी लंबी व तकलीफदेह होने के साथ ही बेहद खर्चीली भी होती है। इसलिए इस दौरान महिलाएं अक्सर भावनात्मक रूप से कमज़ोर महसूस करती हैं और तनावग्रस्त हो सकती हैं। ऐसे में डॉक्टर की सलाह, पति का साथ और अपनों का प्यार उनकी मदद कर सकता है।

आईवीएफ (IVF in hindi) तकनीक के ज़रिए कृत्रिम गर्भाधान करना पति व पत्नी दोनों के लिए काफी मुश्किल भरा हो सकता है। ऐसे में तनाव ना लें और एक दूसरे पर विश्वास बनाए रखें। अगर एक बार में आईवीएफ के ज़रिए आप गर्भधारण नहीं कर सके हैं, तो चिंता ना करें। डॉक्टर दूसरे चक्र में अलग तकनीक का उपयोग करके आपको गर्भधारण करवा सकते हैं। मन को सकारात्मक रखें और हौसला रखें, लगातार कोशिश करते रहने से आपको जल्दी ही खुशखबरी मिल सकती है।

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