28 weeks pregnant mother

Question: प्रेगनेंसी के दौरान कितनी बार अल्ट्रासाउंड कराना चाहिए और कब- कब ? क्या ज्यादा अल्ट्रासाउंड कराने से बच्चे या मां को कोई साइड इफ़ेक्ट ??

1 Answers
Question
Answer: Hello! Most healthy women receive two ultrasound scans during pregnancy. "The first is, ideally, in the first trimester to confirm the due date, and the second is at 18 weeks to confirm normal anatomy..There's no evidence that scans are harmful, if used according to the guidelines.
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Question: मुझे अपने दो महीने के बच्चे को दिन भर में कितनी बार दूध पिलाना चाहिए?
Answer: बच्चे को पहले 6 महीने तक सिर्फ आप अपना ही दूध पिलाने की कोशिश करें। उसके बाद आप अन्य खान पान के साथ अपनी सुविधा के अनुसार 1 या 2 साल तक पिला सकती हैं। आपको अपने बच्चे को हर दो घटे में कम से कम २० मिनट तक दूध पिलाना चाहिए। जब बच्चे का पेट भर जाएगा तो वह आपको खुद ही संकेत देना लगेगा , जिससे आपको पता चल जाएगा की वह दूध नहीं पीना चाहता है। अगली बार फिर से दूध पिलाने के पहले आपको कम से कम २ से ३ घंटे की आराम की जरुरत होती है। इसलिए बच्चे को बहुत ही जल्दी-जल्दी दूध नहीं पिलाएं। अगर आपको ऐसा लग रहा है की आपका दूध बहुत ही कम बन रहा है , इसलिए बच्चा बार-बार दूध पीना चाहता है तो आप उसे फार्मूला मिल्क दे सकती हैं।
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Question: क्या मैं प्रेगनेंसी के दौरान पपीता या पाइनएप्पल खा सकती हूँ। घर की औरतों ने मुझे खाने को मना किया है , क्या इससे मेरे बच्चे को खतरा हो सकता है ?
Answer: हाँ आप बिलकुल खा सकते हो, लेकिन ध्यान रहे कि पक्के पपीते हों। कई शोधों के मुताबिक, कच्चा या अधपका पपीता गर्भावस्था के दौरान हानिकारक हो सकता है। अधपके और कच्चे पपीते में बहुत अधिक लेटेक्स की मात्रा होती है जो कि गर्भाशय में संकुचन पैदा कर सकता है और यही स्थिति गर्भपात का कारण बन सकती हैं।
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Question: क्या मैं प्रेगनेंसी के दौरान पपीता या पाइनएप्पल खा सकती हूँ। घर की औरतों ने मुझे खाने को मना किया है , क्या इससे मेरे बच्चे को खतरा हो सकता है ?
Answer: हाँ आप बिलकुल खा सकते हो, लेकिन ध्यान रहे कि पक्के पपीते हों। कई शोधों के मुताबिक, कच्चा या अधपका पपीता गर्भावस्था के दौरान हानिकारक हो सकता है। अधपके और कच्चे पपीते में बहुत अधिक लेटेक्स की मात्रा होती है जो कि गर्भाशय में संकुचन पैदा कर सकता है और यही स्थिति गर्भपात का कारण बन सकती हैं।
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